Punjab
कोर्ट में हार रहे हैं नशा तस्कर, भारत में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में Punjab में सजा दर सबसे अधिक
पंजाब का ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ (नशीले पदार्थों के खिलाफ युद्ध) अभियान अब सिर्फ गिरफ्तारियों से ही नहीं, बल्कि सजा दिलाने की दर में आई जबरदस्त तेजी से पहचाना जा रहा है। ये सजाएं कोर्ट में भी टिकी हुई हैं, जो नशीले पदार्थों के खिलाफ राज्य की रणनीति में एक निर्णायक बदलाव का संकेत है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में भगवंत मान सरकार के प्रमुख अभियान ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ के समर्थन से, कानून लागू करने वाली एजेंसियां अब ऐसे कानूनी रूप से मजबूत मामले बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जो यह सुनिश्चित करें कि तस्कर न केवल पकड़े जाएं, बल्कि उन्हें सजा भी मिले।
पुलिस अधिकारी नशीले पदार्थों और साइकोट्रोपिक पदार्थों (NDPS) अधिनियम के तहत मामलों में पंजाब की 88% की शानदार सजा दिलाने की दर का श्रेय पुलिसिंग में आए एक व्यवस्थित बदलाव को देते हैं; यह दर पूरे देश में सबसे अधिक है। इस बदलाव में अभियोजन-नेतृत्व वाली जांच, वैज्ञानिक सबूत इकट्ठा करना, नशीले पदार्थों के नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखना और तकनीक-आधारित खुफिया जानकारी इकट्ठा करना शामिल है।
सजा दर में बढ़ोतरी
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2022 में कोर्ट द्वारा निपटाए गए 4812 NDPS मामलों में से कुल 3870 मामलों में सजा दिलाई गई, जो 80% की सजा दर को दर्शाता है। 2023 में यह दर बढ़कर 81% हो गई, जिसमें 6976 मामलों में से 5635 मामलों में सजा मिली; और 2024 में यह और बढ़कर 85% हो गई, जिसमें 7281 मामलों में से 6219 मामलों में सजा मिली। 2025 में, सज़ा दर 88% तक पहुंच गई, जिसमें 7373 मामलों में से 6488 मामलों में सजा मिली। 2026 में, अब तक निपटाए गए 1831 NDPS मामलों में से 1634 मामलों में पहले ही सजा दिलाई जा चुकी है, जिससे सजा दर बढ़कर 89% हो गई है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है।
ये नतीजे ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान की वजह से मिल रहे हैं। इस अभियान ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों को एक मजबूत नीतिगत दिशा और संस्थागत समर्थन प्रदान किया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ प्रयास केवल जब्ती और गिरफ्तारियों तक ही सीमित न रहें, बल्कि एक तय समय-सीमा के भीतर सजा दिलाने तक आगे बढ़ें।
“हमारा मकसद सिर्फ तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं है”
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि इस सफलता की कुंजी पुलिसिंग की सोच में आए एक बुनियादी बदलाव में निहित है। “हमारा मकसद सिर्फ तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं है, बल्कि यह भी पक्का करना है कि उन्हें जेल भी हो। हमारी जांच अब सबसे ऊंचे कानूनी मानकों के हिसाब से की जाती है, ताकि ट्रायल के दौरान केस मज़बूत रहें,” पंजाब पुलिस के एक सीनियर अफसर ने कहा। उन्होंने आगे कहा, “नशीले पदार्थों को जब्त करने से लेकर दस्तावेज बनाने और फॉरेंसिक जांच तक, हर कदम NDPS के नियमों का सख्ती से पालन करते हुए उठाया जाता है, ताकि तस्कर सिर्फ तकनीकी कमियों के आधार पर बच न निकलें।”
अफसरों ने बताया कि सजा दिलाने की ऊंची दर सिस्टम से जुड़े कई सुधारों का नतीजा है। इनमें व्यवस्थित और क्रमबद्ध ट्रेनिंग प्रोग्राम, जांच करने वाले अफसरों को हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में अपनाए जाने वाले सबसे अच्छे तरीकों से रूबरू कराना, 60-पॉइंट वाली जांच चेकलिस्ट के साथ एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करना, और अदालतों में केसों को असरदार तरीके से संभालने के लिए ट्रायल स्पेशल अफसरों की नियुक्ति शामिल है।
जांच की गुणवत्ता में सुधार
