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Punjab: CM भगवंत मान ने माझा क्षेत्र को दिया 135 करोड़ रुपए का तोहफा।
Punjab के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज स्थानीय मिल्क प्लांट के विस्तार के लिए 135 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना का नींव पत्थर रखा। इस परियोजना से लस्सी, दही और विभिन्न स्वादों वाले दूध सहित अन्य उत्पादों के उत्पादन की क्षमता में वृद्धि होगी।
इस परियोजना का नींव पत्थर रखने के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन पहले की सरकारों के दौरान कभी नहीं देखे गए क्योंकि उस समय के सत्ताधारी आम लोगों की बजाय केवल अपने परिवारों की ही परवाह करते थे। उन्होंने कहा कि अब हर दिन ऐसे आयोजन हो रहे हैं क्योंकि राज्य सरकार लोगों के कल्याण के लिए दिन-रात मेहनत कर रही है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि अब राज्य के हर क्षेत्र में प्रगति और विकास की झलक देखी जा सकती है और इस उद्देश्य के लिए राज्य सरकार पूरी ताकत लगा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वेरका ने अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भी अपने उत्पाद बेचने की शुरुआत की है ताकि दुनिया भर में बैठे लोग ऑनलाइन खरीदारी के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण उत्पादों का स्वाद ले सकें। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य के प्रमुख खिलाड़ियों को वेरका के ब्रांड एंबेसडर के रूप में जोड़ेगी ताकि वेरका के उत्पादों को विश्व भर में पहुंचाया जा सके। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने बेहतरीन दूध, दही, लस्सी और अन्य उत्पादों का उत्पादन करके देश में ‘श्वेत क्रांति’ का नेतृत्व किया है और सही मायनों में यही राज्य का विकास है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना न केवल मिल्कफेड की उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगी बल्कि क्षेत्र में डेयरी उद्योग के विकास में भी योगदान देगी और मिल्क यूनियन अमृतसर से जुड़े डेयरी किसानों को लाभकारी कीमतें प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों के लिए नए सेवा नियमों का मसौदा तैयार किया है, जो मिल्कफेड कर्मचारियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन नियमों से नियमित कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों के बराबर वेतन मिलेगा। इसके अलावा, अच्छे प्रदर्शन के लिए कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदर्शन आधारित छूट भी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे 1200 कर्मचारियों की नई भर्ती के लिए भी रास्ता खुलेगा। उन्होंने कहा कि यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि मिल्कफेड रबड़ी और काजू बादाम दूध सहित नए उत्पाद लॉन्च कर रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि नए उत्पाद विभिन्न उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं को पूरा करेंगे, जिससे मिल्कफेड एक अग्रणी डेयरी ब्रांड के रूप में और मजबूती से उभरेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिल्कफेड का नया मस्कट- ‘वीरा’ भी लॉन्च किया गया है जो ब्रांड एंबेसडर के रूप में कार्य करेगा और इससे वेरका का अपने ग्राहकों के साथ संबंध और गहरा होगा। उन्होंने कहा कि मिल्कफेड की स्थापना 1973 में पंजाब में डेयरी फार्मिंग को प्रोत्साहित करने के लिए की गई थी और इसका मुख्य उद्देश्य दूध उत्पादकों को लाभकारी कीमतें प्रदान करना, दूध की खरीद को बढ़ाने के लिए तकनीकी सहायता देना और डेयरी उत्पादों की प्रभावी मार्केटिंग सुनिश्चित करना था। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस समय ‘मिल्कफेड पंजाब’ भारत का सातवां सबसे बड़ा दूध सहकारी संस्थान है जिसका सालाना कारोबार 6000 करोड़ रुपए से अधिक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने डेयरी किसानों की मदद के लिए अधिक खरीद मूल्य देने के लिए बजट सहायता के रूप में 100 करोड़ रुपए दिए हैं। उन्होंने कहा कि मिल्कफेड की मुख्य ताकत बेहतरीन गुणवत्ता वाले दूध की खरीद और उच्च गुणवत्ता वाले दूध उत्पादों के उत्पादन में है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को सुनिश्चित करने के लिए मिल्कफेड अत्याधुनिक दूध संयंत्रों और दूध जांच उपकरणों में भारी निवेश कर रहा है ताकि पूरी आपूर्ति श्रृंखला में दूध की हर बूंद की गुणवत्ता की अच्छी तरह से जांच की जा सके और उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें।
मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे वेरका को अधिक से अधिक दूध उपलब्ध कराएं, ताकि यह संस्था दूध उत्पादकों को लाभकारी दरों पर मूल्य प्रदान करने के साथ-साथ अपने व्यवसाय को विस्तार करने में सक्षम हो सके। उन्होंने बताया कि मिल्कफेड नियमित रूप से नए दूध उत्पाद लॉन्च कर रहा है, जिन्हें भारी समर्थन मिल रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि मिल्कफेड अपनी पहुंच पूरे भारत में बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है और दिल्ली व एनसीआर के बाजारों में ताजा दूध और अन्य उत्पादों का शुभारंभ किया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हमारी सरकार मिल्कफेड की पुरानी प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जो वेरका ब्रांड के तहत दूध, मक्खन, घी और अन्य डेयरी उत्पादों का निर्माण करती है। इन उत्पादों को उनकी उच्च गुणवत्ता और उत्कृष्ट स्वाद के कारण दुनिया भर में सराहा जाता है।
विपक्षी दलों पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पार्टियों के नेता सत्ता के लिए आपस में लड़ रहे हैं, जबकि आम लोगों की सरकार आने वाली पीढ़ियों के कल्याण के लिए अथक मेहनत कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष आपस में बंटा हुआ है, जहां नेता सत्ता के लिए एक-दूसरे की टांग खींच रहे हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमेशा सत्ता के लिए लड़ने वाले अवसरवादी और लालची नेताओं से राज्य के लिए कुछ भी अच्छा होने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
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पंजाब को जल्द मिलेगा स्थायी DGP, 14 IPS अधिकारियों का पैनल तैयार; UPSC को भेजने की तैयारी में मान सरकार
राज्य सरकार ने स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी है। जल्द ही 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजने की तैयारी की जा रही है।
यूपीएससी इस पैनल में से तीन अधिकारियों को शार्टलिस्ट करेगा, जिनमें से एक को राज्य का नियमित डीजीपी नियुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है और इसे जल्द यूपीएससी को भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यह पैनल 1992, 1993 और 1994 बैच के आईपीएस अधिकारियों से तैयार किया गया है, जो डीजीपी पद के लिए पात्र हैं।
इन अधिकारियों के नाम शामिल
1992 बैच के अधिकारियों में कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव, पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी शरद सत्य चौहान, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के स्पेशल डीजीपी कुलदीप सिंह और हरप्रीत सिंह सिद्धू (पोस्टिंग का इंतजार) शामिल हैं।
1993 बैच से कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन व महिला मामलों की स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर देओ, पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी डॉ. जितेंद्र कुमार जैन और रेलवे के स्पेशल डीजीपी शशि प्रभा द्विवेदी का नाम पैनल में है।
वहीं, 1994 बैच के अधिकारियों में स्पेशल डीजीपी (मुख्यालय) सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, विजिलेंस ब्यूरो के स्पेशल डीजीपी-कम-चीफ डायरेक्टर प्रवीण कुमार सिन्हा, ट्रैफिक व रोड सेफ्टी के स्पेशल डीजीपी अमनदीप सिंह राय, साइबर क्राइम के स्पेशल डीजीपी वरुण नेराजा, महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी, फिल्लौर की डायरेक्टर अनीता पुंज, मानवाधिकार के स्पेशल डीजीपी नरेश कुमार और टेक्निकल सर्विसेज के स्पेशल डीजीपी राम सिंह शामिल हैं।
दो साल का होगा कार्यकाल
