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भगवंत मान सरकार ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमर्ज़ी की फ़ीसें बढ़ाने पर लगाई रोक

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प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने के सिलसिले को खत्म करने और पंजाब भर के लाखों परिवारों को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, भगवंत मान सरकार ने एक व्यापक नियामक ढांचे की घोषणा की है। इसके तहत वार्षिक फीस वृद्धि पर 5 फीसदी की सीमा लगाई गई है। जिन स्कूलों ने पिछले तीन सालों के दौरान वार्षिक सीमा का उल्लंघन किया है, उनके द्वारा वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करना अनिवार्य किया गया है और सख्त जुर्मानों के प्रावधान के अलावा अंततः स्कूल की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।

प्रस्तावित कानून, जिसे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानून करार दिया है, आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा और यह पंजाब के सभी प्राइवेट स्कूलों पर लागू होगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि पांच फीसदी की यह सीमा सिर्फ ट्यूशन फीस पर ही नहीं, बल्कि स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले सभी अनिवार्य खर्चों और फंडों पर भी लागू होगी, जिससे उन सभी रास्तों को बंद कर दिया जाएगा, जिनका उपयोग संस्थान अक्सर माता-पिता पर अतिरिक्त खर्चों का बोझ डालने के लिए करते हैं। फीस में बेलगाम वृद्धि पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा 2019 में किए गए संशोधनों के कारण संभव होने की बात कहते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दावा किया कि नया कानून शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही बहाल करेगा, माता-पिता को लूट-खसूट से बचाएगा और स्कूल फीस को लेकर बच्चों व परिवारों की होने वाली मानसिक परेशानी को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।

‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, “अमृतसर में हुई दुखद घटना के बाद मुझे पिछले 24 घंटों के दौरान प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस बढ़ाने के संबंध में माता-पिता के सैकड़ों फोन आए हैं। हमारे बच्चों के भविष्य और माता-पिता को हो रही भारी परेशानी को ध्यान में रखते हुए आपकी सरकार ने बहुत ही महत्वपूर्ण और सख्त फैसला लिया है।”

मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, “पंजाब के किसी भी प्राइवेट स्कूल को अब अपनी वार्षिक फीस में पांच फीसदी से अधिक वृद्धि करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, जिन स्कूलों ने पिछले तीन सालों में फीस में 15 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी की है, उन्हें माता-पिता से वसूली गई अतिरिक्त राशि तुरंत वापस करनी होगी। इस फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए हम जल्द ही अध्यादेश लाएंगे। पांच फीसदी की सीमा सिर्फ ट्यूशन फीस पर ही लागू नहीं होगी, बल्कि स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले अन्य सभी अनिवार्य फंडों और खर्चों को भी कवर करेगी।”

उन्होंने पोस्ट के अंत में कहा, “यह देश में अपने तरह का सबसे सख्त नियम होगा और किसी भी स्कूल को कोई छूट नहीं दी जाएगी। पंजाब में शिक्षा के नाम पर माता-पिता और विद्यार्थियों की लूट-खसूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि प्राइवेट अनएडेड (गैर-सहायता प्राप्त) स्कूलों का फीस ढांचा इस वक्त ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016’ के अधीन आता है, जिसमें 2019 में संशोधन किया गया था, लेकिन पिछली सरकारें इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने में नाकाम रहीं, जिसके कारण स्कूलों को माता-पिता पर फीस बढ़ोतरी का बोझ डालने की खुल्लम-खुल्ला इजाजत मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार ने वार्षिक फीस वृद्धि पर पांच फीसदी की सीमा लगाने का फैसला किया है ताकि कोई भी स्कूल इस सीमा से अधिक फीस ना बढ़ा सके। हम इस संबंध में अध्यादेश लाएंगे। जिन स्कूलों ने पिछले तीन सालों के दौरान फीस में 15 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 2016 के मूल एक्ट में स्पष्ट तौर पर यह शर्त रखी गई थी कि फीसों में बढ़ोतरी पिछले साल की फीस के 8 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन पिछली सरकार द्वारा किए गए संशोधनों के जरिए इस व्यवस्था को कमजोर कर दिया गया था।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2019 के संशोधन ने स्कूलों को एक ‘डिस्क्लोजर मैकेनिज्म’ के जरिए निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाने की इजाजत दी थी, जिसके तहत स्कूलों के लिए दाखिला प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रस्तावित फीस बढ़ोतरी को स्कूल के नोटिस बोर्डों, स्कूल की वेबसाइटों और स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से दर्शाना अनिवार्य था। उन्होंने आगे कहा, “हालांकि कानून ने फीस बढ़ोतरी के संबंध में पारदर्शिता को अनिवार्य बनाया था, लेकिन व्यावहारिक रूप से इन नियमों को शायद ही कभी लागू किया गया। नतीजतन, माता-पिता को अनुचित और बहुत अधिक फीस के बोझ का सामना करना पड़ता रहा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि फीस बढ़ोतरी से संबंधित सभी लंबित शिकायतों की अब जांच की जाएगी और उन पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “रेगुलेटरी बॉडी बहुत अधिक फीस बढ़ोतरी पर तीखी नजर रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि फीस में कोई भी वृद्धि वास्तविक खर्चे या विकास गतिविधियों के आधार पर जायज हो और इसका नतीजा मुनाफाखोरी के रूप में ना निकले। यह बॉडी यह भी सुनिश्चित करेगी कि विद्यार्थियों से वसूले गए फंड का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए ना किया जाए। गंभीर उल्लंघनों के मामलों में स्कूलों को जुर्माने, मान्यता या एफिलिएशन रद्द किए जाने और विद्यार्थियों से वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करने के आदेशों का सामना करना पड़ सकता है।”

