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वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर स्कूलों पर ₹3,500 करोड़ का निवेश कर रही मान सरकार, ग्लोबल बेंचमार्क बनेगा पंजाब
मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुआई में पंजाब सरकार वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर ₹3,500 करोड़ का निवेश कर रही है। स्कूल ट्रांसफॉर्मेशन मिशन के तहत राज्य के सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहतर करने के लिए काम हो रहा है। यह केवल एक वित्तीय समझौता नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की शिक्षा नीतियों पर वैश्विक संस्थाओं के अटूट भरोसे का प्रतीक है। इतने विशाल स्तर का निवेश यह साफ करता है कि पंजाब की शिक्षा क्रांति अब केवल राज्य या देश तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में आप सरकार नन्हें बच्चों को पढ़ाकर, उनके अनुकूल सुरक्षित पर्यावरण तैयार कर रही है। पंजाब की शिक्षा प्रणाली में आज वो बड़े बदलाव नजर आ रहे हैं, जो पिछले 70 सालों में नहीं दिखे।
सरकारी स्कूलों की हालत सुधरी
पंजाब में स्कूलों में एक बॉउंड्री लाइन तक नहीं थी। बच्चे और उनके माता-पिता डरते थे कि बच्चा सरकारी स्कूल में जाएगा तो उसका भविष्य खराब होगा और प्राइवेट में पढ़ाना आम आदमी के लिए सम्भव नहीं, जिसकी कमाई कम और खर्चे ज्यादा हो। मगर मान सरकार ने स्कूलों की ना केवल दशा बदली बल्कि बहुत से मां-बाप का विश्वास भी जीता! अब प्राइवेट स्कूल वाले भी सरकारी को चुनते हैं। पंजाब की ‘सिख्या क्रांति’ के जरिए विकास, विश्वास और बचत पर जोर दिया जा रहा है। पंजाब के स्कूलों में मां बाप के साथ इंटरैक्शन के लिए मेगा पीटीएम, टीचर्स को फॉरन में ट्रेनिंग, स्मार्ट बोर्ड्स, बॉउंड्री वॉल, एसी क्लासरूम और बढ़िया माहौल दिया जा रहा है।
स्कूल ट्रांसफॉर्मेशन मिशन से जुड़ी अहम बातें
- 3,500 करोड़ का मिशन, जिसमें ₹2,500 करोड़ वर्ल्ड बैंक और ₹1,000 करोड़ राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के कायाकल्प के लिए खर्च किए जाएंगे।
- सर्वेक्षण में केरल जैसे राज्यों को पछाड़कर नंबर 1 बनने के बाद, अब लक्ष्य पंजाब के स्कूलों को दुनिया के बेहतरीन स्कूलों के समकक्ष खड़ा करना है।
- अगले छह वर्षों में यह मिशन 20,000 से अधिक सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे, डिजिटल लर्निंग और मैनेजमेंट को पूरी तरह बदल देगा।
- बुनियादी साक्षरता के साथ-साथ साइंस, टेक, इंजीनरिंग,मैथ और व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि छात्र वैश्विक करियर के लिए तैयार हों।
- राज्य में विश्व स्तरीय सुविधाओं वाले ‘स्कूल्स ऑफ एमिनेंस’ की शुरुआत, जहां गरीब बच्चों को भी कॉन्वेंट जैसी शिक्षा मिल रही है।
- पंजाब के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल्स और शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए सिंगापुर और फिनलैंड भेजा गया।
- युवाओं को नशे से हटाकर खेलों और शिक्षा की ओर मोड़ने के लिए ‘खेड़ां वतन पंजाब दीं’ जैसे बड़े आयोजन।
- स्कूलों में बाउंड्री वॉल, मिड-डे मील के लिए बेहतर किचन और स्मार्ट क्लासरूम्स का निर्माण।
- शिक्षा को रोजगार से जोड़ते हुए हजारों युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गईं ताकि पलायन रुके।
जॉब क्रिएटर बनने का सपना देख रहे युवा
मान सरकार ने शिक्षा का बजट बढ़ाकर यह साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि पंजाब का भविष्य है। बिजनेस ब्लास्टर्स जैसे प्रोग्राम्स के ज़रिए अब सरकारी स्कूल के बच्चे जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर बनने का सपना देख रहे है। यह केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है। मान सरकार युवाओं के हाथों में टैब, किताबें और खेल का मैदान दे रही है। पंजाब अब ‘उड़ता पंजाब’ की नकारात्मक छवि को पीछे छोड़ ‘रंगला पंजाब’ की राह पर अग्रसर है।
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7 साल बाद SAFF चैंपियन बना भारत, PM मोदी ने दी बधाई
भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने 7 साल बाद SAFF महिला चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को 3-1 से हराकर रिकॉर्ड छठी बार यह टूर्नामेंट जीता। यह मैच गोवा के मडगांव स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेला गया।
भारत की ओर से पियारी जाखसा, सनफिदा नोंगरूम और लिंडा कोम सेत्रो ने एक-एक गोल किया, जबकि बांग्लादेश के लिए एकमात्र गोल रितु पोर्ना ने किया। पियारी जाखसा ने 42वें मिनट में भारत को बढ़त दिलाई, लेकिन पहले हाफ के इंजरी टाइम में बांग्लादेश ने बराबरी कर ली। दूसरे हाफ में सनफिदा नोंगरूम के शानदार हेडर और 82वें मिनट में लिंडा कोम सेत्रो के गोल ने भारत की जीत सुनिश्चित कर दी।
पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। टीम ने अपने सभी चार मुकाबले जीते, 18 गोल किए और सिर्फ एक गोल ही खाया। इस जीत के साथ मौजूदा चैंपियन बांग्लादेश की लगातार तीसरी बार खिताब जीतने की उम्मीद भी टूट गई।
