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सत्ता हथियाने और पंजाब को लूटने का मौकापरस्त संयोग है अकाली दल-भाजपा गठजोड़; लोग इसे सिरे से नकार देंगे: CM भगवंत सिंह मान

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शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच फिर से गठबंधन होने की चल रही चर्चाओं के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि दोनों पार्टियों का एक साथ आना, पंजाब के लोगों द्वारा बार-बार नकारे जाने के बाद राजनीतिक सत्ता हासिल करने की एक निराशाजनक कोशिश को दर्शाता है। अमलोह हलके के गाँव शमसपुर में लोक मिलनी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकाली-भाजपा गठबंधन जनता की भलाई या किसी साझा विचारधारा के लिए नहीं, बल्कि उस राजनीति को जीवंत करने के लिए किया जा रहा है, जिसने नशों की पुश्तपनाही, किसान विरोधी नीतियों और बाँटो और राज करो के एजेंडे के ज़रिये पंजाब का नुकसान किया था।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर भाजपा पर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस आंतरिक कलह और नेतृत्व की व्यक्तिगत इच्छाओं की भेंट चढ़ चुकी है। पंजाब सरकार द्वारा शुरू किए गए जनकल्याण के प्रयासों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाबियों ने 2022 में ईमानदार शासन और विकास को चुना और वे अब लूट, धोखाधड़ी और निजी हितों की राजनीति को फिर से हावी नहीं होने देंगे। सभा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दावा किया, “पंजाबी पहले ही पारंपरिक पार्टियों को नकार चुके हैं और वे ऐसे मौकापरस्त राजनीतिक समझौतों के ज़रिये उन्हें वापस नहीं आने देंगे, जो न तो किसी विचारधारा और न ही जनता की भलाई के हक में हैं।”

अकाली दल और भाजपा के उभरते गठबंधन पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अकाली दल-भाजपा गठबंधन दोनों पार्टियों के लिए घातक साबित होगा क्योंकि यह किसी विचारधारा या जनकल्याण के सरोकार पर आधारित नहीं है। इसका एकमात्र उद्देश्य पंजाब में सत्ता हथियाना है। दोनों पार्टियों के नेताओं ने सालों एक-दूसरे पर हमले किए और ज़हर उगला है। अब वे लोगों को बताएँ कि वे किस मुँह से जनता से समर्थन माँगेंगे। पंजाबी ऐसे राजनीतिक ड्रामों के छलावे में नहीं आएँगे और उन्हें करारा सबक सिखाएँगे।” भाजपा को निशाने पर लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भाजपा ने हमेशा पंजाब विरोधी मानसिकता का प्रदर्शन किया है और बार-बार पंजाब के साथ भेदभाव किया है, जिससे सूबे के विकास और तरक्की को ख़तरे में डाला गया। भाजपा द्वारा थोपे गए किसान विरोधी कानूनों के ख़िलाफ़ संघर्ष के दौरान 700 से अधिक किसानों की जान गई। इस पार्टी ने लगातार पंजाब के साथ अन्याय किया है और अब धर्म के नाम पर लोगों को बाँटने की कोशिश कर रही है।”

केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केंद्रीय एजेंसियाँ लगातार भाजपा के इशारे पर काम कर रही हैं और लोगों पर भगवा पार्टी का समर्थन करने के लिए दबाव बनाने और डराने-धमकाने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। राजनीतिक विरोधियों और यहाँ तक कि छोटे व्यापारियों को भी पार्टी हितों के लिए परेशान किया जा रहा है। ऐसे हथकंडों के ज़रिये विरोधियों को निशाना बनाकर भाजपा लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने की कोशिश कर रही है और पंजाब ऐसी कार्रवाइयों को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।”