पटियाला में राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के साथ भी एक अहम संस्थागत सहयोग स्थापित किया गया है। यहां सभी जांच करने वाले अफसरों के लिए छह दिन की सर्टिफिकेशन ट्रेनिंग जरूरी है। यूनिवर्सिटी में अब तक 400 से अधिक IOs (जांच अधिकारीयों ) को ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जिससे जांच की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
यह देखते हुए कि NDPS एक्ट भारत के सबसे सख्त आपराधिक कानूनों में से एक है, जिसमें तलाशी, जब्ती और सबूतों को संभालने के लिए सख्त प्रक्रियागत सुरक्षा उपाय हैं, अफसरों ने जोर देकर कहा कि छोटी-सी भी चूक केस को कमजोर कर सकती है। इसलिए, पंजाब पुलिस ने जांच करने वालों को वैज्ञानिक जांच के तरीकों और सबूतों की सुरक्षा (चेन-ऑफ-कस्टडी) के सख्त नियमों में ट्रेनिंग देने पर काफी निवेश किया है, ताकि यह पक्का हो सके कि सबूत कानूनी तौर पर सही रहें।
‘इंटेलिजेंस-आधारित पुलिसिंग’ को अपनाना सजा दर में सुधार का एक और बड़ा कारण
सजा दिलाने की दर में सुधार का एक और बड़ा कारण ‘इंटेलिजेंस-आधारित पुलिसिंग’ को अपनाना रहा है, जिसे टेक्नोलॉजी और नागरिकों की भागीदारी का समर्थन मिला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और गुमनाम सूचना देने वाले सिस्टम के ज़रिए, नागरिकों को नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ी गतिविधियों के बारे में जानकारी साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे हजारों ऐसी जानकारियां मिली हैं जिन पर कार्रवाई की जा सकती है, और संगठित नशीले पदार्थों के नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिली है।
सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्तियों किया गया फ्रीज
अधिकारियों ने नशीले पदार्थों की तस्करी के आर्थिक आधारों को निशाना बनाते हुए वित्तीय जांच भी तेज कर दी है। नशीले पदार्थों से कमाए गए पैसे से खरीदी गई संपत्तियों को ज़ब्त करने और फ़्रीज करने के लिए कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल तेजी से किया जा रहा है। हाल के सालों में, सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्तियों की पहचान करके उन्हें फ़्रीज किया गया है।
‘असली रोक तो सजा मिलने की निश्चितता है’
हालांकि हर साल हजारों NDPS केस दर्ज होते हैं और हज़ारों तस्कर गिरफ्तार किए जाते हैं, अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि सिर्फ कार्रवाई के आंकड़े ही सफलता की परिभाषा नहीं हैं। अधिकारी ने कहा, “असली रोक तो सजा मिलने की निश्चितता है। जब तस्करों को यह एहसास होता है कि गिरफ्तारी के बाद लगभग निश्चित रूप से उन्हें सजा होगी और उनकी संपत्ति जब्त हो जाएगी, तो इससे एक कड़ा संदेश जाता है कि नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध बिना सज़ा के नहीं छूटेंगे।”
अधिकारियों ने आगे बताया कि यह व्यापक इकोसिस्टम वाला नजरिया, जिसमें कार्रवाई, वित्तीय जांच, सामुदायिक जानकारी और पुनर्वास को एक साथ जोड़ा गया है, नशीले पदार्थों की समस्या के सप्लाई और डिमांड, दोनों ही पहलुओं को तोड़ने में मदद कर रहा है। जांचकर्ताओं, सरकारी वकीलों और फोरेंसिक प्रणालियों को एक समन्वित ढांचे में लाने से, अदालतों में पेश किए जाने वाले केसों की गुणवत्ता में काफ़ी सुधार हुआ है।
“हर केस कानूनी रूप से मजबूत होना चाहिए, सबूतों पर आधारित होना चाहिए”
अधिकारी ने आगे कहा, “हमारा नजरिया सीधा-सा है: हर केस कानूनी रूप से मजबूत होना चाहिए, सबूतों पर आधारित होना चाहिए और ट्रायल की कसौटी पर खरा उतरने लायक होना चाहिए। सजा मिलने की दर, नशीले पदार्थों के खिलाफ इस लड़ाई में जांचकर्ताओं और सरकारी वकीलों की कड़ी मेहनत और नागरिकों के सहयोग को दर्शाती है।”
चूंकि पंजाब, भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के मुख्य रास्तों में से एक पर स्थित है, इसलिए अधिकारियों का मानना है कि यह विकसित होती रणनीति, संगठित नशीले पदार्थों के नेटवर्क से निपटने वाले दूसरे राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकती है। अधिकारी ने कहा, “संदेश साफ है: नशीले पदार्थों के तस्करों को न सिर्फ़ गिरफ्तार किया जाएगा, बल्कि उन्हें निश्चित रूप से सज़ा मिलेगी और उनकी अवैध संपत्ति भी जब्त हो जाएगी। यही सबसे मजबूत रोक है जो हम लगा सकते हैं।”
