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Uttar Pradesh

पहलगाम ह/म/ले के बाद UP में बदलेगा सियासी मिजाज ? ‘एक रहेंगे तो नेक रहेंगे’ नारे को मिल सकती है नई धार।

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोर दिया है। आतंकियों ने कथित तौर पर धर्म और पहचान देखकर पर्यटकों को निशाना बनाया। इस हमले की पूरे देश में तीखी निंदा हो रही है। जम्मू-कश्मीर के सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने भी सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया है।

घटना के बाद UP सहित देश के कई हिस्सों में लोगों में शोक और आक्रोश का माहौल है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पहलगाम की यह घटना देश में एक बार फिर धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा दे सकती है। UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘एक रहेंगे तो नेक रहेंगे’ और ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ जैसे संदेशों को इस माहौल में और बल मिल सकता है।

पहलगाम में आतंकी घटना के बाद सबसे पहले छत्तीसगढ़ भाजपा की ओर से ‘X’ पर पोस्ट कर कहा गया- ‘धर्म पूछा जाति नहीं’। कांग्रेस नेता रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि ‘यह सरकार हिंदुओं की बात करती है। अल्पसंख्यक असहज और परेशान महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि घटना का विश्लेषण करेंगे तो पता चलेगा कि आतंकी लोगों की पहचान देख रहे हैं, वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हमारे देश में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विभाजन रेखा खींच दी गई है।’

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी गुरुवार को कहा, आतंकी का कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में केंद्र की भाजपा सरकार ने सब कुछ अपने हिसाब से किया है। केंद्र सरकार इतने लोगों की असामयिक मौत से पल्ला नहीं झाड़ सकती। कुल मिलाकर दोनों तरफ से ही ध्रुवीकरण के संकेत मिलने लगे हैं।

विहिप के जरिए संघ सक्रिय

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानी RSS ने भी पहलगाम घटना की निंदा की है। संघ का कहना है कि ‘जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुआ नृशंस आतंकी हमला अत्यंत निंदनीय एवं संतापजनक है। यह हमला देश की एकता व अखंडता पर प्रहार करने का दुःसाहस है। सभी राजनीतिक दल व संस्थाओं को सारे मतभेदों से ऊपर उठकर इसकी भर्त्सना करनी चाहिए। सरकार इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित करने के लिए शीघ्र ही उचित कदम उठाए।’

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ ने पहले चरण में विहिप के जरिए विरोध प्रदर्शन किया है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की ओर से आतंकी संगठनों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए। आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई होते ही RSS और भाजपा इसे मुद्दा बनाकर जनता के बीच रखेंगे। उस मुद्दे के केंद्र में भी ‘एक रहेंगे तो नेक रहेंगे’, ‘बटेंगे तो कटेंगे’ ही होगा।

विहिप करेगा सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन

विहिप के प्रांतीय अध्यक्ष कन्हैयालाल अग्रवाल का कहना है कि जब आतंकियों का बस नहीं चला, केंद्र सरकार ने चारों तरफ से रास्ते बंद कर दिए तो इनकी हताशा चरम पर पहुंच गई। इसी हताशा में आतंकियों ने पहलगाम में पर्यटकों पर गोलियां चलाईं। उन्होंने कहा कि विहिप की ओर से सभी जिलों में घटना के विरोध में धरना प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को पीएम नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन देकर आतंकियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई जरुरी

राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्रनाथ भट्‌ट का मानना है कि पुलवामा हमले के बाद भी देश की जनभावना इसी तरह आहत और आक्रोशित हुई थी। उस दौरान केंद्र सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। पाक के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक से देश की जनता में उत्साह बना था। उनका मानना है कि पहलगाम हमले के बाद भी उसी तरह देश के बहुसंख्यक समाज की भावना आहत हुई है। जनता में आक्रोश है। सामाजिक संगठन, व्यापारिक संगठन सड़कों पर उतरकर अपना रोष प्रकट कर रहे हैं।

पहलगाम घटना से बढ़ेगा ध्रुवीकरण

वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल का कहना है कि पहलगाम की घटना से हिंदू-मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण बढ़ेगा। दोनों कम्युनिटी के बीच दरार बढ़ने और भरोसा कम होने की संभावना बढ़ गई है। इस भरोसे की कमी का फायदा राजनीतिक दल उठाते हैं।

कुछ दलों को कहना है कि हिंदुओं के साथ गलत हुआ, उनका मजहब पूछकर मारा गया। वहीं, कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि मुस्लिमों के साथ देश में जो व्यवहार हो रहा है, उसके कारण ऐसी घटना घटित हुई है। जैसे-जैसे हिंदू और मुसलमानों के पक्ष में बहस बढ़ेगी वैसे-वैसे राजनीतिक दलों को फायदा होगा।