अकाली दल के कार्यकाल के दौरान हुई बेअदबी की घटनाओं और नशों के मुद्दे पर तीखे हमले करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस पार्टी ने बार-बार गुरबाणी के नाम पर वोट माँगे, लेकिन जब पंजाब में बेअदबी की घटनाएँ हुईं, जिन्होंने लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई, तो ये नेता गुरबाणी की पवित्रता की रक्षा करने में नाकाम रहे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अकालियों ने गुरबाणी के नाम पर वोट माँगे, लेकिन इसकी पवित्रता बरकरार रखने में असफल रहे। गुरु साहिबान की शिक्षाओं का बार-बार हवाला देने के बावजूद उनके शासन के दौरान बेअदबी की ऐसी घटनाएँ हुईं, जिन्होंने पंजाबियों के दिलों को ठेस पहुंचाई। जो लोग अपने कार्यकाल के दौरान विकास की बातें करते हैं, वे कोटकपूरा, बहबल कलां और अन्य दर्दनाक घटनाओं को आसानी से भूल जाते हैं, जहाँ मासूम जानें गई थीं।”

शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व पर सीधा निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखबीर बादल अकाली सरकार के विकास की बातें करते हैं, लेकिन कोटकपूरा, बहबल कलां और अन्य घटनाओं से आँखें मूँद लेते हैं, जहाँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी हुई और बेकसूर लोगों की जानें गईं। अकालियों को पीढ़ियाँ बर्बाद करने के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए क्योंकि उनके लंबे कुशासन के दौरान नशे का कारोबार फला-फूला।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “इन नेताओं के हाथ उन लाखों नौजवानों के खून से रंगे हैं, जो राज्य भर में सप्लाई किए जाने वाले नशों की भेंट चढ़ गए। उनके गुनाह माफी के काबिल नहीं हैं और लोग उनके बुरे कारनामों की लंबी दास्तान को कभी नहीं भूल सकते। अकाली नेताओं ने अपने लंबे शासन के दौरान पंजाब को बेरहमी से लूटा और आम नागरिकों पर अनगिनत ज़ुल्म किए।”

अकाली दल और भाजपा के बीच भविष्य में होने वाले किसी भी गठबंधन के ख़िलाफ़ चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “दोनों पार्टियाँ अब अपनी सत्ता की भूख मिटाने के लिए फिर से हाथ मिलाना चाहती हैं। ऐसा गठबंधन पंजाब के लिए विनाशकारी साबित होगा क्योंकि इसका एकमात्र उद्देश्य राज्य की तरक्की को पटरी से उतारना और इसे फिर से काले दौर में धकेलना है। पंजाबी इन पार्टियों के चरित्र और नीयत को अच्छी तरह समझते हैं और ऐसे संकीर्ण सोच वाले गठबंधन का कभी समर्थन नहीं करेंगे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक पार्टियों ने लोगों को सांप्रदायिक राह पर बाँटकर बार-बार उनका शोषण किया है। उन्होंने कहा, “इन पार्टियों का पंजाब के संसाधनों को लूटने और आम नागरिकों का शोषण करने के अलावा कोई एजेंडा नहीं है। पंजाब के लोग सर्वोपरि हैं और वे उस सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं, जो समाज के हर वर्ग के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है।” कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हर कांग्रेसी नेता मुख्यमंत्री बनना चाहता है। उनके पास कार्यकर्ताओं से ज़्यादा मुख्यमंत्री बनने के चाहने वाले हैं। कांग्रेसी नेता सत्ता में वापसी के सपने देखते रहते हैं, लेकिन पार्टी आपस में बँटी हुई है और आंतरिक लड़ाइयों का अड्डा बनी हुई है। उनके पास पंजाब के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं है और उनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल करना है।”

उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेसी नेता पंजाब में सत्ता संभालने के सपने देख रहे हैं। पार्टी एकजुट नहीं है, जो अपने आंतरिक झगड़ों के कारण ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी। उनका एकमात्र उद्देश्य पंजाब के संसाधनों पर कब्जा करना है, लेकिन राज्य के लोग उनके मंसूबों से पूरी तरह वाकिफ हैं।” 2022 में लोगों द्वारा दिए गए ऐतिहासिक जनादेश को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों के दशकों लंबे शासन के बाद पंजाब ने शासन में एक आदर्श बदलाव देखा है। उन्होंने कहा, “दशकों से पारंपरिक पार्टियाँ सत्ता पर काबिज होने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार करती रहीं। आज झाड़ू उन पार्टियों द्वारा पैदा की गई गंदगी को साफ कर रहा है। 2022 में लोगों ने सात पूर्व मुख्यमंत्रियों और उनके परिवारों को बाहर का रास्ता दिखाकर एक ईमानदार सरकार को सत्ता सौंप दी। उस ऐतिहासिक जनादेश ने पंजाब को बदल दिया है और हमें जनकल्याण के लिए अथक काम करने के योग्य बनाया है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 2022 के जनादेश ने पंजाब को बदलने और इसे देश का अग्रणी राज्य बनाने में मुख्य भूमिका निभाई है। उन्होंने आगे कहा कि ‘आप’ सरकार समाज के हर वर्ग की भलाई सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास कर रही है।

जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन अधिनियम 2026 के कार्यान्वयन का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “वाहेगुरु ने हमें इस ऐतिहासिक कानून के ज़रिये मानवता की सेवा करने का मौका बख्शा है। इस कानून के तहत बेअदबी के दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति को अब दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा के साथ-साथ 50 लाख रुपये का जुर्माना किया जा सकता है। अगर जुर्माना अदा नहीं किया जाता है तो संपत्ति कुर्क की जा सकती है और बेची जा सकती है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के नतीजों को याद रखें।”

इस कानून के बेअदबी के ख़िलाफ़ एक मजबूत निरोधक के रूप में काम करने की उम्मीद जताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। जिन्होंने राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया, उन्हें माफ नहीं किया जा सकता। हम भाग्यशाली हैं कि इस ऐतिहासिक कानून को लागू करके हमने अपनी जिम्मेदारी निभाई है, जो भविष्य में ऐसी घटनाओं के ख़िलाफ़ निरोधक के रूप में काम करेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “यह कानून यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में कोई भी ऐसा अपराध करने की हिम्मत न करे। अगर पंजाब सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा नहीं कर सकती तो कोई और नहीं करेगा। हमें यह ऐतिहासिक कानून पारित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जो ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को रोकने में मदद करेगा।” आप सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लोगों के टैक्स का पैसा लोगों का है और हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर पैसा लोगों की भलाई पर खर्च किया जाए। लोगों का पैसा उन्हें बेहतर स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और जनसेवाओं के ज़रिये वापस किया जा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है, 67,000 से अधिक नौजवानों को बिना किसी भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरियाँ प्रदान की गई हैं, सड़कों को अपग्रेड किया जा रहा है, टोल प्लाजा बंद किए गए हैं, जिससे रोज़ाना 70 लाख रुपये की बचत हो रही है और बुनियादी ढाँचे से संबंधित व्यापक प्रोजेक्ट प्रगति के अधीन हैं।” सिंचाई सुधारों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जब हमने सत्ता संभाली थी, तब सिंचाई के लिए सिर्फ 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग किया जा रहा था। आज यह आँकड़ा 80 प्रतिशत को पार कर गया है।” सिंचाई बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने से संबंधित किए गए प्रयासों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आप सरकार ने राज्य भर में 14,000 किलोमीटर पाइप लाइनें बिछाई हैं और खालों को बहाल किया है और उनके ज़रिये 21,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है। यह पानी दो भाखड़ा नहरों द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी के बराबर है और इससे किसानों को बेहद लाभ होगा।”

सिंचाई बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के प्रयासों के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आप सरकार ने राज्य भर में 14,000 किलोमीटर पाइप लाइनें और रजवाहे निकाले हैं और उनके ज़रिये 21,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है। यह दो भाखड़ा नहरों द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी के बराबर है और इसका किसानों को बहुत लाभ होगा।”

ज़मीन के नीचे पानी के स्तर को सुधारने के उद्देश्य से किए गए उपायों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “नहरों और नदियों में रिचार्ज प्वाइंट बनाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में ज़मीन के नीचे पानी का स्तर दो से चार मीटर तक बढ़ गया है। यह एक तरह से पंजाब के भविष्य के लिए निवेश है क्योंकि पानी के बिना पंजाब की पहचान ही खतरे में है।” सामाजिक बदलाव में शिक्षा की भूमिका पर ज़ोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कोई भी रियायत या कल्याण कार्ड गरीबी को स्थायी तौर पर खत्म नहीं कर सकता। सिर्फ शिक्षा ही परिवारों को ऊपर उठा सकती है, जीवन बदल सकती है और लोगों को गरीबी से मुक्त करने में मदद कर सकती है।”

शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब की प्रगति का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “निरंतर सुधारों के कारण पंजाब ने प्राइमरी और मिडिल-स्कूल शिक्षा में अग्रणी स्थान प्राप्त करने के लिए केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “पिछले चार सालों में ‘आप’ सरकार ने स्कूलों को मजबूत किया है, स्मार्ट क्लासरूम शुरू किए हैं, मानक अध्यापक ट्रेनिंग प्रदान की है और शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाया है। आज पंजाब इन प्रयासों के कारण शीर्ष पर है।” हालिया रैंकिंग का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “नीति आयोग ने नए आँकड़े जारी किए हैं जो दर्शाते हैं कि पंजाब ने प्राइमरी और मिडिल-स्कूल शिक्षा में पहला स्थान प्राप्त करने के लिए केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “पिछले चार सालों से ‘आप’ सरकार ने अध्यापक ट्रेनिंग, आधुनिक शिक्षण विधियों और स्मार्ट क्लासरूमों पर ध्यान केंद्रित किया है। पहले केरल शीर्ष स्थान पर होता था, लेकिन अब पंजाब ने बड़े अंतर से पहला स्थान प्राप्त किया है। हम भविष्य में और भी बड़े प्रयास जारी रखेंगे।” शिक्षा को सामाजिक बदलाव के लिए सबसे शक्तिशाली साधन बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “शिक्षा वह प्रकाश है, जो अंधेरे को दूर करता है और समाज को बदलता है। इसीलिए हमारी सरकार इस क्षेत्र को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दे रही है।”

स्वास्थ्य सेवा पहलों पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के सभी 65 लाख परिवारों को सेहत कार्ड जारी किए जा रहे हैं, जिससे हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है।” उन्होंने आगे कहा, “30 लाख से अधिक लाभार्थी पहले ही अपने सेहत कार्ड प्राप्त कर चुके हैं और लोगों ने इस योजना के तहत लगभग 650 करोड़ रुपये का इलाज हासिल किया है। मैं सभी पात्र परिवारों से इन कार्डों का अधिकतम लाभ उठाने की अपील करता हूँ।”

किसानों के लिए बिजली सप्लाई में सुधारों को गिनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार किसानों को धान के सीजन के दौरान आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली और सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली सप्लाई मिली है, जिससे उनके जीवन में काफी सुधार हुआ है।” ‘मावां धियां सतिकार योजना’ का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आप सरकार ने यह योजना शुरू की है, जिसके तहत 18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह प्राप्त होंगे। पात्र लाभार्थियों को पहली जुलाई से लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।”

लोक मिलनी को लोगों से सीधे जुड़ने का मौका बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह कोई राजनीतिक समारोह नहीं है, बल्कि नागरिकों से सीधे संपर्क का मंच है। पंजाब में सरकारें आईं और गईं, लेकिन लोगों की किसी ने परवाह नहीं की। पारंपरिक पार्टियों ने शासन को खेल समझा और पंजाब के संसाधनों को बुरी तरह लूटा। लोगों ने ‘झाड़ू’ में अपना विश्वास दिखाकर ऐसी लुटेरी पार्टियों को जवाब दिया और लोगों का भरोसा बनाए रखते हुए राज्य भर में स्कूलों, अस्पतालों और जनसेवाओं की तस्वीर बदल दी गई है।”

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ई-20 पेट्रोल से वाहनों के नुकसान का मुद्दा पंजाब विधानसभा में गूंजा

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब विधानसभा में ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में यह मानने के बावजूद कि ई-20 से वाहनों की माइलेज घटती है, इसे जबरदस्ती थोपा है। उन्होंने कहा कि इस कदम से वाहन मालिकों पर वित्तीय बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसे लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई है और आरोप लगाया कि इसका मकसद अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करना है, जिसके तहत भारत अगले पाँच सालों में 20 अरब डॉलर का इथेनॉल आयात करेगा। इस बात पर जोर देते हुए कि उपभोक्ताओं को चुनाव के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार से फ्यूल स्टेशनों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों उपलब्ध कराने और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए ई-20 की कीमत घटाने की मांग करता हुआ एक प्रस्ताव पारित किया।

अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान, मैंने उपभोक्ताओं पर ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल थोपे जाने और इससे लोगों के वाहनों को हो रहे नुकसान का गंभीर मुद्दा उठाया। यह तेल केंद्र सरकार द्वारा बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के थोपा गया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, इससे 67 फीसदी वाहनों की माइलेज घटी है, जबकि 45 फीसदी वाहनों के इंजन खराब हुए हैं, जिससे आम लोगों पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ा है।”

उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा, “केंद्र सरकार ने स्वयं संसद में माना है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों की माइलेज घटाता है। यह सब अमेरिका के साथ हुए एक बड़े व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करने और कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए किया जा रहा है। हमारी मांग है कि फ्यूल स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 के बीच चयन करने का अधिकार दिया जाए और ई-20 की कीमत तुरंत घटाई जाए। पंजाब विधानसभा ने आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। इंकलाब जिंदाबाद।”

विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस को समेटते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह देश के हर नागरिक के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल बिना किसी उचित शोध, वैज्ञानिक अध्ययन या सलाह-मशवरे के वाहन मालिकों पर थोपा गया है। केंद्र सरकार ने यह साबित करने के लिए कोई अध्ययन नहीं किया और न ही किसी इंजीनियरिंग कॉलेज या आई.आई.टी. से प्रमाण-पत्र लिया है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों के इंजनों के लिए सुरक्षित है।”

केंद्र पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ई-10 पेट्रोल पर चलने के लिए डिज़ाइन किए गए इंजनों को व्यापक विरोध के बावजूद मनमाने ढंग से ई-20 पर तब्दील कर दिया गया। 45,000 से अधिक वाहनों के सर्वेक्षण के अनुसार, 67 फीसदी ने माइलेज में भारी गिरावट दर्ज की, जबकि 45 फीसदी इंजन खराब हो गए हैं। यह आम लोगों, जो सालों की बचत और किश्तों पर वाहन खरीदते हैं, की खून-पसीने की कमाई की खुली लूट के अलावा कुछ नहीं है।”

वाहन मालिकों पर पड़ रहे बोझ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले तो आम लोग बड़ी मुश्किल से वाहन खरीदते हैं और फिर उन्हें इस नीति के कारण मरम्मत का अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ता है। यह बहुत अफसोसजनक है कि केंद्र सरकार ई-20 के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी यह मुद्दा उठाया है और दो लाख से अधिक हस्ताक्षर वाली जनता की याचिका तैयार की है, जो वे प्रधानमंत्री को सौंपने जा रहे हैं।”

केंद्र के अपने कबूलनामे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “शुरू में केंद्र सरकार ने दावा किया था कि सिर्फ वाहन निर्माता ही माइलेज का निर्धारण कर सकते हैं। लेकिन हर चालक अपने वाहन की माइलेज देख सकता है, जो आधुनिक वाहनों के डैशबोर्ड पर दिखाई देती है। केंद्र ने अब संसद में मान लिया है कि ई-20 पेट्रोल माइलेज को छह फीसदी तक घटा सकता है और यह वाहनों के इंजनों को प्रभावित करता है।”

इस नीति के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह सिर्फ इथेनॉल के बारे में नहीं, बल्कि इस संबंध में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से है। इस समझौते के तहत भारत अगले पाँच सालों में इथेनॉल के आयात को पाँच गुना बढ़ाकर लगभग एक अरब लीटर से पाँच अरब लीटर करेगा, जो कि लगभग 20 अरब डॉलर बनता है। अमेरिका इथेनॉल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है और भारत को यह बोझ उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डोनाल्ड ट्रंप के आगे झुकने और उनकी हर बात को स्वीकार करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? अमेरिकी किसान अपनी अतिरिक्त पैदावार का निपटारा कर रहे हैं, जबकि भारतीय उपभोक्ताओं को उसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

केंद्र सरकार की विदेश नीति की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्र के फैसले बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। स्थिति अब यह बन चुकी है कि भारत को कहाँ से कच्चा तेल खरीदना है और कहाँ से नहीं, यह अमेरिका तय करता है। ऑपरेशन सिंधूर के दौरान भी, अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान से संबंधित विकास की घोषणा की थी, जिससे हमारी विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।”

