Haryana
Haryana के 3 शहरों में खुलेंगे इनक्यूबेशन सेंटर: HSIIDC ने भेजा प्रस्ताव, CM सैनी की मिलेगी मंजूरी।
Haryana के युवाओं के लिए एक शानदार पहल की जा रही है, खासकर उन लोगों के लिए जो अपना खुद का बिजनेस या स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। राज्य सरकार उन्हें सस्ती दरों पर कार्यस्थल (स्पेस) उपलब्ध कराएगी। इसके तहत प्रदेश में इनक्यूबेशन सेंटर बनाए जाएंगे, जहां युवाओं को जरूरी सुविधाएं मिलेंगी।
शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तीन शहरों—गुरुग्राम, मानेसर और फरीदाबाद—में की जाएगी। हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (HSIIDC) ने इसके लिए लोकेशन तय कर ली है। अधिकारियों द्वारा जल्द ही इस योजना का पूरा प्रस्ताव मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
अगर इन तीन शहरों में यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में इसे सोनीपत, पानीपत जैसे अन्य औद्योगिक इलाकों में भी लागू किया जाएगा। नायब सिंह सैनी सरकार ने इस योजना की घोषणा बजट में की थी।
यहां पढ़िए वो 5 सवाल-जवाब जिनसे इनक्यूबेशन सेंटर की जानकारी मिलेगी…
- सवाल: क्या होता है इनक्यूबेशन सेंटर?
जवाब: इनक्यूबेशन सेंटर एक ऐसा स्थान या संगठन है जो शुरुआती चरण के स्टार्टअप और उद्यमियों को उनके विकास में मदद करता है। यह उन्हें संसाधन, सलाह, और नेटवर्क के अवसर प्रदान करके सफल होने में मदद करता है। इनक्यूबेशन सेंटर अक्सर विश्वविद्यालयों, संस्थानों, या निजी कंपनियों द्वारा स्थापित किए जाते हैं।
इनक्यूबेशन सेंटर स्टार्टअप के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन हो सकते हैं, जो उन्हें अपने व्यवसाय को शुरू करने और विकसित करने में मदद करते हैं।
- सवाल: यहां क्या सुविधाएं मिलेंगी?
जवाब: इनक्यूबेशन सेंटर में युवाओं को कई सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। ये पूरी तरह से वातानुकूलित और आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे। पर्सनल स्पेस, कॉमन स्पेस, कॉमन लैब व मीटिंग रूम के अलावा वाईफाई की सुविधा भी इन सेंटर्स में होगी।
अपना खुद का व्यवसाय करने या स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं के सामने शुरुआती दौर में जगह की ही सबसे बड़ी समस्या आती है। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा भी कई जगहों पर ‘अटल इनक्यूबेशन सेंटर’ स्थापित किए गए हैं।
- सवाल: हरियाणा में क्या ये पहली बार शुरू होंगे?
जवाब: कई प्राइवेट कंपनियों द्वारा भी यह सुविधा दी जा रही है। हरियाणा में ये अपनी तरह के पहले सेंटर होंगे। शुरुआती चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर को इसलिए चुना गया है, क्योंकि यहां सबसे अधिक मल्टीनेशनल कंपनियों के मुख्यालय हैं। ये तीनों ही प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र भी हैं।
- सवाल: क्या सरकार ने इसके लिए फंड भी बनाया है?
