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Punjab की Jails में Sniffer Supercops का पहरा! Mann सरकार ने जेलों में नशे की जड़ें काटने का ऐतिहासिक फैसला!

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पंजाब सरकार ने जेलों में नशे की जड़ें काटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में सोमवार, 13 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य की छह प्रमुख केंद्रीय जेलों में विशेष रूप से प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स तैनात किए जाएंगे। यह पहल ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ और ‘ड्रग-फ्री पंजाब’ अभियान का हिस्सा है।

क्यों यह कदम जरूरी था?

राज्य की 24 जेलों में से 15 जेलों में ड्रग्स का सक्रिय नेटवर्क पाया गया। ड्रोन, मोबाइल फोन और विजिटर्स के जरिए हेरोइन, ओपियेट्स, लोकल लाहन जैसी ड्रग्स आसानी से कैदियों तक पहुँच रही थीं। जेल स्टाफ की मिलीभगत से नशा बढ़ रहा था और सुधार की प्रक्रिया पर भी असर पड़ रहा था।

कैसे काम करेंगे स्निफर डॉग्स?

  • ये लेब्राडोर रिट्रीवर्स नस्ल के डॉग्स BSF और CRPF के कैनाइन प्रोग्राम से खरीदे जाएंगे।
  • इनकी ट्रेनिंग इस तरह की गई है कि ये हेरोइन, अफीम डेरिवेटिव्स, लोकल लाहन, मोबाइल फोन और ड्रोन की गंध पहचान सकें।
  • इन डॉग्स की मदद से जेल में विजिटर्स की बाडी-बैग सर्च, सरप्राइज इंस्पेक्शन और सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।
  • लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, नाभा और बठिंडा जैसी जेलों में इन्हें तैनात किया जाएगा।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “ये डॉग्स फोर्स मल्टीप्लायर की तरह काम करेंगे और ‘जीरो टॉलरेंस फॉर DRUGS’ नीति को पूरा करेंगे।”

खरीद और ट्रेनिंग

  • प्रत्येक डॉग की कुल लागत 15 लाख रुपये (बेस 2.5 लाख + ट्रेनिंग और उपकरण) है।
  • खरीद प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष छूट दी गई।
  • फिल्लौर पंजाब पुलिस अकादमी में जेल स्टाफ को भी अतिरिक्त ट्रेनिंग दी जाएगी।

पहले से मिली सफलता

  • एक्साइज विभाग के दो स्निफर डॉग्स ने पहले ही अवैध लाहन के कई मामलों का पर्दाफाश किया।
  • जेल विभाग की मौजूदा कैनाइन यूनिट्स ने मोबाइल फोन तस्करी रोकने में ‘कमांडेबल सर्विस’ दी।
  • NDPS मामलों में 25% कमी आई, और पिछले साल 1,100 किलो से ज्यादा हेरोइन बरामद हुई।

सरकार का संदेश

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा,

“नशे पर सख्ती सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, यह पूरे समाज का अभियान है। अगर जेलें सुधरेंगी तो पंजाब सुधरेगा। हमारा लक्ष्य है कि पंजाब के युवा नशे के जाल से मुक्त हों और अपने सपनों को पूरा करें।”

सोशल मीडिया पर भी इस पहल की खूब सराहना हो रही है। एक यूजर ने लिखा,

“स्निफर डॉग्स जेलों में सुरक्षा की दहाड़ हैं! भगवंत मान सरकार ने साबित कर दिया कि सुशासन से कुछ भी संभव है।”

पंजाब सरकार का यह कदम जेलों में ड्रग्स के नेटवर्क को तोड़ने, सुरक्षा बढ़ाने और कैदियों को सुधार की राह पर लाने के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। ‘ड्रग-फ्री पंजाब’ का सपना अब और करीब लगता दिख रहा है।

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बेअदबी के दोषियों को 15 साल तक शरण देने वालों को संगत कभी माफ नहीं कर सकती-CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज स्पष्ट रूप से कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के दोषियों को 15 साल तक शरण देने वालों को संगत कभी माफ नहीं कर सकती। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस घिनौने अपराध के जिम्मेदार लोग जल्द ही जेल की सलाखों के पीछे होंगे।

पटियाला जिले के विधानसभा क्षेत्र समाणा के गांव गाजेवास में ‘लोक मिलनी’ के दौरान मुख्यमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026’ बेअदबी करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए कठोर से कठोर सजा का प्रावधान करेगा।

मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के जन-पक्षीय शासन का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों का पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों पर खर्च किया जा रहा है, जबकि 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है और 68,000 से अधिक युवाओं ने बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के सरकारी नौकरियां हासिल की हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा: “आज समाणा विधानसभा क्षेत्र के गांव गाजेवास में ‘लोक मिलनी’ के दौरान लोगों से संपर्क स्थापित किया। लोगों की ओर से भरपूर समर्थन और अपार प्यार मिला। गांव गाजेवास के विकास के लिए गांव के सरपंच को 51 लाख रुपये की अनुदान राशि का चेक सौंपा। महिलाओं के लिए वित्तीय सुरक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं और हर गांव में बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना हमारी मुख्य प्राथमिकता है।”

पोस्ट के अंत में लिखा, “हमारा एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर घर को बेहतर सुविधाएं मिलें और पंजाब को हर क्षेत्र में नंबर एक राज्य बनाया जा सके। लोगों के आशीर्वाद और सहयोग से हम एक बार फिर रंगला पंजाब बनाने के लिए मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। इंकलाब जिंदाबाद।”

लोक मिलनी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन अपराधियों को सिख पंथ और गुरु साहिबान के साथ की गई गद्दारी के लिए कभी माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “बादलों के राज के दौरान बेअदबी की सबसे ज्यादा घटनाएं हुईं, लेकिन किसी को भी सजा नहीं दी गई। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय निर्दोष सिख संगत पर गोली चलाने के आदेश दिए गए। बादलों के बाद सत्ता में आए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस घिनौने अपराध के दोषियों को सजा देकर सिख संगत की भावनाओं को शांत करने के लिए कुछ नहीं किया।”

उन्होंने कहा कि असल में ये लोग मानवता के खिलाफ अक्षम्य अपराध करने वाले समाज विरोधी तत्वों से मिले हुए थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यही कारण है कि ये लोग और इनके कठपुतलियाँ हुए अब ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ का विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि वे अपने पापों के लिए कानून की कटघरे में बेनकाब हो जाएंगे। इन नेताओं को अपने पापों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा और वे जल्द ही जेल की सलाखों के पीछे होंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल को सत्ता में आने के सपने देखने बंद कर देने चाहिए, क्योंकि अब सिख कौम के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए उनकी जेल जाने की बारी है। उन्होंने कहा, “मैं ईश्वर का आभारी हूं जिन्होंने मुझे ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ बनाने का अवसर प्रदान किया। जब भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं हुईं, करोड़ों लोगों की मानसिकता को गहरा आघात पहुंचा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ईश्वर ने उन्हें कानूनी विशेषज्ञों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद यह विधेयक लाने की बुद्धि और शक्ति प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने इस विधेयक को बहुत सावधानी से तैयार किया है ताकि भविष्य में कोई भी संशोधन या कमियां इसे कमजोर न कर सकें। यह विधेयक समाज विरोधी तत्वों के लिए भविष्य में ऐसा कोई भी पाप करने से रोकने का काम करेगा और कोई भी कभी भी इस तरह का घिनौना अपराध करने की हिम्मत नहीं कर सकेगा। पहले लोग यह कहकर फांसी के फंदे से बच जाते थे कि ‘उनका दिमाग खराब है’ या ‘वह मानसिक रूप से बीमार है’, और आरोपी आजाद घूमते थे।”

हालांकि, मुख्यमंत्री ने सवाल किया, “अगर कोई वास्तव में मानसिक रूप से ठीक नहीं है तो वह सिर्फ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही निशाना क्यों बनाता है? वह किसी रेल इंजन से क्यों नहीं टकराता या बिजली की नंगी तारों को हाथ क्यों नहीं लगाता? सच्चाई यह है कि ऐसी हरकतें अक्सर जानबूझकर और साजिश के तहत की जाती थीं। इसलिए हमने कानून में एक धारा जोड़ी है कि अगर किसी को चिकित्सकीय रूप से मानसिक रोगी घोषित किया जाता है, तो उनके संरक्षक, माता-पिता, अभिभावक या देखभाल करने वालों को भी आपराधिक मामलों का सामना करना पड़ेगा।”

