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मान सरकार की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम: सरकारी स्कूल की शिक्षिका ने social media पर जगाई पंजाबी भाषा की अलख

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कईं हज़ार फॉलोअर्स तक पहुंची मातृभाषा की आवाज़ चंडीगढ़।

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार के एक सरकारी विद्यालय में कार्यरत एक समर्पित शिक्षिका आज सोशल मीडिया पर पंजाबी भाषा, संस्कृति और इतिहास की अलख जगाने वाली एक प्रेरणास्त्रोत बन चुकी हैं। अपने नवाचारी शिक्षण तरीकों और डिजिटल माध्यम के प्रभावी उपयोग से उन्होंने न केवल अपने विद्यालय के छात्रों को प्रभावित किया है, बल्कि सोशल मीडिया पर 45 हजार से अधिक फॉलोअर्स का एक विशाल समुदाय तैयार किया है। यह उपलब्धि मान सरकार की दूरदर्शी मातृभाषा संरक्षण नीति और शिक्षकों को दिए गए सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष प्रमाण है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाबी भाषा को बचाने और बढ़ावा देने के लिए जो क्रांतिकारी कदम उठाए हैं, उनका सुखद परिणाम आज पूरे प्रांत में दिखाई दे रहा है।

इस शिक्षिका ने पारंपरिक शिक्षण विधियों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर पंजाबी भाषा को रोचक और प्रासंगिक बनाने का अनूठा प्रयास किया है। कक्षा में वे गुरबाणी, लोक गीतों, पंजाबी साहित्य और प्रांत के गौरवशाली इतिहास को इस तरह प्रस्तुत करती हैं कि बच्चे स्वतः ही अपनी जड़ों से जुड़ जाते हैं। उनकी कक्षाएं केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दर्पण बन जाती हैं। छात्र-छात्राएं पंजाबी कविताओं, कहानियों और नाटकों के माध्यम से भाषा की गहराई और सुंदरता को समझते हैं। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस शिक्षिका के आने के बाद पंजाबी विषय में छात्रों की रुचि और परीक्षा परिणाम दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

सोशल मीडिया पर इस शिक्षिका की उपस्थिति एक क्रांतिकारी कदम साबित हुई है। उन्होंने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर पंजाबी भाषा के दैनिक पाठ, मुहावरे, ऐतिहासिक तथ्य, लोककथाएं और सांस्कृतिक परंपराओं को सरल और आकर्षक तरीके से साझा करना शुरू किया। उनके वीडियो और पोस्ट केवल पंजाब में ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में बसे पंजाबी समुदाय के बीच भी अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं। 45 हजार से अधिक फॉलोअर्स उनके हर पोस्ट का बेसब्री से इंतजार करते हैं और सक्रिय रूप से टिप्पणियों और शेयर के माध्यम से इस मुहिम में भागीदार बनते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में भाषा संरक्षण के लिए यह एक अनुकरणीय मॉडल है, जहां युवा पीढ़ी अपनी पसंदीदा प्लेटफॉर्म पर ही अपनी मातृभाषा से जुड़ पा रही है।

पंजाब सरकार की दूरदर्शी भाषा नीति और शिक्षा सुधारों ने ऐसी प्रतिभाओं को फलने-फूलने का अवसर प्रदान किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सत्ता संभालने के बाद से ही पंजाबी भाषा को प्रोत्साहित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मान सरकार ने अनेक ऐतिहासिक योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें सरकारी स्कूलों में पंजाबी शिक्षण को अनिवार्य और आकर्षक बनाना, शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, पंजाबी साहित्य और संस्कृति पर आधारित पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण और डिजिटल शिक्षण सामग्री का व्यापक विकास शामिल है। शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की है कि मान सरकार राज्य भर के सरकारी विद्यालयों में पंजाबी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान और संसाधन उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का स्पष्ट मानना है कि पंजाबी भाषा पंजाब की आत्मा है और इसे बचाना हर पंजाबी का कर्तव्य है।

शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस शिक्षिका की पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि यह मान सरकार की नीतियों की शानदार सफलता का जीवंत उदाहरण है। “मुख्यमंत्री भगवंत मान जी ने पंजाबी भाषा को केवल संरक्षित ही नहीं रखने का संकल्प लिया है, बल्कि इसे आधुनिक समय में प्रासंगिक और गतिशील बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मान सरकार ने शिक्षकों को वह स्वतंत्रता और संसाधन दिए हैं जो पहले कभी नहीं मिले थे। जब हमारे सरकारी स्कूलों की शिक्षिकाएं इस तरह का समर्पण और नवाचार दिखाती हैं, तो यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उठाए गए कदम ठोस और दूरगामी परिणाम दे रहे हैं,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने गर्व से कहा। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब का भविष्य ऐसी ही समर्पित शिक्षकों के हाथों में सुरक्षित है, और मान सरकार की दूरदर्शिता के कारण ही यह संभव हो पाया है।

सोशल मीडिया पर इस शिक्षिका के फॉलोअर्स में न केवल युवा छात्र हैं, बल्कि अभिभावक, शिक्षाविद, साहित्यकार और विदेशों में बसे पंजाबी भी शामिल हैं। टिप्पणियों में लोग लगातार उनके प्रयासों की सराहना करते हैं और अपने बच्चों को पंजाबी सिखाने के लिए उनकी सामग्री का उपयोग करते हैं। एक फॉलोअर ने लिखा, “मैं कनाडा में रहता हूं और अपने बच्चों को पंजाबी सिखाने में संघर्ष कर रहा था। इस शिक्षिका के वीडियो ने मेरे बच्चों में भाषा के प्रति रुचि जगा दी है।” एक अन्य युवा ने कहा, “पहले मुझे लगता था पंजाबी सीखना बोरिंग है, लेकिन इनके पढ़ाने का तरीका इतना मजेदार है कि अब मैं खुद से सीखने लगा हूं।” यह सकारात्मक प्रतिक्रिया दर्शाती है कि सही दृष्टिकोण और माध्यम से भाषा संरक्षण संभव है।

भाषा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहल न केवल पंजाबी भाषा को जीवित रखने में मदद कर रही है, बल्कि युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक गौरव की भावना भी पैदा कर रही है। पंजाब विश्वविद्यालय के भाषा विभाग के एक प्रोफेसर ने कहा, “जब शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहते और व्यावहारिक, रोचक तरीके से भाषा सिखाते हैं, तो छात्र स्वाभाविक रूप से जुड़ते है। यह शिक्षिका डिजिटल साक्षरता और सांस्कृतिक संरक्षण का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रही है।” उन्होंने आगे कहा कि यदि पंजाब के हर ज़िले में ऐसी दो-तीन शिक्षिकाएं या शिक्षक सामने आएं, तो पंजाबी भाषा का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।

पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दूरदर्शी नेतृत्व में हाल के वर्षों में मातृभाषा को बचाने के लिए अनेक ऐतिहासिक और ठोस कदम उठाए है। सरकारी कार्यालयों में पंजाबी के उपयोग को अनिवार्य बनाना, पंजाबी साहित्य और कला को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान, युवा लेखकों और कलाकारों के लिए प्रतियोगिताएं और पुरस्कार, तथा पंजाबी भाषा के डिजिटल संसाधनों का व्यापक विकास – ये सभी मान सरकार की प्रमुख उपलब्धियां है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में पंजाबी पुस्तकालयों को मजबूत करने और शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों में प्रशिक्षित करने के लिए विशेष बजट आवंटित किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्वयं कई बार कहा है कि पंजाबी भाषा का संरक्षण उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन सभी प्रयासों का शानदार परिणाम यह है कि आज पंजाब के सरकारी स्कूलों में पंजाबी भाषा की शिक्षा अधिक प्रभावी, आकर्षक और गौरवान्वित करने वाली बन गई है।

