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CJI Surya Kant का बड़ा कदम: Supreme Court में VIP culture खत्म, Senior lawyers के shortcuts और influence पर रोक
भारत के चीफ जस्टिस (CJI) Surya Kant ने सुप्रीम कोर्ट में VIP Culture और गैर-ज़रूरी रुकावटों को पूरी तरह खत्म करने का ऐलान किया है। कोर्ट में अब “मैं पहला हूँ, मेरा केस पहले सुनो” जैसी चीजें नहीं चलेगी। इससे कोर्ट की प्रक्रिया ज़्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष हो जाएगी।
VIP Culture खत्म, नए नियम लागू
- अब सुप्रीम कोर्ट में कोई भी केस अगर urgent है, तो उसे oral mention या जोर-जबरदस्ती से नहीं बल्कि written process के जरिए ही लिस्ट किया जाएगा।
- Senior lawyers अब “Take my case first” जैसी बातें नहीं कर पाएंगे।
- Junior lawyers को भी साफ चेतावनी दी गई है कि केस की मांग सिर्फ exceptional situations में ही की जा सकती है।
यानी अब हर किसी को equal chance मिलेगा और कोई shortcut नहीं चलेगा।
Automatic listing: urgent cases जल्दी सुनवाई के लिए
- CJI ने कहा कि urgent cases जैसे बेल, हिबीस कॉर्पस, मौत की सजा या eviction-related cases, automatic listing में आएंगे।
- ऐसे cases, अगर registry में submit किए गए हैं, तो 2 working days में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होंगे।
- सामान्य cases अब routine process से ही सूचीबद्ध होंगे। इससे line jumping और favoritism पूरी तरह खत्म होगा।
क्यों ये बदलाव ज़रूरी थे?
- लंबे समय से complaints आती रही हैं कि सुप्रीम कोर्ट में lobby और influence के आधार पर कुछ cases तुरंत सुनवाई में आ जाते थे।
- इससे आम लोगों या छोटे वकीलों का न्याय मिलने में delay होता था।
- CJI Surya Kant का कहना है कि कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या बहुत ज़्यादा है, और ये reforms justice delivery को तेज और fair बनाएंगे।
NJAC और Collegium system पर संकेत
- CJI Surya Kant ने ये भी संकेत दिए हैं कि Supreme Court Collegium system पर पुनर्विचार कर सकता है और NJAC (National Judicial Appointments Commission) को फिर से लागू करने पर विचार हो सकता है।
- अगर ये हुआ, तो judges की appointments process में transparency और democratic participation बढ़ सकता है।
- ये संकेत legal ecosystem में बहुत बड़ी खबर माने जा रहे हैं क्योंकि इससे judiciary की व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है।
CJI Surya Kant का नया अंदाज़
- Surya Kant ने 24 नवंबर 2025 को भारत के 53वें CJI के रूप में शपथ ली।
- पहले ही दिन उन्होंने 17 cases की सुनवाई की और दिखा दिया कि ये reforms सिर्फ बातों तक नहीं, action में भी हैं।
- उनके फैसले और सुधारों से कोर्ट में कमीशन, favoritism, और लंबित मामलों की समस्या पर असर पड़ेगा।
नए नियमों का असर
- अब कोई भी lawyer सिर्फ अपना influence दिखाकर case नहीं जल्दी सुना सकता।
- हर urgent matter की automatic listing होगी, जिससे आम जनता को भी justice जल्दी मिलेगा।
- Collegium system के बदलने की संभावनाओं से judges की appointments और judiciary की transparency पर बड़ा असर पड़ सकता है।
CJI Surya Kant के ये reforms साबित करते हैं कि Supreme Court को modern, transparent और fair बनाने का काम शुरू हो गया है। Legal world में ये बदलाव system-shaking माने जा रहे हैं और आने वाले दिनों में इनका असर हर level पर देखने को मिलेगा।
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ई-20 के विरोध में 100 लोगों के साथ पीएम से मिलने जा रहे केजरीवाल को पुलिस ने रोका
