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डायलिसिस के 1 लाख सत्र पूरे, ₹16.5 करोड़ का ख़र्च कवर: भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ किडनी मरीज़ों के लिए बनी जीवनरेखा

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अब तक भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत लगभग 1 लाख डायलिसिस प्रक्रियाएँ की जा चुकी हैं, जिन पर करीब 16.5 करोड़ का ख़र्च वहन किया गया है। भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज (दीर्घकालिक गुर्दा रोग) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा समर्थित कैशलेस डायलिसिस योजनाएँ मरीज़ों के लिए जीवनरेखा बनकर उभर रही हैं। हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि इलाज की सफलता अभी भी इलाज की उपलब्धता और वहन क्षमता पर ज़्यादा निर्भर है, न कि उपचार पर।

लुधियाना के ध्यान सिंह हफ़्ते में दो बार अस्पताल जाते हैं। लंबे समय से डायलिसिस करवा रहे मरीज़ों की तरह, उन्हें भी नियमित उपचार के बावजूद कई शारीरिक और मेटाबोलिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालाँकि, ‘सेहत कार्ड’ के ज़रिए मिलने वाली आर्थिक सहायता से कुछ हद तक राहत मिलती है l अब तक वे दर्जन से अधिक बार कैशलेस इलाज ले चुके हैं। वे कहते हैं, “जब से मैंने मुख्यमंत्री सेहत योजना में पंजीकरण करवाया है, तब से सिमरिता नर्सिंग होम में मेरा डायलिसिस मुफ़्त हो रहा है।”

क्रॉनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे मरीज़ों के लिए जीवन दिनों या हफ़्तों में नहीं, बल्कि मशीन के चक्रों में सिमट जाता है। हफ़्ते में दो से तीन बार, करीब चार घंटे तक, शरीर से रक्त निकालकर डायलिसिस मशीन से फिल्टर किया जाता है; और फिर उन विषाक्त पदार्थों से साफ़ करके वापस शरीर में डाला जाता है, जिन्हें निष्क्रिय किडनियाँ अब निकाल नहीं पातीं। यह प्रक्रिया जीवन को बनाए रखती है, लेकिन पूरी तरह स्वास्थ्य को बहाल नहीं करती।

भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जिसका सीधा संबंध मधुमेह और उच्च रक्तचाप के बढ़ते मामलों से है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर साल लाखों मरीज़ एंड-स्टेज किडनी डिजीज तक पहुँच जाते हैं, जहाँ जीवित रहने के लिए या तो लंबे समय तक डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। वैश्विक स्तर पर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस बीमारी को तेज़ी से बढ़ने वाली गैर-संचारी बीमारियों में से एक मानता है, जिसका मुख्य कारण बढ़ती उम्र और जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारक हैं। भारत में यह संकट लागत के कारण और भी गंभीर हो जाता है।

निजी क्षेत्र में एक डायलिसिस सत्र की लागत 1,500 से 4,000 के बीच होती है। अधिकांश मरीज़ों को हफ़्ते में दो से तीन डायलिसिस सत्रों की आवश्यकता होती है, जिससे वार्षिक ख़र्च तेज़ी से कई लाख रुपये तक पहुँच जाता है—जो निरंतर आर्थिक सहायता के बिना अधिकांश परिवारों की पहुँच से बाहर है। इलाज के फैसले अक्सर मेडिकल जरूरत के साथ-साथ आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करते हैं।

इसी परिप्रेक्ष्य में पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ जैसी सरकारी योजनाएँ इलाज में रुकावट को रोकने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

अधिकांश मामलों में किडनी डिजीज कई दीर्घकालिक बीमारियों का अंतिम परिणाम होती है, जो वर्षों तक किडनी को नुकसान पहुँचाती रहती हैं और लक्षण देर से सामने आते हैं। ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में डायलिसिस मुफ़्त उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे मरीज़ों का जेब से होने वाला ख़र्च कम हुआ है और वे इलाज बीच में छोड़ने को मजबूर नहीं हो रहे।

इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “अब तक सेहत योजना के तहत 1 लाख मुफ्त डायलिसिस उपचार, जिनकी लागत 16.5 करोड़ है, प्रदान किए जा चुके हैं। कोई भी मरीज पैसे की कमी के कारण डायलिसिस से वंचित नहीं रहना चाहिए।”

