Connect with us

Punjab

शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, लाखों के बिल वाले मरीज अब बिना कोई भुगतान किए hospital से इलाज लेकर वापस घरों को लौट रहे

Published

on

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब का स्वास्थ्य क्षेत्र एक क्रांतिकारी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पंजाब सरकार के वादे के अनुसार हर परिवार को सुगम, किफायती और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। कई सालों से उच्च इलाज दरों के कारण मरीज इलाज में देरी करने को मजबूर होते रहे, मेडिकल टेस्टों को टालते रहे या दवाइयां बीच में ही छोड़ देते थे, जिससे परिवार कर्जे के नीचे आ जाते थे और स्वास्थ्य परिणाम भी प्रभावित होते थे। यह हालत, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यापक थे, अब धीरे-धीरे बदल रही है।

इस बदलाव के केंद्र में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना है, जो भगवंत मान सरकार की प्रमुख पहल है और तेजी से लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बढ़ा रही है। केवल तीन महीनों में 40 लाख से अधिक हेल्थ-कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जो हर परिवार को वार्षिक 10 लाख रुपये तक का कवर देते हैं। इस योजना को बड़े पैमाने पर अपनाने से इसकी आवश्यकता और इसमें लोगों के भरोसे का पता चलता है। 21 अप्रैल को 28,766 पंजीकरण हुए, जो यह संकेत देते हैं कि स्वास्थ्य प्रणाली अब और अधिक जवाबदेह, समावेशी और लोक-केंद्रित बन रही है।

जिलों में इस योजना का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। लुधियाना 4.20 लाख कार्डों के साथ सबसे आगे है, इसके बाद पटियाला (3.82 लाख) और जालंधर (2.85 लाख) हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस योजना की पहुंच केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। होशियारपुर, अमृतसर, मानसा, फाजिल्का और बरनाला जैसे टायर-2 और टायर-3 जिलों में भी इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जो दर्शाता है कि सरकार की यह स्वास्थ्य पहल छोटे कस्बों तक तेजी से पहुंच रही है, जहाँ इसकी सबसे अधिक आवश्यकता थी।

इस बदलाव की सबसे बड़ी पुष्टि जमीनी स्तर से दिखाई दे रही है। उप-मंडलीय अस्पताल खन्ना के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनिंदर सिंह भसीन कहते हैं, “स्वास्थ्य सेवा किसी विशेष अधिकार की तरह नहीं होनी चाहिए। पहले कवरेज सीमित थी, लेकिन अब हर निवासी को शामिल किया गया है।” वे आगे बताते हैं, “हाल के महीनों में हमने 200 से अधिक गॉलब्लैडर (पित्ते की) सर्जरी की हैं। आम तौर पर इसकी लागत 40,000 से ₹80,000 रुपये होती है, लेकिन मरीजों को इस योजना के अंतर्गत कोई भुगतान नहीं करना पड़ा।”

वे कहते हैं, “घुटने और कूल्हे की रिप्लेसमेंट, जिनकी लागत 1 लाख रुपये से अधिक है, अब रोजमर्रा के आधार पर मुफ्त हो रही हैं। हम हर रोज लगभग 10 सर्जरी करते हैं, वह भी सभी कैशलेस।”

आपातकालीन देखभाल के बारे में डॉ. भसीन बताते हैं, “एस-टी एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्कशन (एसटीईएमआई) हार्ट-अटैक में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। टेनेक्टेप्लाज़ नाम की थ्रोम्बोलिटिक दवा (खून के थक्कों को घोलने वाली), जो हार्ट-अटैक के दौरान खून के थक्कों को तेजी से घोलने के लिए उपयोग की जाती है, से हम खून का प्रवाह जल्दी बहाल करते हैं और अब तक हमने करीब 100 मरीजों की जान बचाई है।”

बरनाला के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. करन चोपड़ा भी इसी तरह के बदलाव की पुष्टि करते हुए कहते हैं, “पहले मरीज महीनों तक सर्जरी टालते थे और अब वे तुरंत इलाज के लिए आ रहे हैं। हर सर्जरी के पीछे लोगों को 1-1.5 लाख रुपये की बचत हो रही है।”

