Punjab
नारकोटिक्स एनोनिमस पीयर-सपोर्ट प्रोग्राम ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत पंजाब के 13 ज़िलों तक फैला
पंजाब सरकार के नशा-विरोधी अभियान के पोस्ट-ट्रीटमेंट रिहैबिलिटेशन हिस्से को और मजबूत करने के लिए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगवाई में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत पंजाब के 13 ज़िलों में नारकोटिक्स एनोनिमस (NA) की मीटिंग्स आयोजित की जा रही हैं।
लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (LMHP) फेलोज के सहयोग से, नारकोटिक्स एनोनिमस अपने हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस (H&I) सेशन के माध्यम से सरकारी डि-एडिक्शन और रिहैबिलिटेशन केंद्रों में नियमित जागरूकता और रिकवरी सत्र आयोजित कर रहा है। यह पहल इस समय श्री मुक्तसर साहिब, लुधियाना, रूपनगर, मानसा सहित 13 ज़िलों में चल रही है।
इस कार्यक्रम के तहत, नारकोटिक्स एनोनिमस मीटिंग्स रिकवरी कर रहे लोगों को ऐसा माहौल प्रदान करती हैं जहाँ वे बिना किसी आलोचना के डर के अपने अनुभव, संघर्ष और सफलता साझा कर सकते हैं। इससे यह विश्वास मजबूत होता है कि जो व्यक्ति खुद रिकवरी से गुजर चुका है, वही दूसरे व्यक्ति की सबसे बेहतर मदद कर सकता है।
नारकोटिक्स एनोनिमस एक वैश्विक फेलोशिप है जो 12-स्टेप प्रोग्राम और पीयर-लीड मीटिंग्स के माध्यम से नशा-मुक्ति में सहायता प्रदान करती है। 1953 में स्थापित यह संस्था कई देशों में कार्यरत है और इसका मूल सिद्धांत है कि साझा अनुभव और आपसी सहयोग से रिकवरी अधिक प्रभावी होती है।
श्री मुक्तसर साहिब के एक रिकवरी में आए व्यक्ति ने बताया कि ये सत्र उन्हें नशा-मुक्त बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “आप एक हफ़्ता या एक महीना नशा-मुक्त रह सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक नशा-मुक्त जीवन बनाए रखने के लिए एन.ए. मदद करता है क्योंकि पीयर ग्रुप के अनुभव आपकी अपनी कहानी जैसे होते हैं। अगर वे नशा छोड़ सकते हैं, तो आप क्यों नहीं? नशा छोड़ने के बाद मैं अपने एक दोस्त को भी साथ लाया, जिसे मैं रिहैबिलिटेशन केंद्र में मिला था। उसे भी यह सहायता बहुत उपयोगी लगी।”
लुधियाना डि-एडिक्शन सेंटर में इलाज करवा रहे एक मरीज जगपाल सिंह (बदला हुआ नाम) ने कहा, “नशा छोड़ चुके अन्य साथियों के अनुभव सुनने से मुझ पर गहरा प्रभाव पड़ा। इसने मेरे अंदर सकारात्मक प्रतिक्रिया पैदा की। जब मैंने अपनी कहानी साझा की तो मुझे सुझाव मिले और प्रेरणा मिली। मैं सुझाव देता हूँ कि इलाज के साथ-साथ एन.ए. मीटिंग्स नशा प्रभावित लोगों की रिकवरी में बहुत मदद कर सकती हैं।”
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा पीयर सपोर्ट नशा-मुक्ति के दौरान आने वाली सबसे बड़ी समस्या ‘एकाकीपन’ से निपटने में काफी मददगार होता है। कार्यक्रम से जुड़े एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, “कई मरीज डि-एडिक्शन सेंटर छोड़ने के बाद अकेलापन महसूस करते हैं और फिर से नशे की ओर चले जाते हैं। एन.ए. उन्हें एक सपोर्ट नेटवर्क देता है और यह भरोसा दिलाता है कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं।”
हाल ही में इन मीटिंग्स में भाग लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और 13 ज़िलों में सरकारी सुविधाओं के भीतर नियमित सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। मानसा में जुड़े एक एच एंड आई (हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस) कोऑर्डिनेटर ने कहा कि संस्था ज़िला प्रशासन के सहयोग से मीटिंग्स आयोजित करती है।
मुक्तसर में जुड़े एक एच एंड आई (हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस) कोऑर्डिनेटर ने कहा कि संस्था ज़िला प्रशासन के सहयोग से मीटिंग्स आयोजित करती है।