ई-20 पेट्रोल के विरोध में 100 लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पैदल मार्च करते हुए उनके आवास जा रहे आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को दिल्ली पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। जिसके बाद अरविंद केजरीवाल लोगों से मिली 2.33 लाख से ज्यादा पीटिशन के साथ सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और पीएम से मिलाने की मांग करने लगे। पुलिस ने उन्हें बताया कि प्रधानमंत्री मिलना नहीं चाहते हैं और सारी पीटिशन लेकर धरना खत्म करा दिया। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार ट्रंप के दबाव में अमेरिका से इथेनॉल खरीदकर देश पर थोपना बंद करे। प्रधानमंत्री को हम पर अपनी ताकत दिखाने से क्या होगा, उन्हें यही हिम्मत ट्रंप को दिखानी चाहिए। ई-20 वापस नहीं होता है तो देश फिर एक बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएगा। इस दौरान वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह समेत पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद रहे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम लोग 2,33,238 पिटीशन लेकर प्रधानमंत्री को देने गए थे। हालांकि पुलिस ने हमें प्रधानमंत्री आवास तक जाने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि एक महीना पहले ई20 के मुद्दे पर प्रधानमंत्री से चर्चा करने के लिए समय मांगा था, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। आज हम उन्हें पिटीशन देने के लिए निकले, तो उन्होंने जवाब दिया कि वे नहीं मिलेंगे। यह उनकी तानाशाही को दिखाता है। जिस तरह से उन्होंने नीट वाले पूरे एपिसोड में तानाशाही दिखाई, वैसे ही ई20 के मुद्दे पर भी वे अड़े हुए हैं। उनकी सरकार ने खुद संसद में माना है कि गाड़ियों की माइलेज कम होती है, लेकिन थोड़ी कम होती है। इंजन के पार्ट खराब होते हैं, लेकिन रबड़ वाले पार्ट खराब होते हैं। जब इंजन के पार्ट खराब होते हैं और गाड़ियों की माइलेज भी कम होती है, तो फिर सरकार ने यह जबरदस्ती क्यों कर रखी है?
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि यह जबरदस्ती इसलिए कर रखी है क्योंकि ट्रंप मोदी जी के सिर पर बैठे हैं। ट्रंप उन पर इतना दबाव डाल रहे हैं कि मोदी जी की ट्रंप के सामने ना कहने की हिम्मत नहीं है। ट्रंप जबरदस्ती कर रहे हैं कि अमेरिका से एथेनॉल खरीदकर भारत में बेचा जाए, इसलिए यह पूरा ई20 लाया गया है। आज हम पिटीशन लेकर गए थे जो रस्सी से बांधी हुई थीं, लेकिन किसी वजह से वो रस्सियां खुल गईं और कई पिटीशन इधर-उधर हो गईं। अगर प्रधानमंत्री कार्यालय कहेगा तो हम सभी पिटीशन का एक फ्रेश सेट उन्हें भिजवा देंगे। अगर 2 लाख 33 हजार से ज्यादा लोगों ने इतनी जल्दी साइन कर दिए, तो जाहिर है कि पूरे देश के अंदर इसे लेकर बहुत बेचौनी है। हम प्रधानमंत्री से यही निवेदन करना चाहते हैं कि वे अमेरिका से एथेनॉल खरीदना बंद करें और ट्रंप का दबाव बर्दाश्त करना सीखें, क्योंकि इसकी वजह से पूरा देश कष्ट झेल रहा है।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि अभी पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया है कि ई20 को वापस लिया जाए। ई20 जनता के खिलाफ है और प्रधानमंत्री जी को ट्रंप का दबाव नहीं मानना चाहिए। गोवा में हमारे दो, गुजरात में पांच और जम्मू-कश्मीर में हमारा एक विधायक है। जम्मू-कश्मीर, गुजरात और गोवा में भी हमारे विधायक यह प्रस्ताव पेश करेंगे। हमें मालूम है कि वह पास होगा या नहीं, क्योंकि कम से कम गुजरात और गोवा में भाजपा की सरकारें हैं और वे इसे पास नहीं होने देंगे। लेकिन हम वहां भी ई20 वापस लेने का प्रस्ताव जरूर पेश करेंगे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नीट वाले पूरे आंदोलन में मोदी जी को खुद निर्णय लेना था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना है या नहीं। लेकिन यहां तो ट्रंप का दबाव है और ट्रंप के सामने मोदी जी भीगी बिल्ली बन जाते हैं। इसमें मोदी जी की चलती नहीं है और उनकी मजबूरियां हैं। अगर जनता को ई20 से छुटकारा चाहिए, तो उसे बड़े स्तर पर सड़कों पर उतरना पड़ेगा। यह आंदोलन जारी रहेगा। आगे कब और कौन सी एक्टिविटी होगी, जल्द ही विचार विमर्श करके अवगत कराएंगे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज जो 100 पीड़ित लोग आए, उन्होंने बड़ी हिम्मत दिखाई, क्योंकि आज के दौर में हिम्मत करना बहुत मुश्किल है। जो सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाल देता है, ये लोग उसकी ऐसी-तैसी कर देते हैं, एफआईआर कर देते हैं। इनके ट्रोल धमकाते हैं और इनके गुंडे घर पहुंच जाते हैं। इन्होंने बहुत गुंडागर्दी मचा रखी है, लेकिन यही गुंडागर्दी इनका अंत साबित होगी।