इस कदम को शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक हस्तक्षेप बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अध्यादेश का उद्देश्य विद्यार्थियों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से संबंधित विद्यार्थियों की लूट-खसूट को खत्म करना है। उन्होंने दावा किया कि “इस कानून का मकसद विद्यार्थियों और उनके परिवारों की लूट-खसूट को रोकना है। भारी फीस की मांग करने वाली संस्थाओं की मनमानी के कारण कोई भी बच्चा कभी भी निराशा में नहीं डूबना चाहिए। प्राइवेट स्कूलों द्वारा बेहिसाब फीस बढ़ाने के खिलाफ पंजाब में देश का सबसे सख्त कानून होगा।”

नया फीस रेगुलेशन ढांचा माता-पिता, विद्यार्थियों और निजी स्कूलों को कैसे प्रभावित करेगा

प्रस्तावित अध्यादेश ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016’ के आधार पर तैयार किया गया है, जो पंजाब भर के प्राइवेट अनएडेड स्कूलों में फीस ढांचे को रेगुलेट करता है। हालांकि यह एक्ट स्कूलों को अपनी फीस खुद निर्धारित करने की इजाजत देता है, लेकिन यह स्पष्ट तौर पर मुनाफाखोरी और कैपिटेशन फीस वसूलने की मनाही करता है। मूल कानून के तहत वार्षिक फीस बढ़ोतरी पिछले साल की फीस के 8 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती थी। हालांकि, 2019 में किए गए संशोधनों ने स्कूलों को एक डिस्क्लोजर मैकेनिज्म के जरिए इस सीमा से अधिक फीस बढ़ाने की इजाजत दी थी, जिसके लिए दाखिला प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रस्तावित फीस बढ़ोतरी को स्कूल के नोटिस बोर्डों, स्कूल की वेबसाइटों और स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर दर्शाना जरूरी था। पंजाब सरकार के अनुसार, वास्तव में इन नियमों को शायद ही कभी लागू किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप कई संस्थानों में फीस में बेरोक-टोक बढ़ोतरी हुई।

पंजाब सरकार द्वारा प्रस्तावित नए ढांचे के तहत वार्षिक फीस बढ़ोतरी की सीमा पांच फीसदी निर्धारित की जाएगी। सरकार ने यह संकेत भी दिया है कि जिन स्कूलों ने पिछले तीन सालों के दौरान फीस में 15 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी की है, उन्हें जांच और कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। बहुत अधिक फीस बढ़ोतरी से संबंधित सभी लंबित शिकायतों की अधिकारियों द्वारा जांच किए जाने की उम्मीद है।

माता-पिता के पास पहले से ही जिला स्तरीय रेगुलेटरी बॉडी के समक्ष फीस बढ़ोतरी को चुनौती देने का कानूनी अधिकार है। मौजूदा कानून के तहत शिकायतों की प्राप्ति के 15 दिनों के अंदर जांच होनी चाहिए और 60 दिनों के अंदर फैसला किया जाना चाहिए। रेगुलेटरी बॉडी के पास मामलों की जांच करते समय सिविल कोर्ट (दीवानी अदालत) के बराबर शक्तियां होती हैं। इस संस्था की अगुवाई जिले के डिप्टी कमिश्नर (डी.सी.) या एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ए.डी.सी.) करते हैं और इसमें जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) सदस्य सचिव के रूप में शामिल होते हैं, साथ ही दो नामांकित सदस्य होते हैं।