उन्होंने कहा, “जब मैं पहली बार एन.ए. मीटिंग में आया तो मुझे लगा कि इस बीमारी से अकेले लड़ना मुश्किल है। इस ग्रुप ने मेरा सपोर्ट सिस्टम बनकर मुझे विश्वास दिया कि व्यक्ति नशा छोड़ सकता है। सदस्यता की एकमात्र योग्यता नशा छोड़ने की इच्छा है। सदस्यों की पहचान गोपनीय रखी जाती है, जिससे वे अपने संघर्ष और रिकवरी के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं।
मुक्तसर ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में मनोचिकित्सा सामाजिक कार्यकर्ता परमिंदर सिंह ने कहा, “नारकोटिक्स एनोनिमस एक नशा प्रभावित व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा मंच है, क्योंकि पीयर ग्रुप के सदस्य नशे की समस्या से जुड़े अनुभवों को अच्छी तरह समझते हैं और वे व्यक्ति को नशा-मुक्त जीवन की ओर ले जाने में सबसे अधिक मददगार साबित होते हैं, क्योंकि उन्होंने खुद वही कठिनाइयाँ झेली होती हैं। वास्तव में, काउंसलिंग सत्रों में भी जो मरीज खुलकर बात नहीं कर पाता, वह एन.ए. के सदस्यों के साथ आसानी से खुल जाता है।”
लुधियाना डि-एडिक्शन सेंटर की काउंसलर अमनप्रीत कौर ने कहा, “पीयर ग्रुप अपने जीवन में नशा छोड़ने के बाद आए सकारात्मक बदलावों को साझा करते हैं और यह दूसरों को उसी राह पर चलने के लिए प्रेरित करता है। शुरुआत में मीटिंग्स में उपस्थित होना आवश्यक होता है। यदि कोई व्यक्ति इन मीटिंग्स में नियमित रहता है तो वह डि-एडिक्शन के काफी करीब होता है। मीटिंग्स मिस करना अक्सर रिलेप्स (पुनः नशा शुरू होने) की शुरुआती चेतावनी हो सकती है।”
अधिकारियों ने बताया कि कई पूर्व नशा उपयोगकर्ता, जो लंबे समय से नशे से दूर हैं, अब स्वयंसेवक बनकर मेंटर के रूप में काम कर रहे हैं और जिला प्रशासन को मीटिंग्स के लिए प्रतिभागियों को एकत्र करने में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने विश्वास जताया कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में एनए (NA) नेटवर्क का विस्तार नशा-विरोधी अभियान के तहत हासिल की गई उपलब्धियों को टिकाऊ बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पंजाब नशे के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज कर रहा है, और नारकोटिक्स एनोनिमस समूहों का बढ़ता नेटवर्क राज्य के प्रयासों को मजबूत कर रहा है ताकि नशा-मुक्ति केवल इलाज तक सीमित न रहे, बल्कि लोग लंबे समय तक समाज में फिर से जुड़ सकें और नशा-मुक्त जीवन जी सकें।
Punjab
‘बेअदबी’ पार्टी (अकाली दल) अपनी प्रतिष्ठा खो चुकी है, अब वह राजनीति में वापसी के लिए भाजपा से समझौता करने की कोशिश कर रही है: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शनिवार को कहा कि बेअदबी पार्टी (अकाली दल) और उसके प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राजनीतिक फायदे के लिए बार-बार अपने राजनीतिक स्टैंड से समझौता किया है और अब वे भाजपा से समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं।
सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “आज सुखबीर सिंह बादल कह रहे हैं कि वह केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लाए जा रहे कुछ बिलों से पूरी तरह सहमत हैं। लेकिन पंजाब के लोगों को अच्छी तरह याद है कि जब कृषि कानून लाए गए थे, तो पूरा बादल परिवार उन कानूनों के पक्ष में वीडियो बनाता हुआ नजर आया था।”
बलतेज पन्नू ने कहा कि बड़े स्तर पर लोगों के गुस्से का सामना करने के बाद ही बादलों ने अपना रुख बदला और खुद को किसानों का हमदर्द दिखाने की कोशिश में कृषि कानूनों के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया।
अकाली दल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर निशाना साधते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “‘बेअदबी’ अकाली दल पंजाब के लोगों के दिलों से पूरी तरह गायब हो चुका है। अब वह भाजपा के साथ समझौता करके अपनी राजनीति को फिर से ज़िंदा करने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।”