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अश्वनी शर्मा के गृह क्षेत्र में भाजपा को झटका:पठानकोट ब्लॉक समिति पर आम आदमी पार्टी का कब्जा, BJP की गीता ने मारी पलटी
भाजपा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष और मौजूदा विधायक अश्वनी शर्मा के गृह क्षेत्र पठानकोट में भाजपा को करारा झटका लगा है। यहां पठानकोट की ब्लाक समिति मैंबर गीता ने पलटी मारते हुए आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया और आप ने बतौर ईनाम उन्हें पठानकोट ब्लाक समिति चेयरपर्सन बना दिया
इसी के साथ जिला की 6 में से 5 ब्लॉक समितियों पर आप का कब्जा हो चुका है। अब बस सुजानपुर में पेंच फंसा है। वहां भाजपा के 8 मेंबर जीते हैं और आप के 7 ही हैं। इसलिए सुजानपुर में चेयरमैन चुनाव की 3 मीटिंगें पोस्टपोन की जा चुकी हैं। सुजानपुर भाजपा की ओर से इसे लेकर नाराजगी जताई जा रही है।
पठानकोट में भी रही असमंजस की स्थिति
इससे पहले पठानकोट ब्लॉक समिति में भी असमंजस की स्थिति थी। क्योंकि यहां भाजपा, कांग्रेस और आप के बराबर 5-5 मेंबर जीते थे। लिहाजा आम आदमी पार्टी ने भाजपा की गीता देवी को चेयरमैन बनाने का वादा कर आप ज्वाइन कराई और हलका इंचार्ज विभूति शर्मा और अमनशेर सिंह कलसी की मौजूदगी में भाजपा से आप में शामिल हुई गीता देवी को चेयरपर्सन और सोनिया देवी को वाइस चेयरपर्सन चुना गया। चेयरमैन गीता देवी ने कहा कि वे पठानकोट ब्लॉक के विकास के लिए काम करेंगी।
जिला की 6 में से 5 समितियों पर आप काबिज
पठानकोट ब्लॉक समिति में आप की चेयरपर्सन बनने से पठानकोट और भोआ की सभी समितियों पर आप का वर्चस्व हो गया है। कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारूचक्क के भोआ हलके की तीनों समितियों पर आप काबिज हो चुकी है। 18 सदस्यीय घरोटा में आप के पवन कुमार फौजी, 15 सदस्यीय नरोट जैमल सिंह में आप के सोहनलाल तथा 15 सदस्यीय बमियाल समिति के आप मेंबर धर्मपाल चेयरमैन बन चुके हैं। धारकलां ब्लॉक समिति में भाजपा के 7, आप के 7 और कांग्रेस का एक मेंबर चुनाव जीता था। कांग्रेसी मेंबर के सपोर्ट कर देने से यहां भी आप के हलका इंचार्ज ठाकुर अमित सिंह मंटू की पत्नी एकता चौधरी चेयरमैन बन गईं।
सुजानपुर में अभी भी फंसा पेंच
बता दें, सुजानपुर ब्लाक समिति चेयरमैन चुनाव में मामला अभी भी फंसा है। क्योंकि, यहां सबसे अधिक 8 मेंबर भाजपा के जीते हैं और सत्ताधारी आप के 7 हैं। जबकि, कांग्रेस का यहां से एक भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर पाया था। ये हालात तब हैं जब सुजानपुर हलके के एमएलए नरेश पुरी कांग्रेस से हैं। सुजानपुर में आप अभी तक भाजपा का कोई मेंबर तोड़ नहीं पाई है। चेयरमैन के चुनाव के लिए 3 बार मीटिंगें बुलाई गईं और हर बार मीटिंग पोस्टपोन कर प्रशासन द्वारा समय दिया जा रहा है। जिसको लेकर भाजपा ने बीते दिन डीसी ऑफिस पहुंच रोष जताया था।
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जालंधर PNB लूटकांड का चंद घंटों में खुलासा, रिटायर्ड DSP का बेटा निकला मुख्य आरोपी
जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने खुरला किंगरा स्थित पीएनबी बैंक में हुई लूट की वारदात को कुछ ही घंटों में सुलझाते हुए एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित की पहचान से सिमरनजीत सिंह के रूप में हुई है जो रिटायर्ड डीएसपी का बेटा है, जिनकी मौत हो चुकी है।
पिता के मरने के बाद सिमरनजीत नशे वाली हो गया था न। अपने साथियों के साथ मिलकर वह नशा बेचने भी लगा और करने भी लगा। इसी के चलते उसने बैंक लूट की योजना बनाई।