इस दौरान, “आप” के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि ट्रंप के दबाव में आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का स्वाभिमान, सम्मान और हिंदुस्तान की 30 करोड़ गाड़ियां ट्रंप के हाथों गिरवी रख दी हैं। ट्रंप की गुलामी के कारण प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका से 22 हजार करोड़ रुपए का कूड़ा खरीदने जा रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने एक महीने पहले प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर अनुरोध किया था कि हम इस मुद्दे पर उनसे मिलना और बातचीत करना चाहते हैं। इसके अलावा 2 लाख 33 हजार लोगों ने हस्ताक्षर करके दिया कि वे ई20 के खिलाफ हैं। लेकिन ट्रंप की गुलामी के कारण प्रधानमंत्री ने अरविंद केजरीवाल की बात नहीं सुनी।
संजय सिंह ने कहा कि आज अरविंद केजरीवाल अपने उन 100 पीड़ित साथियों के साथ, जिनकी गाड़ियां ई20 पेट्रोल से खराब हुई हैं, ये 2 लाख 33 हजार पत्र प्रधानमंत्री को सौंपने जा रहे थे। लेकिन 100 लोगों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया और एक हजार पुलिस वाले लगा दिए गए। असल में यही मोदी का राज है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में ई20 के खिलाफ यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी और हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रंप की गुलामी और दलाली नहीं करने देंगे।
‘‘आप’’ वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि ई-20 का मसला देश के 30 करोड़ लोगों की गाड़ियों में ज़बरदस्ती इथेनॉल डलवाने का मसला है। करोड़ों लोग बता रहे हैं कि इससे उनकी गाड़ियों का नुकसान हो रहा है, माइलेज कम हो रही है, इंजन ख़राब हो रहा है और सर्विस के ख़र्चे बढ़ गए हैं।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि जनता को इतना नुकसान हो रहा है, फिर भी मोदी जी इस पर अड़े क्यों हुए हैं? सिर्फ़ अमेरिका के दबाव में, ट्रंप के दबाव में। ट्रंप के पास सरप्लस इथेनॉल था, जिसे उन्होंने मोदी जी को झुकाकर भारत से ख़रीदवाने पर मजबूर कर दिया। आज इसी बारे में लाखों लोगों की पीटिशन लेकर हम प्रधानमंत्री जी को देने निकले थे, लेकिन प्रधानमंत्री जी ने मिलने से मना कर दिया। तब ये पीटिशन पुलिस के ज़रिए प्रधानमंत्री कार्यालय भिजवाई गईं।
*लोगों ने प्रधानमंत्री के नाम यह याचिका की है साइन*
याचिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा गया है कि देशभर में ई20 पेट्रोल थोपे जाने के खिलाफ भारी आक्रोश है। मुझे यह देखकर दुख होता है कि सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है और इसे थोपने पर आमादा है। सरकार के फैसलों को सही ठहराने के लिए न तो कोई तर्क है, न ही कोई विज्ञान, न इंजीनियरिंग और न ही अर्थशास्त्र। शायद इसके पीछे कोई राजनीति है, जो मेरी समझ से परे है और मैं इसे समझ नहीं पा रहा हूं।
इस देश के एक नागरिक के रूप में, मैं आपसे आग्रह करता हूं किरू
1) फ्यूल स्टेशनों पर हमें शुद्ध पेट्रोल और ई20 के बीच चयन करने का विकल्प प्रदान करें, ताकि हमें ऐसे ईंधन का उपयोग करने के लिए मजबूर न होना पड़े जो हमारे वाहनों को नुकसान पहुंचाता है।
2) ई20 की कीमत कम करें ताकि यह इसके कम कैलोरी मान और इससे मिलने वाले कम माइलेज के अनुरूप हो, जिससे हमें गुणवत्ता से समझौता किए गए उत्पाद के लिए पूरी कीमत न चुकानी पड़े।
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धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाए- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर मंतर से शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने की मांग रख कर युवाओं के अंदर उम्मीद की नई किरण जगा दी है। गुरुवार को उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके संघर्ष का समर्थन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाए। लेकिन प्रधानमंत्री ऐसा करेंगे नहीं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं सोनम वांगचुक शिक्षा में कोई क्रांति न ला दें। देश की सड़ चुकी शिक्षा व्यवस्था को एक क्रांतिकारी कदम ही ठीक कर सकता है। इसलिए देश को सोनम वांगचुक जैसा एक क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री के साथ ही क्रांतिकारी कदम दोनों की जरूरत है। इस दौरान सांसद संजय सिंह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए पूरे देश के युवा जो कॉकरोच आंदोलन