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस योजना के उद्देश्य के बारे में बात करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा मरीज की भुगतान क्षमता पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत हर परिवार को वार्षिक 10 लाख तक का कवर मिल रहा है। हमारा उद्देश्य है कि बिना किसी आर्थिक बोझ के हर घर-परिवार तक मानक इलाज पहुंचे।

भगवंत मान सरकार केवल स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार नहीं कर रही, बल्कि नागरिकों और प्रणाली के बीच संबंधों को भी पुनर्परिभाषित कर रही है। आर्थिक बाधाओं को दूर करके यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इलाज से जुड़े फैसले खर्च के आधार पर नहीं, बल्कि आवश्यकता के आधार पर लिए जाएं। पंजाब भर के डॉक्टरों का कहना है कि सबसे बड़ा बदलाव मनोवैज्ञानिक स्तर पर है—डर में स्पष्ट रूप से कमी आई है और अब परिवार हालात खराब होने तक इंतजार करने की बजाय बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज लेने के लिए आगे आ रहे हैं।

यह वह प्रशासन है जो सीधे लोगों के जीवन में बड़े और सुधारात्मक बदलाव ला रहा है। यह वह सुधार है जो मान-सम्मान को पुनः स्थापित करता है; और यह भगवंत मान सरकार है, जो स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष अधिकार नहीं, बल्कि एक अधिकार के रूप में सुनिश्चित कर रही है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

National

न्याय और आत्म-सम्मान के लिए सब कुछ कुर्बान करने को तैयार रहना चाहिए, अरविंद केजरीवाल ने एक मिसाल कायम की है: CM भगवंत सिंह मान

Published

on

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब की सीनियर लीडरशिप ने पार्टी के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल के जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की कोर्ट में पेश न होने के फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। पार्टी ने इसे सच्चाई, आत्म-सम्मान और गांधीवादी सत्याग्रह की फिलॉसफी में एक सैद्धांतिक कदम बताया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘X’ पर लिखा, “अरविंद केजरीवाल ने साबित कर दिया है कि न्याय और आत्म-सम्मान के लिए इंसान को सब कुछ कुर्बान करने के लिए तैयार रहना चाहिए। जब ​​न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो जनता का भरोसा डगमगा जाता है। हम सब चट्टान की तरह उनके साथ खड़े हैं।”

इस बीच, आप पंजाब के प्रधान अमन अरोड़ा ने कहा, “जब न्याय पर राजनीतिक साया पड़ता है, तो सच्चाई और निष्पक्षता दोनों को नुकसान होता है। भाजपा और उसके वैचारिक ताने-बाने से जुड़े मामलों में निष्पक्षता पर शक होना स्वाभाविक है।”

अरविंद केजरीवाल के फैसले का ज़िक्र करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा, “सत्याग्रह का रास्ता अपनाने का उनका फैसला महात्मा गांधी से प्रेरित एक शांतिपूर्ण लेकिन असरदार विरोध को दिखाता है। जनता का विश्वास वापस लाने के लिए न्यायपालिका को इन उठाई जा रही इन चिंताओं का नोटिस लेना चाहिए।

दूसरी ओर, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “यह कदम बेमिसाल है। आज़ादी के बाद शायद यह पहली बार है जब किसी नेता ने सिस्टम से जुड़ी चिंताओं को सामने लाने के लिए ऐसा रास्ता चुना है। अरविंद केजरीवाल का फैसला एक सैद्धांतिक स्टैंड है, जिसका मकसद न्याय में भरोसा बनाए रखना और यह पक्का करना है कि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे।”

बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा, “न्याय प्रणाली की क्रेडिबिलिटी न केवल निष्पक्षता पर बल्कि उस निष्पक्षता की पारदर्शिता पर भी निर्भर करती है। जब कार्रवाई की निष्पक्षता पर जनता के सवाल उठते हैं, तो ऐसा स्टैंड लेना ज़रूरी हो जाता है जो सिस्टम की गरिमा की रक्षा करे।”

इस बीच, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। यही लीगल सिस्टम की नींव है। जब इस बेसिक स्टैंडर्ड पर भी शक हो, तो पीछे हटना कमजोरी नहीं बल्कि अंतरात्मा की आवाज है।” हरजोत सिंह बैंस ने भी अरविंद केजरीवाल के इस स्टैंड को सलाम किया।

कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह, लाल चंद कटारूचक, हरदीप सिंह मुंडियां और हरभजन सिंह ईटीओ ने भी ऐसे ही विचार प्रकट करते हुए  केजरीवाल के साथ एकजुटता दिखाई और सच्चाई और न्याय की लड़ाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

आप पंजाब के नेताओं ने मिलकर कहा कि यह फैसला न्यायपालिका के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके ऊंचे स्टैंडर्ड बनाए रखने की अपील है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को अपने पूरे समर्थन का भरोसा दिलाया और कहा कि पार्टी पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानून के राज के लिए खड़ी रहेगी।

Continue Reading

National

1 मई से पंजाब में कम होंगे बिजली कट, मंत्री संजीव अरोड़ा का बड़ा ऐलान

Published

on

पंजाब में बढ़ती गर्मी और लगातार लग रहे बिजली कटों के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के बिजली मंत्री Sanjeev Arora ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि 1 मई से पूरे राज्य में बिजली सप्लाई काफी हद तक सामान्य हो जाएगी और कटौती में भारी कमी आएगी।

मंत्री ने बताया कि इस साल गर्मी समय से पहले और अधिक तीव्र होने के कारण अप्रैल महीने में ही बिजली की मांग अचानक बढ़ गई। इसी वजह से कुछ इलाकों में बिजली कट लगाने पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर भारत में इस तरह का दबाव देखा जा रहा है।

संजेव अरोड़ा ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए विभाग ने ग्रिड अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस से जुड़े कई काम फिलहाल रोक दिए हैं, ताकि लोगों को बिना रुकावट बिजली सप्लाई दी जा सके। इसके अलावा कुछ स्थानों पर गेहूं की फसल को आग से बचाने के लिए सुरक्षा के तौर पर अस्थायी कट भी लगाए गए।

उन्होंने बताया कि पंजाब में बिजली ढांचे को मजबूत बनाने के लिए करीब 6000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह काम 15 मई तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता लगातार बिजली आपूर्ति बनाए रखने को दी जा रही है।

मंत्री ने भरोसा दिलाया कि 1 मई से बिजली की कमी में बड़ी गिरावट आएगी और लोगों को लगातार सप्लाई देने की पूरी कोशिश की जाएगी। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिजली का संयम से इस्तेमाल करें और इस दौरान सरकार का सहयोग करें, ताकि स्थिति जल्द सामान्य हो सके।

Continue Reading

Punjab

निलंबित DIG भुल्लर पर ईडी का बड़ा एक्शन, पंजाब और चंडीगढ़ में 11 ठिकानों पर छापेमारी

Published

on

पंजाब के निलंबित डीआईजी Harcharan Singh Bhullar पर शिकंजा कसते हुए Enforcement Directorate (ईडी) ने सोमवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। ईडी की टीमों ने चंडीगढ़ और पंजाब के विभिन्न जिलों में भुल्लर और उनके सहयोगियों से जुड़े 11 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।

यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act 2002 (PMLA) के तहत की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, यह छापेमारी Central Bureau of Investigation (सीबीआई) और एसीबी चंडीगढ़ द्वारा दर्ज प्रेडिकेट केस के आधार पर की गई है।

आरोप है कि एक आपराधिक मामले के निपटारे के लिए बिचौलिये के जरिए अवैध रिश्वत की मांग की गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि भुल्लर के पास उनकी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति हो सकती है। इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच तेज कर दी है।

ईडी की टीमों ने चंडीगढ़ में 2, लुधियाना में 5, पटियाला में 2, नाभा में 1 और जालंधर में 1 स्थान पर छापेमारी की। ये सभी ठिकाने भुल्लर, कथित बिचौलिये कृष्णु शारदा और उनके करीबी सहयोगियों के बताए जा रहे हैं। साथ ही कुछ संदिग्ध बेनामी संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान ईडी अधिकारी दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय साक्ष्यों की गहन जांच कर रहे हैं। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पैसों के लेन-देन का पता लगाना, बेनामी संपत्तियों की पहचान करना और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका को उजागर करना है।

इस कार्रवाई के बाद मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

Continue Reading

Trending