अकालियों पर तीखा हमला करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जब वे सत्ता में थे तो वे कभी भी ऐसा कानून बनाने के लिए इच्छुक नहीं थे। उन्होंने कहा, “सच्चाई यह है कि उनकी नीयत में खोट थी। अकालियों ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए बेअदबी की घटनाएं होने दीं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली दल अब ननद-भाभी की पार्टी बनकर रह गया है क्योंकि ननद सांसद है और भाभी विधायक है। उन्होंने कहा, “सुखबीर बादल साल 2022 की हार के सदमे से अभी तक बाहर नहीं आ सके। पूर्व उप मुख्यमंत्री कहते हैं कि उन्होंने अपने सभी विधायकों को विधानसभा में न जाने के निर्देश दिए हैं, वे यह भूल गए हैं कि शिरोमणि अकाली दल का सिर्फ एक ही विधायक बचा है और वह भी उनका करीबी रिश्तेदार है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा यह अच्छी तरह जानते हैं कि वे राजनीतिक रूप से उनका मुकाबला नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने फर्जी (नकली) वीडियो के जरिए धार्मिक आधार पर उनकी छवि खराब करने के लिए गठजोड़ कर लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेताओं ने अपने लंबे और दमनकारी शासनकाल के दौरान पंजाब को बेरहमी से लूटा तथा आम लोगों पर अनेक अक्षम्य अत्याचार किए। उन्होंने कहा, “उन्होंने पंजाबियों के दिलों को गहरे घाव दिए और राज्य को बर्बाद करने के लिए माफिया को संरक्षण दिया। अकाली नेतृत्व को कभी माफ नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह राज्य की कई पीढ़ियों के भविष्य को बर्बाद करने का जिम्मेदार है। उनके संरक्षण में नशे का कारोबार फला-फूला और उनके लंबे कुशासन के दौरान यह पूरे प्रदेश में फैल गया।”

सुखबीर बादल पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेतृत्व जनता के बीच अपना आधार खो चुका है और अब अपनी रैलियों में भीड़ दिखाने के लिए पैसे देकर लोगों को लाया जाता है। उन्होंने कहा, “अकाली दल की हर रैली में वही लोग दिखाई देते हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक राजनीतिक दल लगातार किसी न किसी आरोप के माध्यम से उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरुद्वारों के बाहर मेरे बहिष्कार के पोस्टर लगाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन जब अकाली दल और सुखबीर बादल ने बेअदबी की घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार की थी, तब उनके खिलाफ ऐसे पोस्टर क्यों नहीं लगाए गए?”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सवाल किया, “2 दिसंबर को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष सुखबीर बादल ने अपने गुनाह स्वीकार किए, गलत कार्यों को माना, गोलीबारी की घटनाओं की जिम्मेदारी ली और यह भी माना कि संगत के खिलाफ आदेश दिए गए थे। क्या उस समय किसी ने गुरुद्वारों के बाहर उनके बहिष्कार के पोस्टर लगाए थे?”

मुख्यमंत्री ने कहा कि संगत समझदार है और जनता सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “ये लोग अहंकार में काम कर रहे हैं क्योंकि उनके पास मेरे खिलाफ उठाने के लिए कोई वास्तविक मुद्दा नहीं बचा है। जब मैं गांवों, सामाजिक कार्यक्रमों और जनसभाओं में जाता हूं तो भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। विपक्ष इस जनसमर्थन को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। इसी हताशा में पारंपरिक राजनीतिक दल मेरे खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाकर बेहद निम्न स्तर की राजनीति कर रहे हैं, जिसे जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने अंतिम दौर में है और बहुत जल्द समाप्त हो जाएगी क्योंकि उसके पास न तो जनता के लिए कोई दृष्टि है और न ही पंजाब के विकास का कोई स्पष्ट विजन। उन्होंने कहा, “इनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल कर पंजाब के खजाने को लूटना है, लेकिन उनके ये सपने कभी पूरे नहीं होंगे।”

सत्ता हासिल करने के सपने देखने वाले कांग्रेस नेताओं पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि कांग्रेस एक बिखरा हुआ घर बन चुकी है, जो अपनी अंदरूनी कलह के कारण स्वयं ढह जाएगी। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन्हें एकजुट करने आने वाले शीर्ष कांग्रेस नेताओं को इनके नामों का सही उच्चारण तक नहीं आता।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी खजाने के प्रत्येक पैसे का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ जनता के कल्याण के लिए कर रही है। उन्होंने कहा, “राज्य के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। जनता के टैक्स का पैसा जनता का है और हम उसे विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के निर्माण पर खर्च कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनता के हित में अनेक ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। इनमें घरों को मुफ्त बिजली, 68,000 से अधिक युवाओं को बिना भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरियां, बेहतर सड़कें, टोल प्लाजा बंद कर प्रतिदिन लगभग 70 लाख रुपये की बचत, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं तथा मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है। उन्होंने कहा, “जब हमारी सरकार बनी थी, तब सिंचाई के लिए केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग हो रहा था, जो आज बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है। गांवों के विकास के लिए भी लगातार अनुदान दिए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ शुरू की है, जो देश में अपनी तरह की पहली योजना है। इसके तहत पंजाब के प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह गर्व की बात है कि पंजाब ऐसा व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवरेज देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस योजना के तहत अब तक लोग 650 करोड़ रुपये से अधिक का मुफ्त इलाज करा चुके हैं।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ‘मावां धीयां सतिकार योजना’ के तहत 1 जुलाई से 18 वर्ष से अधिक आयु की महिला लाभार्थियों को वित्तीय सहायता मिलनी शुरू हो जाएगी। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह तथा अन्य सभी वर्गों की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसकी जानकारी लाभार्थियों को उनके मोबाइल फोन पर भेजी जाएगी। उन्होंने कहा, “राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। जो महिलाएं पहले से सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही हैं, वे भी इस योजना की पात्र होंगी। पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है और इसके लिए राज्य सरकार ने 9,300 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।”