के बैनर तले इकट्ठे हुए हैं, मैं उन सब लोगों को सलाम करता हूं। मैं सोनम वांगचुक को सलाम करता हूं जो अपने लिए नहीं, बल्कि युवाओं और हमारे देश के बच्चों के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर पिछले 19 दिन से अनशन कर रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि हमारे देश में ऐसे बहुत सारे टीचर्स हैं जिन्होंने पेपर लीक के खिलाफ अपने-अपने शहर से आवाज उठाई, लेकिन उनको गिरफ्तार कर लिया गया। उन टीचर्स को तरह-तरह से टॉर्चर किया गया और उनके खिलाफ एफआईआर की गई, मैं उन सब लोगों को भी सलाम करता हूं। सोनम वांगचुक एक बहुत बड़े शिक्षाविद् हैं। उन्होंने पहले भी लद्दाख और देश के लिए कई बार अनशन किए हैं और आज उन्होंने देश के लिए अपनी जान दांव पर लगाई हुई है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब कोई बच्चा कॉम्पिटिटिव एग्जाम देने जाता है तो वह सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि उसके लिए एक सपना होता है। जब वह एग्जामिनेशन हॉल में घुसता है तो उसे विश्वास होता है कि मैं अपनी मेहनत और अपनी बुद्धिमत्ता के बल पर अपना भविष्य बनाऊंगा। मैंने भी आईआईटी के पेपर दिए थे और उसमें सफल होकर आईआईटी गया था, लेकिन उन दिनों पेपर लीक नहीं होते थे। अगर उन दिनों पेपर लीक हो रहे होते तो शायद मेरा आईआईटी देने का विश्वास ही नहीं बनता। मेरे दोनों बच्चे भी आईआईटी से हैं और उनके समय पर भी पेपर लीक नहीं होते थे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ सालों से जिस तरह से देश में पेपर लीक होने लगे हैं, उससे बच्चे का वह आत्म विश्वास लड़खड़ाने लगा है कि अगर वह मेहनत करेगा और इंटेलिजेंट है तो अमीरों के बच्चों को भी पीछे छोड़ देगा। आज बच्चों का यह लड़खड़ाता हुआ आत्म विश्वास सही नहीं है और देश के लिए बहुत खतरनाक बात है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब हर साल पेपर लीक हो रहे हैं। साल 2024 में जो पेपर लीक हुआ था, सरकार ने उसके मास्टरमाइंड को बेल दिला दी। अब यह एक सिस्टम बन गया है कि हर साल पेपर लीक होते हैं, कमेटी बैठती हैं, जांच होती है, एफआईआर होती है, गिरफ्तारी होती है, बेल हो जाती है और अगले साल के पेपर लीक होने की फिर तैयारी शुरू हो जाती है। देश का युवा और ये बच्चे इसे कब तक बर्दाश्त करेंगे?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नीट पेपर लीक के बाद 20 से ज्यादा बच्चों ने सुसाइड कर लिया, लेकिन सरकार को कोई अक्ल नहीं आई। इनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती, चाहे जितने बच्चे सुसाइड कर लें। जो बच्चे सुसाइड कर रहे हैं वे हमारे घरों के बच्चे थे, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। सीबीएसई में पूरा इवैल्यूएशन सिस्टम गड़बड़ा गया, गिरफ्तार करना तो दूर की बात है, सरकार ने जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की। इतने बड़े स्तर पर पूरे देश में आंदोलन चल रहा है, फिर भी सरकार ने कोई ऐसा सिस्टम में बदलाव नहीं किया जिससे अगले साल पेपर लीक न हों। अगले साल फिर पेपर लीक होंगे और हमारे बच्चे फिर मरेंगे, फिर आत्महत्या करेंगे। यह सिस्टम कब बदलेगा? इस सिस्टम को बदलना ही पड़ेगा।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यही जंतर-मंतर था, 4 अप्रैल 2011 का दिन था और यहीं अन्ना हजारे बैठे हुए थे। उस वक्त की सरकार को भी बड़ा अहंकार था, लेकिन तीन साल के बाद वह सरकार अपने अहंकार की वजह से नहीं बची और डूब गई। आज 2026 है और मैं सरकार को कहना चाहता हूं कि वह युवाओं के कॉकरोच आंदोलन और सोनम वांगचुक की बात सुन ले, नहीं तो आज से तीन साल बाद उनका भी यही हश्र होगा, जो 2014 में उस अहंकारी सरकार का हुआ था। इस सरकार को अक्ल नहीं आ रही है और ये भी बहुत ज्यादा अहंकार में डूबे हुए हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को तो इस्तीफा देना ही चाहिए, लेकिन सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाओ और सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाओ। मुझे पता है कि प्रधानमंत्री सुनने वाले नहीं हैं। प्रधानमंत्री सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री नहीं बनाएंगे, क्योंकि उन्हें डर लगता है कि कहीं सोनम वांगचुक कोई क्रांतिकारी चीज न कर दे। आज शिक्षा व्यवस्था जितनी खराब हो गई है, उसे ठीक करने के लिए हमें क्रांतिकारी कदम ही चाहिए। बिना क्रांति के शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं होने वाली है। इसके लिए हमें सोनम वांगचुक जैसा एक क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री और क्रांतिकारी कदम दोनों की जरूरत है। उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि 20 जुलाई को ज्यादा से ज्यादा संख्या में जंतर-मंतर आना है और शांतिपूर्ण संसद मार्च को सफल बनाना है।
