Punjab
Punjab में Drug Trade पर बड़ा Revelation: DSP ने High Court में दायर की याचिका, कहा – Government 300 से ज्यादा NDPS Cases की जांच को ‘जानबूझकर रोक रही’ है
पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। पंजाब पुलिस के एक मौजूदा डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) वविंदर कुमार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि AlpraSafe नामक सिंथेटिक ड्रग, जिसमें Alprazolam नाम का खतरनाक साइकोट्रॉपिक पदार्थ होता है, पंजाब में भारी मात्रा में बिक रहा है और NDPS एक्ट के तहत दर्ज 300 से ज्यादा केसों की जांच जानबूझकर “कैरीयर लेवल” तक ही सीमित रखी गई है।
कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, फर्जी याचिका होने पर चेतावनी भी दी
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश शील नागु और न्यायमूर्ति संजीव बेरी शामिल हैं, ने पंजाब सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर जवाब मांगा है। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह याचिका पब्लिक इंटरेस्ट के नाम पर पर्सनल इंटरेस्ट के लिए दायर की गई है, तो इसे लागत सहित खारिज कर दिया जाएगा।
DSP वविंदर कुमार के आरोप:
- सिंथेटिक ड्रग ‘AlpraSafe’ का पूरे पंजाब में बड़ा नेटवर्क
DSP का कहना है कि Alprazolam से बनी यह ड्रग पूरे राज्य में “भारी मात्रा” में फैल चुकी है। ये ड्रग्स फार्मा कंपनियों की मिलीभगत से फैक्ट्री और गोदामों से निकल कर सड़कों तक पहुंच रही हैं। - 2023 में ही 300 से अधिक FIR, पर जांच सिर्फ कैरियर तक ही सिमटी
उन्होंने बताया कि 2023 में अकेले 300 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं, लेकिन किसी केस में भी निर्माताओं या बड़ी सप्लाई चेन तक जांच नहीं पहुंची। सभी केस केवल ड्रग्स ले जाने वालों (कैरीयर) की गिरफ्तारी पर खत्म हो गए। - STF में तैनाती के दौरान किया बड़ा खुलासा
STF (स्पेशल टास्क फोर्स) में अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने 20 फरवरी 2024 को FIR नंबर 31 दर्ज की थी, जिसमें Rs 275 करोड़ की नशीली दवाइयां और 765 किलो पाउडर जब्त किया गया। यह ड्रग्स कई बड़ी फार्मा कंपनियों की फैक्ट्रियों और गोदामों से मिले थे। - भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए
DSP ने दावा किया कि FIR नंबर 23 (22 जनवरी 2023) के मामले में एक फार्मा कंपनी ने एक सीनियर अफसर को 3 करोड़ रुपये की रिश्वत दी, ताकि जांच को रोका जा सके। वहीं FIR नंबर 31 में Rs 45 लाख की घूस देकर कंपनियों के मालिकों को बचाया गया। - दबाव में ट्रांसफर और फर्जी FIR का आरोप
DSP वविंदर ने कहा कि जब उन्होंने सीनियर अधिकारियों के कहने पर जांच रोकने से इनकार किया, तो STF से उनका तबादला कर दिया गया और बाद में भ्रष्टाचार के झूठे केस में फंसा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास जो दस्तावेज और चिट्ठियां थीं, वो पुलिस के पास हैं और शायद छेड़छाड़ भी की गई है।
DSP खुद भी हैं भ्रष्टाचार केस में आरोपी
सितंबर 2024 में पंजाब पुलिस ने वविंदर कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार की FIR दर्ज की थी, जिसमें आरोप था कि उन्होंने एक फार्मा कंपनी से Rs 45 लाख की रिश्वत ली, ताकि उसे कानूनी कार्रवाई से बचाया जा सके। हालांकि, अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद एस. भारद्वाज ने CBI को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया और STF को भ्रष्टाचार वाली FIR में आगे की जांच करने से रोक दिया।
राज्य सरकार का जवाब: “यह PIL नहीं, पर्सनल इंटरेस्ट लिटिगेशन है”
पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील सलिल सबलोक ने कोर्ट में कहा कि DSP की याचिका PIL की आड़ में चल रही व्यक्तिगत लड़ाई है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने जिन 300 FIR का जिक्र किया है, उनमें किसी एक का भी विस्तार से ब्यौरा नहीं दिया गया है। इसके अलावा DSP खुद एक केस में जांच अधिकारी रह चुके हैं, इसलिए वह कोर्ट मॉनिटरिंग की मांग नहीं कर सकते।
“यह पूरी तरह से व्यक्तिगत हित साधने की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही PIL के दुरुपयोग पर चेतावनी दे चुका है।” – सलिल सबलोक
सबलोक ने यह भी बताया कि FIR नंबर 31 की CBI जांच फिलहाल हाईकोर्ट के एकल पीठ के समक्ष लंबित है, जिसकी अगली सुनवाई 8 अगस्त को होनी है।
ड्रग्स, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक दबाव की पेचीदा लड़ाई
DSP वविंदर कुमार की याचिका ने पंजाब में ड्रग्स नेटवर्क और पुलिस तंत्र की निष्क्रियता पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। जहां एक ओर अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उन्हें सच्चाई उजागर करने पर सजा दी जा रही है, वहीं सरकार और वकील इसे पर्सनल विवाद बता रहे हैं।
