Delhi
राज्यसभा में सांसद राघव चड्ढा ने उठाए Middle Class लोगों की समस्याओं पर कड़े सवाल।
- बोले- Middle Class को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी समझती है सरकार
- संसद में रखी बुजुर्गों की सब्सिडी बहाल करने की मांग,
- रेलवे में बढ़ते किराए और घटती सुविधाओं पर उठाए सवाल।
- ट्रंप की नीतियों से खतरे में पड़ीं लाखों नौकरियां, भारत में और बढ़ सकती है बेरोजगारी दर
- राघव चड्ढा बोले- रेल मंत्री को रेल से ज्यादा रील्स में है दिलचस्पी, यात्रियों की असल समस्याओं पर नहीं है कोई ध्यान
नई दिल्ली, 11 फरवरी, 2025: मंगलवार को राज्यसभा में बजट चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल उठाए और मिडिल क्लास, रेलवे, और प्रवासी भारतीयों की समस्याओं को राज्यसभा में खुलकर सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार Middle Class लोंगो को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी समझती है।
Middle Class लोगों को अनदेखा कर रही सरकार।
राघव चड्ढा ने कहा “गरीबों को सब्सिडी और स्कीम्स मिल जाती हैं, वहीं अमीरों के कर्ज माफ कर दिए जाते हैं, लेकिन Middle Classको कुछ नहीं मिलता। सरकार द्वारा इन लोगों को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी समझा जाता है ।
इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, तो मांग भी बढ़ रही है, लेकिन यह मांग सिर्फ मिडिल क्लास लोगो से ही क्यों है। जनगणना और सर्वेक्षण भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि खाली जेबों के साथ Middle Class लोगों के अपने सपने और अरमान होते हैं और उनके बच्चों की आंखों में ख्यालों का आसमान होता है।
सांसद राघव चढ्डा ने कहा, 87,762 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि की मांग के लिए विधेयक का विनियोजन किया गया है। लेकिन यह राशि कहां से आएगी और इसका बोझ किस पर डाला जाएगा?
सरकार के लिए Middle Class सोने का अंडा देने वाली मुर्गी
सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि भारत की 140 करोड़ आबादी में से केवल 6.68% लोग ही इन छूटों का लाभ उठा पाते हैं। 8 करोड़ भारतीय कर दाखिल करते हैं, लेकिन उनमें से 4.90 करोड़ लोग शून्य आय दिखाते हैं, और केवल 3.10 करोड़ लोग ही टैक्स भुगतान करते हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि टैक्स का असली बोझ मिडिल क्लास पर ही है।
उन्होंने वित्त मंत्री की उस सोच को भी खारिज किया कि इस टैक्स छूट से खपत में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा, “यह खपत तब तक नहीं बढ़ेगी, जब तक जीएसटी दरें कम नहीं की जातीं। जीएसटी का भुगतान सभी करते हैं, आम आदमी जब दूध, सब्जी और दवाइयों पर भी टैक्स भरता है, तो उसकी जेब और हल्की होती जाती है।”
राघव चड्ढा ने कहा कि सरकार की नीतियां गरीबों और अमीरों के लिए अलग-अलग हैं। गरीबों को सब्सिडी और योजनाएं मिलती हैं, जबकि अमीरों के कर्ज माफ कर दिए जाते हैं। लेकिन Middle Class को कुछ नहीं मिलता। न सब्सिडी, न टैक्स में राहत और न ही किसी योजना का लाभ।
Middle Classके अरमान टैक्स के बोझ तले दबे
राघव चड्ढा ने कहा कि मिडिल क्लास सबसे बड़ा टैक्सदाता है लेकिन उसे सबसे कम लाभ मिलता है। सैलरी न बढ़ने के कारण , बचत नहीं हो पाती, और महंगाई लगातार बढ़ती जाती है। जब खाद्य पदार्थों की महंगाई 8 फीसदी से अधिक बढ़ती है, तो वेतन वृद्धि 3 फीसदी से भी कम होती है।
महंगाई और कर्ज के जाल में फंसा Middle Class
राघव चड्ढा ने कहा कि Middle Class सबसे बड़ा टैक्सदाता है लेकिन उसे सबसे कम लाभ मिलता है। सैलरी बढ़ती नहीं, बचत नहीं हो पाती, और महंगाई लगातार बढ़ती जाती है। जब खाद्य पदार्थों की महंगाई 8% से अधिक बढ़ती है, तो वेतन वृद्धि 3% से भी कम होती है।