इस शिक्षिका की सफलता की कहानी मान सरकार की भाषा नीति की सार्थकता और प्रभावशीलता को रेखांकित करती है। यह दर्शाती है कि जब मुख्यमंत्री भगवंत मान जैसे दूरदर्शी नेता सही नीतियां बनाते है और शिक्षक समर्पण के साथ उन्हें जमीन पर उतारते है, तो चमत्कारिक परिणाम मिलते है। पंजाब की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं में निहित है, और मान सरकार की नीतियों के तहत ऐसी शिक्षिकाएं यह सुनिश्चित कर रही हैं कि आने वाली पीढ़ियां इस विरासत को गर्व से आगे ले जाएं। यदि पंजाब के सरकारी स्कूलों में ऐसी और शिक्षिकाएं और शिक्षक आगे आएं, तो प्रांत का भविष्य न केवल सुरक्षित होगा, बल्कि और अधिक गौरवशाली बनेगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने पंजाबी बोली को बचाने और बढ़ावा देने की जो अटूट प्रतिबद्धता दिखाई है, वह इस शिक्षिका जैसे समर्पित कर्मियों के माध्यम से साकार हो रही है। मान सरकार के इस दूरदर्शी नेतृत्व में ही पंजाबी भाषा और संस्कृति का भविष्य उज्ज्वल है – यही इस पूरी पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि और गौरव का विषय है।

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भगवंत मान ने आरोपों को बताया ‘गंदी राजनीति’, कहा- फर्जी वीडियो से छवि खराब करने की साजिश

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने ऊपर लगाए गए “अपवित्र आचरण” और सिख गुरुओं के अपमान से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक विरोधियों की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिए फर्जी वीडियो वायरल किए जा रहे हैं और धर्म का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी वीडियो संदेश में मान ने कहा कि जिस वीडियो को लेकर विवाद खड़ा किया गया है, वह पूरी तरह फर्जी है। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति न तो उनके शरीर से मेल खाता है और न ही उनके हाव-भाव उनसे मिलते हैं। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक जांच में भी वीडियो को फर्जी बताया गया है।

मुख्यमंत्री ने भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जब उनके विरोधियों को सरकार के कामकाज पर हमला करने का कोई मुद्दा नहीं मिलता, तो वे धर्म का सहारा लेकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि जनता जानती है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ फैला रहा है।

भगवंत मान ने कहा कि वे पंजाब के विकास, रोजगार, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सरकार के कार्यों को उसी गति से जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि विरोधी दल उनकी लोकप्रियता से घबराकर ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं।

वहीं, इस मामले को लेकर भाजपा लगातार आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर हमलावर है। भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मामला इतना गंभीर है तो मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए।

इधर, गुरुग्राम पुलिस ने वायरल वीडियो और कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट मामले में जांच तेज कर दी है। पुलिस के अनुसार दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने के लिए बड़ी रकम का लेन-देन हुआ था। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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मौसम ने ली करवट, हरियाणा-पंजाब-चंडीगढ़ में 26 जून तक आंधी-बारिश का येलो अलर्ट

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भीषण गर्मी और उमस से परेशान हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के लोगों को जल्द राहत मिलने वाली है। मौसम विभाग (IMD) ने 26 जून तक मौसम के बदलते रहने का अनुमान जताते हुए कई इलाकों में आंधी, तेज हवाओं और बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पंजाब के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक मौसम में बदलाव बना रहेगा। 24 से 26 जून के बीच कई क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चल सकती है और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि 26 जून तक बादलों की आवाजाही और हवाओं की दिशा में बदलाव देखने को मिलेगा। 25 जून से प्री-मानसून गतिविधियां तेज होंगी, जबकि 25 से 30 जून के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में दस्तक दे सकता है।

हरियाणा के पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल और जींद में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश की संभावना है। वहीं पश्चिमी जिलों सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और भिवानी में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रह सकता है।