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जो ‘राम‘ के ना हुए, वो ‘राष्ट्र’ के क्या होंगे, चंदा चोर पार्टी का सामाजिक बहिष्कार हो- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भगवान श्रीराम के घर में अरबों रुपए की चोरी करने वाले सभी राक्षसों को सरेआम फांसी पर लटकाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जो ‘राम‘ के ना हुए, वो ‘राष्ट्र’ के क्या होंगे। पूरे देश में चंदा चोर पार्टी का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। क्योंकि ट्रस्ट, ट्रस्ट के लोग और राम के घर डकैती करने वाले सब चंदा चोर पार्टी के हैं। चंदा चोर पार्टी छोटे प्यादों को फंसाकर राम के घर बड़ी डकैती करने वालों को बचा रही है। ऐसे में करोड़ों हिन्दुओं की आत्मा को तभी शांति मिलेगी, जब बड़े डकैतों को फांसी की सजा होगी। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन्होंने चोरी की, उन्हीं पर कार्रवाई की जिम्मेदारी है। फर्जी एसआईटी, फर्जी एफआईआर और फर्जी गिरफ्तारी, छोटे प्यादों को फंसाकर बड़े अपराधियों को बचाया गया।

अयोध्या में प्रेसवार्ता कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भगवान राम के घर में महा डकैती हो गई है। भगवान राम के आभूषण, उनका हार, उनकी पादुका, उन पर चढ़ाए गए चांदी, सोना, हीरे-जवाहरात, करोड़ों-अरबों रुपए का कैश और ना जाने क्या-क्या चोरी हो गया है। इस चोरी में बहुत बड़े-बड़े राक्षस शामिल हैं। भगवान राम पर करोड़ों-करोड़ों लोगों की आस्था है और उन करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है। लोग आहत हुए हैं। मैं स्वयं बहुत आहत हुआ और इसीलिए आज मैं भगवान राम के दर्शन करने के लिए राम मंदिर गया।

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि जिन लोगों ने चोरी की है और जो इस महा डकैती में शामिल हैं, बदकिस्मती से उन्हीं को कार्रवाई भी करनी है। जाहिर तौर पर वह अपने खिलाफ तो कार्रवाई करेंगे नहीं, वह पूरी तरह से अपने को बचाने में लगे हुए हैं। ये जो फर्जी एसआईटी बनी और गुरुवार को जो फर्जी एफआईआर हुई, उस फर्जी एफआईआर में आठ छोटे-छोटे प्यादों को आरोपी शामिल किया गया। कोई बड़े नाम नहीं हैं। एक तरफ तो इतनी बड़ी महा डकैती हुई और दूसरी तरफ इसमें जितने बड़े-बड़े राक्षस शामिल हैं, उनको बचाने की कोशिश की जा रही है। यह एक तरह से सभी हिंदुओं के जले पर नमक छिड़कने वाली बात है। लोगों का कहना है कि उनकी आत्मा को तब तक शांति नहीं मिलेगी जब तक चोरी करने वाले इन बड़े-बड़े लोगों को सरेआम फांसी की सजा नहीं दी जाएगी।