इसे लागू करने की समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केंद्र ने असल में 2030 तक ई-20 को लागू करने की योजना बनाई थी। 2026 में इसे लागू करने की क्या जल्दी थी? उन्होंने ई-20 से शुरुआत की है और ई-25 तथा ई-50 को लागू करने से पहले विवाद के ठंडा पड़ने का इंतज़ार कर रहे हैं।”

विधानसभा के रुख को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब विधानसभा ने इस गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है। भाजपा सदस्यों ने हिस्सा न लेने का फैसला किया, लेकिन हम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से एक चुनने की छूट होनी चाहिए। पहले, लोग लैड और अनलेड पेट्रोल में से एक चुन सकते थे। यह फैसला लोगों की मर्जी को ताक पर रखकर जबरन उन पर थोपा गया है।”

इस नीति की तुलना टोल प्लाज़ा से करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “दुनिया भर में, लोगों के पास टोल सड़कों या बिना टोल वाली सड़कों का चयन करने का विकल्प होता है। जब नागरिक पहले ही रोड टैक्स अदा करते हैं, तो उन्हें अलग से टोल टैक्स क्यों देना पड़े? पंजाब सरकार ने 19 टोल प्लाज़ा बंद कर दिए हैं, जिससे यात्रियों को हर रोज़ लगभग 67 लाख रुपये की बचत हो रही है।”

अपनी मांग को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लोगों को तुरंत पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से एक चुनने की छूट दी जानी चाहिए और ई-20 की कीमत घटाई जानी चाहिए। मैंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर उनसे आम लोगों के हितों की रक्षा करने की अपील की है।”

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पंजाब देश में सबसे अधिक वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल, कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी आगे: हरपाल सिंह चीमा

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यह रेखांकित करते हुए कि पंजाब पहले से ही देश में सबसे अधिक सरकारी वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल है तथा कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां कहा कि पूर्ववर्ती शिरोमणि अकाली दल-भाजपा तथा कांग्रेस सरकारों की नीतियों के कारण राज्य को कर्मचारियों के वेतन आयोग के बकायों के रूप में 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार हाईकोर्ट द्वारा स्वीकृत निपटान योजना के तहत पहले ही 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये का भुगतान कर चुकी है तथा हाईकोर्ट के ताजा फैसले और उपलब्ध कानूनी उपायों का परीक्षण करते हुए सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन आयोग की रिपोर्ट वास्तव में वर्ष 2016 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान तैयार की गई थी, लेकिन इसे कई वर्षों तक लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट केवल जुलाई 2021 में लागू की गई। परिणामस्वरूप 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये को स्थगित कर दिया गया, जिससे 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी उत्पन्न हो गई।”

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि हालांकि तत्कालीन शासनकाल के दौरान वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इन बकाया राशियों में से एक रुपया भी जारी किए बिना अपना कार्यकाल पूरा कर लिया, जिससे पूरा वित्तीय बोझ वर्तमान सरकार पर आ गया।

‘आप’ सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विभिन्न कर्मचारियों द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद पंजाब सरकार ने एक सुनियोजित निपटान योजना तैयार की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, “14,191 करोड़ रुपये की कुल देनदारी में से ‘आप’ सरकार पहले ही कर्मचारियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर चुकी है। हाईकोर्ट ने इस निपटान योजना को स्वीकार कर लिया था और इसे लागू करने का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है।”

वर्तमान महंगाई भत्ते (डीए) के वितरण संबंधी हाईकोर्ट के ताजा फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि एकल पीठ की व्याख्या में कुछ संवैधानिक मानदंडों तथा न्यायिक नज़ीरों की अनदेखी की गई प्रतीत होती है।

महाराष्ट्र राज्य के मामले में वर्ष 2005 के संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय देश में सबसे अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, जो कई श्रेणियों में केंद्र सरकार के वेतन ढांचे से भी अधिक हैं।

विभिन्न पदों के लिए पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के वेतनमानों की तुलना प्रस्तुत करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “राज्य सरकार का कानूनी तर्क यह था कि जब राज्य का वेतन ढांचा पहले से ही काफी अधिक हो, तो कोई भी राज्य सरकार एक ही समय में सबसे अधिक मूल वेतनमान और केंद्र की सबसे अधिक डीए दरों—दोनों को बनाए नहीं रख सकती।”

