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Punjab University का नाम बदलने के लिए VC को पत्र, छात्र संगठन ‘सथ’ ने विरोध जताया।
Punjab University छात्रसंघ के अध्यक्ष अनुराग दलाल ने विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘पंजाब एवं हरियाणा विश्वविद्यालय’ करने की मांग की है, क्योंकि लगभग आधे छात्र हरियाणा से आते हैं।
इस प्रस्ताव को रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी समर्थन दिया है। हालांकि, इस प्रस्ताव का विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध किया है। एसएटी संगठन ने इसे पंजाब की सांस्कृतिक धरोहर पर हमला बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई प्रयास सफल नहीं होने देंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे प्रयासों से पंजाब के हितों की रक्षा के लिए वे संघर्ष करेंगे।

उन्होंने कहा कि Punjab University और चंडीगढ़ दोनों ही पंजाब के हैं, इसलिए हमें पंजाब की हर पार्टी से कहना है कि वे एकजुट होकर Punjab University और चंडीगढ़ पर अपना दावा पेश करें। दूसरा, हम पंजाब के युवाओं से, जो मध्यमार्गी पार्टियों के प्रिय बन गए हैं, अनुरोध करते हैं कि आपको पंजाब विरोधी और सिख विरोधी ताकतों द्वारा तुच्छ लालच या पद-लोलुपता के लिए बरगलाया जा रहा है। आपको अपने कठपुतली बने राष्ट्रपतियों द्वारा किए जा रहे पंजाब विरोधी कार्यों से यह समझ लेना चाहिए कि आपको सत्ता हासिल करने के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। हम ऐसे युवाओं से अनुरोध करते हैं कि आप पंजाब समर्थक राजनीति की ओर रुख करें। हम Punjab University को खाकर पंजाब के हितों के खिलाफ काम करने वाले हर तत्व को चुनौती देते हैं कि पंजाब के हितों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई का पंजाब विश्वविद्यालय में कड़ा विरोध किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि Punjab University सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से पंजाब से जुड़ा हुआ है। पंजाब सरकार यहां अपने हिस्से का वित्तपोषण उपलब्ध कराती है, जबकि हरियाणा सरकार कोई वित्तपोषण उपलब्ध नहीं कराती है। वे स्कूल का नाम सिर्फ इसलिए बदलना चाहते हैं क्योंकि यहां हरियाणा के छात्र पढ़ते हैं। हम सभी राज्यों के छात्रों का स्वागत करते हैं, लेकिन हम किसी विशेष राज्य का नाम इसके साथ जुड़ने नहीं देंगे। यहां बिहार और हिमाचल के छात्र भी पढ़ते हैं, तो क्या हम उनके राज्यों का नाम भी जोड़ेंगे ?
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पंजाब की महिलाओं के खातों में पैसे आने शुरू, CM भगवंत मान ने धूरी से योजना का शुभारंभ किया
आज 1 जुलाई को पंजाब में 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के खातों में 1,100 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने गृह ज़िले संगरूर के धूरी से ‘मावां धियां सत्कार योजना’ की शुरुआत की। सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति (SC) की महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये दिए गए। पहली बार सरकार ने तीन महीने की राशि एक साथ जारी की।
सामान्य वर्ग की महिलाओं को 3,000 रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 4,500 रुपये मिले। कार्यक्रम में मौजूद एक महिला के मोबाइल फोन पर सबसे पहले 4,500 रुपये आने का संदेश प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि कल तक 40 लाख महिलाओं ने इस योजना के लिए पंजीकरण कराया था। महिलाओं को जुलाई, अगस्त और सितंबर की राशि एक साथ प्रदान की गई है।
आम आदमी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान वादा किया था कि यदि उनकी सरकार बनी तो पंजाब में 18 वर्ष से अधिक आयु की प्रत्येक महिला को प्रति माह 1,000 रुपये दिए जाएंगे। इस वर्ष सरकार ने इस योजना के लिए बजट में 9,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ‘आप’ सरकार का कहना है कि जनता ने उन्हें पांच वर्षों के लिए चुना है, इसलिए वह अपने कार्यकाल के दौरान इस वादे को पूरा कर रही है।
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महिलाओं की सत्कार राशि’ आज बैंक खातों में जमा की जाएगी : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि पंजाब महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन की इबारत लिखने के लिए तैयार है, क्योंकि आम आदमी पार्टी की सरकार मांवां-धीयां सत्कार योजना’ के आगाज़ के साथ एक और बड़ी गारंटी पूरी कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे पंजाब में दोपहर 12 बजे के बाद मोबाइल फोनों पर मैसेज आने शुरू हो जाएंगे, क्योंकि तीन महीने की ‘सम्मान राशि’ एक ही किस्त के रूप में हर महिला के बैंक खाते में 3,000 रुपये और अनुसूचित जाति (एस.सी.) समुदाय से संबंधित महिलाओं के खातों में 4,500 रुपये जमा किए जा रहे हैं।