अरविंद केजरीवाल ने कुछ उदाहरण देते हुए कहा कि सिंधी एसोसिएशन ने 26 जनवरी 2021 को 200 किलो चांदी दान में दी। उन्हें रसीद नहीं मिली और उन्होंने रसीद की जिद भी नहीं की। उन्हें पूरा यकीन था कि भगवान के यहां चंदा चढ़ा रहे हैं, इसमें रसीद की क्या जरूरत है। बहुत लोग जाते हैं भगवान के यहां चंदा चढ़ाते हैं, रसीद कौन मांगता है। 5 साल हो गए उन्होंने कभी रसीद की जिद नहीं की, लेकिन अब जब उन्होंने यह सारा मामला जाना तो उनकी भी रूह कांप गई। अब वे पूछ रहे हैं कि हमारी 200 किलो चांदी कहां गई? उनका विश्वास डगमगा गया। भगवान राम पर उनकी अटूट श्रद्धा है, लेकिन मंदिर को चलाने वाले और उनके ऊपर के आकाओं के ऊपर उनका विश्वास डगमगा गया है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि रोज लाखों श्रद्धालु मंदिर में आते हैं और चढ़ावा चढ़ाते हैं। बताया जा रहा है कि रोज 12 से 14 लाख रुपए का चंदा मंदिर में आया करता था। जब से यह खबरें मीडिया में आई हैं, यह घटकर 1 लाख रुपए से भी कम हो गया है। लोगों की आस्था को बहुत भारी ठेस पहुंची है। ऐसे ढेरों उदाहरण हैं। किसी रस्तोगी जी ने दो दीपक दान में दिए, जिसमें से एक दीपक पर अखंड ज्योति जलाई गई। बता रहे हैं कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद उस दीपक का कोई अता-पता नहीं है। बहुत सारे लोग अब अपने-अपने चंदे का हिसाब मांग रहे हैं। जिन लोगों ने अपनी जमीनें, गहने और अपने घर का पूरा सामान बेचकर सब कुछ भगवान राम पर लुटा दिया, आज उनकी आस्था को भारी ठेस पहुंची है।

अरविंद केजरीवाल ने याद दिलाया कि भगवान राम ने अपने पिता दशरथ और माता कैकेयी के कहने पर सवेरे होने वाले अपने राज्याभिषेक को छोड़कर एक मिनट के अंदर सत्ता को लात मार दी और मुस्कुराते हुए 14 साल का वनवास स्वीकार कर लिया। ऐसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के नाम का गलत इस्तेमाल करके और पिछले 30 साल से भगवान राम का मंदिर बनाने के नाम पर चंदा चोर पार्टी सत्ता में आई। जब से ये सत्ता में आए हैं, तब से इन्होंने राम मंदिर को अपनी पैसे की हवस का शिकार बना दिया है। रोज कुछ ना कुछ निकल रहा है।

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि राम मंदिर के नाम पर जमीनों की भी चोरी हुई है और जमीनों के जरिए इन्होंने पैसे को साइफन ऑफ किया है। इसका एक उदाहरण है कि कुसुम पाठक और हरीश पाठक ने 18 मार्च 2021 को अपनी सवा हेक्टेयर जमीन 2 करोड़ रुपए में चंदा चोर पार्टी से संबंधित दो लोगों को बेची। मात्र 10 मिनट के अंदर मंदिर के ट्रस्ट ने 2 करोड़ की वही जमीन चंदा चोर पार्टी के लोगों से 18 करोड़ रुपए में खरीद ली। इसका मतलब 16 करोड़ रुपए ट्रस्ट ने भगवान राम के साइफन ऑफ कर दिए। ऐसे ढेरों उदाहरण हैं जिनकी कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन जिन लोगों को कार्रवाई करनी है, वे अपने खिलाफ एक्शन नहीं लेंगे। वे छोटे-छोटे कैशियर, चौकीदार और माली को पकड़ेंगे, ऊपर बैठे हुए बड़े लोगों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण में भी आरोप लग रहे हैं कि हर टेंडर के अंदर कमीशन खाया गया और 2 रुपए का काम 10-20 रुपए में कराया गया। और अब जो निकल कर आ रहा है कि मंदिर बनने के समय और मंदिर चालू होने के बाद जितना चढ़ावा आया, उस चढ़ावे की बड़े स्तर के ऊपर चोरी की गई है।

