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जनता के लिए मिसाल: Health Minister Dr. Balbir Singh ने अपने Ancestral House का हिस्सा किया Clinic के नाम

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पंजाब की राजनीति में एक अनोखी और प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने अपने पैतृक घर का एक हिस्सा गांव भौरा (जिला नवांशहर) में Health & Wellness Centre (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) बनाने के लिए सरकार को समर्पित कर दिया है।

घर का हिस्सा अब बनेगा Health & Wellness Centre

डॉ. बलबीर सिंह के परिवार का यह पुराना मकान वर्षों से खाली पड़ा था। मंत्री और उनके भाई ने फैसला किया कि इसका एक बड़ा हिस्सा गांववालों की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जाए। इस घर को अब हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में बदला जा रहा है।
मकान में ज़रूरी मरम्मत हो रही है—जैसे वॉशरूम, मिनी-किचन और अल्यूमीनियम फिटिंग। उम्मीद है कि अगले एक महीने के भीतर यह सेंटर चालू हो जाएगा।

कौन-कौन सी सुविधाएँ मिलेंगी?

इस नए सेंटर में एक Community Health Officer (CHO), एक ANM (Auxiliary Nurse Midwife) और ASHA वर्कर तैनात किए जाएंगे। यहाँ लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगी, जैसे:

  • गर्भवती महिलाओं की खास देखभाल (high-risk pregnancy cases)
  • बच्चों का टीकाकरण (immunisation)
  • टीबी (TB) के मरीजों का फॉलो-अप
  • सामान्य बीमारियों की जांच और इलाज

यानी गांववासियों को छोटी-बड़ी बीमारियों के इलाज और ज़रूरी हेल्थ चेकअप के लिए अब दूर शहर नहीं जाना पड़ेगा।

लोगों को होगा सीधा फायदा

अब तक गांव भौरा और आसपास के लोगों को छोटी-मोटी बीमारियों या टेस्ट के लिए भी बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता था।
अब गांव के पास ही यह सेंटर खुलने से लोगों को घर के नज़दीक ही इलाज, दवाइयाँ और चेकअप की सुविधा मिलेगी।

Aam Aadmi Clinics से जोड़कर देखा जा रहा

पंजाब सरकार पहले से ही “Aam Aadmi Clinics” चला रही है, जहाँ जनता को फ्री इलाज, फ्री दवाइयाँ और फ्री लैब टेस्ट मिलते हैं।
डॉ. बलबीर सिंह का यह कदम उसी सोच को आगे बढ़ाता है। यह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी लोगों को भरोसा दिलाएगा कि सरकार सचमुच उनकी सेहत की परवाह कर रही है।

मंत्री का मकसद: कोई पंजाबी इलाज से वंचित न रहे

डॉ. बलबीर सिंह ने साफ कहा कि उनकी प्राथमिकता जनता की सेहत है। उनका मानना है कि—
हर पंजाबी, चाहे गरीब हो या अमीर, अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं का बराबर हकदार है।”

राजनीति के लिए भी बनी मिसाल

आम तौर पर नेता अपनी संपत्ति और सुविधाओं को निजी उपयोग के लिए रखते हैं। लेकिन डॉ. बलबीर सिंह का यह कदम अलग है। उन्होंने अपनी संपत्ति का एक हिस्सा गांववालों के लिए दे दिया, ताकि वहां हेल्थ सेंटर बन सके।
यह सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि राजनीति में भी एक नई मिसाल है। यह दिखाता है कि अगर नेता चाहें, तो जनता की भलाई के लिए अपनी संपत्ति भी समर्पित कर सकते हैं।

गांव भौरा में बनने वाला यह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर न सिर्फ वहां के लोगों के लिए राहत लेकर आएगा, बल्कि पूरे पंजाब के लिए एक इंस्पिरेशन (प्रेरणा) है।
यह साबित करता है कि पंजाब सरकार की सोच जनता-केंद्रित है और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह का यह कदम सरकार और जनता के बीच विश्वास और भरोसा और भी मज़बूत करेगा।

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पेट्रोल पंपों पर ‘NO STOCK’ के बोर्ड, लंबी कतारों से मची अफरा-तफरी — अफवाहों पर सरकार की सख्त चेतावनी

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान-इज़राइल तनाव को लेकर फैल रही अफवाहों ने भारत के कई राज्यों में अचानक घबराहट का माहौल पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया पर पेट्रोल-डीजल की कमी की खबरें वायरल होने के बाद कई शहरों में लोगों ने घबराहट में बड़े पैमाने पर ईंधन खरीदना शुरू कर दिया, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं।