बरनाला के महिल कलां हल्के में ‘लोक मिलनी’ के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल महिलाओं के मान-सम्मान और वित्तीय सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि पंजाब के तेज़ विकास से बौखलाए विरोधी राज्य की तरक्की में रोड़ा अटकाने की साजिशें रच रहे हैं।
*महिल कलां में लोक मिलनी के दौरान छतों पर जमा भीड़ द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का ज़ोरदार स्वागत*
जब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान बरनाला के महिल कलां हल्के में लोक मिलनी को संबोधित कर रहे थे, तो उनके पूरे भाषण के दौरान लोगों ने नारों के साथ उनका स्वागत किया। लोगों की भीड़ इतनी अधिक थी कि पंडाल में जगह कम पड़ गई, जिसके कारण सैकड़ों समर्थकों को नज़दीकी घरों और इमारतों की छतों से रैली देखनी पड़ी। वे मुख्यमंत्री के समर्थन में पोस्टर लहराते रहे और उनकी बातों का उत्साहपूर्वक जवाब देते रहे। रैली स्थल के आस-पास की हर छत पर लोगों की बड़ी भीड़ थी।
लोक मिलनी के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस ऐतिहासिक स्कीम की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने कहा, “1 जुलाई से महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे आने शुरू हो जाएंगे। मांवां-धीयां सत्कार योजना’ के तहत हर महिला को 1,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह मिलेंगे। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी और जो महिलाएं पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन ले रही हैं, वे भी इसके लिए पात्र होंगी। पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है, जिसके लिए राज्य सरकार ने बजट में 9,300 करोड़ रुपये रखे हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को मान-सम्मान और वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह योजना शायद महिलाओं को अमीर न बनाए, लेकिन यह उन्हें मान-सम्मान और स्वाभिमान ज़रूर देगी। महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं। माताओं और बहनों के आशीर्वाद हर चुनौती को पार करने में मदद कर सकते हैं। परिवार की भलाई, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक और आर्थिक फैसलों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए उनकी वित्तीय आज़ादी को मजबूत करना बहुत ज़रूरी है।”
सरकार की जन-पक्षीय पहलों का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार लोगों की भलाई के लिए दिन-रात काम कर रही है। हमने घरों को मुफ्त बिजली दी है, 68,000 से अधिक नौजवानों को बिना किसी भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरियां दी हैं, सड़कों का नवीनीकरण किया, टोल प्लाज़ा बंद करके रोज़ाना करीब 70 लाख रुपये बचाए हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा को मजबूत किया है, बुनियादी ढांचा तैयार किया है और कई अन्य अहम कदम उठाए हैं। जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब सिंचाई के लिए सिर्फ 22 प्रतिशत नहरी पानी का इस्तेमाल हो रहा था। आज यह आंकड़ा बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है। हम राज्य भर के गांवों के विकास के लिए ग्रांट भी दे रहे हैं।”
राज्य के स्वास्थ्य सुधारों के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ देश की अपनी तरह की पहली योजना है, जो पंजाब के हर निवासी परिवार को 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मुहैया कराती है। यह बहुत गर्व की बात है कि पंजाब ऐसी व्यापक स्वास्थ्य सुविधा देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस योजना ने मानक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करते हुए लोगों पर वित्तीय बोझ को काफी कम किया है। इसका उद्देश्य राज्य के हर परिवार को व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है और लोग पहले से ही इस योजना के तहत 650 करोड़ रुपये से अधिक के मुफ्त इलाज का लाभ ले चुके हैं।”