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि हिंदुओं ने चंदा चोर पार्टी को प्यार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन चंदा चोर पार्टी ने हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। चंदा चोर पार्टी ने हिंदुओं को जिस तरह का धोखा दिया है, शायद ही भारत के इतिहास में किसी ने हिंदुओं के साथ इतना बड़ा छल किया होगा। यह जो ट्रस्ट है, यह इनका है, इसके मेंबर और ट्रस्टी सब इनके हैं। मंदिर का सारा मैनेजमेंट इनका है। मंदिर में बहुत बड़े पैमाने पर चोरी और महा डकैती हुई है और अब उस डकैती पर पर्दा ढाकने का काम भी यही लोग कर रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर रोज चोरी हो रही थी, तो क्या बड़े लोगों को पता नहीं था? अगर किसी मंदिर की मूर्ति चोरी हो जाए, तो वह एक घटना मानी जा सकती है, लेकिन जहां रोज इतने बड़े स्तर पर चोरी हो रही हो, शिकायतें हो रही हों और 8 महीने के सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग गायब कर दी गई हो, तो इसका मतलब है कि यह बहुत ऊपर तक की बात है। मुख्य प्रश्न यह है, जो पूरा देश और हिंदू समाज जानना चाहता है कि कितने करोड़ और अरबों रुपए की चोरी हुई और वह सारा पैसा गया कहां? वह सारा पैसा ये आठ कैशियर नहीं ले गए जिनके खिलाफ एफआईआर हुई है। जो अरबों रुपए का पैसा, सारे हीरे-जवाहरात, चांदी, पादुका, हार और भगवान के आभूषण चोरी हो गए, वह अयोध्या के बाहर गया, कहां गया और उसका डेस्टिनेशन कहां है? इसके तार बहुत ऊपर तक हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चोरी सामने आए 18 दिन हो गए। जब मैं गुरुवार को लखनऊ एयरपोर्ट पर उतरा और अयोध्या की तरफ आ रहा था, एफआईआर उसके बाद हुई है। एफआईआर करने के लिए भी इतनी जद्दोजहद करनी पड़ी। मैंने सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए सुना कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने चंपत राय से रिकॉर्ड और हिसाब-किताब मांगा, लेकिन चंपत राय ने देने से मना कर दिया। इस देश में एक ऐसा व्यक्ति भी है जो मोदी जी को मना भी कर सकता है और मोदी जी ने उसे मान भी लिया, कोई रिमाइंडर तक नहीं भेजा। इससे समझा जा सकता है कि इसके तार कहां तक हैं। चंपत राय के पास ऐसी क्या जानकारी है जिसके सामने मोदी जी भी बेबस हैं?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जिस चंदा चोर पार्टी ने इस मुद्दे को सबसे ज्यादा भुनाया, उसके एक भी नेता ने चंदा चोरी की आलोचना नहीं की और इसके खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला। पूरे हिंदू समाज की एक ही मांग है कि जिन राक्षसों ने यह काम किया है, उन्हें सरेआम फांसी पर लटकाया जाए। चंदा चोरी, लोगों की आस्था और विश्वास के साथ खिलवाड़ एक महापाप है और इसे करने वाले सभी राक्षसों को सरेआम फांसी पर लटकाया जाए।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जैसा देखने में आ रहा है, ये लोग कुछ नहीं करेंगे, ऊपर से नीचे तक सब मिले हुए हैं। अगर प्रधानमंत्री जी चंपत राय के सामने इतने बेबस हैं, तो सोचा जा सकता है कि कौन कहां कितना मिला हुआ है। लेकिन मेरी समाज से विनती कि कानून अपना काम करे या ना करे, हम सब मिलकर कानून से काम कराएंगे। भगवान राम भी इन लोगों को दंड देंगे। आज मैं भगवान राम के सामने नतमस्तक हुआ, वे भी इनको दंड देंगे। लेकिन यह पूरे समाज की भी जिम्मेदारी है कि जितने भी चंदा चोर, उनके सहयोगी या समर्थक हैं, उन सबका सामाजिक बहिष्कार करना शुरू कर दीजिए, नहीं तो आप भी पाप के भागीदार बनेंगे।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इन लोगों को लगता था कि राम मंदिर में भगवान राम की मूर्ति मिट्टी की है। बड़ी इन्हें यह पता नहीं है कि भगवान राम कितने शक्तिशाली हैं और उनकी ताकत क्या है। इन्हें लगता था कि बड़ी आसानी से डकैती कर लेंगे। मैं इनको कहना चाहता हूं कि ये राम के सहारे आए थे, अब भगवान राम ही इनको भगाएंगे। पूरे हिंदू समाज की मांग है कि ट्रस्ट के अंदर बैठे इन नेताओं और अफसरों का मंदिर से क्या लेना-देना है? इन्होंने अपने प्यादों को बिठा रखा है। आज हम हनुमानगढ़ी गए थे, जिसका संचालन साधु-संत करते हैं। साधु-संत निर्माेही होते हैं। वहां सदियों से करोड़ों का चंदा चढ़ता है, लेकिन आज तक एक नए पैसे का आरोप नहीं लगा। वह मंदिर सदियों से चल रहा है। भगवान राम का मंदिर भी साधु-संतों और धर्माचार्यों को सौंपा जाए। इन अफसरों और नेताओं को उसके चंगुल से हटाया जाए और ट्रस्ट में केवल धर्माचार्यों को ही रखा जाए।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं लोगों से कहना चाहता हूं कि जो राम के नहीं हुए, जिन्होंने भगवान राम को लूट लिया, वे आपके क्या होंगे? कुछ अंधभक्तों को लगता था कि ये लोग बड़े ईमानदार हैं और उन्हें इनकी ईमानदारी पर बड़ा भरोसा था, वे अंधभक्त जान लें कि जिन्होंने राम को नहीं छोड़ा, वे राष्ट्र को क्या छोड़ेंगे? मैं पूरे देश से अपील करना चाहता हूं कि यह धर्म युद्ध है, इसके लिए सब लोगों को उठना और खड़ा होना पड़ेगा। सब लोगों को इस धर्म युद्ध की लड़ाई लड़नी पड़ेगी। आज मैं तो भगवान राम के मंदिर में कसम खाकर आया हूं कि जब तक इन राक्षसों को फांसी पर नहीं चढ़वा दूंगा, तब तक चैन की सांस नहीं लूंगा।