पंजाब और चंडीगढ़ में भी अगले तीन दिनों तक 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। लुधियाना, बरनाला, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और मोहाली समेत कई जिलों में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार पंजाब में सबसे पहले मानसून अमृतसर पहुंच सकता है, जबकि बठिंडा में इसकी एंट्री सबसे बाद में होने की संभावना है। चंडीगढ़ में 27 से 30 जून के बीच मानसून पहुंचने के आसार हैं और 28-29 जून के दौरान अच्छी बारिश हो सकती है।

उधर हिमाचल प्रदेश में भी पश्चिमी विक्षोभ के असर से शिमला, सोलन, कांगड़ा और अन्य मध्य व निचले पर्वतीय क्षेत्रों में 26 जून तक बारिश और बौछारों का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है।

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पंजाब के गांव देश में सबसे अधिक विकसित होंगे; सरपंचों को आगे बढ़कर बदलाव का नेतृत्व करना चाहिए: CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सरपंचों को ग्रामीण पंजाब के बदलाव का नेतृत्व करने का आह्वान किया और स्पष्ट किया कि पंजाब को देश का सबसे विकसित राज्य बनाने के सपने को साकार करने के लिए राज्य के गांव देश में सबसे अधिक विकसित होकर उभरने चाहिए। रामपुरा फूल और तलवंडी साबो के सरपंचों और पंचों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने पंचायतों से अपील की कि वे सरकारी फंडों का उपयोग इस प्रकार करें, जिससे समाज के हर वर्ग को लाभ मिले, जबकि शिक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने गांवों के विकास और सिंचाई से संबंधित मुद्दों की भी समीक्षा की और किसानों के लिए नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और पंजाब की प्रगति एवं समृद्धि की गति को तेज करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

सरपंच मिलनी की कुछ झलकियाँ एक्स पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “रामपुरा फूल और तलवंडी साबो के सरपंचों और पंचों के साथ बैठक के दौरान पंजाब सरकार की उपलब्धियों के बारे में चर्चा की गई। सभी ने पूरी तरह से मेरिट के आधार पर नौकरियाँ देने और शिक्षा के मानक को सुधारने के लिए सरकार के प्रयासों का स्वागत किया। ग्रामीण विकास और किसानों के लिए नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया। पंजाब के विकास और प्रगति का यह सफर निरंतर जारी रहेगा।”

‘सरपंच मिलनी’ के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य में सबसे कठिन चुनाव सरपंच का होता है क्योंकि वही जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा, “सरपंच गांव का मुखिया होता है और एक अच्छा सरपंच गांव की सूरत बदल सकता है और लोगों की समृद्धि सुनिश्चित कर सकता है। वास्तव में सरपंच वह नींव हैं, जिस पर लोकतंत्र का स्तंभ खड़ा है, जिसके कारण वे समाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के स्तर पर समस्याओं को जानने के लिए ये लोक मिलनियाँ अनूठी पहल हैं। उन्होंने कहा कि अनुदानों की कोई कमी नहीं है, लेकिन गांवों में इनका उपयोग सही और ईमानदारी से होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आरोप किसी पर भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन सही सरपंच ही गांवों के विकास का धुरा होते हैं। पहले पिछली सरकारों का अनुदानों में हिस्सा होता था, जिसके कारण विकास कार्य प्रभावित होते थे। अब गांवों को बड़ी मात्रा में अनुदान आ रहे हैं और वह दिन दूर नहीं जब इस पैसे से राज्य के गांवों की पूरी तरह से कायाकल्प हो जाएगी।”

सरपंचों को विकास कार्यों को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये फंड इस प्रकार खर्च किए जाने चाहिए कि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि सबसे पहले पुस्तकालयों, स्कूलों के निर्माण और सोलर लाइटें लगाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और उसके बाद गलियों-नालियों को, ताकि गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य के विकास को तेज करने के लिए यह बहुत आवश्यक है और समय की मांग है ताकि पंजाब को देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि गांवों की पंचायतें लोकतांत्रिक प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सहायक रही हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार सरपंचों को हर संभव सहायता और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि वे संपूर्ण ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंचायतें और सरपंच राज्य सरकार की वास्तविक आँखें और कान हैं क्योंकि वे जमीनी स्तर पर जनता से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “पंचायतों को लोकतंत्र की नींव के रूप में जाना जाता है क्योंकि उनके पास अपार शक्ति होती है और उनके फैसलों को पूरा गांव सम्मान से मानता है।”

