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‘सात हत्याओं के आरोपी को बना दिया मुख्यमंत्री’, CM मान के सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) को प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर चल रही ईडी की छापामारी को लेकर केंद्र की बीजेपी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हमला बोला।

इतना ही नहीं, अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मान ने बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बिहार सीएम पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। आइए जानते हैं उन्होंने बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर क्या कुछ कहा।

बीजेपी में जाते ही दागी दूध के धुले हो जाते हैं: CM मान

दरअसल, मुख्यमंत्री भगवंत मान शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे थे कि सरकार केवल विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करती है। ताकि विपक्षी नेता डरकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाएं।

उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं पर कितने भी आरोप लग जाएं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी में जाते ही हर नेता वाशिंग मशीन में से निकलकर दूध का धुला हो जाता है और उसके सारे दाग मिट जाते हैं।

जंगलराज को लेकर बीजेपी पर किया पलटवार

इसके बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, ‘इन्होंने (बीजेपी) अभी बिहार में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया। जिन पर 7 लोगों के हत्या का आरोप है। जो जेल भी गए हैं और तो और अपनी उम्र भी गलत बताई है। तीन बार अपनी डेट ऑफ बर्थ चेंज की है। कभी सम्राट चौधरी नाबालिग बन जाते हैं तो कभी बालक बन जाते हैं।’

सीएम मान ने आगे कहा, ‘बीजेपी हमेशा जंगलराज की बात करती है, तो अब बिहार में कौन सा राज आ गया है? क्या यह जंगलराज अच्छा है?’ उन्होंने कहा कि बीजेपी में जाने के बाद दाग अच्छे हो जाते हैं।

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London की संसद में बिहार के डॉक्टर का सम्मान, होम्योपैथी में योगदान को मिला अंतरराष्ट्रीय पहचान

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बिहार के गया जिले के लिए गर्व की बात सामने आई है। फतेहपुर ब्लॉक के प्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक Dr. Raghvendra Kumar Rakesh को लंदन की British Parliament में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न सिर्फ गया बल्कि पूरे बिहार के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।


अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला सम्मान

यह सम्मान ‘Holistic Medicine Conference 2026’ के दौरान दिया गया, जो 10 से 13 अप्रैल 2026 तक लंदन में आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में दुनिया भर से स्वास्थ्य विशेषज्ञ, सांसद और मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।


 विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रण

डॉ. राघवेंद्र कुमार राकेश को इस प्रतिष्ठित मंच पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्हें होम्योपैथी और होलिस्टिक मेडिसिन के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया, जो उनके कार्य की वैश्विक स्तर पर सराहना को दर्शाता है।


 किन संस्थाओं ने किया आयोजन

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 1928 Institute और India All-Party Parliamentary Group के संयुक्त सहयोग से किया गया। सम्मेलन के दौरान आधुनिक और वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों के भविष्य पर विस्तृत चर्चा हुई।


 बिहार में खुशी की लहर

डॉ. राकेश की इस उपलब्धि से स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है। मेडिकल जगत में भी उनकी खूब सराहना हो रही है। उन्हें देश-विदेश से लगातार बधाइयाँ मिल रही हैं। उनकी यह सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

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संजीव अरोड़ा के घर ED की रेड पर भड़के सीएम भगवंत मान, कहा- हम डरने वाले नहीं हैं

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पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा और सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहली प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि हम ईडी से डरने नहीं वाले हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रेस कांफ्रेंस में ED की छापेमारी पर कहा कि बीजेपी से वह कहना चाहते हैं कि 2027 के चुनाव की तैयारी करनी है तो जनता के बीच जाओ न कि ED और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल विरोधी नेताओं के खिलाफ करो. मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता इससे डरने वाले नहीं हैं.

सीएम मान ने कहा कि हमारे देश को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है. यहां लोग अपनी सरकार चुनते हैं. पिछले कुछ समय से लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है. जहां भाजपा की सरकारें नही है वहां केंद्र सरकार ग्रांट रोक देती है. आम आदमी पार्टी के साथ तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है क्योंकि यह पार्टी कुछ ही समय में नेशनल पार्टी बन गई. पिछले कुछ दिनों से लोकतंत्र का गला धीरे-धीरे करके दबाया जा रहा है.