उन्होंने आगे कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने स्वयं यह निर्णय लिया था कि नए भर्ती किए गए कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत शामिल किया जाएगा।

कर्मचारियों के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान किया जाएगा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “हमारी कानूनी टीम ताजा फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है, न्यायिक नज़ीरों की समीक्षा कर रही है तथा उपयुक्त कानूनी रास्ता तय करने के लिए विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने की संभावना भी शामिल है।”

प्रेस वार्ता का समापन करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पूर्ववर्ती अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस सरकारों से भारी वित्तीय बोझ विरासत में मिलने के बावजूद पंजाब सरकार सभी बकाया वित्तीय देनदारियों का योजनाबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से समाधान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से खराब हुई गाड़ियों की मरम्मत में ₹25,000 से ₹50,000 का खर्च आता है: हरपाल सिंह चीमा

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भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को अप्रैल 2026 से 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंड (ई-20 पेट्रोल) को ज़बरदस्ती लागू करने की आलोचना की, जबकि असल में डेडलाइन 2030 से आगे बढ़ा दी गई थी। वह अपने पेश किए गए प्रस्ताव के समर्थन में सदन में बोल रहे थे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूएस दुनिया का 60 परसेंट इथेनॉल बनाता है जबकि भारत सिर्फ़ 5 परसेंट बनाता है। चीमा ने भाजपा की केंद्र सरकार पर भारतीय उपभोक्ताओं और गाड़ी मालिकों की कीमत पर यीएस और डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर करने का आरोप लगाया।

राज्य में इस मुद्दे की गंभीरता पर ध्यान देते हुए, कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “पंजाब ट्रांसपोर्ट विभाग के पास अभी 1,25,88,851 रजिस्टर्ड टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर और कमर्शियल गाड़ियां हैं, जबकि पड़ोसी राज्यों से खरीदी गई कुछ दूसरी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन प्रोसेस अभी भी चल रहा है। इतनी ज़्यादा पुरानी गाड़ियों वाले राज्यों पर ज़बरदस्ती ई-20 फ्यूल थोपना बहुत भारी पड़ रहा है।”

लोकल मैकेनिकों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया, “इथेनॉल ब्लेंड से खराब हुई कार को ठीक करने का खर्च ₹25,000 से ₹50,000 के बीच है।”

उन्होंने पुरानी गाड़ियों वाले लोगों के लिए दूसरा इंतज़ाम न करने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की भी आलोचना की और चेतावनी दी कि अगर डिलीवरी बॉय और छोटे व्यापारियों की गाड़ियां हर कुछ महीनों में खराब होती रहीं, तो उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी।

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया, “केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी संसद में माना था कि फ्यूल माइलेज में 6% की कमी आई है, जबकि असल में एफिशिएंसी का नुकसान बहुत ज़्यादा है। घरेलू वैज्ञानिकों, मैन्युफैक्चरर्स, सांसदों या आम जनता से सलाह किए बिना देश पर ऐसी पॉलिसी थोपना निंदनीय है। यह पॉलिसी देश को कॉर्पोरेट हितों के लिए बेच रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “इथेनॉल बनाने में बहुत पानी लगता है, जो पंजाब के पहले से ही गिरते भुमिगत पानी लेवल के लिए एक गंभीर खतरा है।”

भारी जन विरोध को हाईलाइट करते हुए, मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने हाल ही में आप के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली में ऑर्गनाइज़ किए गए एक डायलॉग का ज़िक्र किया, जिसमें 4,000 से 5,000 लोग शामिल हुए थे और 7 लाख लोगों ने इसे ऑनलाइन देखा था। उन्होंने बताया, “उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के मैकेनिक और एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया और इस बात पर अपनी आवाज़ उठाई कि यह पॉलिसी कंज्यूमर्स के लिए कितनी नुकसानदायक है, जिससे यह साबित होता है कि यह एक ज़रूरी और ज़रूरी नेशनल मुद्दा है जिस पर तुरंत दोबारा विचार करने की ज़रूरत है।”

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