राज्य को स्वस्थ और नशा मुक्त बनाने के लिए सरकार के एजेंडे की बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमारी सरकार 15 जुलाई तक पंजाब भर में 3,100 नए बने खेल मैदान लोगों को समर्पित करेगी। नशों के खिलाफ हमारी मुहिम में खेलों को बढ़ावा देना सबसे कारगर हथियार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों को बढ़ावा देकर हम अपने नौजवानों की असीम ऊर्जा को सही दिशा की ओर मोड़ रहे हैं। खेलों में उलझे नौजवानों के पास नशों की ओर देखने का समय भी नहीं होता, क्योंकि वे अपनी पूरी ऊर्जा दांव-पेंच लगाने में लगाते हैं। यह पहल नशों की विभीषिका को खत्म करने और नौजवानों को सूबे के सामाजिक-आर्थिक विकास में बराबर का भागीदार बनाने में बहुत सहायक साबित होगी।”
पिछले चार वर्षों के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में आई तब्दीली का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सत्ता संभालने के बाद हमारी सरकार ने पंजाब की तरक्की और खुशहाली, खासकर शिक्षा क्षेत्र पर विशेष ज़ोर दिया। पिछली सरकारों ने सरकारी स्कूलों को सिर्फ ‘मिड-डे मील’ के केंद्र बनाकर रख दिया था, लेकिन आज इन स्कूलों को शिक्षा के धुरे में बदल दिया गया है। हम शिक्षा को मजबूत करने के मिशन के साथ काम कर रहे हैं, ताकि गरीब से गरीब बच्चे को भी मानक शिक्षा मिल सके।”
स्कूली शिक्षा में राज्य की उपलब्धि को साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारी सरकार की अथक कोशिशों के बदौलत पंजाब प्राइमरी और मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पछाड़कर नंबर एक स्थान पर पहुंच गया है। हमने प्राइमरी और मिडिल स्कूलों को अपग्रेड किया है, शिक्षा प्रणाली को मजबूत किया है, स्मार्ट क्लासरूम शुरू किए हैं और अध्यापकों को उन्नत प्रशिक्षण दिया है। इन निरंतर कोशिशों के नतीजे के रूप में पंजाब अब स्कूली शिक्षा में देश का नेतृत्व कर रहा है। नीति आयोग द्वारा जारी किए गए ताज़ा आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि पंजाब प्राइमरी और मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य बन गया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले चार वर्षों से हमारी सरकार ने शिक्षकों के प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और स्मार्ट क्लासरूमों पर ध्यान केंद्रित किया है और आज पंजाब शीर्ष पर खड़ा है। पहले केरल पहले स्थान पर था, लेकिन अब पंजाब ने बड़े अंतर से पहला स्थान हासिल कर लिया है। आने वाले वर्षों में भी हम और अधिक प्रयास जारी रखेंगे क्योंकि शिक्षा वह प्रकाश है जो अंधकार को दूर कर दुनिया को रोशन करता है।”
हर बच्चे को शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार का दृढ़ विश्वास है कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। हम शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि सामान्य परिवारों के बच्चों को भी आगे बढ़ने के वही अवसर मिलें जो किसी अन्य को मिलते हैं। शिक्षा आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाने और समृद्ध पंजाब के निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है तथा हमारी सरकार इसे और मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।”
‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026’ के पारित होने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं परमात्मा का आभारी हूँ जिसने मुझे ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ पारित करने का सौभाग्य प्रदान किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की प्रत्येक घटना ने करोड़ों लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई थी। परमात्मा ने मुझे विधि विशेषज्ञों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह कानून लाने की शक्ति और बुद्धि प्रदान की।”
भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार के संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दावा किया, “हमारी सरकार ने इस कानून को बहुत सोच-समझकर तैयार किया है ताकि भविष्य में कोई भी संशोधन या खामी इसे कमजोर न कर सके। यह कानून समाज विरोधी तत्वों के लिए एक मजबूत रोक का काम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी इस प्रकार का घिनौना अपराध दोबारा करने का साहस न करे। पहले बेअदबी के दोषी यह कहकर सजा से बच जाते थे कि उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है या वे मानसिक रूप से बीमार हैं। लेकिन यदि कोई वास्तव में मानसिक रूप से बीमार है तो वह केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही क्यों निशाना बनाता है? वह किसी रेल इंजन से क्यों नहीं टकराता या बिजली के खुले तारों को क्यों नहीं छूता?”