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने सरपंचों को यह ताकत दी है और उनके हितों की रक्षा करना और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना सरपंचों का मूल कर्तव्य है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये संस्थाएँ राज्य सरकार की जन-पक्षधर और विकास-उन्मुख योजनाओं के लाभों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए माध्यम के रूप में काम करती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतियाँ राज्य सरकार द्वारा बनाई जाती हैं और सरपंच तथा पंच इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी सरपंचों से अपील की कि वे स्वयं को विकास कार्यों के लिए पुनः समर्पित करें और विकास कार्यों तथा सेवाओं की निगरानी पूरी तनदेही से सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सरपंचों को एक स्पष्ट आह्वान दिया कि वे विकास कार्यों में किसी भी प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप से दूर रहें। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अतीत में गांवों में व्यापक गुटबाजी के कारण कई काम अधूरे रह गए थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरपंचों को गांवों में गुटबंदी समाप्त करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में बहुमत हासिल करने वाला व्यक्ति या पार्टी विजेता होती है, लेकिन एक बार चुने जाने के बाद सरपंच पूरे गांव का होता है। एक सरपंच को गांव के प्रत्येक निवासी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और निर्णय निष्पक्ष होकर लिए जाने चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कई सरपंच हैं, जिन्होंने अपनी समझदारी और दूरदर्शिता से अपने गांवों की तस्वीर बदल दी है।

सर्वसम्मति से पंचायतों का चुनाव करने वाले गांवों का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा, “इन गांवों ने संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर और एक ओर गांवों में आपसी भाईचारे तथा सौहार्द की भावना को मजबूत किया है तथा दूसरी ओर सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए सर्वसम्मति से अपने सरपंच चुने हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि उनकी सरकार गांवों के समग्र विकास और प्रगति के लिए वचनबद्ध है तथा इस नेक कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। उन्होंने कहा, “सरपंच सरकार और गांवों के बीच एक पुल हैं और उन्हें गांवों के विकास में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।”

उन्होंने सरपंचों से गांवों को स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने की अपील भी की ताकि राज्य के पर्यावरण को बचाया जा सके। बैठक में महिला सरपंचों की बड़ी संख्या में मौजूदगी से उत्साहित होकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाएं देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

मुख्यमंत्री ने प्रशासन, अर्थव्यवस्था और समाज में महिलाओं की भूमिका के प्रति व्यापक दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण शिक्षा, प्रतिनिधित्व और आर्थिक अवसरों में निहित है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने महिलाओं से निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में आगे आने और राज्य के भविष्य को नया स्वरूप देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि लड़कियां आगे आएं और शिक्षा के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाएं। उन्होंने कहा, “यह देश के व्यापक हित में है, क्योंकि जो महिलाएं घरों और परिवारों का कुशलतापूर्वक संचालन करती हैं, उन्हें देश भी चलाना चाहिए। राज्य सरकार इस नेक कार्य के लिए वचनबद्ध है और इसके लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है।”

राजनीति में अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में आगे आकर हिस्सा लेना चाहिए ताकि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बन सकें और समाज में आवश्यक परिवर्तन ला सकें।

उन्होंने कहा कि लड़कियों ने लगभग हर क्षेत्र में लड़कों को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन राजनीति अभी भी उनकी पहुंच से दूर है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “इस क्षेत्र को लंबे समय से पुरुष प्रधान माना जाता रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि महिलाएं यहां भी अपनी पहचान बनाएं। समानता आधारित समाज की स्थापना और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए महिलाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इससे पंजाब को एक प्रगतिशील और समृद्ध राज्य बनाने में मदद मिलेगी।”

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