पुलिस ने आरोपित के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किया गया रिवाल्वर, तीन जिंदा कारतूस और लूटी गई नकदी का हिस्सा भी बरामद किया है। यह पिस्टल कहां से आया है और किसका है इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर ने बताया कि 6 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 2:35 बजे दो नकाबपोश युवक बैंक में दाखिल हुए और हथियार के बल पर लूटपाट कर फरार हो गए। बैंक कर्मचारी विक्रम भगत के बयान पर थाना डिवीजन नंबर 7 में केस नंबर 65 दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने सिमरनजीत सिंह उर्फ अमरिक सिंह निवासी ग्रीन मॉडल टाउन, जालंधर को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ पहले भी दो आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी और एनडीपीएस एक्ट के तहत केस शामिल हैं। पुलिस अब उसके फरार साथी की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
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पंजाब को स्थायी डीजीपी जल्द: सरकार ने 14 अफसरों का पैनल यूपीएससी को भेजा, तीन उम्मीदवार होंगे शाॅर्टलिस्ट
पंजाब पुलिस को जल्द ही स्थायी डीजीपी मिल सकता है। पंजाब सरकार ने राज्य में नियमित पुलिस महानिदेशक के पद के लिए तीन उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल संघ लोक सेवा आयोग को भेजा है।
अभी कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव के काफी समय पंजाब पुलिस का नेतृत्व कर रहे हैं।
फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को निर्देश दिए थे कि वे उन राज्यों से स्थायी डीजीपी के लिए पैनल मंगवाए जहां लंबे समय से कार्यवाहक डीजीपी के बूते काम चलाया जा रहा है। इन राज्यों में पंजाब भी शामिल है। यूपीएससी ने पंजाब के गृह विभाग को 10 दिन के भीतर वरिष्ठ आईपीएस अफसरों का पैनल भेजने के निर्देश दिए थे। इस पर कई दिन से मंथन चल रहा था। अंतत: अब सरकार ने इस पैनल में डीजी रैंक के 14 अफसरों का नाम यूपीएससी को भेजा है।
सूची में शामिल हैं ये नाम
सूची में 1992 बैच के IPS अधिकारी गौरव यादव, स्पेशल डीजीपी शरद सत्य चौहान (पंजाब विजिलेंस प्रमुख), स्पेशल डीजीपी (एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स) कुलदीप सिंह और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हरप्रीत सिंह सिद्धू के नाम शामिल हैं।
इसके अलावा, सूत्रों के अनुसार, स्पेशल डीजीपी (सामुदायिक मामले और महिला मामले) गुरप्रीत कौर देव, स्पेशल डीजीपी (पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन) जितेंद्र कुमार जैन, स्पेशल डीजीपी (रेलवे) शशि प्रभा द्विवेदी, स्पेशल डीजीपी (मुख्यालय) सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, स्पेशल डीजीपी पीके सिन्हा, स्पेशल डीजीपी (यातायात और सड़क सुरक्षा) अमरदीप सिंह राय, और स्पेशल डीजीपी (साइबर अपराध) वी. नीरज, सहित अन्य लोग भी इस सूची में शामिल हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले महीने कहा था कि उनकी सरकार एक नियमित डीजीपी के चयन के लिए अधिकारियों का एक पैनल भेजेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
इससे पहले, पंजाब एक नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए पैनल भेजने में हिचकिचा रहा था, जबकि यूपीएससी ने नियमित डीजीपी के चयन के लिए अधिकारियों का पैनल भेजने के लिए कई बार याद दिलाया था। फरवरी में, सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब समेत कुछ राज्यों को एक्टिंग डीजीपी रखने के लिए फटकार लगाई थी।
पंजाब सरकार ने 2023 में पंजाब पुलिस (संशोधन) बिल पास किया था, जो राज्य को एक अलग राज्य-स्तरीय समिति के जरिए डीजीपी नियुक्त करने का अधिकार देता है। हालांकि, इस बिल को अभी राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना बाकी है।
आप सरकार ने जुलाई 2022 में गौरव यादव को एक्टिंग DGP नियुक्त किया था, जब राज्य पुलिस प्रमुख वीके भांवरा को छुट्टी पर भेज दिया गया था। प्रक्रिया के अनुसार, जब कोई राज्य नियमित डीजीपी नियुक्त करने के लिए अधिकारियों की एक सूची भेजता है, तो यूपीएससी की पैनल वाली समिति तीन अधिकारियों का एक पैनल वापस भेजती है, ताकि उनमें से किसी एक को राज्य पुलिस प्रमुख के तौर पर चुना जा सके।
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