कानून रेगुलेटरी बॉडी को निगरानी की महत्वपूर्ण शक्तियां भी प्रदान करता है। यह बॉडी यह सुनिश्चित करने के लिए अधिकृत है कि स्कूलों का फीस ढांचा उचित सीमाओं के अंदर रहे, मुनाफाखोरी को रोका जा सके, बहुत अधिक फीस बढ़ोतरी की जांच की जा सके, यह पता लगाया जा सके कि क्या बढ़ोतरी अधिक खर्चों या विकास गतिविधियों के कारण जायज है और यह सुनिश्चित किया जा सके कि विद्यार्थियों से वसूला गया पैसा शिक्षा से गैर-संबंधित उद्देश्यों के लिए ना इस्तेमाल किया जाए।

कानून का उल्लंघन करने वाले स्कूलों को चरणबद्ध जुर्माना प्रणाली का सामना करना पड़ेगा। पहले उल्लंघन के लिए जुर्माना प्राइमरी स्कूलों के लिए 30,000 रुपये से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए एक लाख रुपये तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर अधिक जुर्माना लगेगा, जो 60,000 से लेकर दो लाख रुपये तक होगा। तीसरे उल्लंघन के मामले में अधिकारी आर्थिक जुर्माना लगाने के अलावा स्कूल की मान्यता या एफिलिएशन रद्द कर सकते हैं। रेगुलेटरी बॉडी के पास माता-पिता से वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करने के आदेश देने की शक्ति भी है।

पंजाब सरकार प्राइवेट स्कूलों के वित्तीय ऑडिट (खातों की जांच) के लिए प्रणालियों पर भी विचार कर रही है। विचाराधीन एक प्रस्ताव में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की एक कमेटी बनाना शामिल है, जो पिछले तीन से पांच सालों के स्कूलों के वित्तीय रिकॉर्डों की समीक्षा करेगी, जिसमें फीस की वसूली, खर्चे, तनख्वाहें, बुनियादी ढांचे का निवेश, रिजर्व फंड और संबंधित पक्षों के लेन-देन शामिल हैं। ऐसे ऑडिट यह निर्धारित करने में मदद करेंगे कि क्या फीस बढ़ोतरी सचमुच जायज थी और क्या वसूले गए फंडों का उपयोग शिक्षा के उद्देश्यों के लिए किया गया था।

प्रस्तावित अध्यादेश का उद्देश्य इन नियमों को सख्ती से लागू करना, प्राइवेट स्कूलों की निगरानी को मजबूत करना, फीस निर्धारण में अधिक पारदर्शिता लाना और मनमानी फीस बढ़ोतरी को चुनौती देने के लिए मजबूत प्रणाली प्रदान करना है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि शैक्षणिक संस्थान बिना किसी मुनाफाखोरी के काम करें।

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श्री आनंदपुर साहिब में संशोधित हेरिटेज स्ट्रीट प्लान को मंजूरी; श्रद्धालुओं का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव बढ़ेगा : CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और इसकी समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के उद्देश्य से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों की समीक्षा की। पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग की एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शंभू सीमा पर भव्य स्वागती गेट के निर्माण को भी मंजूरी दी है, जो पंजाब की ‘पंज-आब’ पहचान और वास्तुकला की विरासत के सम्मान में तैयार किया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने श्री आनंदपुर साहिब में संशोधित हेरिटेज स्ट्रीट प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है।

हेरिटेज स्ट्रीट किला श्री आनंदगढ़ साहिब, तख्त श्री केसगढ़ साहिब और अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों को जोड़ने के साथ-साथ श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए आध्यात्मिक आभा प्रदान करेगी, जिससे पंजाब की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सिख धर्म के सबसे सम्मानित ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्रों में से एक श्री आनंदपुर साहिब में प्रस्तावित हेरिटेज स्ट्रीट के लिए संशोधित योजना को मंजूरी दे दी है। “श्री आनंदपुर साहिब में प्रस्तावित हेरिटेज स्ट्रीट किला आनंदगढ़ साहिब के पास गोल चौक से शुरू होगी और तख्त श्री केसगढ़ साहिब पार्क, गुरुद्वारा सीसगंज साहिब और गुरुद्वारा भोरा साहिब तक जाएगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस प्रोजेक्ट की योजना श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आध्यात्मिक और विरासत अनुभव को और मजबूत करने के लिए बनाई गई है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रोजेक्ट के सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों से सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त की जाएंगी और इसके डिजाइन को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और अन्य सक्षम अधिकारियों द्वारा विधिवत मंजूरी दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि प्रोजेक्ट के सुचारू एवं निर्बाध कार्यान्वयन और इसकी निगरानी के लिए उच्च-शक्ति समिति भी बनाई जाएगी।