जवाब: नायब सरकार ने स्टार्टअप में निवेश बढ़ाने के लिए फंड ऑफ फंड्स बनाने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत सरकार 2000 करोड़ रुपए का फंड जुटाएगी। इसमें सरकार का भी शेयर होगा और प्रदेश के विभिन्न निजी निवेशकों को इस फंड में भागीदार बनाने के लिए जागरूक व प्रेरित किया जाएगा।
इस फंड को स्टार्टअप में निवेश करने की प्लानिंग है ताकि बड़ी कंपनियों को नये चेहरे और प्रोजेक्ट मिल सके और स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को प्लेटफार्म उपलब्ध हो सके।
- सवाल: टेक्निकल सपोर्ट भी मिलेगी
जवाब: इनक्यूबेशन सेंटर में युवाओं को टेक्निकल सपोर्ट भी सरकार मुहैया कराएगी। कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए ट्रेंड टीम के साथ-साथ युवाओं के लिए सलाह, मार्गदर्शन और विशेषज्ञों के उपयोग का भी प्रबंध होगा। अगर युवा चाहेंगे तो सरकार द्वारा यहां नियुक्त किए जाने वाले प्रोफेशनल लोगों से मदद भी ले सकेंगे। सरकार का मुख्य मकसद युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाना है।
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भीषण गर्मी के चलते हरियाणा में स्कूल बंद, छुट्टियों का ऐलान
हरियाणा के स्कूली बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा विभाग के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया।
अब हरियाणा के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी। पहले ये छुट्टियां 1 जून से शुरू होनी थीं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव और लू के अलर्ट के बाद सरकार ने छुट्टियां एक सप्ताह पहले करने का निर्णय लिया है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है तथा कई इलाकों में लू चलने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने छुट्टियों के फैसले को मंजूरी दी।
गौरतलब है कि इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टियों का ऐलान किया था। अब हरियाणा सरकार ने भी इसी तरह का फैसला लेते हुए विद्यार्थियों को गर्मी से राहत दी है।
वहीं अभिभावकों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया था।
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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल
भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।
पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक
बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।
कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।
इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।
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जालंधर में विपक्ष पर गरजे पूर्व CM खट्टर: महिला आरक्षण विधेयक पर बोले- कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा परिणाम
जालंधर में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री बेबी मोर्या ने प्रैस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। खट्टर ने कहा कि लोकसभा में महिलाओं के साथ और देश की आधी आबादी के साथ अन्याय हो रहा था। कांग्रेस सरकार ने कभी इसके बारे में नहीं सोचा।
जब कभी भी भारतीय जनता ने इस क्षेत्र में काम करना चाहता तब-तब कांग्रेस सरकार सहित अन्य पार्टियों ने अड़चन डाली। 1971-74 तक महिलाओं को आरक्षण देने के लिए काम शुरू किया गया लेकिन विपक्ष ने कोई न कोई अड़चन डाल दी। इसके बाद 1979 में पहली बार पंचायत में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्ति हुई। कुछ पंचायतों ने इसे 50 प्रतिशत तक भागीदारी दी।
2023 में नहीं लाया जा सका बिल
2023 में 128वें संशोधन के रूप में पीएम मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण बिल को लाया गया। लेकिन कुछ कमियों के कारण नहीं लाया जा सका। अब फिर से मोदी सरकार ने 2029 से पहले महिला आरक्षण को लागू करने की पहल की। हमने इसका प्रारूप तैयार किया। अब फिर से विपक्ष घिनौना खेल खेल रहा है। कांग्रेस ने इस बिल पर सरकार का साथ नहीं दिया।
आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए
खट्टर ने कहा कि कांग्रेस को इस अपराध का परिणाम भुगतना पड़ेगा। चुनाव परिणाम के रूप में महिलाओं का गुस्सा दिखेगा। पीएम ने कहा है कि इस आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे तो इसका श्रेय भी नहीं चाहिए। अगर इसका श्रेय कोई भी लेना चाहता है तो ले ले। खट्टर ने कहा कि महिलाओं को जो राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण मिलना था वो कांग्रेस के चलने नहीं मिल पाया है। अब ये गैर राजनीतिक मुद्दे की तरह आगे बढ़ेगा। खट्टर ने कहा कि चैन्नई के अंदर को एक विधायक ने इस विधेयक की प्रतियां तक जलाईं। तमिलनाड़ू में इसका विरोध किया।
बेबी रानी मोर्या बोलीं- महिलाएं अपमान नहीं सहतीं, वो बदला जरूर लेंगी
आगरा की पहली मेयर, पूर्व राज्यापाल और नेशनल वूमेन कमीशन चेयपर्सन रह चुकीं बेबी रानी मौर्या ने कहा कि जब ये बिल संसद में पेश हुआ। जब इस पर वोटिंग होनी थी तो विरोधी पार्टियों ने मिलकर देश की आधी आबादी के अधियनियम को गिरा दिया। ये महिलाओं को बड़ा अपमान है। महिलाएं सब सह लेती हैं लेकिन अपना अपमान नहीं सहती। महिलाएं इस अपमान का बदला आने वाले चुनाव में लेंगी।
परिवारवादी पार्टियों ने किया बिल का विरोध
पीएम मोदी ने महिलाओं के लिए शुरू से काम किया है। उज्ज्वला का सिलेंडर दिया, शौचालय दिया ताकि महिलाओं की जिंदगी आसान हो सके। महिला वंदन बिल भी इसी कड़ी का हिस्सा है। मैं आपको बताना चाहती हूं कि जब पंचायती राज में महिलाएं इतना अच्छा काम कर रही हैं। अगर ये राष्ट्रीय राजनीति में आ जातीं तो कितना अच्छा होता। मोर्या ने कहा कि सभी परिवारवारवादी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया है।
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