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युवाओं के सपनों को मिलेगा सरकारी ‘रनवे’: CM Mann ने राज्य के पहले स्टार्टअप कॉन्क्लेव का किया आगाज़
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कपूरथला स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में राज्य के पहले स्टार्टअप पंजाब कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया, जिसके तहत नवाचार, कड़ी मेहनत और उद्यमिता को सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण में प्रमुख प्राथमिकता दी गई है। पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित यह स्टार्टअप पंजाब कॉन्क्लेव 2026 एक प्रमुख राज्य-स्तरीय मंच के रूप में उभरा है, जो नवाचार, उद्यमिता और राज्य के तेजी से विस्तार कर रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम को दर्शाता है।
100 से अधिक स्टार्टअप्स की भागीदारी, उद्यमों को सीड ग्रांट्स का वितरण तथा उद्योगपतियों, निवेशकों, इनक्यूबेटरों, अकादमिक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को एक ही छत के नीचे लाकर भगवंत मान सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि नए कारोबारी विचारों को सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग मिलेगा। उन्होंने पंजाब के युवाओं को रोजगार पैदा करने वाला बनने के लिए प्रेरित किया और युवाओं की अगुवाई वाले विकास को सुनिश्चित करने के लिए उन्हें अपडेट रहने तथा उद्यम सृजन की नई सोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब का भविष्य नौकरियों की तलाश में नहीं, बल्कि उद्यमिता अपनाने में है।
स्टार्टअप कॉन्क्लेव के दौरान उद्यमियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट उद्देश्य पंजाब के युवाओं को नौकरी ढूंढने वालों के बजाय नौकरी देने वाले बनाना है और उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने के योग्य बनाना है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि राज्य के युवा नौकरी ढूंढने वालों के बजाय नौकरी देने वाले बनें, ताकि वे अपनी अलग पहचान बना सकें।” उन्होंने कहा कि पंजाबी स्वभाव से ही इंजीनियर और जन्मजात उद्यमी होते हैं, इसलिए वे जिस भी राह को चुनते हैं, उसमें सफलता हासिल करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार पंजाबियों के सपनों को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस दिशा में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने अपडेट रहने और उद्यम सृजन का नारा देते हुए कहा कि फंड्स की कोई कमी नहीं है और सरकार कारोबारी नेताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए हर विचार पर पूरी मदद करेगी। अपनी हालिया जापान यात्रा के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पष्ट दृष्टिकोण से ही देश प्रगति करते हैं। उन्होंने कहा कि जापान में परिवहन के हर साधन को सिंगल विंडो के माध्यम से सुलभ बनाया गया है। जापान के पास भविष्य को देखने का दृष्टिकोण है।” उन्होंने राइजिंग स्टार और राइजिंग सन जैसी कंपनियों को सकारात्मक मानसिकता के उदाहरण के रूप में बताया, जिनके कारण उनकी औसत आयु 100 वर्षों से अधिक है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब के युवाओं से ऐसी ही अग्रगामी सोच अपनाने की अपील की और इसे सफलता की कुंजी बताया।
जापान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जापानी नागरिक अपने सपनों को पूरा करने के लिए ओवरटाइम काम करते हैं, जिससे उनकी आयु भी लंबी होती है। उन्होंने कहा, “पंजाबियों को वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त करने और अपनी क्षमता को बेहतर ढंग से सिद्ध करने के लिए इन गुणों को अपनाना चाहिए। पंजाब सरकार आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर और ठोस प्रयास कर रही है और यह सरकार का नैतिक दायित्व है।”
इस सम्मेलन पर विश्वास व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पंजाब के नवाचारी और तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर उजागर करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के दौरान उद्यमियों, निवेशकों, अकादमिक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक ही मंच पर लाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य पंजाब के युवाओं की उपलब्धियों को उजागर करना और दूसरों को प्रेरित करना है तथा यह गर्व और संतोष की बात है कि राज्य भर से 100 से अधिक स्टार्टअप्स इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस आयोजन के दौरान पंजाब में स्थित 15 से अधिक इनक्यूबेटर्स और पांच से अधिक सहायक संस्थाओं ने अपनी पहलों को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार आठ स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन चेक प्रदान कर रही है, जिनमें सात स्टार्टअप्स को सीड ग्रांट के रूप में 3-3 लाख रुपये और प्रत्येक स्टार्टअप को लीज रेंटल सहायता के रूप में 1.20 लाख रुपये दिए गए हैं। उन्होंने आगे बताया कि स्टार्टअप केवल कारोबार नहीं होते, बल्कि ये रोजगार के नए अवसर सृजित करने और राज्य के आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पिछली सरकारों की कड़ी आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले लोग नए उद्यम शुरू करने से डरते थे, क्योंकि नेता उनके उद्यमों से हिस्सा मांगते थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन नेताओं ने जनता को लूटा और उनके हाथ पंजाब और पंजाबियों के खून से रंगे हुए हैं, जबकि इसके विपरीत अब आम लोगों की सरकार हर नागरिक को जीवन में सफल होने का उचित अवसर दे रही है। पंजाब सरकार के दीर्घकालिक विजन को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार का सपना है कि पंजाब के युवा नौकरी ढूंढने वालों के बजाय रोजगार सृजनकर्ता बनें। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में जमीनी स्तर की चुनौतियों का समाधान करने वाले स्टार्टअप्स को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि औद्योगिक एवं कारोबारी विकास नीति 2022 को उद्यमियों को पारदर्शी और मजबूत ढांचा प्रदान करने के लिए लागू किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप पंजाब राज्य में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास कर रही है, जिसमें महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स और नए उद्यमों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब का मजबूत औद्योगिक आधार और उत्कृष्ट बुनियादी ढांचा स्टार्टअप विकास के लिए अनुकूल है और राज्य की प्रगति की नींव अब नवाचार और उद्यमिता के मार्ग पर आगे बढ़ेगी। उन्होंने निवेशकों और उद्योगपतियों से पंजाब के युवाओं की प्रतिभा पर विश्वास करने और राज्य की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के लिए साझेदार बनने का आह्वान किया।
राज्य सरकार की बिज़नेस ब्लास्टर्स मुहिम के तहत युवाओं को एकजुट होने और नवोन्मेषी विचारों की खोज करने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के विद्यार्थी अनूठे विचारों से भरपूर हैं, लेकिन अक्सर उन्हें मान्यता और प्रोत्साहन की कमी रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम उदाहरणों से भरी उस दुनिया में रहते हैं, जहां सफलता केवल प्रस्तुति पर नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत पर निर्भर करती है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सपने वे नहीं होते जो नींद में देखे जाते हैं, बल्कि असली सपने वे होते हैं जो सोने नहीं देते।
युवाओं को अल्पकालिक प्रसिद्धि से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें समाज के लिए प्रकाश स्तंभ बनने का आह्वान किया। टूथपेस्ट कंपनी की बिक्री बढ़ाने के उदाहरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक साधारण और व्यावहारिक विचार ने एक कंपनी की किस्मत बदल दी। भगवंत सिंह मान ने गर्व से कहा कि मास्टरकार्ड के सीईओ की तरह स्विगी और जोमैटो के संस्थापक भी पंजाबी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सपनों को उड़ान देने के लिए एक रनवे के रूप में काम कर रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा, लोकसभा सदस्य डॉ. राज कुमार चब्बेवाल, राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
नवीनतम विकास के लिए राज्य के सहयोग को उजागर करता स्टार्टअप पंजाब कॉन्क्लेव 2026
पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने कपूरथला स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में स्टार्टअप पंजाब कॉन्क्लेव 2026 का सफल आयोजन किया, जिसे नवाचार, उद्यमिता और पंजाब के तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक प्रमुख राज्य-स्तरीय मंच के रूप में घोषित किया गया। इस सम्मेलन के दौरान स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स, निवेशक, औद्योगिक दिग्गज, अकादमिक विशेषज्ञ और नीति निर्माता एक ही मंच पर एकत्र हुए, जिन्होंने उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और पंजाब को नवीन उद्यमों के लिए एक प्राथमिक गंतव्य के रूप में चुनने हेतु राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
इस सम्मेलन में 75 से 80 स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स, इंडस्ट्री एसोसिएशन्स और इकोसिस्टम पार्टनर्स ने भाग लिया, जिन्होंने अपने उत्पादों, सेवाओं और नवाचारों का प्रदर्शन किया, जो पंजाब में स्टार्टअप्स की क्षमता को दर्शाते हैं। इस आयोजन में स्टार्टअप पंजाब इकोसिस्टम और सरकारी पहलों, सीड-फंडेड स्टार्टअप्स को चेक वितरण तथा इन्वेस्ट पंजाब समिट से जुड़े स्टार्टअप-संबंधी सहयोगियों को भी उजागर किया गया।
सम्मेलन के दौरान इनक्यूबेटर सहायता प्रणालियों को मजबूत करने, स्केलेबल स्टार्टअप्स के निर्माण पर संस्थापकों की समझ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप टेक और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर थीम आधारित पैनल चर्चाओं का आयोजन भी किया गया। यह आयोजन इनक्यूबेटर्स, सहयोगियों और नोडल एजेंसियों को सम्मानित करने के साथ संपन्न हुआ, जिसमें नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास के पंजाब के व्यापक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया गया।
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AAP पंजाब ने चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए भाजपा पर डर और डराने-धमकाने की राजनीति करने का लगाया आरोप : अमन अरोड़ा