महत्वपूर्ण शंभू स्वागती गेट प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने किया कि शंभू सीमा पर बनने वाला भव्य स्वागती गेट पंजाब की शान को दर्शाएगा। यह गेट चार-मार्गी एन.एच.ए.आई. (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) सड़क पर 12 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा, जो हमारी भव्य विरासत और परंपराओं के सम्मान का प्रतीक होगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वास्तुकला अजूबे को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह सहजता से मौजूदा हाईवे बुनियादी ढांचे से जुड़ सके, जो इसकी सुंदरता को और निखारेगा। इस गेट के हाईवे के पिलर दोनों तरफ सर्विस रोड के साथ स्थापित होंगे, जो पंजाब के प्रवेश गेट पर भव्य पहचान बनाएंगे। पंजाब की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक वास्तुकला के सम्मान में तैयार किए गए इस ढांचे पर विस्तृत कारीगरी शामिल होगी, जो राज्य की अद्वितीय पहचान को दर्शाएगी।

डिजाइन में शामिल अनूठी सांस्कृतिक विशेषताओं की पहचान करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह गेट पारंपरिक और वास्तुकला की एक श्रृंखला के माध्यम से क्षेत्रीय कलात्मकता को प्रदर्शित करेगा। गेट में पत्थर की क्लैडिंग, एफ.आर.पी. वर्क, भव्य जाली पैटर्न, फुलकारी से प्रेरित कलाकृति और कई अन्य विशेषताएं होंगी, जो पंजाब की समृद्ध कलात्मक परंपराओं को दर्शाएंगी। इस डिजाइन की अवधारणा ‘पंज-आब’ शब्द की उत्पत्ति का सम्मान करती है, जिसका अर्थ है पांच पानियों की भूमि और इस विचार को आर्किटेक्चरली ‘रिदम ऑफ फाइव’ द्वारा दर्शाया गया है, जिसमें गेटवे के दोनों तरफ पांच-पांच गुंबद हैं, जो राज्य के पांच नदियों का प्रतीक हैं।

बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस, तरुनप्रीत सिंह सौंद और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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पंजाब पुलिस की लोक-केंद्रित पुलिसिंग से लोगों का भरोसा हुआ मजबूत, उद्योग और निवेश के लिए बना सुरक्षित माहौल

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पंजाब पुलिस नागरिकों और कानून प्रवर्तन तंत्र के बीच भरोसे को और मजबूत करते हुए पूरे राज्य में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक पुलिसिंग के नए मानदंड स्थापित कर रही है। पंजाब की औद्योगिक राजधानी लुधियाना, लोक-केंद्रित पुलिसिंग मॉडल की एक प्रमुख मिसाल के रूप में उभरा है; जहाँ उद्योगपतियों और आम नागरिकों ने पुलिसिंग, सामुदायिक सहभागिता और अपराध रोकथाम के लिए की गई पहलकदमियों में आए सकारात्मक बदलाव की खुलकर सराहना की है।

पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव के नेतृत्व में पंजाब पुलिस ने अपराध-मुक्त माहौल सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयासों को और तेज कर दिया है, जिसके चलते समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा पुलिस की सराहना की जा रही है। अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई से लेकर सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने तक, पुलिस बल ने लोगों का विश्वास जीतने और नागरिकों में सुरक्षा की भावना पैदा करने पर विशेष ध्यान दिया है।

लुधियाना के उद्योगपति अनमोल सूद ने कारोबारी समुदाय पर पुलिसिंग के सकारात्मक प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा, “कारोबारी नजरिए से देखा जाए तो पंजाब पुलिस ने हमें सुरक्षा का मजबूत एहसास दिलाया है। मुझे एक घटना याद है जब कुछ असामाजिक तत्व हमारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे और पुलिस ने कुछ ही मिनटों में उन पर कार्रवाई की। यह पंजाब पुलिस के अच्छे कामों के अनेकों उदाहरणों में से एक है। लुधियाना में जिस तरह की सामुदायिक पुलिसिंग की जा रही है, वह न केवल सराहनीय है, बल्कि इसके परिणाम भी लोगों के लिए बहुत लाभकारी हैं।”