तेलंगाना, मध्य प्रदेश और गुजरात के कई शहरों में हालात ऐसे बन गए कि पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लंबी लाइनें देखने को मिलीं। खास तौर पर हैदराबाद में अफवाहों के चलते भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे ट्रैफिक जाम और लोगों के बीच बहस के मामले भी सामने आए। इसी तरह इंदौर, अहमदाबाद, सूरत और राजकोट में भी लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए पंपों पर पहुंच गए।

घबराहट में की गई इस पैनिक बाइंग के चलते कुछ जगहों पर अस्थायी रूप से स्टॉक कम हो गया, जिसके कारण कई पेट्रोल पंपों पर ‘NO STOCK’ के बोर्ड तक लगाने पड़े। हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया है कि यह स्थिति केवल अचानक बढ़ी मांग के कारण बनी है, न कि किसी वास्तविक कमी के कारण।

सरकार और तेल कंपनियों ने स्थिति को लेकर स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से ईंधन जमा करने से बचें।

साथ ही प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो लोग जानबूझकर इस तरह की भ्रामक खबरें फैलाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

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MLA हरमीत सिंह पठानमाजरा गिरफ्तार, SSP के बड़े खुलासे — कई महीनों से फरार विधायक को मध्य प्रदेश से पकड़ा गया!

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पंजाब के सनौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से फरार चल रहे विधायक को पटियाला पुलिस की टीमों ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर के बाहरी इलाके से दबोचा। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा में पंजाब लाया गया है, जहां अब उनसे पूछताछ की जा रही है।

गिरफ्तारी के बाद पटियाला के एसएसपी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कई अहम खुलासे किए। उन्होंने बताया कि पुलिस को मजबूत तकनीकी इनपुट (Strong Technical Input) प्राप्त हुए थे, जिनके आधार पर लगातार ट्रैकिंग और निगरानी की जा रही थी। कई राज्यों में टीमों ने छापेमारी की और आखिरकार ग्वालियर के पास उनकी लोकेशन ट्रेस कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। एसएसपी के मुताबिक आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था।

जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने हरमीत सिंह पठानमाजरा को दिसंबर महीने में ही भगोड़ा घोषित कर दिया था। वह पिछले साल सितंबर से ही फरार चल रहे थे और उनके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी से जुड़े मामलों में और भी अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।

पुलिस अब आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड लेने की तैयारी कर रही है, ताकि विस्तृत पूछताछ की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि फरारी के दौरान उसे किस-किस का सहयोग मिला। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं।

यह गिरफ्तारी पंजाब की राजनीति और कानून-व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है और आने वाले दिनों में इस मामले पर और भी अपडेट सामने आ सकते हैं।

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13 साल के संघर्ष के बाद हरीश राणा को मिली अंतिम विदाई — इच्छा मृत्यु के बाद अंगदान से 6 लोगों को मिलेगी नई जिंदगी

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13 वर्षों तक कोमा में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे गाजियाबाद निवासी हरीश राणा ने आखिरकार इस दुनिया को अलविदा कह दिया। सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिलने के बाद 24 मार्च को दिल्ली के एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद आज उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया।

सुबह करीब 9:40 बजे हरीश के छोटे भाई आशीष ने मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार का माहौल बेहद भावुक रहा। हरीश के पिता अशोक राणा ने नम आंखों से बेटे को अंतिम विदाई दी और लोगों से अपील करते हुए कहा, “कोई न रोए, मेरा बेटा शांति से जाए। जहां भी जन्म ले, उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” उनके शब्दों ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।

31 वर्षीय हरीश पिछले 13 सालों से कोमा में थे। उनकी हालत को देखते हुए परिवार ने लंबे समय से इच्छा मृत्यु की अनुमति की मांग की थी। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस ऐतिहासिक मामले में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला माना जा रहा है।

इसके बाद 14 मार्च को हरीश को गाजियाबाद स्थित उनके घर से एम्स, दिल्ली में शिफ्ट किया गया था। 16 मार्च को उनकी फीडिंग ट्यूब हटा दी गई थी, जिसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से जीवन त्याग दिया।

डॉक्टरों के अनुसार, हरीश के परिवार ने एक सराहनीय निर्णय लेते हुए उनके अंगदान का फैसला किया। उनके फेफड़े, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किए गए हैं, जिससे कम से कम 6 लोगों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है। इस कदम की समाज में व्यापक सराहना हो रही है।

यह मामला न सिर्फ एक परिवार के दर्द और संघर्ष की कहानी है, बल्कि इच्छा मृत्यु और अंगदान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर देशभर में नई बहस को भी जन्म दे रहा है।

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