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को जालंधर और अमृतसर में हाल ही में हुए धमाकों के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा पंजाब सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का राजनीतिक फ़ायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और आरोप लगाया कि भाजपा का चुनाव से पहले डर और बांटने का इतिहास रहा है।
अरोड़ा ने कहा कि पूरे देश में एक रुझान देखा गया है जहां चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए कानून-व्यवस्था, धर्म या सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का सहारा लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी फ़ायदे के लिए अशांति फैलाने और समुदायों को बांटने के लिए अक्सर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव की ओर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लोगों के पक्ष के कामों से घबराई हुई है। इसीलिए ऐसी साज़िशें रची जा रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है, क्योंकि इंटरनेशनल बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। यह देखते हुए कि अमृतसर और जालंधर दोनों इस दायरे में आते हैं, अरोड़ा ने कहा कि जवाबदेही केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र में भाजपा की सरकार की है।
अरोड़ा ने आतंकवाद की यादें ताज़ा करके पंजाब को अस्थिर करने और डर पैदा करने की कोशिशों के ख़िलाफ़ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पंजाबी इन “नापाक इरादों” से वाकिफ़ हैं और बांटने वाली राजनीति का शिकार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सांप्रदायिक सद्भाव की ज़मीन है, जहाँ सबसे बुरे समय में भी नफ़रत के बीज कभी नहीं उगे। लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें यहाँ कभी कामयाब नहीं होंगी।
पंजाब की एकता और धर्मनिरपेक्षता की विरासत को दोहराते हुए, अरोड़ा ने भाजपा और केंद्र सरकार से ऐसी चालों से बचने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश के खिलाफ एकजुट रहेंगे।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, डॉ. बलबीर सिंह और हरजोत सिंह बैंस ने भी हाल के धमाकों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है, जिससे अमृतसर और जालंधर जैसे इलाके इसके दायरे में आ गए हैं। इसे देखते हुए, उन्होंने कहा कि सुरक्षा में किसी भी चूक की ज़िम्मेदारी सीधे केंद्र की है। मंत्रियों ने आगे कहा कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब की शांति को बिगाड़ने की भाजपा की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि राज्य के लोग एकजुट हैं और ऐसी बांटने वाली चालों के खिलाफ़ सतर्क हैं।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब को अस्थिर करने की भाजपा की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा कि राज्य “कोई ट्रॉफी नहीं बल्कि एक इमोशनल पहचान है।” अमन अरोड़ा की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए, बैंस ने कहा कि चुनाव से पहले डर, अशांति और पोलराइज़ेशन पैदा करने के ऐसे तरीके बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना और खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान दिए गए बड़े बलिदानों पर बनी है और इसे सिर्फ़ चुनावी महत्वाकांक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भाजपा के “बंगाल की तरह पंजाब जीतने” के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बैंस ने इन बातों को शर्मनाक और असंवेदनशील बताया और कहा कि पंजाबी अपने निजी राजनीतिक फ़ायदों के लिए अपनी एकता और शांति को कभी भी टूटने नहीं देंगे।
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पंजाब में बेअदबी विरोधी कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब से ‘शुक्राना यात्रा’ का किया नेतृत्व
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद पूरे उत्साह के साथ ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू की। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह यात्रा परमात्मा का शुक्राना करने के लिए की जा रही है, जिसने उन्हें बेअदबी के मामलों में सख्त सजा की व्यवस्था करने वाला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ प्रकट हुआ था, उससे ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू हुई है। बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की पवित्र जिम्मेदारी हमें बख्शने के लिए गुरु साहिब के चरणों में शुक्राना किया जा रहा है। पंजाब की शांति और ‘सर्बत्त के भला’ के लिए अरदासें जारी रहेंगी।”
पवित्र तख्त साहिब में माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा। हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक कानून को पास करने की जिम्मेदारी मिली, जो भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को खत्म करने में मददगार होगा।”उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति, भाईचारक साझ और एकता को तोड़ना था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि इस अक्षम्य अपराध के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा और इस घिनौने अपराध के दोषियों को अनुकरणीय सजा दी जाएगी। यह कानून निवारक के रूप में काम करेगा और भविष्य में कोई भी ऐसा गुनाह करने की हिम्मत नहीं करेगा।”