विपक्षियों पर अपना शब्दिक हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, “अकाली बेअदबी विरोधी कानून का पूरी ताकत से विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें अतीत में किए गए अपने अपराधों का जवाब देना पड़ेगा। वे बेअदबी की साजिशें रचने वाली देश-विरोधी ताकतों के साथ मिले हुए थे। अब इन नेताओं को अपने बुरे कर्मों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, इसलिए वे और उनकी कठपुतलियाँ इस कानून का विरोध कर रही हैं। हालांकि, कोई भी विरोध मुझे जनता की भलाई के लिए काम करने से नहीं रोक सकता और मैं इस उद्देश्य के लिए इसी तरह हर संभव प्रयास करता रहूँगा।”
लोगों के साथ अपने संबंधों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के शासन की तुलना पिछली सरकारों से की। उन्होंने कहा, “मुझसे पहले रहे मुख्यमंत्री कभी भी आम लोगों के बीच नहीं गए। वे मौसम देखकर ही अपने आलीशान घरों से बाहर निकलते थे, जबकि मैं चौबीसों घंटे लोगों के लिए उपलब्ध रहता हूँ।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन नेताओं ने अपने पदों का दुरुपयोग कर अंधाधुंध सरकारी धन लूटा और ऊँची-ऊँची दीवारों तथा बड़े-बड़े गेटों वाले महल बनाए, जो लोगों के लिए हमेशा बंद रहे। ये नेता हमेशा जनता की पहुँच से दूर रहे और अंततः लोगों ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के लोगों ने उनके विश्वास को ठेस पहुँचाने वाले नेताओं को बार-बार नकारा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के लोगों ने उन लोगों को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया जिन्होंने बारी-बारी से उन्हें लूटा। इन स्वार्थी नेताओं ने वर्षों तक लोगों को मूर्ख बनाया, लेकिन आज राज्य के लोग जागरूक हो चुके हैं और अब उनके गुमराह करने वाले प्रचार में नहीं आएँगे। इन अहंकारी नेताओं ने हमेशा लोगों को हल्के में लिया और इसी कारण अंततः जनता ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया।
आज ये अवसरवादी नेता बौखलाए हुए हैं क्योंकि लोगों से उन्हें कोई समर्थन नहीं मिल रहा। इन नेताओं का एजेंडा हमेशा जनता के बजाय अपने परिवारों की भलाई तक ही सीमित रहा है।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सुखबीर बादल को शेखचिल्ली जैसे सपने देखना बंद कर देना चाहिए। सत्ता में वापसी के सपने देखने के बजाय अब उनके परिवार की जेल जाने की बारी है। वे दिन चले गए जब ये पार्टियाँ सत्ता की कुर्सी का खेल खेलती थीं और शासन करने के लिए अपनी बारी का इंतजार करती थीं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सत्ता में रहते हुए इन लोगों ने एक-दूसरे के हितों की रक्षा की, जिसके कारण इनके काले कारनामे कभी सामने नहीं आए। आज लोगों ने ‘आप’ को चुना है और पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘झाड़ू’ पंजाब की राजनीतिक व्यवस्था की सफाई कर रहा है। वह दिन दूर नहीं जब अकाली अपने पापों की सजा भुगतते हुए सलाखों के पीछे होंगे।
उन्होंने आगे कहा, “सुखबीर बादल पंजाब की जमीनी हकीकतों से पूरी तरह अनजान हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन सुख-सुविधाओं और आलीशान माहौल में बिताया है। ये कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़े-लिखे राजनीतिक नेता हैं जो राज्य की सामान्य भौगोलिक स्थिति से भी परिचित नहीं हैं, फिर भी पंजाब पर शासन करना चाहते हैं। यदि बाकी सब छोड़ भी दें, तो पूर्व उपमुख्यमंत्री राज्य की सामान्य फसलों में भी अंतर नहीं बता सकते क्योंकि उन्हें पंजाब के बुनियादी मुद्दों की कोई समझ नहीं है।”
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी अपनी अंतिम साँसें गिन रही है और जल्द ही अपने आप समाप्त हो जाएगी क्योंकि उसके पास न जनता के लिए और न ही पंजाब के लिए कोई विजन है। उसका एकमात्र उद्देश्य हमेशा सत्ता हासिल करना और राज्य के खजाने को लूटना रहा है, लेकिन यह सपना कभी पूरा नहीं होगा। कांग्रेस एक बिखरा हुआ घर है जो अपने आंतरिक कलह के कारण ही ढह जाएगा।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह कितनी हास्यास्पद और आश्चर्यजनक बात है कि इन आपस में लड़ रहे गुटों को एकजुट करने के लिए यहाँ आने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को राज्य के इन नेताओं के नामों का सही उच्चारण तक नहीं आता।
इस अवसर पर लोकसभा सदस्य गुरमीत सिंह मीत हेयर, कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल तथा कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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एशियन, विश्व और ओलंपिक चैंपियनों की नर्सरी बनकर उभरेगा संगरूर: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