उक्त कारोबारी के भाई और साझेदार संचित सूद ने कहा कि अपराधिक गतिविधियों में आई कमी ने कानून-व्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा, “अब राज्य में फिरौती के लिए फोन कॉल जैसी घटनाएं सुनने को नहीं मिलतीं। यह स्थानीय पुलिस द्वारा डीजीपी गौरव यादव के नेतृत्व में चलाए गए विभिन्न अभियानों का परिणाम है। पुलिस सामुदायिक पुलिसिंग, त्वरित कार्रवाई और लोगों को बिना किसी परेशानी के जीने के लिए सुरक्षित माहौल मुहैया कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।”

पंजाब पुलिस की पहलकदमियों के व्यापक उद्देश्यों के बारे में बताते हुए डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “पंजाब पुलिस राज्य और इसके नागरिकों की भलाई के लिए 24 घंटे समर्पित है। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से हमने समाज के हर वर्ग के साथ मजबूत तालमेल विकसित किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग से लेकर खुले संवाद कार्यक्रमों तक, पंजाब पुलिस हर नागरिक तक पहुंचकर उनमें सुरक्षा की भावना पैदा कर रही है।”

राज्य में बड़े पैमाने पर लगातार निवेश का आना पंजाब में कानून-व्यवस्था के बेहतर माहौल के प्रति उद्योग जगत के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। पिछले एक वर्ष के दौरान पंजाब ने 57,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है और देश के सबसे उभरते निवेश केंद्रों में शामिल हुआ है। पंजाब पुलिस द्वारा बनाया गया सुरक्षित और स्थिर माहौल आर्थिक विकास को गति देने और नए निवेश को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी राज्य के औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने के लिए विश्व स्तरीय निवेशकों के साथ लगातार संपर्क में हैं। नीदरलैंड की यात्रा के दौरान उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स को मोहाली में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्र स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार करने का निमंत्रण दिया। इसी तरह, नवरत्न सीमेंट इंडस्ट्रीज ने राजपुरा के राय माजरा गांव में ग्रीन सीमेंट निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए 250 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश की घोषणा की है।

लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन (एलएचटीए) के अध्यक्ष सुभाष चंद्र रलहान ने कहा कि पंजाब पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया ने नागरिकों और कारोबारी प्रतिष्ठानों में सुरक्षा की भावना को काफी मजबूत किया है। उन्होंने कहा, “हमारे यहां सैकड़ों लोग काम करते हैं और हर किसी के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना आसान नहीं होता। शहर में लूट-पाट की घटनाओं में कमी आई है। हमने अपने इलाके में अपराधिक घटनाओं पर रोक के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की थी और पुलिस ने बहुत कम समय में समस्या का समाधान किया। ऐसी त्वरित कार्रवाई लोगों का पुलिस पर पूरा भरोसा कायम करने के लिए काफी है।”

लगभग चार दशकों से लुधियाना में कारोबार कर रहे उद्योगपति अरुण शर्मा ने भी पुलिसिंग में आए बदलाव की सराहना की। उन्होंने कहा, “मैंने राज्य के मुश्किल और अच्छे दोनों दौर देखे हैं, लेकिन मौजूदा पुलिसिंग प्रणाली वाकई सराहनीय है। किसी समस्या को लेकर पुलिस के पास जाने का डर अब खत्म हो चुका है और समस्याओं के त्वरित समाधान की प्रक्रिया लोगों के लिए बहुत मददगार साबित हो रही है।”

टेक्नोलॉजी-आधारित पुलिसिंग को और मजबूत करते हुए पंजाब पुलिस ने हाल ही में लुधियाना में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) शुरू किया है। यह केंद्र ट्रैफिक निगरानी, पुलिस कंट्रोल रूम संचालन और निगरानी प्रणालियों का एक ही छत के नीचे प्रबंधन करता है, जिससे प्रतिक्रिया समय में तेजी आई है और जांच क्षमताओं में भी सुधार हुआ है।

लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने कहा कि पुलिस बल नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार जनसंपर्क और सक्रिय पुलिसिंग उपायों के प्रति वचनबद्ध है। उन्होंने कहा, “पंजाब पुलिस देश के सबसे बहादुर पुलिस बलों में से एक है, जो लोक कल्याण के लिए समर्पित है। पूरा पुलिस बल चौबीसों घंटे काम करता है और हम ‘सुरक्षित पंजाब, सफल पंजाब’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापक योजनाओं पर काम कर रहे हैं। आधुनिक पुलिसिंग में लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी है और नागरिकों का सबसे बड़ा योगदान समय पर जानकारी मुहैया कराना है। जैसे ही कोई जानकारी मिलती है, पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है।”

