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AAP के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल का फैसला सच्चाई, आत्म-सम्मान और गांधीवादी सत्याग्रह पर आधारित है, आप पंजाब लीडरशिप चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी है
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब की सीनियर लीडरशिप ने पार्टी के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल के जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की कोर्ट में पेश न होने के फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। पार्टी ने इसे सच्चाई, आत्म-सम्मान और गांधीवादी सत्याग्रह की फिलॉसफी में एक सैद्धांतिक कदम बताया है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘X’ पर लिखा, “अरविंद केजरीवाल ने साबित कर दिया है कि न्याय और आत्म-सम्मान के लिए इंसान को सब कुछ कुर्बान करने के लिए तैयार रहना चाहिए। जब न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो जनता का भरोसा डगमगा जाता है। हम सब चट्टान की तरह उनके साथ खड़े हैं।”
इस बीच, आप पंजाब के प्रधान अमन अरोड़ा ने कहा, “जब न्याय पर राजनीतिक साया पड़ता है, तो सच्चाई और निष्पक्षता दोनों को नुकसान होता है। भाजपा और उसके वैचारिक ताने-बाने से जुड़े मामलों में निष्पक्षता पर शक होना स्वाभाविक है।”
अरविंद केजरीवाल के फैसले का ज़िक्र करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा, “सत्याग्रह का रास्ता अपनाने का उनका फैसला महात्मा गांधी से प्रेरित एक शांतिपूर्ण लेकिन असरदार विरोध को दिखाता है। जनता का विश्वास वापस लाने के लिए न्यायपालिका को इन उठाई जा रही इन चिंताओं का नोटिस लेना चाहिए।
दूसरी ओर, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “यह कदम बेमिसाल है। आज़ादी के बाद शायद यह पहली बार है जब किसी नेता ने सिस्टम से जुड़ी चिंताओं को सामने लाने के लिए ऐसा रास्ता चुना है। अरविंद केजरीवाल का फैसला एक सैद्धांतिक स्टैंड है, जिसका मकसद न्याय में भरोसा बनाए रखना और यह पक्का करना है कि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे।”
बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा, “न्याय प्रणाली की क्रेडिबिलिटी न केवल निष्पक्षता पर बल्कि उस निष्पक्षता की पारदर्शिता पर भी निर्भर करती है। जब कार्रवाई की निष्पक्षता पर जनता के सवाल उठते हैं, तो ऐसा स्टैंड लेना ज़रूरी हो जाता है जो सिस्टम की गरिमा की रक्षा करे।”
इस बीच, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। यही लीगल सिस्टम की नींव है। जब इस बेसिक स्टैंडर्ड पर भी शक हो, तो पीछे हटना कमजोरी नहीं बल्कि अंतरात्मा की आवाज है।” हरजोत सिंह बैंस ने भी अरविंद केजरीवाल के इस स्टैंड को सलाम किया।
कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह, लाल चंद कटारूचक, हरदीप सिंह मुंडियां और हरभजन सिंह ईटीओ ने भी ऐसे ही विचार प्रकट करते हुए केजरीवाल के साथ एकजुटता दिखाई और सच्चाई और न्याय की लड़ाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
आप पंजाब के नेताओं ने मिलकर कहा कि यह फैसला न्यायपालिका के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके ऊंचे स्टैंडर्ड बनाए रखने की अपील है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को अपने पूरे समर्थन का भरोसा दिलाया और कहा कि पार्टी पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानून के राज के लिए खड़ी रहेगी।
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पंजाब के कुश्ती जगत के मशहूर ‘रुस्तम-ए-हिंद’ जस्सा पट्टी AAP में शामिल, CM मान ने कराया स्वागत
पंजाब के कुश्ती जगत में ‘जस्सा पट्टी’ के नाम से प्रसिद्ध रुस्तम-ए-हिंद जस्कंवर सिंह पट्टी आज अपने साथियों सहित आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी का पार्टी में स्वागत किया और इस मौके की तस्वीरें भी साझा कीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब का गौरव और ‘रुस्तम-ए-हिंद’ जस्सा पट्टी का आम आदमी पार्टी में शामिल होना गर्व की बात है। उनके जुड़ने से ‘रंगला पंजाब’ के निर्माण के संकल्प को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी की विचारधारा और लोक सेवा के जज़्बे के साथ मिलकर राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाया जाएगा।
