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मौसम ने ली करवट: 18-19-20 और 21 मार्च को होगी भारी बारिश और ओलावृष्टि, कई राज्यों में ऑरेंज अलर्ट…

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 मौसम ने अचानक करवट ले ली है। आने वाले कुछ दिन काफी बदलते हुए नजर आ सकते हैं। गर्मी के बीच अब बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू होने वाला है। मौसम विभाग के मुताबिक 18 से 21 मार्च के बीच कई राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है।

इतना ही नहीं, कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है, जिससे किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। इस बदलते मौसम को देखते हुए विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, यानी लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। ऐसे में बाहर निकलने से पहले मौसम का हाल जरूर जान लें, क्योंकि अगले कुछ दिन मौसम अचानक अपना रंग बदल सकता है।

कई राज्यों में बारिश व ओले का ऑरेंज अलर्ट

नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत के हिमालयी रेंज के राज्यों समेत मैदानी क्षेत्रों में अगले पांच दिन तक गरज-चमक के साथ बारिश व ओलावृष्टि और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

आइएमडी ने 18 मार्च को छत्तीसगढ़, 19 मार्च को राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, उत्तराखंड व हिमाचल, 20 मार्च को पश्चिमी राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, पश्चिम बंगाल व ओडिशा में बारिश व ओलावृष्टि को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19-20 मार्च को 70 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज आंधी का अलर्ट जारी किया है।

वहीं पूर्वोत्तर में 18 मार्च को भारी बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में 18 से 21 मार्च तक गरज व तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना रहेगी।

तापमान में मिलेगी राहत

अगले एक सप्ताह तक हवाओं की सक्रियता से देशभर में अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहेगा। उत्तर-पश्चिम भारत में 3-7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आएगी, जिससे लू और भीषण गर्मी से अस्थायी राहत मिलेगी। दिल्ली में अधिकतम तापमान 30-34 डिग्री के आसपास रहेगा। हालांकि 21 मार्च के बाद मौसम साफ होने पर तापमान में फिर बढ़ोतरी हो सकती है।

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पंजाब में सिंचाई क्षेत्र में बड़ा बदलाव: चार साल में तीन गुना बढ़ा बजट, 58 लाख एकड़ तक पहुंचा नहरी पानी

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी सरकार के चार साल के कार्यकाल के दौरान सिंचाई विभाग द्वारा किए गए बड़े कामों की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में सरकार बनने के समय राज्य में नहरी पानी का उपयोग केवल 26.5 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर लगभग 58 लाख एकड़ क्षेत्र तक पहुंच गया है। यह करीब 78 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है, जो राज्य में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इन चार वर्षों में सिंचाई क्षेत्र में लगभग 6,700 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिससे सिंचाई बजट तीन गुना बढ़ गया। इस दौरान 13,938 किलोमीटर नए खाल (नहरें) बनाए गए और 18,000 किलोमीटर से अधिक पुराने ढांचे का पुनरुद्धार किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के 2,444 ऐसे गांव थे, जिन्हें आजादी के बाद भी नहरी पानी नहीं मिला था, लेकिन अब पहली बार इन गांवों तक पानी पहुंचाया गया है।

कांडी क्षेत्र में 1,500 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइनों की बहाली के जरिए 24,000 एकड़ जमीन को सिंचाई से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई नहरें कागजों में तो मौजूद थीं, लेकिन जमीन पर उनका अस्तित्व खत्म हो चुका था। सरकार ने ऐसी नहरों की पहचान कर उन्हें दोबारा चालू किया। उदाहरण के तौर पर, तरनतारन जिले की सरहाली नहर के करीब 22 किलोमीटर हिस्से को पुनर्जीवित किया गया।

उन्होंने दावा किया कि नहरी पानी की आपूर्ति बढ़ने से भूजल के दोहन में कमी आई है। गुरदासपुर के कई ब्लॉकों में भूजल दोहन की दर आधे से अधिक घट गई है, जबकि 57 प्रतिशत से अधिक कुओं में जल स्तर 0 से 4 मीटर तक बढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 वर्षों से लंबित शाहपुर कंडी डैम परियोजना को 3,394.49 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है। इस परियोजना से सिंचाई के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, और 26 नए पर्यटन स्थलों का विकास किया गया है।

राज्य सरकार ने राज्य आपदा राहत कोष के तहत 470 करोड़ रुपये खर्च कर 195 परियोजनाएं पूरी की हैं। बाढ़ और जलभराव की समस्या को कम करने के लिए 3,700 किलोमीटर नालों की सफाई की गई है और नई मशीनरी भी लगाई गई है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान को पानी की आपूर्ति और भुगतान से जुड़े मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि पानी की सप्लाई 1920 में बीकानेर राज्य और बहावलपुर के बीच हुए समझौते के तहत शुरू हुई थी, जो बाद में राजस्थान तक पहुंची। उस समय प्रति एकड़ पानी के उपयोग के लिए शुल्क निर्धारित किया गया था और यह भुगतान 1960 तक जारी रहा।