ED, सीबीआई, इलेक्शन कमीशन के माध्यम से जीत रही बीजेपी- मान

सीएम ने कहा कि आम आदमी पार्टी सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली पार्टी है इससे डर कर बीजेपी पहले भी हमारे नेताओं को डराने और धमकाने की कोशिश की गई. बीजेपी इलेक्शन अपने दम पर नहीं जीती ये ED, सीबीआई, इलेक्शन कमीशन के माध्यम से जीत रही है.

उन्होंने लोकतंत्र की हत्या हो रही है हम इसकी निंदा करते है. ये कारवाई सिर्फ और सिर्फ विपक्ष के नेता पर होती है  ये डेमोक्रेसी नहीं डिक्टेटरशिप है.

संजीव अरोड़ा पर छापे को लेकर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता के यहाँ तीन दिन में ये दूसरी ED की रेड है. केजरीवाल ने पूछा कि क्या प्रधान मंत्री जी बतायेंगे कि अभी तक “आप” नेताओं के यहाँ जो इतनी सारी अनगिनत रेड की हैं, उनमे कितना काला पैसा मिला? एक रुपया भी मिला? पूरा देश देख रहा है कि आप केवल सत्ता के लिए कितनी ओछी राजनीति कर रहे हैं.

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केजरीवाल की एफिडेविट में उठाए गए प्रमुख तथ्यों में से किसी पर भी CBI को आपत्ति नहीं: आप

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तथाकथित शराब नीति मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा अपनी रिक्यूजल अर्जी के तहत दाखिल किए गए नए हलफनामे पर दिल्ली हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अपने जवाब में, सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए किसी भी प्रमुख तथ्य का खंडन नहीं किया है, फिर भी उसका दावा है कि इसमें हितों का कोई टकराव नहीं है।

अरविंद केजरीवाल ने इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष पेश होकर एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया था, जिसमें बताया गया था कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं। हलफनामे में यह भी कहा गया था कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई की तरफ से पेश होते हैं, उन्हें ऐसे मामले सौंपते हैं जिनके लिए उन्हें फीस मिलती है। इसमें आगे कहा गया कि 2022 में पैनल में शामिल होने के बाद से बेटे को 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए गए हैं, जो एक युवा वकील के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है और पैनल में शामिल होना और मामलों का यह आवंटन माननीय न्यायाधीश के हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल के दौरान ही हुआ है। हलफनामे में कहा गया है कि ये तथ्य किसी भी वादी के मन में पक्षपात की उचित आशंका पैदा करते हैं।

अपने जवाब में सीबीआई ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं। उसने इस बात का भी खंडन नहीं किया है कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई के लिए पेश होते हैं, उन्हें फीस वाले मामले सौंपते हैं। सीबीआई ने आगे इस बात से भी इनकार नहीं किया है कि 2022 में पैनल में शामिल होने के बाद से बेटे को 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए गए हैं, जो एक युवा वकील के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है। उसने इस बात का भी खंडन नहीं किया है कि पैनल में यह नियुक्ति और मुकदमों का यह आवंटन माननीय न्यायाधीश के हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल के दौरान ही हुआ है। अगर यह हितों का टकराव नहीं है, तो फिर क्या है?

सीबीआई का कहना है कि यह हितों का टकराव नहीं है। क्या देश में इसी तरह से काम होता है? ये कोई कोरी चिंताएं नहीं हैं। ये रिकॉर्ड पर मौजूद स्पष्ट तथ्य हैं जो निष्पक्षता और संस्थागत ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

सीबीआई ने आगे यह तर्क दिया है कि इस लॉजिक को स्वीकार करने का मतलब यह होगा कि जिन जजों के रिश्तेदार सरकारों या पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) के पैनल में शामिल हैं, उन्हें ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। यह ध्यान भटकाने की कोशिश है। मुद्दा पैनल में शामिल होना नहीं है। मुद्दा यह है कि मामले में पेश हो रहे वही सॉलिसिटर जनरल जज के निकटतम परिवार को हजारों फीस वाले मामले आवंटित कर रहे हैं।

यह सभी जजों के बारे में नहीं है। यह विशिष्ट और निर्विवाद तथ्यों वाले एक मामले के बारे में है। जब केस में बहस करने वाले एक ही कानून अधिकारी द्वारा 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए जाते हैं, तो यह कोई रूटीन काम नहीं है। इसे सामान्य कहना गंभीर सवाल खड़े करता है।

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