पैनल में से चुने जाने वाले डीजीपी को कम से कम दो साल का कार्यकाल मिलेगा, भले ही उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख कुछ भी हो। यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्देशों और बाद में तय यूपीएससी गाइडलाइंस के तहत लागू होता है। पंजाब में जुलाई 2022 से कार्यवाहक डीजीपी की व्यवस्था जारी है। आम आदमी पार्टी सरकार ने गौरव यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी थी और वे तब से लगातार इस पद पर कार्यरत हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 फरवरी को इस मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए राज्यों को नियमित डीजीपी नियुक्त करने की प्रक्रिया अपनाने को कहा था और यूपीएससी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। प्रक्रिया में देरी पर सवाल सरकार को 10 दिन के भीतर प्रस्ताव भेजने को कहा गया था, लेकिन इसमें देरी हुई।
राज्य ने 2023 में पारित पंजाब पुलिस संशोधन विधेयक का हवाला देते हुए अपनी प्रक्रिया अपनाने की कोशिश की थी। हालांकि 12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी की प्रक्रिया से ही होगी।
यूपीएससी की भूमिका अहम
यूपीएससी की एंपैनलमेंट कमेटी में चेयरमैन या सदस्य, केंद्रीय गृह सचिव का प्रतिनिधि और केंद्रीय पुलिस संगठन का प्रमुख शामिल होता है। यही कमेटी राज्य द्वारा भेजे गए नामों में से तीन अधिकारियों को चुनती है।
अब सभी की नजरें यूपीएससी पर टिकी हैं, जो इस पैनल से तीन नाम तय करेगी। इसके बाद पंजाब सरकार अंतिम फैसला लेकर राज्य को नया नियमित डीजीपी देगी।
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CM मान की गारंटी पूरी: ‘मां-बेटी सम्मान योजना’ का नोटिफिकेशन जारी, अप्रैल से लागू
पंजाब सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मां-बेटी सम्मान योजना’ के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने International Women’s Day के अवसर पर बजट पेश करते हुए इस योजना का ऐलान किया था। नोटिफिकेशन के अनुसार, यह योजना 2 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएगी और सेवा केंद्रों पर इसका रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त होगा।
मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने कहा कि यह ‘आप’ सरकार की गारंटी थी, जिसे अब पूरा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाएं (सरकारी कर्मचारी, पूर्व विधायक, सांसद और पेंशनर को छोड़कर) इस योजना का लाभ उठा सकेंगी।
इस योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रति माह ₹1,100 और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की महिलाओं को ₹1,500 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
यह एक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना है, जिसके तहत राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री ने उन महिलाओं से अपील की है जिनके पास बैंक खाता नहीं है, वे जल्द से जल्द खाता खुलवाएं। उन्होंने दावा किया कि राज्य की लगभग 97% महिलाएं (करीब 1.10 करोड़) इस योजना के दायरे में आएंगी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर न रहें।
जरूरी दस्तावेज:
- पंजाब के पते वाला आधार कार्ड
- बैंक खाता पासबुक
- SC वर्ग की महिलाओं के लिए जाति प्रमाण पत्र
- पंजाब वोटर आईडी कार्ड
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर डिप्टी कमिश्नरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों में महिलाओं की सहायता के लिए विशेष सुविधा कर्मी और मोबिलाइज़र नियुक्त किए जाएंगे, जो बैंक खाता खुलवाने और आधार लिंक कराने में मदद करेंगे।
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ने सख्त नियम भी लागू किए हैं। लाभार्थी की मृत्यु होने पर सहायता राशि तुरंत बंद कर दी जाएगी, हालांकि अंतिम संस्कार के लिए दिए गए अग्रिम भुगतान की वसूली नहीं की जाएगी। साथ ही, धोखाधड़ी रोकने के लिए मोबाइल ऐप और डैशबोर्ड के जरिए डेटा की निगरानी की जाएगी।
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भगवंत मान सरकार ने रिकॉर्ड कायम किया, पंजाब के इतिहास में पहली बार सिर्फ 4 सालों में 65,264 सरकारी नौकरियां दी गईं
आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की ‘शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल’ श्रृंखला के तहत पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मुख्य क्षेत्रों में आप सरकार की कारगुजारी पर प्रकाश डालते हुये अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए इसे पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
सरकारी क्षेत्र में रोजगार और प्रशासन में नया मानदंड स्थापित करते हुए भगवंत मान सरकार ने पिछली सरकारों की कमियों को दूर करते हुए युवाओं को आयु सीमा में 5 साल की छूट दी और केवल चार वर्षों में रिकॉर्ड 65,264 सरकारी नौकरियां प्रदान कीं, जो पंजाब के इतिहास में दी गई अब तक की सबसे अधिक नौकरियां हैं।
शिक्षा, पुलिस, बिजली, स्वास्थ्य और स्थानीय निकायों सहित प्रमुख क्षेत्रों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए सरकार ने पक्षपात की पुरानी परंपराओं से दूरी बनाई है और अब आम नागरिकों को बिना रिश्वत या सिफारिश के नौकरियां दी जा रही हैं।
इसके साथ ही सेवा केंद्रों में हर महीने 30 लाख लोगों की पहुंच और 8.20 करोड़ से अधिक सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी के माध्यम से ‘डिजिटल पंजाब’ की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है, जो पारदर्शी प्रशासन, कौशल विकास और प्रणालीगत सुधारों को दर्शाती है जिसका मकसद पंजाब के भविष्य को नई दिशा देना है।
विभिन्न विभागों के रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब एक नए डिजिटल हब के रूप में उभर रहा है, जिसने अपने कामकाज में पारदर्शिता लाते हुए युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों और अवसरों के नए रास्ते खोले हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब के इतिहास में पहली बार चार सालों में 65,264 सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में 16,308 नौकरियां, पंजाब पुलिस में 12,966 नौकरियां, बिजली विभाग में 8,765 नौकरियां, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और मेडिकल शिक्षा में 16,320 तथा स्थानीय निकाय विभाग में 5,771 लोगों को नौकरियां दी गई हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इससे राज्य में युवाओं की विदेशों की ओर पलायन की प्रवृत्ति पर रोक लगी है और पंजाब के हर गांव, कस्बे और शहर के युवाओं को इन नौकरियों का लाभ हुआ है।
भर्ती में पारदर्शिता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सभी नौकरियां बिना किसी रिश्वत या पक्षपात के केवल मेरिट और योग्यता के आधार पर दी गई हैं। कोई पेपर लीक नहीं हुआ और न ही किसी भर्ती को अदालत में चुनौती दी गई है।
उन्होंने आगे कहा कि कई उम्मीदवारों को तो अलग-अलग विभागों में कई-कई बार नौकरियां भी मिली हैं और इनमें से अधिकांश युवा ये नौकरियां लेने के लिए विदेशों से लौटकर वापस आए हैं।
उन्होंने कहा कि पहले अदालतों में चुनौती के चलते भर्ती प्रक्रियाओं में देरी होना आम बात थी, जिसके चलते अक्सर कई उम्मीदवारों की उम्र निर्धारित सीमा को पार कर जाती थी। अब युवा आईईएलटीएस सेंटर्स में जाने की बजाय सरकारी नौकरियों की तैयारी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
मौजूदा गवर्नेंस मॉडल की पिछली सरकारों से तुलना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने आम लोगों के बजाय अपने ही परिवारों का पक्ष लिया, लेकिन राज्य की सरकार ने सबकी भलाई के लिए काम किया है, जिसके चलते प्राइवेट कंपनियों में भी सात लाख के करीब युवाओं को नौकरियां मिली हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हुनर विकास मिशन शुरू किया गया है, जिसके तहत अमृतसर, बठिंडा, होशियारपुर, जालंधर और लुधियाना में पांच बहु-हुनर विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में अब तक 1.25 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 73,250 को रोजगार भी मिल गया है।
उन्होंने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसी कंपनियों के साथ एआई, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षण के लिए एमओयू साइन किए गए हैं।
रोजगार पहलों का विवरण देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 1,799 स्वरोजगार कैंपों ने 1,99,000 युवाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण हासिल करने में मदद की और 6,724 प्लेसमेंट कैंपों तथा नौकरी मेलों ने लाखों युवाओं को रोजगार हासिल करने में मदद की।