उन्होंने बताया कि 1960 के बाद यह भुगतान व्यवस्था समाप्त हो गई और न तो राजस्थान और न ही पंजाब ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाया। अब पुराने रिकॉर्ड के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि 1960 से 2026 तक का बकाया लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये बनता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि राजस्थान 1920 के समझौते के तहत पानी प्राप्त कर रहा है, तो उसे उसी अनुसार भुगतान भी करना चाहिए। अन्यथा, इस समझौते की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने संकेत दिए कि इस मुद्दे को अब उच्च स्तर पर उठाया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में राजस्थान फीडर से लगभग 18,000 क्यूसेक पानी की आपूर्ति हो रही है, जबकि इसके बदले कोई वित्तीय मुआवजा नहीं मिल रहा। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि पहले भुगतान किया जाता था, तो अब क्यों नहीं किया जा रहा।

इस बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में पंजाब और राजस्थान के बीच पानी और भुगतान को लेकर मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से उठ सकता है।

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अब राजस्थान से पानी की पेमेंट वसूलेगा पंजाब:CM बोले- 1960 के बाद नहीं दिए 1.44 लाख करोड़

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पंजाब सरकार राजस्थान से वहां को दिए जाने वाले पानी के बदले पैसे वसूलेगी। 1960 से अब तक 1.44 लाख करोड़ बकाया है। इसके लिए हमने राजस्थान सरकार को पत्र भी लिखा है, पत्र में कहा है कि हम आपके साथ इस मुद्दे पर बैठना चाहते हैं। केंद्र सरकार भी इसमें बैठेगी।

यह दावा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। उन्होंने साफ किया है कि अब यह मुद्दा आगे बढेगा। वहीं, उन्होंने बताया कि तरनातरन में 22 किलोमीटर लंबी सरहाली लंबी नहर तलाशी है। यह कई सालों से गायब थी। वहीं, 26 नए रेस्टहाउस शुरू करेंगे। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर हमला करते हुए कहा कि जो पानी के राखे (रक्षक) थे, उन्होंने पानी नहीं संभाला है। वहीं, जो बाणी के राखों ने बाणी को रोल दिया है।

सीएम ने कहा कि 1920 में महाराजा बीकानेर और बहाबलपुर रिसायत के लिए पानी देने का एग्रीमेंट हुआ था। राजस्थान फीडर से पंजाब का 18000 क्यूसिक पानी जाता है। 1960 तक राजस्थान पानी की पेमेंट करता था। लेकिन 1960 में नई संधी आ गई थी। इसके बाद राजस्थान पैसे देने पीछे हट गया और पंजाब वसूली करने से पीछे हो गया।

सीएम केंद्र पर हमलावर

14 तारीख को पंजाब दौरे पर देश के गृहमंत्री अमित शाह मोगा में आए थे। उन्होंने वहां पर रैली को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने पंजाब सरकार पर जुबानी तीर छोड़े थे। उसके बाद से सीएम भी केंद्र सरकार व पीएम पर हमलावर हैं। वह लगातार पीएम को निशाना बना रहे हैं।

विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पास

विधानसभा में इस बार भी केंद्र सरकार की देश में पैदा हुई गैस किल्लत के मुद्दे पर स्पेशल प्रस्ताव लाया गया। इस दौरान केंद्र सरकार की विदेश नीति के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया गया। इसके बाद 16 मार्च को जब सेशन संपन्न होना था, उस दिन आम आदमी पार्टी विधायक व मंत्रियों ने गैस किल्लत के मुद्दे पर सदन के बाहर और अंदर प्रदर्शन किया।

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पंजाब ने स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए ऐतिहासिक मिशन शुरू करने हेतु वर्ल्ड बैंक के साथ 3,500 करोड़ रुपये का समझौता किया: CM भगवंत मान

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पंजाब के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित करते हुए, भगवंत मान सरकार ने ‘पंजाब शिक्षा क्रांति 2.0’ की शुरुआत की है, जिसके तहत अगले छह वर्षों में 3,500 करोड़ रुपये के निवेश से स्कूल शिक्षा में क्रांतिकारी सुधार किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे के सुधार को तेज करना और पंजाब की शिक्षा प्रणाली को विश्व स्तरीय मानकों के अनुरूप बनाना है।

इस मिशन के तहत पंजाब सरकार ने कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए विश्व बैंक के साथ साझेदारी की है। यह साझेदारी राज्य द्वारा पहले से किए गए महत्वपूर्ण शिक्षा सुधारों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता को दर्शाती है।
इस कार्यक्रम के लिए कुल 3,500 करोड़ रुपये में से 2,500 करोड़ रुपये विश्व बैंक द्वारा ऋण सहायता के रूप में और 1,000 करोड़ रुपये पंजाब सरकार द्वारा प्रदान किए जाएंगे, जिससे यह राज्य के इतिहास के सबसे बड़े शिक्षा सुधार निवेशों में से एक बन जाता है।

