Punjab
Punjab सरकार ने राज्य में गैर-संचारी रोगों से निपटने हेतु एक राज्य स्तरीय जांच अभियान की शुरुआत की।
चंडीगढ़, Punjab के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज राज्यभर में सामान्य गैर-संचारी रोगों (एन.सी.डी.) की रोकथाम, नियंत्रण और जांच के लिए जनसंख्या-आधारित पहल की शुरुआत की। डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इस अभियान के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की शुगर, उच्च रक्तचाप और तीन प्रमुख प्रकार के कैंसर—मुंह, स्तन और सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह जांच गैर-संचारी रोगों के नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मंत्री ने जानकारी दी कि यह जांच ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आम आदमी क्लीनिकों/आयुष्मान आरोग्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और उप-मंडल अस्पतालों में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों जैसे आशा, ए.एन.एम. और एम.पी.डब्ल्यू. द्वारा की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यह अभियान 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की गई स्क्रीनिंग प्रोग्राम की तर्ज पर शुरू किया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में जनसंख्या-आधारित जांच के जरिए सामान्य गैर-संचारी रोगों की शीघ्र पहचान करना है। यह अभियान 31 मार्च तक चलेगा।
जिला एस.ए.एस. नगर के स्वास्थ्य ब्लॉक बूथगढ़ के गांव सैणी माजरा में इस अभियान के उद्घाटन समारोह के दौरान वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस विशेष पहल का उद्देश्य गैर-संचारी रोगों के शुरुआती पहचान के लिए जांच करवाना और समय पर उपचार प्रदान कर नागरिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। उन्होंने बताया कि गैर-संचारी रोग आमतौर पर दीर्घकालिक होते हैं, जिनका उपचार लंबी अवधि तक किया जाता है, और इस प्रकार की बीमारियों की नियमित और समय पर जांच अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉ. बलबीर सिंह ने सभी मरीजों का विस्तृत ऑनलाइन रिकॉर्ड बनाए रखने, सटीक डेटा एकत्र करने, रोग के फैलाव पर नजर रखने और प्रभावी इलाज प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। अभियान की सफलता के लिए नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए उन्होंने सभी से इस पहल का पूरा लाभ उठाने और अपनी जांच करवाने का आग्रह किया। इस वर्चुअल उद्घाटन समारोह में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य कुमार राहुल, एमडी एनएचएम घनश्याम थोरी, सिविल सर्जन मोहाली डॉ. संगीता जैन, सहायक निदेशक सह राज्य कार्यक्रम अधिकारी एनपी-एनसीडी डॉ. गगनदीप सिंह ग्रोवर, पीओ डॉ. आशु समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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कर्मचारियों की शिकायतें अब होंगी जल्दी हल, मान सरकार का बड़ा भरोसा: हरपाल चीमा
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार कर्मचारियों की शिकायतों को जल्द और पारदर्शी तरीके से हल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी के चेयरमैन के रूप में उन्होंने आज विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठकें कीं।
इन बैठकों के दौरान वित्त मंत्री ने पंजाब भर की अलग-अलग यूनियनों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उनकी लंबित मांगों और चिंताओं को सुना। जिन यूनियनों के प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया, उनमें मेरिटोरियस स्कूल टीचर्स यूनियन, अध्यापक इंसाफ कमेटी, फायर ब्रिगेड आउटसोर्स इम्प्लाइज यूनियन, फायर ब्रिगेड कॉन्ट्रैक्ट इम्प्लाइज यूनियन और फॉरेस्ट वर्कर्स यूनियन शामिल थीं।
बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। वित्त मंत्री ने सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यूनियनों द्वारा उठाई गई सभी जायज मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए और उनका जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाए।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और उनके कार्यस्थल से जुड़ी समस्याओं को समयबद्ध तरीके से हल करना है। उन्होंने दोहराया कि सरकार कर्मचारियों के साथ संवाद बनाए रखते हुए उनके कल्याण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की वैध मांगों को गंभीरता से ले रही है और उन्हें हल करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि प्रशासनिक कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे और कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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Punjab की सबसे कम उम्र की लाभार्थी: 1 साल की बच्ची को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत मिला जीवनरक्षक इलाज!