पंजाब को भारत का खेल केंद्र बनाने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज संगरूर में 9.50 करोड़ रुपये की लागत से बने ओलंपिक स्तर के स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संगरूर जिला एशियन, विश्व और ओलंपिक चैंपियनों की नर्सरी के रूप में उभरेगा। खेलों के बुनियादी ढांचे में सरकार द्वारा किए गए अभूतपूर्व निवेश का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने कभी भी पंजाब का खेल बजट 200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं बढ़ाया था, जबकि हमारी सरकार ने खेल बजट को बढ़ाकर 1,790 करोड़ रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहली बार पंजाब को एशियन हॉकी चैंपियनशिप ट्रॉफी की मेजबानी मिली है और राज्य अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं को निखारने के लिए क्रिकेट और हॉकी प्रीमियर लीग शुरू करने के लिए भी तैयार है।
इस कार्यक्रम का वीडियो ‘एक्स’ पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, “आज संगरूर के लोगों को खेलों के क्षेत्र में बड़ा प्रोत्साहन मिला है क्योंकि वार हीरोज स्टेडियम में ओलंपिक स्तर के आधुनिक स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया गया है। 9.50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 50×21 मीटर आकार का स्विमिंग पूल खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण ढांचा उपलब्ध कराएगा।”
उन्होंने आगे लिखा, “पंजाब की खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए हमारी सरकार ने खेल बजट को 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,790 करोड़ रुपये कर दिया है। खिलाड़ियों को अब प्रशिक्षण के लिए अग्रिम राशि उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक के लिए 1 करोड़ रुपये, रजत पदक के लिए 75 लाख रुपये और कांस्य पदक के लिए 50 लाख रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।”
पोस्ट के अंत में लिखा गया, “खेल संस्कृति को और बढ़ावा देने के लिए पंजाब सरकार जल्द ही पंजाब प्रीमियर लीग और पंजाब हॉकी लीग शुरू करेगी। इसके अलावा, अक्टूबर-नवंबर के दौरान मोहाली और जालंधर में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी (हॉकी) की मेजबानी की जाएगी, जिससे देश में खेलों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में पंजाब की स्थिति और मजबूत होगी।”
उद्घाटन के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज का दिन संगरूर के लोगों, विशेष रूप से युवाओं के लिए अत्यंत गौरव और खुशी का दिन है, क्योंकि यह नया अत्याधुनिक स्विमिंग पूल उन्हें समर्पित किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह स्विमिंग पूल मात्र एक इमारत नहीं है, बल्कि यह हमारे भविष्य के ओलंपियन खिलाड़ियों की नर्सरी के रूप में उभरेगा।”
खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विश्वस्तरीय स्विमिंग पूल पंजाब को देश का नंबर एक खेल राज्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह स्विमिंग पूल अंतरराष्ट्रीय मानकों और ओलंपिक विनिर्देशों के अनुरूप 9.50 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इसका आकार 50 मीटर × 21 मीटर है, इसकी गहराई 4.5 फीट से 7.5 फीट तक है तथा इसमें 2.5 लाख लीटर पानी की क्षमता है।”
इस परिसर में विकसित सुविधाओं का विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि खिलाड़ियों और खिलाड़ीाओं की सुविधा के लिए अलग-अलग आधुनिक शॉवर, चेंजिंग रूम, प्रशिक्षकों के लिए विशेष कक्ष तथा स्टोर रूम बनाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता और फिटनेस बढ़ाने के लिए आधुनिक जिमनेजियम भी स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “7 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए एक विशेष मिनी स्विमिंग पूल भी तैयार किया गया है।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस स्विमिंग पूल का निर्माण विश्वस्तरीय ‘मिर्था रेनोवएक्शन’ और ‘क्लासिक मॉड्यूलर सिस्टम’ तकनीक का उपयोग करके किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इसमें लैमिनेटेड पीवीसी और स्टेनलेस स्टील के पैनल लगाए गए हैं, जो इसे देश के सबसे आधुनिक स्विमिंग पूलों में से एक बनाते हैं। स्वच्छ और सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय मानकों के अनुरूप फिल्ट्रेशन और डिसइन्फेक्शन सिस्टम स्थापित किया गया है।”
संगरूर तथा आसपास के क्षेत्रों के अभिभावकों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अपने बच्चों को खेलों के प्रति प्रेरित करें। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि खेलों के विकास के लिए सुविधाओं अथवा धन की कभी कोई कमी न आने पाए।”
राज्यभर में खेलों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार खेलों को बढ़ावा देने तथा युवाओं को नशे की बुराई से दूर रखने के उद्देश्य से पूरे पंजाब में 3,100 खेल मैदानों का निर्माण कर रही है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत तथा तरुनप्रीत सिंह सौंद भी उपस्थित थे।
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