सुखबीर बादल के भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं के बारे में पहले दिए गए बयान को याद करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “मैं सुखबीर सिंह बादल को उनकी ही बातें याद दिलाना चाहता हूं। उन्होंने कहा था कि जो लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उन्हें अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि किसी को अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए, लेकिन जब सुखबीर बादल ने खुद यह बयान दिया, तो आज इसका जिक्र करना बनता है।”
उन्होंने कहा कि बादल परिवार के बार-बार लिए गए यू-टर्न ने अकाली दल की राजनीति का असली चेहरा सामने ला दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग उन लोगों के बीच साफ फर्क समझ सकते हैं जो अपने उसूलों पर अड़े रहते हैं और जो राजनीतिक सुविधा के हिसाब से अपना रुख बदलते हैं।
बलतेज पन्नू ने दावा किया कि पंजाब के लोग पहले ही अकाली दल की राजनीति को नकार चुके हैं और भाजपा के साथ राजनीतिक समझौता करने की उसकी नई कोशिशों से गुमराह नहीं होंगे।
Punjab
मुक्तसर की तियां में पहुंचीं डॉ. गुरप्रीत कौर मान, महिलाओं ने चुनाव की तारीख पूछनी शुरू कर दी
मुक्तसर विधानसभा में आज पंजाबी संस्कृति और महिलाओं के उत्साह से सराबोर तियां का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान जी की धर्मपत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुक्तसर की बड़ी संख्या में माताओं और बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने महिलाओं से बातचीत की और उनके अनुभव जाने। बातचीत में मावा दीया योजना को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने बताया कि उनके खातों में ₹4,500 और ₹3,000 की राशि पहुंचने से उन्हें काफी राहत और खुशी मिली है।
महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान सरकार की योजनाओं को लेकर उनका उत्साह इतना स्पष्ट था कि बात सिर्फ योजना के लाभ तक सीमित नहीं रही—महिलाएं चुनाव की तारीख और अगला चुनाव कब होगा, यह पूछने लगीं।
माहौल ऐसा था कि मान साहब से ज्यादा अब पंजाब की इन माताओं-बहनों को चुनाव की जल्दी दिखाई दी, क्योंकि उनका कहना था कि वे जल्द से जल्द चुनाव चाहती हैं, ताकि उन्हें एक बार फिर भगवंत मान जी को अपना समर्थन देकर पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने और उनकी सरकार को दोबारा सत्ता में लाने का मौका मिले।
मुक्तसर की तियां में आज पंजाबी संस्कृति और महिलाओं की खुशियों के साथ-साथ महिलाओं के मन की राजनीतिक इच्छा भी खुलकर सामने आई—उन्हें अब चुनाव का इंतजार है।
Punjab
‘गैंगस्टरां ते वार’ ने ख़ुफ़िया-आधारित पुलिसिंग की प्रभावशीलता सिद्ध की; गैंगस्टरों के लिए कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नहीं : DGP गौरव यादव
पंजाब पुलिस का प्रमुख एंटी-गैंगस्टर अभियान ‘गैंगस्टरां ते वार’ संगठित अपराध के विरुद्ध राज्य में चलाए जा रहे सबसे व्यापक और निरंतर अभियानों में से एक के रूप में उभरते हुए अपने 200 दिन पूरे कर चुका है। इस अभियान के दौरान पुलिस ने पूरे पंजाब में 1,09,087 छापेमारियाँ कीं, 1,532 घोषित अपराधियों (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स) को गिरफ़्तार किया, 58,212 अपराधियों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई की, भारी मात्रा में अवैध हथियार और मादक पदार्थ बरामद किए तथा संगठित आपराधिक गिरोहों के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के मार्गदर्शन में शुरू किया गया ‘गैंगस्टरां ते वार’ एक ख़ुफ़िया सूचना-आधारित अभियान है, जिसका उद्देश्य लक्षित कार्रवाई, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वय, वित्तीय जाँच तथा तकनीक-आधारित पुलिसिंग के माध्यम से संगठित अपराध गिरोहों का पूरी तरह सफाया करना है।