मोगा के दिल्ली हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सौरव गोयल का कहना है कि डायलिसिस में आर्थिक सहायता का प्रभाव केवल सुविधा तक सीमित नहीं है। वे बताते हैं, “डायलिसिस इलाज नहीं, बल्कि जीवन बनाए रखने वाली प्रक्रिया है। अगर मरीज़ एक या दो सत्र भी छोड़ देता है, तो शरीर में विषाक्त पदार्थ तेज़ी से जमा हो जाते हैं, जो जानलेवा हो सकते हैं। कैशलेस सुविधा का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि इलाज में निरंतरता बनी रहती है, और डायलिसिस में निरंतरता ही जीवन है।”

अपना अनुभव साझा करते हुए वे कहते हैं, “अब हम पहले की तुलना में हर महीने ज़्यादा डायलिसिस सत्र कर रहे हैं, जिनमें से कई कैशलेस हैं। यह मरीज़ों के लिए बड़ी मदद है और डॉक्टरों के लिए भी राहत, क्योंकि इससे आर्थिक कारणों से इलाज रुकने की समस्या कम होती है।”

डॉ. गोयल के अनुसार, भारत में सबसे बड़ी चुनौती रोग की समय पर पहचान (अर्ली डिटेक्शन) है। अधिकांश मरीज़ बहुत देर बाद सामने आते हैं, जब किडनी की कार्यक्षमता काफ़ी हद तक पहले ही ख़त्म हो चुकी होती है। उस समय विकल्प केवल डायलिसिस या ट्रांसप्लांट तक सीमित रह जाते हैं।

चिकित्सा शोध बताते हैं कि भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज के कई मरीज़ इलाज के दौरान भारी आर्थिक बोझ का सामना करते हैं। इलाज शुरू होने के कुछ ही महीनों में कई परिवारों की बचत ख़त्म हो जाती है या वे कर्ज में डूब जाते हैं।

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Punjab-Chandigarh में बदलेगा मौसम, 5 दिनों तक गर्मी से राहत; तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी

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पंजाब और Chandigarh के लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। आज 2 मई से अगले पांच दिनों तक गर्मी से काफी राहत मिलने की संभावना जताई गई है। इस दौरान कई इलाकों में गरज-चमक, आंधी और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग के India Meteorological Department के चंडीगढ़ केंद्र ने इस स्थिति को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। पहाड़ी इलाकों में हो रही बारिश और ओलावृष्टि के असर से मैदानी क्षेत्रों के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है।

राज्य में औसतन तापमान में 1.1 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, जो सामान्य से लगभग 2.8 डिग्री कम है। Bathinda में अधिकतम तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार आज सात जिलों—Pathankot, Hoshiarpur, Fazilka, Muktsar, Bathinda, Mansa और Rupnagar—में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

राज्य के सभी जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। 11 जिलों में तापमान 35 से 40 डिग्री के बीच रहा। Amritsar में तापमान 35.8 डिग्री, Ludhiana में 35.2 डिग्री, Patiala में 35.6 डिग्री और Chandigarh में 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जहां तापमान में गिरावट देखी गई।

मौसम विभाग ने किसानों को तेज हवाओं और बदलते मौसम के कारण फसलों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। आने वाले पांच दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जिससे जहां एक ओर गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं तेज हवाओं और आंधी को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।

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भगवंत मान सरकार ने सर्वसम्मति से जीता विश्वास मत

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब विधानसभा के फ्लोर को राजनीतिक अधिकार के एक निर्णायक दावे में बदल दिया, जिसमें उनकी सरकार ने सर्वसम्मति से विश्वास प्रस्ताव जीतकर एक स्पष्ट संदेश दिया कि पंजाब सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें नाकाम रहीं। लोगों के जनादेश को दृढ़ विश्वास का प्रतीक बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एलान किया कि आम आदमी पार्टी (आप) का बहुमत आधार बरकरार है, जो 2027 में और भी बड़े फैसले से स्पष्ट दिखाई देगा। उन्होंने “खून-पसीने” से बनी पार्टी की जमीनी ताकत और अरविंद केजरीवाल के साथ इसके अटूट बंधन को उजागर किया।

विपक्ष के संबंध में उन्होंने सदन में कांग्रेस की अनुपस्थिति को मौन समर्थन बताया और भाजपा के संगठनात्मक ढांचे पर सवाल उठाए। उन्होंने साथ ही यह एलान करके एक बड़ी संवैधानिक लड़ाई का संकेत दिया कि पंजाब सरकार राष्ट्रपति के पास पहुंचकर दल-बदल विरोधी सख्त कानूनी प्रस्तावों या री-कॉल के अधिकार की मांग करेगी। ‘आप’ को दल-बदल से प्रभावित न होने वाली एक टिकाऊ राष्ट्रीय ताकत बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि हमारी पार्टी लोगों के विश्वास का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि ईडी और सीबीआई जैसी संस्थाओं के दुरुपयोग जैसे तरीके बाबा साहिब अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को कमजोर करते हैं।

