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पंजाब के औद्योगिक विकास को गति देने और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिए CM भगवंत सिंह मान नीदरलैंड के दौरे पर
राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति देने के लिए पंजाब सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, अलॉयज एंड स्टील्स, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी समेत प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तथा निवेश आकर्षित करने के लिए आज नीदरलैंड के दौरे पर रवाना हो गए हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारा विजन पूरी तरह स्पष्ट है, जो नीति स्थिरता, तेजी से फैसले लेने और निवेशकों के समय व भरोसे का सम्मान करने वाली शासन व्यवस्था प्रदान करके पंजाब को विश्व स्तर पर उद्योग के लिए प्राथमिकता वाला स्थान बनाने पर केंद्रित है।
यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नीदरलैंड भारत के लिए सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक है और कई डच कंपनियां पहले से ही पंजाब में अपना कारोबार चला रही हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले अक्टूबर-2023 में विविधा इंडस्ट्रियल पार्क, राजपुरा में डी ह्यूस फैक्टरी का शिलान्यास किया था। इसी प्रकार आलू की फसल के लिए इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहले ही राज्य में सफलतापूर्वक काम कर रहा है, जो पंजाब और नीदरलैंड के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।
इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री राज्य के औद्योगिक विकास को और गति देने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी पर जोर देंगे। वे पंजाब की रणनीतिक स्थिति, एनसीआर और प्रमुख बंदरगाहों से निर्बाध संपर्क, मजबूत औद्योगिक क्लस्टर, गुणवत्तापूर्ण निर्बाध बिजली आपूर्ति, कुशल कार्यबल और प्रगतिशील नीति ढांचे को उजागर करके पंजाब को उत्तरी भारत के पसंदीदा निवेश स्थल के रूप में भी प्रस्तुत करेंगे।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल पंजाब सरकार द्वारा लागू किए गए प्रमुख प्रशासनिक और नियामक सुधारों को पेश करेगा, जिसमें 173 सरकार से कारोबार सेवाएं, ऑटो-डीम्ड मंजूरियां, पैन-आधारित व्यापारिक पहचान, पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट में संशोधन और फास्टट्रैक पंजाब सिंगल-विंडो सिस्टम शामिल हैं।
इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य श्रृंखलाबद्ध रोड शो, वन-टू-वन बिजनेस मीटिंग्स और बड़ी ग्लोबल कॉर्पोरेट कंपनियों व संस्थाओं के साथ चर्चाओं के माध्यम से पंजाब को यूरोपीय देशों के लिए निवेश के आकर्षक गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करना और पंजाब में नया निवेश लाना है।
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7 साल बाद SAFF चैंपियन बना भारत, PM मोदी ने दी बधाई
भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने 7 साल बाद SAFF महिला चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को 3-1 से हराकर रिकॉर्ड छठी बार यह टूर्नामेंट जीता। यह मैच गोवा के मडगांव स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेला गया।
भारत की ओर से पियारी जाखसा, सनफिदा नोंगरूम और लिंडा कोम सेत्रो ने एक-एक गोल किया, जबकि बांग्लादेश के लिए एकमात्र गोल रितु पोर्ना ने किया। पियारी जाखसा ने 42वें मिनट में भारत को बढ़त दिलाई, लेकिन पहले हाफ के इंजरी टाइम में बांग्लादेश ने बराबरी कर ली। दूसरे हाफ में सनफिदा नोंगरूम के शानदार हेडर और 82वें मिनट में लिंडा कोम सेत्रो के गोल ने भारत की जीत सुनिश्चित कर दी।
पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। टीम ने अपने सभी चार मुकाबले जीते, 18 गोल किए और सिर्फ एक गोल ही खाया। इस जीत के साथ मौजूदा चैंपियन बांग्लादेश की लगातार तीसरी बार खिताब जीतने की उम्मीद भी टूट गई।
इस अवसर पर भारतीय टीम की अनुभवी खिलाड़ी डांगमेई ग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कह दिया। उन्होंने वर्ष 2012 में भारत के लिए पदार्पण किया था और 95 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के बाद अपने करियर का समापन एक और SAFF खिताब के साथ किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय महिला टीम को इस ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है और यह उपलब्धि देश की युवा खिलाड़ियों को फुटबॉल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। प्रधानमंत्री ने टीम के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
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RBI का बड़ा फैसला! रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, EMI में नहीं होगा इजाफा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने पॉलिसी रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर यथावत रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 3 से 5 जून तक चली MPC बैठक के बाद इसकी घोषणा की।
RBI के इस फैसले से होम लोन, कार लोन और अन्य रेपो रेट से जुड़े कर्जों की EMI में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो रेट को स्थिर रखना कर्ज लेने वालों के लिए राहत की खबर है।
RBI गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। सप्लाई चेन में रुकावटें, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर विकास दर और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है।
इसके साथ ही RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर के अनुमान में भी कटौती की है। पहले 6.9 फीसदी रखे गए अनुमान को घटाकर अब 6.6 फीसदी कर दिया गया है।
केंद्रीय बैंक के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में GDP वृद्धि दर 6.6 फीसदी, दूसरी तिमाही में 6.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है।
RBI ने यह भी चिंता जताई है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसका असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग तथा खपत पर पड़ सकता है।
हालांकि रेपो रेट को स्थिर रखने से आम लोगों को तत्काल राहत मिली है, लेकिन वैश्विक आर्थिक चुनौतियां और GDP वृद्धि दर के घटाए गए अनुमान आने वाले समय के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रहे हैं।
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होर्मुज संकट के बीच तेल कंपनियों की चेतावनी, कच्चे तेल की कीमतों में आ सकता है बड़ा उछाल
दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों और वित्तीय संस्थानों ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जारी संकट लंबा खिंचता है तो आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल योग्य तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं, जिससे ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
अमेरिकी निवेश बैंक जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत में दुनिया के पास करीब 8.4 अरब बैरल तेल का भंडार था, लेकिन इसमें से केवल 0.8 अरब बैरल ही तत्काल इस्तेमाल के लिए उपलब्ध था। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर होर्मुज मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो सितंबर तक कई देशों के वाणिज्यिक तेल भंडार खतरनाक स्तर तक नीचे पहुंच सकते हैं।
इस दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा अतिरिक्त तेल आपूर्ति, रणनीतिक भंडारों के इस्तेमाल और अन्य स्रोतों से बाजार में आई सप्लाई के कारण कीमतों पर तुरंत असर नहीं पड़ा।
वहीं अमेरिकी तेल कंपनी शेवरॉन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक वर्थ ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ हफ्तों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए रखे गए अतिरिक्त तेल भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं और बाजार की संकट झेलने की क्षमता अब पहले से काफी कम हो चुकी है।
माइक वर्थ के मुताबिक जून और खासतौर पर जुलाई महीने में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मध्य-पूर्व का संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और कई देशों में आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।
इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी ADNOC के प्रमुख सुल्तान अल-जाबेर ने कहा है कि भले ही संघर्ष खत्म हो जाए, फिर भी होर्मुज मार्ग से तेल की सामान्य आपूर्ति बहाल होने में कई महीने लग सकते हैं। उनका अनुमान है कि पूरी तरह सामान्य स्थिति 2027 से पहले लौटना मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश अपने रणनीतिक तेल भंडार दोबारा भरना शुरू करते हैं तो वैश्विक बाजार में मांग और बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। ऐसे में आने वाले महीने वैश्विक तेल बाजार और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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