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Punjab में 19,491 KM KM Link Roads का होगा निर्माण, CM Bhagwant Mann का बड़ा ऐलान

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पंजाब के लोगों के लिए त्योहारी सीजन की शुरुआत खुशखबरी के साथ हुई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य की जनता को एक बड़ा तोहफा देते हुए 4,150 करोड़ रुपये की लागत से 19,491 किलोमीटर लिंक सड़कों के निर्माण और मरम्मत का ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत तरनतारन से की गई, जिसे उन्होंने गुरु अर्जन देव जी, गुरु तेग बहादुर जी और बाबा बुढ़ा जी की पवित्र धरती बताया।

ग्रामीण इलाकों के लिए बड़ा कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रोजेक्ट पंजाब के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मज़बूती देगा। गांवों को शहरों से जोड़ने वाली ये सड़कें अब और बेहतर होंगी, जिससे किसानों, व्यापारियों और आम लोगों को फायदा मिलेगा। सड़कों के सुधरने से आवागमन, व्यापार और विकास में तेजी आएगी।

प्रोजेक्ट की लागत और योजना

इस योजना के तहत कुल 7,373 लिंक सड़कों को दुरुस्त किया जाएगा, जिनकी लंबाई 19,491.56 किलोमीटर है।
इस पर ₹4,150.42 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे —

  • ₹3,424.67 करोड़ रुपये सड़कों की मरम्मत और उन्नयन (repair and upgradation) पर
  • ₹725.75 करोड़ रुपये 5 साल की देखभाल (maintenance) पर

इसके साथ ही ठेकेदारों को 5 साल तक सड़कों की देखरेख की ज़िम्मेदारी दी गई है, ताकि सड़कें लंबे समय तक अच्छी स्थिति में बनी रहें।

काम की पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

सीएम मान ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में ई-टेंडरिंग सिस्टम अपनाया गया है ताकि काम पूरी पारदर्शिता से हो। इसके अलावा, सड़कों की स्थिति का Artificial Intelligence (AI) की मदद से सर्वे किया गया है, जिससे 383.53 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार हर पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित कर रही है ताकि जनता को सीधा लाभ मिले।

सड़क सुरक्षा पर भी जोर

सरकार ने सड़क सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। इसके लिए ₹91.83 करोड़ रुपये का एक अलग प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
इस प्रोजेक्ट के तहत:

  • सड़कों के किनारे तीन इंच चौड़ी सफेद पट्टी (white strip) बनाई जाएगी ताकि धुंध या अंधेरे में भी रास्ता साफ नजर आए।
  • स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों के पास ज़ेबरा क्रॉसिंग बनाई जाएगी।
  • हर दो किलोमीटर पर सड़क का नाम, लंबाई और एजेंसी की जानकारी वाले साइन बोर्ड लगाए जाएंगे।
    इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को सड़क से जुड़ी जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

पंजाब में कुल सड़कों की स्थिति

सीएम मान ने बताया कि पंजाब में इस समय कुल 30,237 लिंक सड़कें हैं, जिनकी लंबाई 64,878 किलोमीटर है।
इनमें से —

  • 33,492 किमी सड़कें पंजाब मंडी बोर्ड के अधीन हैं,
  • और 31,386 किमी सड़कें लोक निर्माण विभाग (PWD) के तहत आती हैं।

पहले चरण में 7,373 लिंक सड़कों (19,491.56 किमी) को उन्नत और मरम्मत किया जाएगा।

गुणवत्ता पर सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने पहली बार “सड़क बुनियादी ढांचा विकास बैठक (Road Infrastructure Development Meeting)” आयोजित की है।
इस बैठक में मंडी बोर्ड, ठेकेदारों और अन्य हितधारकों को साफ निर्देश दिए गए कि काम की गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं होगा

सीएम मान का संदेश

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार जनता की सेवा और विकास के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है।
उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश है कि हर गांव और हर इलाके तक विकास पहुंचे। यह प्रोजेक्ट सिर्फ सड़कों का नहीं, बल्कि गांवों की तरक्की और लोगों की सुविधा से जुड़ा है।”

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि “कुछ राजनीतिक दल केवल आलोचना में व्यस्त हैं, जबकि हमारी सरकार काम में विश्वास रखती है।”

कार्यक्रम में मौजूद रहे अधिकारी

इस मौके पर कई नेता और अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं —

  • कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर
  • विधायक सरवन सिंह धुन
  • अमनशेर सिंह शेरी कलसी
  • मंडी बोर्ड के चेयरमैन हरचंद सिंह बरसट
  • सचिव रामवीर

यह प्रोजेक्ट न केवल पंजाब की ग्रामीण सड़कों को नई दिशा देगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, व्यापार और रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगा।
मुख्यमंत्री मान का यह कदम गांवों को शहरों से जोड़ने और विकास की रफ्तार बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

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सोना-चांदी खरीदना होगा महंगा! केंद्र सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी

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अगर आप आने वाले समय में सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ा इजाफा कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक नई दरें 13 मई 2026 से लागू हो गई हैं।

सरकार के इस फैसले के बाद देश में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। विदेशों से सोना मंगवाना अब महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर ज्वेलरी बाजार और ग्राहकों पर पड़ेगा।

नई दरों के अनुसार सोने पर कुल आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है। बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है, जबकि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को 1 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। यूएई से तय कोटे के तहत आने वाले सोने पर भी अब बढ़ी हुई ड्यूटी लागू होगी।