‘पंजाब शिक्षा क्रांति 2.0’ की शुरुआत पहले चरण की उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए की गई है। पहले चरण के तहत राज्य भर के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल दी गई और पंजाब को राष्ट्रीय शिक्षा रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर पहुंचाया गया।

भारत सरकार द्वारा आयोजित परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 में पंजाब ने केरल को पीछे छोड़ते हुए कक्षा शिक्षण परिणामों में पहला स्थान हासिल किया और देशभर में अग्रणी बनकर उभरा। यह उपलब्धि शिक्षा क्रांति के तहत किए गए बुनियादी सुधारों को दर्शाती है, जिनमें कक्षा शिक्षण को मजबूत करना, बुनियादी ढांचे का उन्नयन और लगभग 20,000 सरकारी स्कूलों में प्रशासन को बेहतर बनाना शामिल है।

पिछले दो वर्षों के दौरान राज्य ने करियर मार्गदर्शन प्रणालियों को मजबूत किया है, विज्ञान और वाणिज्य संकाय तक पहुंच का विस्तार किया है, शिक्षक प्रशिक्षण तंत्र को सुदृढ़ किया है और हजारों संस्थानों में स्कूल बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया है, ताकि सुधार केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर ठोस और मापनीय परिणाम दे सकें।

इन प्रणालीगत सुधारों ने एक मजबूत और विश्वसनीय नींव तैयार की है। ‘पंजाब शिक्षा क्रांति 2.0’ अब इन उपलब्धियों को संस्थागत रूप देगा और पंजाब की शिक्षा प्रणाली को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा प्रणालियों की कतार में खड़ा करेगा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि शिक्षा क्रांति की सफलता ने राज्य के शिक्षा परिदृश्य को नया रूप दिया है। उन्होंने कहा, “पंजाब ने साबित कर दिया है कि सरकारी स्कूल देश का नेतृत्व कर सकते हैं। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 में पहला स्थान इस बदलाव का प्रमाण है। शिक्षा क्रांति 2.0 के साथ हम अब अपनी शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं। विश्व बैंक के साथ सहयोग हमारी पारदर्शिता और विश्वसनीयता को दर्शाता है। यह हर बच्चे के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का अगला कदम है।”

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि शिक्षा क्रांति पहले ही मापनीय परिणाम दे चुकी है और अगला चरण सुधारों के दायरे और गहराई को और विस्तारित करेगा। उन्होंने कहा, “पंजाब शिक्षा क्रांति ने सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल दी है और राज्य को राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचाया है। अब शिक्षा क्रांति 2.0 हमें राष्ट्रीय नेतृत्व से वैश्विक उत्कृष्टता की ओर तेजी से आगे बढ़ाएगी। पंजाब का हर बच्चा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अवसरों का हकदार है और यह मिशन हमें उस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।”

सरकार के अनुसार, 3,500 करोड़ रुपये की लागत वाला यह मिशन परिणाम-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से शिक्षा सुधारों को और गहरा तथा स्थायी बनाएगा। इसके तहत बुनियादी शिक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक बच्चा आवश्यक कौशल प्राप्त कर सके।

इस पहल के तहत विज्ञान और वाणिज्य संकाय तक पहुंच बढ़ाई जाएगी, व्यावसायिक शिक्षा को उन्नत किया जाएगा और विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं बेहतर रोजगार की दिशा में मार्गदर्शन देने के लिए संरचित करियर काउंसलिंग प्रणाली शुरू की जाएगी। साथ ही, एक व्यापक डिजिटल करियर गाइडेंस पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा, जिससे छात्रों को परामर्श, योग्यता मूल्यांकन और बेहतर करियर विकल्प चुनने में सहायता मिलेगी।

इन सुधारों का उद्देश्य शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करना, पेशेवर विकास कार्यक्रमों को आधुनिक बनाना और एक व्यापक स्कूल नेतृत्व ढांचा लागू करना है, ताकि शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों को सशक्त बनाया जा सके। साथ ही, डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली और स्कूल प्रबंधन समितियों को मजबूत कर पारदर्शी एवं जवाबदेह स्कूल प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे सामुदायिक भागीदारी भी बढ़ेगी।

यह मिशन भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचा और प्रणालियां विकसित करेगा। इसके तहत व्यापक सुधार किए जाएंगे ताकि दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित, टिकाऊ और डिजिटल रूप से सक्षम शिक्षण वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

‘पंजाब शिक्षा क्रांति’ द्वारा रखी गई मजबूत नींव को आगे बढ़ाते हुए ‘पंजाब शिक्षा क्रांति 2.0’ अब इस परिवर्तन को और विस्तार देगा और पंजाब की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा। 

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