इस अवसर पर, डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि यह अभियान अब बहुआयामी कार्रवाई का रूप ले चुका है, जो केवल गैंगस्टरों ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध को बढ़ावा देने वाले पूरे तंत्र को भी निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा, “‘गैंगस्टरां ते वार’ के पहले 200 दिनों ने निरंतर और ख़ुफ़िया-आधारित पुलिसिंग की प्रभावशीलता को सिद्ध किया है। हमारी रणनीति केवल गिरफ़्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित अपराध को सक्षम बनाने वाले पूरे नेटवर्क—सहयोगियों, वित्तीय स्रोतों, रसद व्यवस्था, संचार माध्यमों और विदेशों में मौजूद संपर्कों—को ध्वस्त करने पर केंद्रित है। पंजाब पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश के भीतर या बाहर कहीं भी संचालित होने वाले गैंगस्टरों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना न बचे।”
इन 200 दिनों के दौरान 1,532 घोषित अपराधियों (पीओ) को गिरफ़्तार किया गया, जबकि 58,212 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जिनमें 853 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 57,359 वांछित अपराधी शामिल हैं।
निवारक पुलिसिंग के तहत 28,201 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 577 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 27,624 वांछित अपराधी शामिल थे; वहीं 18,514 व्यक्तियों का वेरिफिकेशन कर उन्हें बाद में रिहा किया गया, जिनमें 1,529 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 16,985 वांछित अपराधी शामिल थे। कुल मिलाकर अभियान के दौरान 1,04,927 व्यक्ति अभियान के दौरान पुलिस कार्रवाई के दायरे में आए जिनमें 2,959 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 1,01,968 वांछित अपराधी शामिल हैं।
गिरफ़्तारियों के अतिरिक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य संगठित गिरोहों की हथियारों, मादक पदार्थों, वित्तीय संसाधनों और रसद व्यवस्था तक पहुँच को समाप्त कर उनकी अपराध करने की क्षमता को कमज़ोर करना भी रहा।
इस अभियान ने संगठित अपराध गिरोहों की मारक क्षमता को भी बड़ा झटका दिया।अभियान के दौरान पंजाब पुलिस ने 990 अवैध हथियार, 242 धारदार हथियार, 2,739 कारतूस, 315 मैगज़ीन, 2.5 किलोग्राम विस्फोटक और 15 हैंड ग्रेनेड बरामद किए, जिससे आपराधिक गिरोहों की मारक क्षमता को गंभीर रूप से कमज़ोर किया गया।
साथ ही, पंजाब पुलिस ने संगठित अपराध और नशा तस्करी के गठजोड़ के विरुद्ध कार्रवाई तेज़ करते हुए 774.38 किलोग्राम हेरोइन, 480.23 किलोग्राम अफीम, 7,266.26 किलोग्राम पोस्त भूसी तथा 26,91,455 नशीली गोलियाँ बरामद कीं। पुलिस ने 1,73,41,965 रुपये की ड्रग मनी, 1,80,54,446 रुपये नकद तथा 413.85 ग्राम सोना भी ज़ब्त किया, जिससे संगठित अपराध और मादक पदार्थों के कारोबार को वित्तीय सहायता देने वाले स्रोतों पर प्रभावी प्रहार हुआ।
एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस प्रमोद बान ने कहा कि अब अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल अपराधियों की गिरफ़्तारी नहीं, बल्कि संगठित अपराध के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है। उन्होंने कहा, “आज का संगठित अपराध वित्तीय नेटवर्क, डिजिटल संचार और विदेशों में बैठे संचालकों के माध्यम से संचालित होता है। इसी कारण हमारी जाँच में फील्ड ऑपरेशन के साथ-साथ वित्तीय ट्रैकिंग, डिजिटल इंटेलिजेंस तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय शामिल है। इसी रणनीति के कारण पंजाब पुलिस रंगदारी गिरोहों का पर्दाफाश करने, विदेशों में बैठे संचालकों की पहचान करने तथा वांछित अपराधियों के निर्वासन (डीपोर्टेशन) और प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सफल रही है। साथ ही यह अभियान युवाओं को यह संदेश भी देता है कि गैंगस्टर संस्कृति का तथाकथित आकर्षण केवल एक भ्रम है, जिसका अंत अपराध और विनाश में होता है।”