भाजपा के लिए ज्यादा चुनौती

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पहलगाम की घटना के बाद देश में हिंदुओं की जनभावना जिस तरह आक्रोशित है। हिंदू-मुस्लिम का विवाद जिस तरह बढ़ा है, उससे भाजपा को फायदा होगा। लेकिन यह भाजपा के लिए भी बड़ी चुनौती है।

भाजपा उन हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करती है, जो भाजपा पर भरोसा कर पहलगाम गए। उन्होंने कश्मीर में सरकार की दलील को स्वीकार किया कि वहां सब कुछ सामान्य है। गुजरात, राजस्थान में जनता जिस तरह केंद्र सरकार के मंत्रियों के सामने रोष प्रकट कर रही है, उससे लगता है कि भाजपा को हिंदू समाज का भरोसा जीतने के लिए कठिन परिश्रम करना होगा।

राजनीति नहीं आतंकवाद के खात्मे पर बात करें

वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय का कहना है कि पहलगाम में पर्यटकों को बचाते हुए एक मुस्लिम की भी मौत हुई है। यह 30-35 साल बाद हुआ है जब कश्मीर में भी सभी कौम के लोग सड़क पर उतर कर हमले की निंदा कर रहे हैं। उनका कहना है कि मानवता और इंसानियत को कौम में नहीं बांटना चाहिए।

योगी के बाद मोदी भी बोले- मिट्‌टी में मिला देंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मधुबनी (बिहार) में आयोजित रैली में कहा, ये हमला सिर्फ निहत्थे पर्यटकों पर नहीं हुआ है। देश के दुश्मनों ने भारत की आस्था पर हमला करने का दुस्साहस किया। हमला करने वाले आतंकियों और साजिश रचने वालों को कल्पना से बड़ी सजा मिलेगा। सजा मिलकर रहेगी। आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। पीएम मोदी के मिट्‌टी में मिलाने वाले बयान के बाद सियासी हल्कों में सीएम योगी के विधानसभा में दिए उस बयान की चर्चा शुरू हो गई, जिसमें उन्होंने माफिया अतीक को मिट्‌टी में मिलाने को कहा था।

साइड इफेक्ट ये भी: राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पहलगाम की घटना के बाद देश का गुस्सा देखते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक्फ बिल के खिलाफ आंदोलन कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया है।

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Uttar Pradesh

‘पहले आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया’, CM योगी का विपक्ष पर तीखा प्रहार

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को अयोध्या पहुंचे, जहां उन्होंने आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी से भेंट की। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी रामनगरी में मौजूद रहीं। तीनों ने राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन किए।

इस अवसर पर सीएम योगी ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “जिस आस्था को पहले अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया, वही लोग उस समय सत्ता में थे।

कुर्सी बचाने के लिए वे नोएडा जाने से कतराते थे

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ये वही लोग हैं जो अपनी कुर्सी बचाने के लिए नोएडा जाने से कतराते थे। वह उन्हें अंधविश्वास नहीं लगता था। लेकिन राम मंदिर की बात करना, काशी में काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण या मथुरा-वृंदावन का उल्लेख करना उन्हें अंधविश्वास और रूढ़िवादिता लगता था।

वृंदावन जाएंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गुरुवार शाम लगभग 5 बजे वृंदावन पहुंचेंगी। उनके स्वागत को लेकर शहर में व्यापक स्तर पर सजावट और व्यवस्थाएं की गई हैं। राष्ट्रपति के आगमन के बाद वे होटल रेडिसन में ठहरेंगी और शाम करीब 6:30 बजे इस्कॉन मंदिर, वृंदावन से अपने धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत करेंगी। इसके बाद उनके प्रेम मंदिर, नीब करौरी आश्रम, उड़िया बाबा आश्रम और रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में दर्शन करने का कार्यक्रम निर्धारित है।

एक मंच पर जुटेंगे विशेषज्ञ, योगी होंगे मुख्य अतिथि

विश्व वानिकी दिवस (21 मार्च) के अवसर पर लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में देशभर के विशेषज्ञों का एक मंच पर जुटान होगा। इसमें राज्यों में चल रहे वनीकरण, वन संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन से जुड़े कार्यों की समीक्षा और अनुभवों को साझा किया जाएगा।

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UP पुलिस भर्ती परीक्षा में विवादित प्रश्न पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद सख्त, हो सकती है कार्रवाई

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उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में एक विवादित प्रश्न को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार को काफी किरकिरी झेलनी पड़ रही है। रविवार को परीक्षा के दूसरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण पर गंभीर रुख अपनाया है।

विवादित प्रश्न को लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा के साथ ही आधा दर्जन से अधिक ब्राह्मण विधायक तो शनिवार से ही डैमेज कंट्रोल में जुट गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को मोर्चा संभाला और जिम्मेदारों को सख्त लहजे में चेतावनी भी दी है।

प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में आपत्तिजनक या विवादित सवालों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी भर्ती बोर्डों के अध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या संप्रदाय की मर्यादा और आस्था से जुड़े विषयों पर अमर्यादित टिप्पणी किसी भी स्थिति में शामिल न की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस संबंध में सभी पेपर तैयार करने वालों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जाए ताकि प्रश्नपत्रों में संवेदनशीलता बनी रहे।

उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में शनिवार को पूछे गए एक सवाल ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। परीक्षा में एक बहु विकल्पीय प्रश्न पूछा गया-‘अवसर के अनुसार बदलने वाला।’ परीक्षार्थियों को इसके जो विकल्प दिए गए उसमें एक विकल्प है-’पंडित’। भाजपा के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने इस पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी थी, जबकि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। मामला संज्ञान में आने के बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मुख्यमंत्री ने रविवार को कहा कि यदि कोई पेपर तैयार करने वाला बार-बार ऐसी गलती करता है तो उसे आदतन उल्लंघन करने वाला (हैबिचुअल आफेंडर) मानते हुए तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि पेपर बनाने वालों के साथ किए जाने वाले एमओयू में भी इस प्रविधान को शामिल किया जाए, ताकि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया अधिक जिम्मेदार और जवाबदेह बन सके। सरकार का मानना है कि इससे भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहेगी और अनावश्यक विवादों से भी बचा जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में सभी पेपर सेटर्स को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जाए ताकि प्रश्नपत्रों में संवेदनशीलता बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई पेपर सेटर बार-बार ऐसी गलती करता है तो उसे आदतन उल्लंघन करने वाला (हैबिचुअल आफेंडर) मानते हुए तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाए। इस प्रकरण में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के कड़े रुख के बाद यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड भविष्य में प्रश्नों के ‘ऑडिट’ के लिए नई समीक्षा समिति बनाने पर विचार कर रहा है।

दरअसल, शनिवार को आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक विवादित प्रश्न के बाद अभ्यर्थियों और विभिन्न वर्गों की ओर से आपत्ति जताई गई थी। मामले के संज्ञान में आने के बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

यूपी सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2026 के पहले ही दिन एक सवाल के जवाब में ‘पंडित’ शब्द के विकल्प पर भारी बवाल मच गया है। इस प्रकरण पर यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड के चेयरमैन एसबी शिरोडकर ने कहा कि जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पुलिस भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र स्थानीय स्तर पर तैयार नहीं होते हैं। इन्हें बाहरी अतिगोपनीय संस्थाएं सेट करती हैं, जिन्हें बोर्ड का कोई अधिकारी भी परीक्षा से पहले नहीं देख सकता। इस विवाद ने परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही और प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है बवाल का कारण

यूपी पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर शनिवार को विवाद खड़ा हो गया है। इस सवाल में पूछा गया, “अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” इस वाक्यांश के लिए एक शब्द का चयन कीजिए। इसके उत्तर में चार विकल्प में ‘पंडित’ भी दिया गया।

‘पंडित’ विकल्प पर ही विवाद है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने विकल्प में पंडित शब्द रखे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। हिंदू महासभा ब्राह्मणों के इस बड़े अपमान पर एफआईआर दर्ज कराएगी।

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CM योगी की मां पर विवादित टिप्पणी करने वाले मौलाना के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस ने दर्ज की FIR

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उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने CM योगी की मां पर विवादित टिप्पणी करने वाले मौलाना सलीम के खिलाफ एक्शन लिया है। पुलिस ने मौलाना के खिलाफ FIR दर्ज की है।बलरामपुर जिले के भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष की तहरीर पर मौलाना के खिलाफ FIR दर्ज हुई है।

यूपी के 83 थानों में तहरीर

सामने आई जानकारी के मुताबिक, मौलाना के खिलाफ बलरामपुर के अलावा यूपी के 83 थानों में तहरीर दी गई है। हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बीजेपी पदाधिकारियों और छात्रों ने पुलिस को मौलाना के खिलाफ तहरीर दी है। संगठनों ने मौलाना की जल्द से जल्द गिरफ्तारी न होने पर दी बड़े प्रदर्शन की चेतावनी।

कई जिलों में जोरदार प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां के खिलाफ अभद्र टिप्पणी के मामले ने बीते कुछ दिनों से तूल पकड़ लिया है। विवादित बयान देने वाले मौलाना अब्दुल सलीम के खिलाफ पूरे प्रदेश में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई जिलों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने मौलाना के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की, यहां तक कि बुल्डोजर कार्रवाई और फांसी की सजा की मांग तक कर डाली है।

अधिवक्ताओं ने भी किया प्रदर्शन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां के खिलाफ अभद्र टिप्पणी के मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ अधिवक्ताओं ने हजरतगंज चौराहे पर विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध में बिहार के मौलाना अब्दुल्ला सलीम के पुतले को भी जलाया गया था। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा था कि जिस तरह से अब्दुल्लाह सलीम ने अभद्र टिप्पणी की है हम चाहते हैं कि यूपी पुलिस उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करके जो कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो उसे मामले में करें किसी की मां के खिलाफ इस तरीके की टिप्पणी करना भारतीय समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

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