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर गहने खरीदने वालों पर पड़ सकता है। शादी या निवेश के लिए सोना खरीदना अब और महंगा हो जाएगा। ज्वेलर्स की लागत बढ़ेगी और इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही पड़ेगा।

इसके साथ ही निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रीसाइक्लिंग जैसे उद्योग भी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में कीमती धातुओं का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। लागत बढ़ने से कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं।

भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात 24 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 71.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 58 बिलियन डॉलर था। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात 757 टन से घटकर 721 टन रह गया।

भारत दुनिया का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। देश सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से आयात करता है, जिसका हिस्सा करीब 40 फीसदी है। इसके बाद यूएई और दक्षिण अफ्रीका का नंबर आता है।

गौरतलब है कि जुलाई 2024 के बजट में सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए सोने पर ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी थी। लेकिन अब बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा पर दबाव को देखते हुए सरकार ने फिर से ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है।

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पीएम की सलाह आर्थिक इमरजेंसी की आहट?- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री की ओर से देशवासियों को पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल का कम इस्तेमाल करने और सोने समेत अन्य कीमतीे चीजें खरीदने में कटौती करने की सलाह देने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने सवाल किया है कि कहीं देश भारी आर्थिक संकट में तो नहीं फंस गया है। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पीएम ने देश के सभी नागरिकों को खाने-पीने, घूमने- फिरने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की सलाह दी है। साथ ही, सोना और अन्य कीमती चीज़ें खरीदने में भी कटौती करने की सलाह दी है। उन्होंने पूछा है कि क्या यह देश में आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फंस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री को देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। आखिर देश की असली आर्थिक हालत क्या है?

उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी स्वदेशी अपनाने और विदेशी चीजें कम से कम खरीदने की सलाह पर प्रधामंत्री पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शब्दों के उस्ताद हैं, लेकिन उनको देश के सामने सच बोलना चाहिए। यह सर्वविदित है कि मौजूदा समय में भारत की डोर व्हाइट हाउस के हाथों में है, क्योंकि हर फैसला व्हाइट हाउस की सहमति से ही लिया जा रहा है। भारत-पाकिस्तान युद्ध जैसे मुद्दों में भी सीज फायर की घोषणा अमेरिकी अधिकारियों की ओर से की गई थी, जो देश की संप्रभुता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा कि भले ही देश के शासक विश्व गुरु होने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वे विश्व चेला बनने की ओर बढ़ रहे हैं क्योंकि व्हाइट हाउस के आदेशों का आंख मूंदकर पालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन रक्षा क्षेत्र तक में एफडीआई जैसे उनके कदमों ने देश को बर्बाद कर दिया है। भगवंत मान ने आगाह किया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय कृषि को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।

देश के युवाओं को पेपर लीक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने नीट परीक्षा का पेपर लीक होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर साल 7 करोड़ युवा इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेजों में दाखिले और सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाएँ देते हैं। लेकिन राजनीतिक संरक्षण में चल रहे पेपर लीक गिरोह इन युवाओं का भरोसा और हौसला तोड़ रहे हैं। पेपर लीक में शामिल माफिया और उन्हें संरक्षण देने वाले नेता देश के दुश्मन हैं। ये लोग देश की नींव को खोखला कर रहे हैं। सरकारें इस अपराध की साझेदार बन चुकी हैं। इसके खिलाफ युवाओं को देशभर में एक निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी।

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‘एक साल तक सोना न खरीदें’ PM मोदी की बड़ी अपील

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में हैदराबाद में एक रैली के दौरान देशवासियों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील किए जाने के बाद देशभर की ज्वेलरी इंडस्ट्री में चर्चा और चिंता का माहौल बन गया है। PM मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और वैश्विक संकटों को ध्यान में रखते हुए लोगों से सोने की खरीद कम करने और “मेड इन इंडिया” उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की थी।

इस बयान के बाद दिल्ली और देशभर के व्यापारियों एवं उद्यमियों के संगठन ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री’ (CTI) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद ज्वेलरी और सोने के कारोबार से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अपीलों से ग्राहकों में असमंजस और डर का माहौल बन सकता है, जिसका सीधा असर सोने की बिक्री पर पड़ सकता है।

CTI के अनुसार चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। यदि लोग प्रधानमंत्री की अपील को बड़े स्तर पर मानते हैं तो देश में सोने की मांग 800 टन से घटकर लगभग 500 टन तक आ सकती है। व्यापारियों का मानना है कि इससे ज्वेलरी बाजार में बड़ी मंदी आ सकती है।

ज्वेलर्स ने खास तौर पर चिंता जताई है कि यह अपील ऐसे समय पर आई है जब देश में शादी-विवाह का सीजन चरम पर है। भारत में शादी समारोहों के दौरान सोने की खरीद को पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि ग्राहक सोने की खरीद से पीछे हटते हैं तो इसका बड़ा असर छोटे ज्वेलर्स से लेकर बड़ी ज्वेलरी कंपनियों तक सभी पर पड़ सकता है।

CTI ने यह भी कहा कि इस अपील का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। निवेशकों की चिंता के कारण ज्वेलरी सेक्टर के स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि ज्वेलरी इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, जिससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। इसलिए उद्योग को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित नीतियां और स्पष्ट संदेश बेहद जरूरी हैं। अब ज्वेलरी कारोबार से जुड़े व्यापारी नई रणनीतियों और ग्राहकों को आकर्षित करने के नए तरीकों पर काम करने की तैयारी कर रहे हैं।

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