इस अवसर पर भारतीय टीम की अनुभवी खिलाड़ी डांगमेई ग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कह दिया। उन्होंने वर्ष 2012 में भारत के लिए पदार्पण किया था और 95 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के बाद अपने करियर का समापन एक और SAFF खिताब के साथ किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय महिला टीम को इस ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है और यह उपलब्धि देश की युवा खिलाड़ियों को फुटबॉल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। प्रधानमंत्री ने टीम के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
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RBI का बड़ा फैसला! रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, EMI में नहीं होगा इजाफा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने पॉलिसी रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर यथावत रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 3 से 5 जून तक चली MPC बैठक के बाद इसकी घोषणा की।
RBI के इस फैसले से होम लोन, कार लोन और अन्य रेपो रेट से जुड़े कर्जों की EMI में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो रेट को स्थिर रखना कर्ज लेने वालों के लिए राहत की खबर है।
RBI गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। सप्लाई चेन में रुकावटें, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर विकास दर और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है।
इसके साथ ही RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर के अनुमान में भी कटौती की है। पहले 6.9 फीसदी रखे गए अनुमान को घटाकर अब 6.6 फीसदी कर दिया गया है।
केंद्रीय बैंक के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में GDP वृद्धि दर 6.6 फीसदी, दूसरी तिमाही में 6.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है।
RBI ने यह भी चिंता जताई है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसका असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग तथा खपत पर पड़ सकता है।
हालांकि रेपो रेट को स्थिर रखने से आम लोगों को तत्काल राहत मिली है, लेकिन वैश्विक आर्थिक चुनौतियां और GDP वृद्धि दर के घटाए गए अनुमान आने वाले समय के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रहे हैं।
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होर्मुज संकट के बीच तेल कंपनियों की चेतावनी, कच्चे तेल की कीमतों में आ सकता है बड़ा उछाल
दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों और वित्तीय संस्थानों ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जारी संकट लंबा खिंचता है तो आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल योग्य तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं, जिससे ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
अमेरिकी निवेश बैंक जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत में दुनिया के पास करीब 8.4 अरब बैरल तेल का भंडार था, लेकिन इसमें से केवल 0.8 अरब बैरल ही तत्काल इस्तेमाल के लिए उपलब्ध था। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर होर्मुज मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो सितंबर तक कई देशों के वाणिज्यिक तेल भंडार खतरनाक स्तर तक नीचे पहुंच सकते हैं।
इस दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा अतिरिक्त तेल आपूर्ति, रणनीतिक भंडारों के इस्तेमाल और अन्य स्रोतों से बाजार में आई सप्लाई के कारण कीमतों पर तुरंत असर नहीं पड़ा।
वहीं अमेरिकी तेल कंपनी शेवरॉन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक वर्थ ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ हफ्तों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए रखे गए अतिरिक्त तेल भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं और बाजार की संकट झेलने की क्षमता अब पहले से काफी कम हो चुकी है।
माइक वर्थ के मुताबिक जून और खासतौर पर जुलाई महीने में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मध्य-पूर्व का संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और कई देशों में आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।
इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी ADNOC के प्रमुख सुल्तान अल-जाबेर ने कहा है कि भले ही संघर्ष खत्म हो जाए, फिर भी होर्मुज मार्ग से तेल की सामान्य आपूर्ति बहाल होने में कई महीने लग सकते हैं। उनका अनुमान है कि पूरी तरह सामान्य स्थिति 2027 से पहले लौटना मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश अपने रणनीतिक तेल भंडार दोबारा भरना शुरू करते हैं तो वैश्विक बाजार में मांग और बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। ऐसे में आने वाले महीने वैश्विक तेल बाजार और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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