उन्होंने आगे कहा कि 11 प्रशिक्षण केंद्रों का आधुनिकीकरण करने के साथ-साथ तीन नए कैंप स्थापित किए गए हैं और 36,342 युवाओं को फौज, जल सेना, वायु सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 5,509 भर्ती हो चुके हैं।
रक्षा प्रशिक्षण संस्थानों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज़ प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट ने 218 लड़कों को प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से 106 एनडीए और अन्य अकादमियों के लिए चयनित हुए हैं तथा 85 कमीशंड अधिकारी बन चुके हैं। वहीं माई भागो आर्म्ड फोर्सेज़ प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट ने 199 लड़कियों को प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से 24 कमीशंड अधिकारी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि होशियारपुर में जल्द ही एक नया इंस्टीट्यूट शुरू किया जाएगा।
डिजिटल गवर्नेंस पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब डिजिटल पंजाब बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है क्योंकि 544 सेवा केंद्र 465 से अधिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 30 लाख लोग इन केंद्रों से हर महीने सेवाएं ले रहे हैं, यानी रोजाना एक लाख लोग सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं और अब तक 8,20 करोड़ डिजिटल सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जन्म, मृत्यु और विवाह जैसे प्रमाण-पत्र एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जा रहे हैं तथा एक करोड़ से अधिक प्रमाण-पत्र डिजिटल रूप में भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि सेवाओं की बकाया दर में भारी कमी आई है, जो 14 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 0.52 प्रतिशत रह गई है।
नागरिक-केंद्रित पहलकमियों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘भगवंत मान सरकार तुम्हारे द्वार’ स्कीम दिसंबर 2023 में लुधियाना से शुरू की गई थी, जिसके तहत नागरिक 1076 हेल्पलाइन के माध्यम से घर बैठे 437 सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह स्कीम खास तौर पर बुजुर्गों और दफ्तरों में जाकर अपना काम करवाने में असमर्थ लोगों के लिए अधिक मददगार साबित हो रही है तथा अब तक 2.66 लाख लोग इसका लाभ ले चुके हैं।
आपदा राहत सुधारों के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने देश में अपनी तरह की पहली डिजिटल बाढ़ मुआवजा प्रणाली पेश की है। उन्होंने आगे कहा कि 3,700 गांवों में डिजिटल तरीके से मुआवजे का वितरण किया गया है, जिसने पूरी पारदर्शिता के साथ सही लोगों तक राहत पहुंचाने को सुनिश्चित किया है।
जमीन सुधारों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘ईजी रजिस्ट्री’ ने तहसील दफ्तरों से भ्रष्टाचार को खत्म कर दिया है और जुलाई 2025 से अब तक छह लाख से अधिक दस्तावेज रजिस्टर किए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि बिचौलिया प्रणाली को खत्म कर दिया गया है और रजिस्ट्रेशन अब एक क्लिक से ऑनलाइन करवाई जा सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि सब-रजिस्ट्रार 48 घंटों के अंदर-अंदर आपत्ति उठा सकते हैं और उच्च अधिकारी इसकी समीक्षा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोग जिले के किसी भी सब-रजिस्ट्रार दफ्तर से अपनी संपत्ति रजिस्टर करवा सकते हैं और व्हाट्सएप के माध्यम से रीयल-टाइम अपडेट्स प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि रिश्वतखोरी के लिए शिकायत दर्ज करवाने का ऑप्शन और ‘ड्राफ्ट माई डीड’ विशेषता भी प्रदान की गई है।
ट्रांसपोर्ट सुधारों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में पहली बार फेसलेस आरटीओ सेवाएं पेश की गई हैं, जो एक बड़ी डिजिटल तब्दीली को दर्शाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि अब आरटीओ दफ्तरों में जाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि लाइसेंस और आरसी समेत 56 सेवाएं पूरी तरह फेसलेस कर दी गई हैं, जो हेल्पलाइन 1076 और सेवा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध हैं, जिससे अब तक 25,236 लोगों को लाभ मिला है।
सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘कतई ना बर्दाश्त’ नीति अपनाई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 23 मार्च, 2022 को भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन भी शुरू की गई थी।
उन्होंने आगे कहा कि इस हेल्पलाइन पर 12,218 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 10,820 संबंधित विभागों को और 1,398 विजीलेंस ब्यूरो को भेजी गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि सही मामलों में कार्रवाई करते हुए 275 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 341 मुलजिमों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 16 गजेटेड अधिकारी, 161 सरकारी कर्मचारी, 88 पुलिस कर्मचारी और 77 आम व्यक्ति शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि विजीलेंस ब्यूरो ने 487 छापेमारी करते हुए 1,215 मुलजिमों के विरुद्ध 534 केस दर्ज किए हैं।
इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि 112 गजेटेड अफसरों, 162 सरकारी मुलाजिमों और 83 निजी व्यक्तियों समेत 357 व्यक्तियों के खिलाफ जांच चल रही है। उन्होंने आगे कहा कि 143 केसों में दोषियों को सजा सुनाई गई है और कई मुलाजिमों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ चार साल का रिपोर्ट कार्ड है और आने वाले समय में भी ऐसे लोग भलाई प्रयास जारी रहेंगे।
एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि देश की हालत इस हद तक अजीबोगरीब बन गई है और देश में जो भी बुरा हुआ है, उसके लिए नेहरू को, दिल्ली के लिए अरविंद केजरीवाल को और पंजाब व चंडीगढ़ के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सब कुछ सियासी विरोधियों के नाम पर थोपकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है, जबकि 15 लाख रुपये के वादे से लेकर एमएसपी तक कुछ भी नहीं दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा शब्दों की खेल और कठपुतलियों की तरह विरोधियों को निशाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती।
किसान भलाई के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार किसानों की जमीनों के नीचे हाई टेंशन तारें डालने की संभावना की पड़ताल कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रभावशाली योजना किसानों को लाभ पहुंचाने और फसलों के जोखिम को कम करने के लिए जल्द ही लागू की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रोजेक्ट मेरे पैतृक गांव से शुरू होगा जहां 2,000 एकड़ में 413 ट्यूबवेल मोटरें और 1,100 बिजली के खंभे मौजूद हैं, जिन्हें जमीनदोज करने का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार एक्ट, 2008’ में संशोधन के लिए बैसाखी के मौके पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस एक्ट के तहत बेअदबी की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को न्यूनतम 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सख्त सजा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों के बारे में संत समाज और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा चल रहा है।
– मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब में गेहूं की निर्विघ्न खरीद का भरोसा दिया, आढ़तियों की चिंताओं को केंद्र के पास बार-बार उठाया
आढ़तियों की चिंताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आढ़तियों को हरियाणा में कारोबार करने की पूरी छूट है और वे यह भी बताना चाहते हैं कि उनके मुद्दे सिर्फ केंद्र द्वारा ही हल किए जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैंने उनकी जायज मांगों को भारत सरकार के सामने कई बार उठाया है लेकिन केंद्र की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार गेहूं की निर्विघ्न और मुश्किल रहित खरीद को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है तथा सारे प्रबंध पहले ही कर लिए गए हैं।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और अन्य मौजूद थे।
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