सदन की कार्यवाही के दौरान कुल 88 ‘आप’ विधायक मौजूद थे, जबकि ‘आप’ के दो विधायक इस समय विदेश में हैं और दो जेल में हैं। इसके अलावा दो विधायक अस्पताल में भर्ती हैं। विश्वास प्रस्ताव को सदन में सर्वसम्मति से समर्थन प्राप्त हुआ, जिसने भगवंत मान सरकार की ताकत और एकता को उजागर किया।

विश्वास प्रस्ताव पेश करके विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि गलत और भ्रामक जानकारी के जरिए सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन पंजाब के लोग सरकार के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि इन दिनों सूबा सरकार को अस्थिर करने के लिए झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों के मन में शक की भावना पैदा हो रही है। हालांकि, पंजाब के लोगों ने बार-बार सरकार और इसकी नीतियों में स्पष्ट विश्वास दिखाया है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पूरा विपक्ष निराशा के आलम में है क्योंकि उनके नकारात्मक कूड़ प्रचार के बावजूद उन्हें लोगों से कोई समर्थन नहीं मिल रहा।

विपक्ष के आंतरिक कलह पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि विपक्ष पूरी तरह से आपस में ही उलझा हुआ है और उनकी लीडरशिप सत्ता के लिए आपस में लड़ रहे नेताओं से बंटी हुई है। विपक्ष के नेता और उनका अपना भाई एक ही घर में रहते हैं लेकिन उनकी पार्टियों के झंडे अलग-अलग हैं। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत ‘आप’ सत्ताधारी ‘आप’ पार्टी पूरी तरह से एकजुट है, जिसका हर वॉलिंटियर पंजाब की तरक्की के लिए ठोस यत्न कर रहा है।

वैधानिक और राजनीतिक सक्रियताओं के बारे में उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां यह हजम नहीं कर पा रही हैं कि जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 पास हो गया है, क्योंकि यह अधिनियम उन्हें अपने विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने की इजाजत नहीं देगा। उन्होंने आगे कहा कि गुजरात से लेकर देश भर में ‘आप’ की बढ़ती मौजूदगी ने भाजपा और इसके सहयोगियों को बेचैनी में डाल दिया है। ‘आप’ अब जम्मू से गोवा तक फैल चुकी है, जो भाजपा और कांग्रेस दोनों की नींद हराम कर रही है, क्योंकि ये पार्टियां लोग केंद्रित मुद्दों को उठाने के बजाय सत्ता का दोस्ताना मैच खेलने को प्राथमिकता देती आई हैं।

पार्टी की विचारधारात्मक ताकत को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि कांग्रेस, अकाली दल या भाजपा के विपरीत, ‘आप’ को तोड़ा नहीं जा सकता क्योंकि यह पार्टी राजनीतिक प्रणाली को साफ करने के लिए उभरी है। उन्होंने कहा कि कुछ मौकापरस्त आगुओं की वफादारी बदलने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि पंजाब के लोग सरकार और इसकी अनोखी पहलकदमियों के साथ डटकर खड़े हैं।

उन्होंने आगे कहा कि दल-बदलुओं के जाने के बाद विपक्षी पार्टियां झूठे दावे कर रही थीं कि ‘आप’ विधायक उनके संपर्क में हैं, जबकि उनके अपने नेता ही एक-दूसरे से आंख नहीं मिलाते।

लोकतांत्रिक माहौल के बारे में चिंताएं जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि देश मुश्किल समय से गुजर रहा है, जहां लोकतांत्रिक नियमों को खतरे में डाला जा रहा है और संविधान को तोड़ा जा रहा है। यह संविधान के मुख्य निर्माता बाबा साहिब अंबेडकर का घोर अपमान है, जो बिल्कुल भी बर्दाश्त योग्य नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि वोटों को हाईजैक किया जा रहा है और लोकतंत्र की आवाज को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।

भाजपा के खिलाफ अपनी आलोचना जारी रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने टिप्पणी की कि भाजपा का अपना कोई कैडर नहीं है। मशहूर हस्तियां आती हैं, चुनाव लड़ती हैं और फिर चली जाती हैं। अगर देखा जाए तो उनके 240 सांसदों में से 125 कांग्रेस के हैं, जो दर्शाता है कि उनका अपना कोई आधार नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पार्टियां बदलने वाले नेताओं ने लोगों और उनके जनादेश की पीठ में छुरा मारा है। उन्होंने कहा कि मैं भारत के राष्ट्रपति से मिलकर संशोधनों की मांग करूंगा ताकि ऐसे नेताओं को वापस बुलाया जा सके।

