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मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, उत्तर भारत में फिर बढ़ी गर्मी; कई राज्यों में बारिश थमी, हीटवेव का अलर्ट

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देशभर में मानसून की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, देश के करीब 70 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल पीछे हट गए हैं, जिससे कई राज्यों में बारिश का दौर थम गया है और तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। वहीं, पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में अगले पांच दिनों तक बारिश की संभावना काफी कम है। बारिश में कमी के चलते दिल्ली, मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में गर्मी और उमस बढ़ गई है।

पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। प्रयागराज और ऋषिकेश से भी जलस्तर बढ़ने की तस्वीरें सामने आई हैं। मौसम विभाग ने राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, पाकिस्तान सीमा से लगे गुजरात के इलाकों और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में हीटवेव की चेतावनी जारी की है।

वहीं, बिहार, सिक्किम, असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल के हिमालयी क्षेत्रों में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत देश के कई हिस्सों में बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट लागू किया गया है।

मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक उत्तर और पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां सीमित रहेंगी, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में लोगों को गर्मी और उमस के साथ-साथ मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

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‘सतलुज’ फिल्म पर रवनीत सिंह बिट्टू का बड़ा हमला, 25 हजार लापता लोगों के दावे पर मांगे दस्तावेजी सबूत

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फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म के निर्माता और निर्देशक पर तीखा हमला बोलते हुए फिल्म में किए गए 25 हजार लापता या कथित तौर पर अवैध तरीके से अंतिम संस्कार किए गए लोगों के दावे के दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस दावे के समर्थन में विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किए गए, तो उपलब्ध सभी संवैधानिक और कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

प्रेस बयान जारी करते हुए बिट्टू ने कहा कि ‘रचनात्मक स्वतंत्रता’ के नाम पर विवादित दावों को स्थापित इतिहास के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पंजाब का दर्दनाक इतिहास किसी एक विचारधारा या पूर्वाग्रह के आधार पर चुनिंदा तरीके से नहीं दिखाया जा सकता।

उन्होंने सवाल उठाया कि फिल्म में आतंकवाद के दौर में मारे गए निर्दोष हिंदुओं, बस यात्रियों, दुकानदारों, सरकारी कर्मचारियों, मजदूरों और आम नागरिकों की पीड़ा को समान महत्व क्यों नहीं दिया गया। साथ ही आतंकवाद से लड़ते हुए शहीद हुए पंजाब पुलिस और सुरक्षा बलों के हजारों जवानों के बलिदान को भी नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

बिट्टू ने कहा कि फिल्म में 25 हजार लापता लोगों का आंकड़ा किस आधार पर दिखाया गया है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से प्रमाणित है, किसी जांच रिपोर्ट पर आधारित है या केवल एक अनुमान है। उनके अनुसार, किसी भी जिम्मेदार फिल्म निर्माता को विवादित आंकड़ों को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करने का अधिकार नहीं है।

केंद्रीय मंत्री ने फिल्म निर्माताओं से निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने दावे का पूरा दस्तावेजी आधार सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो उन्हें पंजाब की जनता के सामने यह स्वीकार करना चाहिए कि यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है।

बिट्टू ने कहा कि पंजाब का इतिहास तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। किसी भी पक्ष के दर्द, बलिदान और इतिहास को नजरअंदाज कर एकतरफा कहानी पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने दोहराया कि “सत्य को प्रचार पर, तथ्यों को कल्पना पर और प्रमाणों को भावनाओं पर हमेशा प्राथमिकता मिलनी चाहिए।”

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भाई जसवंत सिंह खालड़ा मामला: राष्ट्रपति वीरता पदक वापस लेने की मांग, DSGMC ने CM मान को भेजा पत्र

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भाई जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड को लेकर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने पंजाब सरकार से बड़ी मांग की है। कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर मामले में दोषी ठहराए गए पुलिस अधिकारियों को दिए गए राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक तत्काल वापस लेने की मांग की है।

DSGMC ने अपने पत्र में पूर्व एसएसपी अजीत सिंह संधू और पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह को दिए गए राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक रद्द करने की अपील की है। कमेटी का कहना है कि दोनों अधिकारी भाई जसवंत सिंह खालड़ा के अपहरण, यातना और हत्या के मामले में दोषी पाए जा चुके हैं, इसलिए उनके पास ऐसे राष्ट्रीय सम्मान बने रहना न्याय और कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने पत्र में कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए अधिकारियों के पास आज भी वीरता पदक मौजूद हैं। उनका कहना है कि ऐसे सम्मान बनाए रखना न्याय व्यवस्था और जवाबदेही की भावना को कमजोर करता है।

कमेटी ने भाई जसवंत सिंह खालड़ा को मानवाधिकारों का निडर प्रहरी बताते हुए कहा कि उन्होंने हजारों लापता लोगों की सच्चाई सामने लाने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उनकी कुर्बानी आज भी पूरी दुनिया में मानवाधिकार और न्याय की लड़ाई लड़ने वालों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

DSGMC ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की है कि इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए दोषी अधिकारियों से राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक वापस लिए जाएं, ताकि न्याय व्यवस्था और शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा की स्मृति का सम्मान कायम रखा जा सके।

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अमृतसर में आज से ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, कई प्रमुख रूटों पर सेवाएं रहेंगी बंद

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पंजाब के अमृतसर में आज से ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर सार्वजनिक परिवहन प्रभावित रहेगा, जिससे यात्रियों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यूनियन ने न्यूनतम किराया 10 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा किराए पर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

हड़ताल से पहले शनिवार को पंजाब स्टेट ऑटो यूनियन की अगुवाई में शहर में बड़ा विरोध मार्च निकाला गया। यूनियन अध्यक्ष तीर्थ सिंह कोहाली ने कहा कि लगातार बढ़ रही महंगाई, ईंधन और रखरखाव के खर्च के कारण पुराने किराए पर काम करना अब संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से जल्द किराया संशोधित करने की मांग की।

यूनियन के अनुसार हड़ताल के दौरान अटारी रोड, अजनाला रोड, मजीठा रोड और छब्बल रोड समेत कई प्रमुख रूटों पर ऑटो और ई-रिक्शा सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। संगठन ने अपने सभी सदस्यों से हड़ताल में शामिल होने की अपील की है।

शनिवार को निकाला गया विरोध मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर छेहरटा चौक, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, पुतलीघर चौक, वाल्मीकि चौक, रेलवे स्टेशन, अशोका चौक, भंडारी पुल, घास मंडी चौक, हुसैनपुरा चौक, बस स्टैंड और तंदूरां वाला चौक होते हुए जहाजगढ़ स्थित पंच पीर पार्किंग क्षेत्र में समाप्त हुआ।

यूनियन नेताओं का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पहले ही जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं। उनका कहना है कि हड़ताल से आम लोगों को होने वाली असुविधा का उन्हें अहसास है, लेकिन आर्थिक संकट से जूझ रहे हजारों ऑटो और ई-रिक्शा चालकों के हितों को देखते हुए यह कदम उठाना मजबूरी बन गया है। उन्होंने प्रशासन से जल्द वार्ता कर समस्या का समाधान निकालने की मांग की है।

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