सिखों की श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के साथ आध्यात्मिक साझ पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी प्रकट कर रहे हैं और धन्यवाद कर रहे हैं।” शुक्राना यात्रा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब के बाद वे 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होंगे। उन्होंने अत्यधिक गर्मी के बावजूद यहां एकत्रित हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “इस यात्रा का एकमात्र मंतव्य इस महत्वपूर्ण एक्ट को पास करने के लिए ताकत और बख्शने के लिए परमात्मा का शुक्राना करना है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम तो एक माध्यम हैं, जिसे गुरु साहिब ने यह पवित्र जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है। मैं इस एक्ट को पास करने वाला कोई नहीं हूं। गुरु साहिब ने खुद यह सेवा मुझसे ली है। परमात्मा ऐसी सेवा सिर्फ उन्हीं को सौंपता है, जिन्हें उसने खुद चुना होता है। मैं गुरु साहिब का एक विनम्र सेवक हूं, जिसे यह कार्य सौंपा गया है।” उन्होंने आगे कहा कि समाज के सभी वर्गों के लोग लंबे समय से बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे कानून की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस एक्ट का एकमात्र उद्देश्य पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण लोगों की अशांत हुई भावनाओं को शांत करना है। इस कानून के पीछे कोई भी राजनीतिक मंतव्य नहीं है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दुनिया भर के लोग इस पहल के लिए हमारा धन्यवाद करने के लिए रोजाना फोन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्ति इस एक्ट का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका नाखुश हैं। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इस पवित्र मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें जल्दी अपने गुनाहों के नतीजे भुगतने पड़ेंगे।” लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ मिलकर छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने के मामले की सदन में सफलतापूर्वक पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब उस समय को शोक के महीने के रूप में मनाता है क्योंकि छोटे साहिबजादों को जालिम शासकों ने जिंदा नींव में चिनवा दिया था। मुझसे पहले 190 से अधिक सांसदों ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी संसद में यह मुद्दा नहीं उठाया।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अत्याचार, बेइंसाफी और दमन के खिलाफ जूझने के लिए प्रेरित करती रहेगी। श्री आनंदपुर साहिब के ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र धरती पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ प्रकट किया था, जो इतिहास को नया मोड़ देने वाली घटना थी। इसी दिन हमारी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पास किया है।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350 साला शहीदी दिवस के अवसर पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पंजाब विधानसभा गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक हुई। इस विशेष सत्र के दौरान विधानसभा ने अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया।”
पंजाब में सिखी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) – पंजाब में पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की लंबे समय से लटकती मांग को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। इन शहरों के समग्र विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है।”
यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं।
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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को कैबिनेट की मंजूरी
केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।
यह बढ़ोतरी करीब छह साल बाद की जा रही है। इससे पहले 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। सरकार के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित 34 जज कार्यरत हैं। नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।
मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर काफी दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा।
इतिहास पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत शुरुआत में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह संख्या कई बार बढ़ाई गई—1960 में 13, बाद में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 की गई थी।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या संसद तय करती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।
हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और तकनीक का बेहतर उपयोग भी उतना ही जरूरी है।
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