अब सभी की निगाहें 8 अगस्त को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर हैं, जहां यह तय होगा कि मामले की CBI जांच आगे कैसे बढ़ेगी और क्या वाकई पंजाब में NDPS एक्ट के केसों में कोई बड़ी साजिश छुपाई जा रही है।
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सेना के वेरका का सूखा दूध खारिज किए जाने के बाद एक्शन; Ludhiana इकाई के महाप्रबंधक निलंबित
सेना को आपूर्ति किए गए सूखे दूध की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद पंजाब के दुग्ध सहकारी संस्थान वेरका की लुधियाना इकाई में बड़ा कदम उठाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इकाई के महाप्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है, जबकि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, सेना की आपूर्ति शाखा की जम्मू स्थित इकाई ने लुधियाना जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को पत्र भेजकर सूचित किया कि वेरका की लुधियाना इकाई से भेजा गया पूरा दूध चूर्ण निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। इस कारण दो अलग-अलग खेपों को अस्वीकार कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि एक खेप लगभग 58.338 मीट्रिक टन और दूसरी करीब 66.654 मीट्रिक टन की थी। इस तरह कुल मिलाकर करीब 125 मीट्रिक टन सूखा दूध सेना द्वारा खारिज किया गया है।
गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई
पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उत्पाद की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया। इस मामले की जानकारी रक्षा मंत्रालय के खरीद और खाद्य निरीक्षण संगठन के मुख्य निदेशक को भी भेजी गई है, ताकि उच्च स्तर पर इसकी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
वहीं, मिल्कफैड के प्रबंध निदेशक राहुल गुप्ता ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आते ही तुरंत जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वेरका देश के प्रमुख दुग्ध ब्रांडों में शामिल है और यहां उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सख्त मानक अपनाए जाते हैं।
दोबारा नमूनों की जांच का किया अनुरोध
राहुल गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रारंभिक स्तर पर किसी बड़ी कमी की पुष्टि नहीं हुई है। संस्थान ने सेना से दोबारा नमूने लेने का अनुरोध किया है, जिसे सैन्य अधिकारियों ने स्वीकार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि समस्या उत्पादन, भंडारण या आपूर्ति के किस चरण में उत्पन्न हुई। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
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मुफ्त बिजली, सड़कें और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार! 4 वर्षों में Bhagwant Mann सरकार ने बदली पंजाब की तस्वीर, लाभान्वित हुए लोग
पंजाब में जनहित को प्राथमिकता देते हुए मान सरकार सुविधाओं का विस्तार लगातार कर रही है। सीएम भगवंत मान को पंजाब की सत्ता में आए 4 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
इन चार वर्षों में सरकार की ओर से पंजाबकी जनता तक सीधा लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई है।
बात चाहें मुफ्त बिजली की हो या सड़क निर्माण, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार आदि से जुड़ी। सीएम भगवंत मान की सरकार हर मोर्चे पर खरी उतरी है। शासन स्तर से ऐसी नीतियां बनाई गई हैं जो सीधे तौर पर जनता को लाभान्वित करते हुए पंजाब की तस्वीर बदलने का काम करें।
पिछले 4 वर्षों में Bhagwant Mann सरकार ने बदली पंजाब की तस्वीर!
मान सरकार ने पिछले चार वर्षों में पंजाब की तस्वीर बदलने का काम किया है। इस क्रम में अब पंजाब के मंत्री लोगों से संवाद कर रहे हैं।
इस मुहिम को निरंतरता प्रदान करते हुए कैबिनेट मंत्रियों ने लेहरागागा निर्वाचन क्षेत्र के कई इलाकों का दौरा किया। इस दौरान लोगों से संवाद कर भगवंत मान सरकार द्वारा पिछले चार वर्षों में जनता के हर वर्ग के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई।
कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि कैसे सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के छात्रों को छात्रवृत्ति, दलित समुदाय की ऋण माफी, शिक्षा, बिजली, नशा विरोधी अभियान और औद्योगिक निवेश आदि कर पंजाब की तस्वीर बदली जा रही है।
मुफ्त बिजली के साथ सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं का हुआ विस्तार!