इस दौरान “आप” के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह श्दिनकर’ की पंक्तियों ‘समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध’ का जिक्र करते हुए घरों में बैठे लोगों से अपील की कि वे बाहर निकलकर जंतर-मंतर पहुंचें। लोगों को सोनम वांगचुक की आवाज में आवाज मिलाकर भारत सरकार और नरेंद्र मोदी को झुकने के लिए मजबूर करना है।
संजय सिंह ने आगे कहा कि मोदी जी से बड़ा नौटंकीबाज पूरी दुनिया में कोई नहीं मिलेगा। जब देश में कोरोना आया और नोटबंदी में लोग मर गए, तब वे रोने लगे। देश के प्रधानमंत्री दिन-रात सिर्फ झूठ बोलने का काम करते हैं। इसलिए मैं यकीन दिलाकर जा रहा हूं कि 20 जुलाई से संसद के अंदर सभी साथी सांसदों से बात करके हम लोग युवाओं के लिए लड़ाई लड़ने का काम करेंगे। 20 जुलाई को सोनम वांगचुक के आह्वान पर मैं भी एक कार्यकर्ता और साथी के रूप में इस आंदोलन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर आऊंगा और हमारे अन्य साथी भी यहां पहुंचेंगे।
संजय सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने भरोसा दिलाया है कि हम इस आंदोलन को हर तरीके से अपना समर्थन देंगे। हम अन्य राजनीतिक दलों और जन आंदोलनों से भी इस आंदोलन को समर्थन देने की अपील करते हैं, क्योंकि सोनम वांगचुक कोई अपनी निजी लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि देश के करोड़ों नौजवानों, हिंदुस्तान के भविष्य और आने वाले कल की लड़ाई लड़ रहे हैं।
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Mahatma Gandhi की समाधि पर जाकर केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हुए नतमस्तक, सत्याग्रह के मार्ग पर डटे रहने की मांगी शक्ति
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया मंगलवार को राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी की समाधि पर नतमस्तक हुए। उनके साथ पार्टी के विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सत्याग्रह की राह दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन करते हुए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं कि हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।
अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि आज मनीष सिसोदिया और अन्य साथियों के साथ राजघाट पहुंच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन किया। मेरी बापू से यही प्रार्थना है कि उनके दिखाए ‘सत्याग्रह’ के मार्ग पर चलने के हमारे संकल्प को वे सदैव शक्ति दें। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से, सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।
वहीं, मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मामला अदालत का है। हम अदालत का बहुत सम्मान करते हैं। हम अपने देश की न्याय प्रणाली का बहुत सम्मान करते हैं, क्योंकि इसी न्याय प्रणाली और न्यायपालिका ने हमें बेल दिलवाई और आरोप मुक्त किया है। आज हम लोग अगर आजाद घूम रहे हैं, तो हमारी न्याय प्रणाली की वजह से ही घूम रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, जिनकी वजह से हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। वे सभी हमने जज साहिबा को लिखी चिट्ठी में बयां कर दिए हैं।
उधर, ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बापू समाधि पर नतमस्तक होने के बाद एक्स पर कहा कि मंगलवार को राजघाट जाकर पूज्य बापू की समाधि पर अरविंद केजरीवाल के साथ नतमस्तक हुआ। महात्मा गांधी जी ने हमें हमेशा सत्य के रास्ते पर अडिग रहने और सत्य के लिए आत्मबल के साथ सत्याग्रह करने की प्रेरणा दी है। आज उसी मार्ग पर चलने का संकल्प और मजबूत हुआ।
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