केजरीवाल का योगी पर पलटवार, ‘चंदा चोरों का साथ छोड़िए, ये आपकी कुर्सी भी नहीं छोड़ेंगे’

अरविंद केजरीवाल ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर पलटवार करते हुए कहा कि कि महाराज जी, ये जो चंदा चोर हैं, ये आपको भी हटाने का पूरा षड्यंत्र रच रहे हैं और आपकी भी कुर्सी के पीछे पड़े हैं। आप महापाप करने वालों का साथ क्यों दे रहे हैं? मेरा संघर्ष यह है कि इन चंदा चोरों और राक्षसों को सरेआम फांसी दी जानी चाहिए। इसमें मेरा साथ दीजिए और इन महापापियों का साथ मत दीजिए। उन्होंने एक्स पर कहा कि महाराज जी, आप चंदा चोरों का क्यो साथ दे रहे हो? ये चंदा चोर आपको भी हटाने का षड्यंत्र कर रहे हैं। आपकी कुर्सी भी नहीं छोड़ेंगे। भगवान राम के घर हुई महा डकैती के राक्षसों को सरे आम फांसी दिलवाने के मेरे संघर्ष में आप मेरा साथ दीजिए। इस महापाप में भागीदार मत बनिए।

उधर, “आप” के राज्यसभा सदस्य व उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने कहा कि गुरुवार को जब अरविंद केजरीवाल प्रभु श्री राम के दर्शन करने अयोध्या पहुंचे, तो आनन-फानन में चंदा चोरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जब अरविंद केजरीवाल ने इस मामले को मजबूती से उठाया, तो आज यह जानकारी मिल रही है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी हो गया है। राम मंदिर में हुई इस चंदा चोरी की घटना से अरविंद केजरीवाल और हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले देश के करोड़ों लोग बेहद आहत और पीड़ित हैं।

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गांवों का सर्वांगीण विकास ही पंजाब को देशभर में नंबर एक राज्य बनाएगा: CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सरपंचों को संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी निष्ठा से काम करने का आह्वान किया। यहां ‘सरपंच मिलनी’ के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरपंचों को 15 अगस्त से 10,000 रुपये प्रति माह मानदेय मिलेगा। उन्होंने सरपंचों से सार्वजनिक धन के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करने, गुटबाजी को खत्म करने, आपसी सामुदायिक एकता बढ़ाने और गांवों को नशा मुक्त, स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयासों का नेतृत्व करने की अपील भी की।

‘सरपंच मिलनी’ के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंचायतों को लोकतंत्र की नींव के रूप में जाना जाता है क्योंकि पंचायतों के पास अपार शक्तियां होती हैं और इनके फैसलों को पूरे गांव द्वारा सम्मानपूर्वक माना जाता है। ग्रामीणों के हितों की रक्षा करना और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना हर सरपंच का नैतिक कर्तव्य है। हमारे देश की लगभग 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है, जिस कारण पंचायती राज संस्थाओं को लोकतंत्र की धुरी माना जाता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “ये संस्थाएं राज्य सरकार की जन-पक्षधर और विकास-उन्मुख योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम करती हैं। राज्य सरकार नीतियां बनाती है, जबकि सरपंच और पंच इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। मैं सभी सरपंचों से अपील करता हूं कि वे आज से ही विकास कार्यों के लिए स्वयं को पुनः समर्पित करें ताकि लोगों को इसका भरपूर लाभ मिल सके।”