शासन और विकास के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक बड़ी सिंचाई पहल पर प्रकाश डाला और कहा कि पंजाब के इतिहास में पहली बार 1 मई से पानी छोड़ा जा रहा है ताकि किसानों को इसका लाभ हो सके। धान के सीजन से पहले 4,000 किलोमीटर नए रजवाहों और 3,000 किलोमीटर पाइपलाइनों को चालू कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि सिस्टम की जांच करने और किसी भी कमी को दूर करने के लिए 21,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।

उन्होंने आगे कहा कि “छोड़ा गया पानी दो भाखड़ा नहरों की सप्लाई के बराबर है, जिससे किसानों को अधिक लाभ होगा। यह समर्पित रिचार्ज स्कीमों के जरिए भूमिगत पानी को रिचार्ज करने में भी मदद करेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को लाभ होगा।” उन्होंने आगे कहा कि नहरों और दरियाओं में रिचार्ज पॉइंट बनाए गए हैं, जिससे पानी के स्तर में दो से चार मीटर का इजाफा हुआ है।

लंबे समय के दृष्टिकोण को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से है, क्योंकि पंजाब का वजूद पानी पर निर्भर करता है। यह बहुत मान वाली बात है कि पिछले साल 21 लाख घन मीटर पानी रिचार्ज किया गया है। यह ऐतिहासिक पहल जमीन के नीचे के पानी की संभाल के साथ-साथ पंजाब के कृषि क्षेत्र को और मजबूत करेगी।

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विभिन्न राज्यों में ED और CBI के छापों के जरिए डराकर चुनी हुई सरकारों को कमजोर कर रही है भाजपा: Harpal Singh Cheema

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भाजपा पर तीखा हमला करते हुए ‘आप’ के वरिष्ठ नेता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संघीय ढांचे को कमजोर करने की योजना बनाने वाली सरकार बताया।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का समर्थन करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “देश की बुनियादी लोकतांत्रिक मूल्यों और पिछले दशक के दौरान भाजपा द्वारा की जा रही गैर-संवैधानिक गतिविधियों के बीच बहुत बड़ा अंतर है। पंजाब से छह राज्यसभा सदस्यों को तोड़ा गया है। यह स्पष्ट रूप से एक सुनियोजित और लोकतांत्रिक विकृति है कि 117 विधानसभा सीटों में से केवल दो सीटें जीतने वाली पार्टी अब छह राज्यसभा सीटों का दावा कर रही है।”

एजेंसियों के दुरुपयोग की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “भाजपा ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर और मैनेजिंग डायरेक्टर के घर उन्हें डराने-धमकाने के लिए ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल किया, ताकि उच्च सदन में बहुमत साबित किया जा सके और 123 सदस्यों के आंकड़े के करीब पहुंचा जा सके। देशभर में ऐसा ही कुछ चल रहा है—हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में क्रॉस वोटिंग, महाराष्ट्र में शिवसेना का टूटना, बिहार में नीतीश कुमार से जुड़े जनादेश में फेरबदल और गुजरात में विधायकों की खरीद-फरोख्त के जरिए चुने हुए प्रतिनिधियों को कमजोर किया जा रहा है।”

सीनियर ‘आप’ नेता ने आगे कहा, “ये कार्रवाइयां दर्शाती हैं कि भाजपा जनादेश जीतने में असफल रहने पर अप्रत्यक्ष रूप से राज्यों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए एक समानांतर गैर-लोकतांत्रिक प्रणाली चला रही है। अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित आम आदमी पार्टी का नेतृत्व बाबा साहिब डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान में अटूट विश्वास रखता है, जबकि भाजपा का इसमें कोई विश्वास नहीं है और शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, लाला लाजपत राय और शहीद ऊधम सिंह के अद्वितीय बलिदानों को भुलाकर लोगों को बांटने और सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ाने की कोशिश कर रही है।”

अंत में उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र को तानाशाही और कानूनहीन केंद्रीय सरकार से बचाने के लिए दूसरे राष्ट्रीय आंदोलन का समय आ गया है। ऐसी कार्रवाइयां ‘गुंडा राज’ का उदाहरण हैं और भारत के संघीय ढांचे के लिए गंभीर खतरा हैं, जिनका डटकर विरोध किया जाना चाहिए।

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