जनभागीदारी को और मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से हमने नागरिकों के साथ खुले संवाद की पहल की है। पुलिस द्वारा मोहल्लों, स्कूलों, डॉक्टरों, कारोबारियों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अन्य कई वर्गों के साथ नियमित बैठकें की जा रही हैं, ताकि आपसी संचार को बेहतर बनाया जा सके और उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढा जा सके। लोगों से मिलने वाला फीडबैक हमें हर दिन अपने कामकाज में और सुधार करने में मदद करता है।”

संगठित अपराध के खिलाफ पंजाब पुलिस का अभियान भी महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त कर चुका है। सीमावर्ती राज्य होने की चुनौतियों के बावजूद पुलिस ने ‘ऑपरेशन गैंगस्टरां ते वार’ के माध्यम से अपराधिक गिरोहों पर सख्त कार्रवाई की है और गैंगस्टर नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार उपाय किए जा रहे हैं।

इस कार्रवाई के व्यापक उद्देश्यों के बारे में जानकारी देते हुए स्वपन शर्मा ने कहा, “गैंगस्टर खुद तो सुरक्षित ठिकानों पर बैठे रहते हैं, जबकि पंजाब के युवाओं को अपने गैर-कानूनी कामों के लिए इस्तेमाल करने हेतु गुमराह करते हैं। पिछले चार महीनों के दौरान पंजाब पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है। मेरी युवाओं को सलाह है कि वे पढ़ाई करें, देश की तरक्की में योगदान दें और अपने भविष्य को सवांरने पर ध्यान दें। इस अभियान ने राज्य के लोगों और पुलिस के बीच भरोसे के रिश्ते को फिर से मजबूत करने में मदद की है। यह अभियान सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे पंजाब पुलिस की खुफिया और निगरानी क्षमताएं भी और मजबूत हुई हैं और नागरिकों में सुरक्षा की भावना भी बढ़ी है।”

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वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कर्मचारी यूनियनों के साथ उच्च स्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की, लंबित मुद्दों के जल्द समाधान के दिए निर्देश

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, जो प्रदेश के कर्मचारियों की शिकायतों के निपटारे के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी के चेयरमैन भी हैं, ने आज विभिन्न कर्मचारी यूनियनों द्वारा उठाई गई जायज मांगों के निपटारे में तेजी लाने के लिए उच्च स्तरीय बैठकों की श्रृंखला की अध्यक्षता की।

प्रत्येक शिष्टमंडल द्वारा उठाई गई विशिष्ट मांगों और मुद्दों की समीक्षा करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, ‘मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार कर्मचारियों के कल्याण के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।’

उन्होंने संबंधित विभागों के प्रशासनिक प्रमुखों को मौके पर ही निर्देश जारी करते हुए कर्मचारियों की जायज मांगों की बारीकी से पड़ताल करने और जल्द से जल्द इनका समाधान सुनिश्चित करने की हिदायत दी।

कैबिनेट सब-कमेटी की भूमिका पर जोर देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा, ‘कैबिनेट सब-कमेटी प्रदेश के सभी कैडरों के कर्मचारियों के मुद्दों के समाधान के लिए एक सहयोगी माहौल सृजित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।’

इन विचार-विमर्श के दौरान वित्त मंत्री ने पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन, बाजीगर वणजारा समाज संघर्ष कमेटी, कंप्यूटर अध्यापक यूनियन, लाल झंडा मिड-डे-मील वर्करज़ यूनियन और जल स्पलाई और सेनिटेशन वर्करज़ यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की।

पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन ने एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा, जिसमें पंजाब सरकार के कर्मचारियों को सामना करने वाले साझा मुद्दों को उजागर किया गया। आम कर्मचारी कल्याण के मामलों के अलावा, यूनियन ने विभिन्न क्षेत्रों में तैनात मिनिस्टीरियल स्टाफ से संबंधित विशिष्ट चिंताओं को सामने लाया, जिनमें जिला प्रशासनिक कार्यालय, शिक्षा विभाग, सहकारिता विभाग, आबकारी विभाग, वित्त विभाग, आई.टी.आई., जल आपूर्ति और स्वच्छता विभाग, भूमि एवं जल संरक्षण विभाग और कमिश्नर कार्यालयों के कर्मचारियों के मुद्दे शामिल थे।

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