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत नवजात और छोटे बच्चों के इलाज के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि गंभीर स्थिति में मरीजों को बिना किसी देरी के तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके।
श्री मुक्तसर साहिब में 1 साल की बच्ची ख्वाहिश को निमोनिया होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसे तत्काल इलाज की जरूरत थी। पहले ऐसे मामलों में परिवारों को इलाज शुरू होने से पहले पैसे जुटाने, दस्तावेज पूरे करने और मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना ने इस प्रक्रिया को आसान बना दिया है।
बच्ची का स्वास्थ्य कार्ड पहले से बना होने के कारण दीप अस्पताल में डॉ. मोनिका गर्ग की देखरेख में बिना किसी अग्रिम भुगतान के तुरंत इलाज शुरू कर दिया गया। परिवार को न तो पैसों की चिंता करनी पड़ी और न ही किसी तरह की औपचारिकता में समय गंवाना पड़ा। समय पर इलाज मिलने से बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो गई।
इसी तरह के कई मामले संगरूर और मानसा जिलों से भी सामने आए हैं, जहां कम वजन और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे नवजात बच्चों को भी बिना किसी आर्थिक बाधा के इलाज मिल रहा है। यह दर्शाता है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान हो गई है।
योजना के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी मरीज का इलाज पैसे या प्रक्रिया की वजह से न रुके। खासकर बच्चों के मामलों में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है और यह योजना उस जोखिम को खत्म करती है।
यह योजना प्रति परिवार सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा प्रदान करती है, जिसके तहत सरकारी और निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज कराया जा सकता है। अब तक 26 लाख से अधिक स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं और मरीज 900 से ज्यादा अस्पतालों में 2300 से अधिक मेडिकल पैकेजों के तहत इलाज करवा रहे हैं।
योजना के तहत बढ़ते बाल चिकित्सा मामलों से यह साफ है कि पंजाब में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा मजबूत हो रहा है, जहां बिना किसी आर्थिक बोझ के तुरंत इलाज संभव हो रहा है। सरकार लोगों को लगातार प्रेरित कर रही है कि वे इस योजना का लाभ लेने के लिए स्वास्थ्य कार्ड बनवाएं और जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज प्राप्त करें।
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Punjab में ‘खेल क्रांति’ से बड़ा बदलाव: International Hockey Tournament की मेजबानी के साथ राज्य बना Sports Hub
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘शानदार चार साल, भगवंत मान दे नाल’ कार्यक्रम के तहत खेल विभाग का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कहा कि उनकी सरकार की “खेल क्रांति” ने राज्य की खेल व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है और पंजाब को अंतरराष्ट्रीय खेल नक्शे पर मजबूत पहचान दिलाई है। उन्होंने बताया कि पहली बार पंजाब को हॉकी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी मिली है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और चीन जैसी शीर्ष छह टीमें हिस्सा लेंगी। यह टूर्नामेंट अक्टूबर-नवंबर में मोहाली के बलबीर सिंह सीनियर हॉकी स्टेडियम और जालंधर के सुरजीत हॉकी स्टेडियम में आयोजित होगा, जहां मैचों के साथ-साथ पंजाबी संस्कृति को दर्शाने के लिए भांगड़ा और गिद्धा जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी में शानदार इतिहास होने के बावजूद पंजाब को पहले कभी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी नहीं मिली थी, इसलिए यह उपलब्धि राज्य के लिए बेहद खास है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि लगभग 40 वर्षों बाद पंजाब को राष्ट्रीय बैडमिंटन अंडर-13 चैंपियनशिप की मेजबानी भी मिली है, जो जालंधर में आयोजित होगी और इससे राज्य में खेलों को नई दिशा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने खेलों के क्षेत्र में किए गए बड़े सुधारों का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने खेल बजट को 350 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1791 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया है, जो देश में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि कोचों की संख्या 500 से बढ़ाकर 2458 कर दी गई है और नए कोचों की भर्ती की गई है, जिनमें कई पूर्व खिलाड़ी भी शामिल हैं। खिलाड़ियों को ओलंपिक की तैयारी के लिए 15 लाख रुपये और एशियाई खेलों के लिए 8 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है, जबकि ओलंपिक, पैरा-ओलंपिक और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को एक-एक करोड़ रुपये तक का इनाम दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में करीब 100 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की जा चुकी है और कई खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां भी दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ‘खेड़ां वतन पंजाब दीयां’ योजना के तहत खेलों को जमीनी स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें खिलाड़ियों की संख्या डेढ़ लाख से बढ़कर पांच लाख तक पहुंच चुकी है और हर साल हजारों खिलाड़ियों को पदक व नकद पुरस्कार दिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में 3100 खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं, 3000 जिम आधुनिक उपकरणों से लैस किए जा रहे हैं और खिलाड़ियों को 17,000 खेल किट वितरित की गई हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिए डाइट अलाउंस बढ़ाकर 480 रुपये किया गया है और 13 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बेहतर पोषण सुविधाएं दी जा रही हैं। खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए मोहाली, बठिंडा और लुधियाना में हॉकी एस्ट्रोटर्फ बदले गए हैं और मोहाली में नया सिंथेटिक ट्रैक भी बनाया गया है। स्पोर्ट्स मेडिसिन को बढ़ावा देने के लिए 113 पद सृजित किए गए हैं, जिनमें डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट को प्रमुख शहरों में तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री ने पंजाब की समृद्ध खेल विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य ने हरमनप्रीत सिंह, शुभमन गिल, हरमनप्रीत कौर, गुरप्रीत सिंह संधू और अर्शदीप सिंह जैसे कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं और पंजाबी खिलाड़ियों के बिना भारतीय हॉकी की कल्पना अधूरी है। उन्होंने बताया कि 50 से अधिक पंजाबी खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीते हैं और कई खिलाड़ियों ने भारतीय टीम की कप्तानी की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर साल चार देशों का हॉकी टूर्नामेंट आयोजित करने की योजना पर भी काम कर रही है, जिससे राज्य में खेलों का स्तर और ऊंचा होगा। उन्होंने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले खेल संस्कृति को नजरअंदाज किया गया, लेकिन अब उनकी सरकार इसे फिर से पटरी पर ला रही है। अंत में उन्होंने कहा कि खेल नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए खेलों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है, इसलिए सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है ताकि पंजाब देश का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स हब बन सके।
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