अभियान को पड़ोसी राज्यों तथा केंद्रीय जाँच एवं ख़ुफ़िया एजेंसियों के साथ नियमित समन्वय का भी भरपूर सहयोग मिला, जिससे सूचनाओं के तुरंत आदान-प्रदान और संगठित अपराध के विरुद्ध संयुक्त अभियानों को गति मिली।
अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में से एक फरार गैंगस्टर भुवनेश चोपड़ा उर्फ आशीष चोपड़ा, पुत्र हीरा लाल, निवासी मकान नंबर 15, अंदरूनी दिल्ली गेट, फिरोज़पुर, को मध्य एशिया से तथा गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ जोबन बिल्ला को जकार्ता (इंडोनेशिया) से सफलतापूर्वक भारत वापस लाना रहा। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने ओएफटीईसी पंजाब तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर इस अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इससे यह सिद्ध हुआ कि पंजाब पुलिस अब राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर भी वांछित अपराधियों को कानून के कटघरे में लाने में सक्षम है।
गैंगस्टरों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई के अतिरिक्त अभियान के दौरान 64,402.77 लीटर अवैध शराब, 34,840 बोतलें तथा 926 पेटियाँ बरामद कर नष्ट की गईं। इसके अलावा अपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे 4,978 मोबाइल फोन, 1,781 वाहन और 61 ड्रोन भी ज़ब्त किए गए। इन कार्रवाइयों ने आपराधिक ढाँचे को कमज़ोर करने, संगठित अपराध के नेटवर्क को बाधित करने और पूरे पंजाब में सार्वजनिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 93946-93946 नंबर पर एक समर्पित टिपलाइन भी शुरू की है, जिसके माध्यम से लोग वांछित अपराधियों, गैंगस्टरों और उनसे संबंधित आपराधिक गतिविधियों की जानकारी गोपनीय और गुमनाम रूप से साझा कर सकते हैं। इस पहल के ज़रिए लोग अपनी पहचान उजागर होने के डर के बिना गोपनीय रूप से महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा कर सकते हैं, जिससे एजीटीएफ को गैंगस्टरों और अन्य अपराधियों का जल्द पता लगाकर उन्हें गिरफ़्तार करने में मदद मिलेगी।
जनसहभागिता को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से एजीटीएफ ने एक इनाम नीति भी लागू की है, जिसके तहत वांछित गैंगस्टरों और अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई में सहायक विश्वसनीय सूचना देने वालों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा तथा उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इस पहल से पंजाब में संगठित अपराध के विरुद्ध ख़ुफ़िया-आधारित अभियानों को और अधिक मज़बूती मिलने की उम्मीद है।
-
Religious3 years agoकब है तुलसी विवाह? इस दिन तुलसी माता का विवाह करने से मिलेगा लाभ
-
Religious3 years agoजानिए गोवर्धन पूजा का महत्व, कौनसा समय रहेगा पूजा के लिए सही
-
Religious3 years agoआखिर क्यों लिखा जाता है घर के बाहर शुभ लाभ, जानिए क्या है इन चिह्न का मतलब
-
Religious3 years agoपैरों के निशान, बनावट, रंग, साइज से पता लागए की आप कितने है भागयशाली
-
Religious3 years agoजानिए दीपावली में वाले दिन आखिर कितने जलाने चाहिए दीये ? और क्यों जलाने चाहिए दिये |
-
Chandigarh2 years agoChandigarh: Top 10 Restaurants. ये लोकप्रिय क्यों हैं ?
-
Punjab2 years agoपंजाब में अमरूद के बगीचे के मुआवजे के घोटाले में ED ने 26 स्थानों पर छापे मारे
-
Punjab2 years agoLudhiana में पुलिस स्टेशन के पास शव मिला। एक आदमी सड़क के बीच में पड़ा था; पास में कपड़ों से भरा एक बोरे भी मिला था, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो सकी