सीएम मान ने आगे कहा कि खेल जगत में जस्सा पट्टी की मेहनत और अनुशासन युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनके साथ जुड़ने से युवाओं को नशे से दूर कर खेलों और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करने की मुहिम को और गति मिलेगी।
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‘गांधी जी के सिखाए सत्याग्रह से ही…’ आप नेता Anurag Dhanda ने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल का वीडियो किया शेयर
आप संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बता दें कि केजरीवाल ने कथित शराब घोटाले से जुड़ी कानूनी लड़ाई को नया रूप दे दिया है। दरअसल याचिका खारिज होने के बाद अब आप संयोजक ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल के माध्यम से एक वीडियो जारी किया। गौरतलब है कि इसी वीडियो को सीएम मान समेत कई बड़े नेता शेयर कर रहे है। इसी बीच अब आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी Anurag Dhanda ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
Anurag Dhanda ने अरविंद केजरीवाल का वीडियो किया शेयर
आप नेता अनुराग ढांडा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि “जब न्याय के दरवाज़े बंद होने लगें तो गांधी जी के सिखाए सत्याग्रह से ही सच्ची लड़ाई लड़ी जा सकती है।
ये अकेले अरविंद केजरीवाल की नहीं हर उस इंसान की लड़ाई है जो इंसाफ़ में भरोसा करता है”।
अरविंद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति को लिखा पत्र
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि “अत्यंत विनम्रता और न्यायपालिका के प्रति पूर्ण सम्मान के साथ, मैंने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को निम्नलिखित पत्र लिखा है, जिसमें मैं उन्हें सूचित कर रहा हूँ कि सत्याग्रह के गांधीवादी सिद्धांतों का पालन करते हुए, मेरे लिए उनकी अदालत में इस मामले को स्वयं या किसी वकील के माध्यम से आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा।
मैंने यह कठिन निर्णय इस स्पष्ट निष्कर्ष पर पहुँचने के बाद लिया है कि उनकी अदालत में चल रही कार्यवाही किसी भी तरह से इस मूलभूत सिद्धांत को संतुष्ट नहीं करती कि ‘न्याय न केवल होना चाहिए बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए’। इन कार्यवाही में मेरी भागीदारी, चाहे मैं स्वयं या किसी वकील के माध्यम से, कोई सार्थक उपलब्धि नहीं होगी”।
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पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, ‘यूनिफाइड बिल्डिंग रूल्स 2025’ रद्द; पुराने नियम फिर से लागू
पंजाब सरकार ने ‘पंजाब यूनिफाइड बिल्डिंग रूल्स, 2025’ को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। आवास और शहरी विकास विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की। इसके साथ ही राज्य में पहले से लागू पुराने बिल्डिंग नियम फिर से प्रभावी हो गए हैं।
विभाग ने नोटिफिकेशन के जरिए स्पष्ट किया कि 15 दिसंबर 2025 को लागू किए गए यूनिफाइड बिल्डिंग रूल्स अब लागू नहीं रहेंगे। सरकार ने यह कदम विभिन्न कानूनों के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उठाया है।
इनमें पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1995 की धारा 180 और 43, पंजाब म्युनिसिपल एक्ट, 1911 की धारा 240, पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1976 की धारा 262 और पंजाब टाउन इम्प्रूवमेंट एक्ट, 1922 की धारा 73 शामिल हैं।
पुराने नियम फिर से लागू
2025 के नियमों की वापसी के साथ ही वे सभी बिल्डिंग नियम और बाय-लॉज फिर से लागू हो गए हैं, जिन्हें उस समय निरस्त कर दिया गया था। अब ‘पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बिल्डिंग रूल्स, 2021’ और ‘पंजाब म्युनिसिपल बिल्डिंग बाय-लॉज, 2018’ पहले की तरह प्रभावी होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों को ऐसे माना जाएगा जैसे 2025 के नियम कभी लागू ही नहीं हुए थे।
कठिनाई होने पर सरकार करेगी समाधान
अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि यदि इन नियमों को लागू करने में किसी तरह की व्यावहारिक दिक्कत आती है, तो सरकार आदेश जारी कर उसे दूर कर सकेगी। यह आदेश PUDA, GMADA, GLADA समेत सभी संबंधित प्राधिकरणों और विभागों को आगे की कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।
इस फैसले को बिल्डिंग सेक्टर और रियल एस्टेट से जुड़े लोगों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे फिर से पुराने नियमों के तहत काम करना होगा।
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