Connect with us

National

बाढ़ से Stranded Animals को भी मिली राहत — Punjab Government और जन संघर्ष की ज़ुबानी

Published

on

पंजाब में अगस्त के अंत में सतलुज और व्यास नदियों में अचानक आई भारी बाढ़ ने इंसानों से लेकर जानवरों तक को अपनी लपेट में ले लिया। इस भीषण आपदा में लगभग 1,400 से ज़्यादा गांव डूबे, 3.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, और 2.5 लाख जानवर व 5.88 लाख पोल्ट्री पक्षी बाढ़ की मार झेलते रहे।

लेकिन इस तबाही के बीच इंसानों की दया का एक चमकीला सवेरा था — जहाँ सरकार और आम लोग मिलकर दूरभासी को भी बचाने की जद्दोजहद में जुट गए।

प्रमुख राहत और बचाव प्रयास अब तक का हाल:

  • 481 पशु चिकित्सा टीमें मैदान में उतारी गईं — हर टीम में एक पशु चिकित्सा अधिकारी, एक इंस्पेक्टर/फार्मासिस्ट और एक कर्मचारी शामिल था। इन टीमों ने 22,534 जानवरों का इलाज कर उनकी जान बचाई
  • कुल मिलाकर लगभग 5.16 लाख जानवरों को बचाया गया
  • 12,170 क्विंटल पशु आहार और 5,090 क्विंटल हरा व सूखा चारा वितरित किया गया, जिससे जानवरों को पोषण मिला।
  • ₹31.50 लाख इलाज और राहत कार्यों में खर्च किए गए।
  • 24×7 नियंत्रण कक्ष राज्य और ज़िला दोनों स्तर पर चालू किए गए थे, ताकि हर मदद माॅगी जा सके।
  • ड्रोन और नावों की मदद से छतों पर फंसे जानवरों का पता लगाया गया और उन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया गया।

सरकार और संगठनों का संकल्प:

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद निर्देश दिए: किसी भी जीव, चाहे इंसान हो या जानवर, उसे पीछे नहीं छोड़ा जाएगा। यह संदेश Relief मिशन को एक व्यापक “लाइफ-सेविंग ऑपरेशन” में बदल गया।

कई सामाजिक संगठन जैसे कलगीधर ट्रस्ट ने भी 125 गांवों में पहुँचा- पशुओं के लिए चारा दिया, और राहत कार्य में साथ दिया।

भारी नुक़सान लेकिन उम्मीद बनी रही:

  • बाढ़ से 504 मवेशी/भैंस, 73 भेड़-बकरियाँ, 160 सुअर और 18,304 पोल्ट्री पक्षी मारे गए।
  • इससे प्रभावित कुल जानवरों की संख्या 2.52 लाख, और पोल्ट्री पक्षियों की 5.88 लाख रही।

फिर भी सरकार ने हार नहीं मानी — विशेष जल निकासी प्रणालियों से 1,000 एकड़ से ज़्यादा जलभराव वाली जमीन को सुखाया गया, जिससे पशुओं के लिए सुरक्षित ठिकाना बनाया जा सका।

ताजा अपडेट्स:

  • सरकार ने सैंड माइनिंग की नीति बदली: किसान अब अपने खेतों से फसल नुकसान वाली बालू और मिट्टी निकाल सकते हैं — इसे बेचकर उनकी थोड़ी ही राहत हो सकती है।
  • Milkfed Punjab (Verka) ने राहत और रिकवरी ऑपरेशन शुरू किया — बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों और उनके पशुओं की मदद की जा रही है।
  • NRIs (UK, France, Austria) ने भी हाथ बढ़ाया — उन्होंने प्रभावित क्षेत्र के डेयरी किसानों के लिए भैंसें और घरों की मरम्मत सहायता देने का ऐलान किया है।
  • आज (8 सितंबर) अलर्ट: 48 लोगों की मौत, 2,050 गांव प्रभावित, 3.9 लाख लोग प्रभावित, 4.42 लाख एकड़ फसल नष्ट, राहत में NDRF, सेना, BSF, हेलीकॉप्टर्स और 170 नावों का प्रयोग जारी है।

अगस्त–सितंबर 2025 की पंजाब बाढ़ ने इंसानों के साथ-साथ जानवरों की दुनिया को भी तहस-नहस कर दिया। लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार, स्थानीय प्रशासन, डॉक्टर, NGO और आम जनता ने मिलकर इस संकट को एक जीवन रक्षा मिशन बना दिया। पांच लाख से ऊपर जानवर, लाखों लोग, हर मेरा जीव, इंसान या पशु, कोई भी पीछे नहीं छोड़ा गया।

जब Compassion (दयालुता) में कोई फर्क नहीं किया जाता, तो असल में हमने अपनी Humanity (इंसानियत) को बचाया होता है।

Blog

पेट्रोल पंपों पर ‘NO STOCK’ के बोर्ड, लंबी कतारों से मची अफरा-तफरी — अफवाहों पर सरकार की सख्त चेतावनी