पंजाब के आम लोगों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की गई है। पिछले चार वर्षों में सीएम भगवंत मान के प्रयासों से घरेलू बिजली बिल शून्य हुआ है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक नई सड़कों का जाल बिछा है। इससे कनेक्टिविटी को गति मिली है और अवसरों के द्वार खुले हैं। इससे इतर मान सरकार ने मुख्यमंत्री सेहय योजना लागू कर स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया है।
आम आदमी क्लीनिक भी पंजाब की जनता तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच आसान कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी शासन स्तर से कई पहल की गई है। ये सारे प्रयास दर्शाते हैं कि कैसे भगवंत मान सरकार ने लोगों को लाभान्वित करने की दिशा में काम किया है।
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नशे से नौकरी तक का सफर: Punjab में ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान से बदल रही जिंदगियां
Punjab News: पंजाब में नशों के खिलाफ चल रही जंग के चलते स्पष्ट बदलाव सामने आ रहे हैं, क्योंकि भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान के तहत सिर्फ कानून लागू करने तक सीमित न रहकर पुनर्वास और पुनः एकीकरण पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. जिलों में नशे की दलदल में फंसे लोग अब स्थिर जीवन की ओर लौट रहे हैं और नशे से उबरने में रोजगार अहम भूमिका निभा रहा है.
अभिषेक कुमार (नाम बदला गया) उन लोगों में से एक हैं जिसने इस बदलाव को खुद अनुभव किया है. कुछ साल पहले नशे ने उसकी जिंदगी को इस कदर तबाह कर दिया था कि रोजमर्रा के काम भी मुश्किल हो गए थे और उसके परिवार को डर था कि वह नशे की भेंट चढ़ जाएंगा. आज, वह एक स्थिर नौकरी कर रहा हैं और अपने परिवार के साथ फिर से जुड़ गया है. उसने कहा, “नौकरी दोबारा मिलने से सब कुछ बदल गया. इसने मुझे सही रास्ता अपनाने का कारण दिया.”
नशे से उबरने का संघर्ष और रोजगार की नई शुरुआत
वह नशे से अचानक नहीं उभरा. उसके परिवार के निरंतर प्रोत्साहन, व्यवस्थित चिकित्सीय इलाज, परामर्श, और ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’’ अभियान से जुड़ी पहलों के तहत मिले पुनर्वास के बाद रोजगार सहायता की बदौलत अभिषेक स्थिरता और आत्मविश्वास दोनों वापस हासिल कर सका.
नवदीप कुमार (बदला हुआ नाम) के लिए उसके जीवन का निर्णायक मोड़ उसके घर से ही शुरू हुआ. लगातार झगड़ों और भावनात्मक दूरी ने उसे उस नुकसान का एहसास कराया जो नशे की वजह से हुआ था. उसने कहा, “मेरी मां मुझे सही रास्ते पर वापस लेकर आयी है.”
इलाज पूरा करने के बाद, नवदीप को रोजगार सहायता मिली और अब वह निजी क्षेत्र में काम कर रहा है. वह दोबारा रोजगार मिलने को उस पल के रूप में बताता है जिसने उनके जीवन में अनुशासन लाया और उसे अपना मकसद फिर से तय करने में मदद की.
समर्थन और पुनर्वास से नई शुरुआत
गुरजिंदर सिंह (बदला हुआ नाम) की कहानी रिकवरी के एक और पहलू को दर्शाती है. नशे ने न केवल उसके स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि उसके परिवार में उसकी आर्थिक स्थिरता और भरोसेयोग्यता को भी खत्म कर दिया था. पुनर्वास सेवाओं और उसके माता-पिता के निरंतर समर्थन से, वह धीरे-धीरे रिकवरी की ओर बढ़ा. आज, वह फिर से नौकरी कर रहा है और उनकी सेहत में सुधार हुआ है तथा पारिवारिक संबंध भी बेहतर हुए हैं.
नशा पीड़ितों का रिकवरी की ओर यह सफर ‘आप’ सरकार द्वारा अपनाई गई व्यापक रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत नशों के खिलाफ जंग केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नशे की दलदल में फंसे लोगों को सामाजिक और आर्थिक मुख्यधारा में वापस लाया जाए.
इस अभियान से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पुनर्वास, परामर्श और संरचित सहायता प्रणालियों को रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है, क्योंकि यह माना गया है कि आर्थिक स्थिरता के बिना रिकवरी अधूरी रहती है.
स्थिर नौकरी से नशा मुक्त जीवन संभव
सभी मामलों में यह देखा गया है कि रोजगार केवल रिकवरी के बाद का एक कदम नहीं है, बल्कि यह नशा-मुक्त जीवन को सुनिश्चित करने की नींव है. एक स्थिर नौकरी वित्तीय स्वतंत्रता देती है, सम्मान को बहाल करती है और व्यक्तियों को अपने परिवारों और समुदायों से फिर से जुड़ने में सक्षम बनाती है. अभिषेक ने कहा, “कभी भी नशों का सेवन न करें. यह नुकसानदेय लग सकता है, लेकिन यह सब कुछ बर्बाद कर सकता है.”
जैसे-जैसे ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान का विस्तार हो रहा है, नशा पीड़ितों की ये कहानियां व्यापक बदलाव को दर्शाती हैं, जहां नशे से रिकवरी को अब अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक स्थिर और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.
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