एक बड़ी घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरपंचों को 15 अगस्त से 10,000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। इससे पहले पिछली सरकारों ने सरपंचों को 1,200 रुपये मानदेय देने का वादा किया था, लेकिन वह फैसला कभी अमल में नहीं आया और सरपंचों को अपना हक लेने के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। हालांकि, हमारी सरकार ने सरपंचों को 2,000 रुपये मानदेय देना शुरू किया था, जिसे अब बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार उन कार्यों के लिए अनुदान जारी कर रही है जो सार्वजनिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं और ये पहले से ही पंचायतों की सीधी निगरानी में हैं। इसी तरह गांवों के विकास से संबंधित विभिन्न कार्य भी सरपंचों के नेतृत्व में किए जाते हैं। सरपंचों को इन कार्यों और सेवाओं की निष्ठापूर्वक निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। यह हर सरपंच का नैतिक कर्तव्य है कि वह करदाताओं के एक-एक पैसे के पूरी तरह पारदर्शी ढंग से उपयोग को सुनिश्चित करे।”

सरपंचों को आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरपंच विकास कार्यों में किसी भी प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप से दूर रहें। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले समय में गांवों में कई काम बड़े पैमाने पर गुटबाजी के कारण पटरी से उतर गए। गांवों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए सरपंचों को गांवों में गुटबाजी खत्म करने को मुख्य प्राथमिकता देनी चाहिए। लोकतंत्र में बहुमत हासिल करने वाला व्यक्ति या पार्टी विजेता होती है, लेकिन एक बार चुने जाने के बाद सरपंच पूरे गांव का होता है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “सरपंचों को गांव के हर निवासी के साथ बराबर का व्यवहार करना चाहिए और हर फैसला निष्पक्षता से लिया जाना चाहिए। ऐसे कई सरपंच हैं जिन्होंने अपनी समझदारी और दूरदर्शिता के कारण अपने गांवों की तस्वीर बदल दी है। सरपंचों को अपने गांवों को नशा मुक्त बनाने की ओर मुख्य जोर देना चाहिए ताकि नौजवानों को नशे की लानत से दूर किया जा सके। उन्हें गांवों में आपसी एकता, शांति और सामुदायिक माहौल को मजबूत करने के लिए भी कड़ी मेहनत करनी चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “गांवों में विकास और समृद्धि की रफ्तार को और बढ़ावा देना समय की जरूरत है। पंजाब सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास और तरक्की के लिए प्रतिबद्ध है और इस नेक कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। सरपंच सरकार और गांवों के बीच एक कड़ी होते हैं, इसलिए आपको गांवों के विकास में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।”

सरपंचों को पूर्ण सहयोग का विश्वास दिलाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दावा किया, “गांवों में विकास कार्य कराने के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है। अपने गांवों के विकास कार्यों को प्राथमिकता दें ताकि राज्य सरकार उन पर काम शुरू करवा सके। मैं आप सभी से अपील करता हूं कि राज्य के गांवों की तस्वीर बदलने के लिए एक रचनात्मक अभियान शुरू करके सक्रिय भूमिका निभाएं ताकि हम सब मिलकर ‘रंगला पंजाब’ (खुशहाल पंजाब) का सृजन कर सकें। गांवों को स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कड़ी मेहनत करें। राज्य सरकार इस नेक कार्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य में सबसे कठिन चुनाव सरपंच का होता है क्योंकि सरपंच ही होते हैं जो जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े होते हैं। सरपंच गांव का मुखिया होता है और एक अच्छा सरपंच गांव का नक्शा बदल सकता है और अपने लोगों की समृद्धि को सुनिश्चित कर सकता है। यह ‘सरपंच मिलनी’ गांव स्तर पर समस्याओं को समझने के उद्देश्य से शुरू की गई एक अनोखी पहल है। अनुदान की कोई कमी नहीं है, लेकिन गांवों में इनका सही मायने में उपयोग होना सुनिश्चित किया जाए।”

उन्होंने दोहराया, “दोष किसी पर भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन सही सरपंच गांव के विकास की धुरी होते हैं। पहले, पिछली सरकारों का अनुदानों में अपना हिस्सा होता था, जिस कारण विकास प्रभावित होता था। आज गांवों में बड़े अनुदान आ रहे हैं और वह दिन दूर नहीं जब पंजाब के गांवों की इस पैसे से पूरी तरह तस्वीर बदल जाएगी। विकास कार्यों को प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि ये फंड इस तरीके से खर्च किए जाएं कि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिले।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “सबसे पहले पुस्तकालयों, स्कूलों, सोलर लाइटों और फिर गलियों-नालियों के निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। राज्य के विकास को तेज करने के लिए यह बेहद आवश्यक है और पंजाब को देश में अग्रणी बनाने के लिए यह समय की जरूरत है। मैं हर सरपंच को गांवों के सर्वांगीण विकास और अपने लोगों की समृद्धि के लिए सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग और मदद का विश्वास दिलाता हूं।”

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