Published

on

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान-इज़राइल तनाव को लेकर फैल रही अफवाहों ने भारत के कई राज्यों में अचानक घबराहट का माहौल पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया पर पेट्रोल-डीजल की कमी की खबरें वायरल होने के बाद कई शहरों में लोगों ने घबराहट में बड़े पैमाने पर ईंधन खरीदना शुरू कर दिया, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं।

तेलंगाना, मध्य प्रदेश और गुजरात के कई शहरों में हालात ऐसे बन गए कि पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लंबी लाइनें देखने को मिलीं। खास तौर पर हैदराबाद में अफवाहों के चलते भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे ट्रैफिक जाम और लोगों के बीच बहस के मामले भी सामने आए। इसी तरह इंदौर, अहमदाबाद, सूरत और राजकोट में भी लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए पंपों पर पहुंच गए।

घबराहट में की गई इस पैनिक बाइंग के चलते कुछ जगहों पर अस्थायी रूप से स्टॉक कम हो गया, जिसके कारण कई पेट्रोल पंपों पर ‘NO STOCK’ के बोर्ड तक लगाने पड़े। हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया है कि यह स्थिति केवल अचानक बढ़ी मांग के कारण बनी है, न कि किसी वास्तविक कमी के कारण।

सरकार और तेल कंपनियों ने स्थिति को लेकर स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से ईंधन जमा करने से बचें।

साथ ही प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो लोग जानबूझकर इस तरह की भ्रामक खबरें फैलाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

Continue Reading

Blog

MLA हरमीत सिंह पठानमाजरा गिरफ्तार, SSP के बड़े खुलासे — कई महीनों से फरार विधायक को मध्य प्रदेश से पकड़ा गया!

Published

on

पंजाब के सनौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से फरार चल रहे विधायक को पटियाला पुलिस की टीमों ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर के बाहरी इलाके से दबोचा। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा में पंजाब लाया गया है, जहां अब उनसे पूछताछ की जा रही है।

गिरफ्तारी के बाद पटियाला के एसएसपी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कई अहम खुलासे किए। उन्होंने बताया कि पुलिस को मजबूत तकनीकी इनपुट (Strong Technical Input) प्राप्त हुए थे, जिनके आधार पर लगातार ट्रैकिंग और निगरानी की जा रही थी। कई राज्यों में टीमों ने छापेमारी की और आखिरकार ग्वालियर के पास उनकी लोकेशन ट्रेस कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। एसएसपी के मुताबिक आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था।

जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने हरमीत सिंह पठानमाजरा को दिसंबर महीने में ही भगोड़ा घोषित कर दिया था। वह पिछले साल सितंबर से ही फरार चल रहे थे और उनके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी से जुड़े मामलों में और भी अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।

पुलिस अब आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड लेने की तैयारी कर रही है, ताकि विस्तृत पूछताछ की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि फरारी के दौरान उसे किस-किस का सहयोग मिला। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं।

यह गिरफ्तारी पंजाब की राजनीति और कानून-व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है और आने वाले दिनों में इस मामले पर और भी अपडेट सामने आ सकते हैं।

Continue Reading

Blog

13 साल के संघर्ष के बाद हरीश राणा को मिली अंतिम विदाई — इच्छा मृत्यु के बाद अंगदान से 6 लोगों को मिलेगी नई जिंदगी

Published

on

13 वर्षों तक कोमा में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे गाजियाबाद निवासी हरीश राणा ने आखिरकार इस दुनिया को अलविदा कह दिया। सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिलने के बाद 24 मार्च को दिल्ली के एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद आज उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया।

सुबह करीब 9:40 बजे हरीश के छोटे भाई आशीष ने मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार का माहौल बेहद भावुक रहा। हरीश के पिता अशोक राणा ने नम आंखों से बेटे को अंतिम विदाई दी और लोगों से अपील करते हुए कहा, “कोई न रोए, मेरा बेटा शांति से जाए। जहां भी जन्म ले, उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” उनके शब्दों ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।

31 वर्षीय हरीश पिछले 13 सालों से कोमा में थे। उनकी हालत को देखते हुए परिवार ने लंबे समय से इच्छा मृत्यु की अनुमति की मांग की थी। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस ऐतिहासिक मामले में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला माना जा रहा है।

इसके बाद 14 मार्च को हरीश को गाजियाबाद स्थित उनके घर से एम्स, दिल्ली में शिफ्ट किया गया था। 16 मार्च को उनकी फीडिंग ट्यूब हटा दी गई थी, जिसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से जीवन त्याग दिया।

डॉक्टरों के अनुसार, हरीश के परिवार ने एक सराहनीय निर्णय लेते हुए उनके अंगदान का फैसला किया। उनके फेफड़े, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किए गए हैं, जिससे कम से कम 6 लोगों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है। इस कदम की समाज में व्यापक सराहना हो रही है।

यह मामला न सिर्फ एक परिवार के दर्द और संघर्ष की कहानी है, बल्कि इच्छा मृत्यु और अंगदान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर देशभर में नई बहस को भी जन्म दे रहा है।

Continue Reading

Trending