उन्होंने कहा, “Middle Class को किताब, कॉपी, दवाइयां, मिठाइयां, कपड़े, मकान हर चीज पर टैक्स देना पड़ता है। मेहनत से कमाई गई हर चीज पर टैक्स लगाया जाता है। Middle Class के अरमान भी टैक्स के बोझ तले दब जाते हैं। आय स्थिर है, लेकिन खर्चे लगातार बढ़ते जा रहे हैं , हर मोर्चे पर Middle Class संघर्ष कर रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि Middle Class के लोग कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं। “पूरी जिंदगी काम करने के बाद भी 2BHK घर खरीदने के लिए Middle Class को 20-25 साल के कर्ज में डूबना पड़ता है। सैलरी 7 तारीख को आती है, लेकिन मकान मालिक 1 तारीख को किराया मांगता है। बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए भी कर्ज लेना पड़ता है, और स्वास्थ्य आपातकाल के समय तो सोना तक गिरवी रखना पड़ता है। यह स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।”
रेलवे की समस्याओं पर सरकार के खिलाफ बोले सांसद राघव चड्ढा।
नई दिल्ली। रेलवे की स्थिति पर राघव चड्ढा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि रेलवे में सुविधाएं घटती जा रही हैं, जबकि किराया बढ़ता जा रहा है। वंदे भारत जैसी महंगी ट्रेनों में आम आदमी यात्रा नहीं कर सकता है।राघव चड्ढा ने आरोप लगाते हुए कहा कि जनता से प्रीमियम किराया वसूला जा रहा है और वंदे भारत और बुलेट ट्रेन जैसी महंगी परियोजनाएं केवल अमीरों के लिए हैं। गरीबों को इनका कोई लाभ नहीं है।
उन्होंने रेलों की रफ्तार पर बात करते हुए कहा, दुनिया भर में ट्रेनों की स्पीड बढ़ती जा रही है, लेकिन भारतीय रेलवे की रफ्तार की रफ़्तार बढ़ने की बजाए घटती जा रही है। वंदे भारत की स्पीड घटा दी गई है ,जबकि किराया 2013-14 के 0.32 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़कर 2021-22 में 0.66 रुपये हो गया है, जो 107 फीसदी की वृद्धि है। वंदे भारत जैसी महंगी ट्रेनें खाली चल रही हैं क्योंकि आम आदमी इनका लाभ नहीं उठा पाते , अब रेल यात्रा भी अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है।
सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी मजबूरी में ही रेलवे का रुख करता है, लेकिन रेल मंत्री को रेल से ज्यादा रील्स में दिलचस्पी है। यात्रियों की असल समस्याओं पर ध्यान देने की बजाए उनका ध्यान सोशल मीडिया पर है।
उन्होंने कहा, 3AC और 2AC को ‘लक्ज़री’ माना जाता था, लेकिन अब इनकी हालत जनरल डिब्बों से भी खराब हो गई है। टिकट लेने के बावजूद भी यात्रियों को सीट नहीं मिल पाती । ट्रेनों में भीड़ इतनी बढ़ गई है कि लोग आलू की बोरियों की तरह एक-दूसरे के उपर पड़े रहते हैं। प्लेटफॉर्म पर गंदगी, गंदा पानी, और खाने में कीड़े-मकोड़े आम शिकायतें बन चुकी हैं। पिछले दो वर्षों में स्वच्छता संबंधी शिकायतों में 500 फीसदी की वृद्धि हुई है।
टिकट बुकिंग पर बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा, टिकट बुक करना भी मुश्किल हो गया है, जिससे लोग थर्ड-पार्टी ऐप्स का सहारा लेते हैं, जो भारी कमीशन वसूलते हैं। टिकट कैंसिल करने पर भी यात्रियों से भारी शुल्क वसूला जाता है। इसके अलावा स्टेशन पर मिलने वाला खाना भी महंगा हो चुका है। बिसलेरी की जगह नकली पानी बेचा जा रहा है और खाने में घटिया किस्म की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि 140 करोड़ लोगों में से कितने लोग बुलेट ट्रेन और वंदे भारत जैसी महंगी ट्रेनों में यात्रा कर सकते हैं? अगर 80 करोड़ भारतीयों को मुफ्त राशन देना पड़ता है, तो वही लोग 2,000-3,000 रुपये के टिकट कैसे खरीद पाएंगे ? जिनकी महीने भर की कमाई ही मात्र 8,000-10,000 रुपये है।
रेलवे बुजुर्गों को फिर से दे सब्सिडी
सांसद राघव चड्ढाने कहा कि देश को कुछ बुलेट ट्रेनों की नहीं, बल्कि हजारों किफायती सामान्य ट्रेनों की जरूरत है। महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में लोग सस्ती यात्रा की ओर ज्यादा रूझान रखते है। 2020 में रेलवे ने बुजुर्गों की यात्रा सब्सिडी बंद कर दी थी, जिससे 150 मिलियन सीनियर सिटिजंस प्रभावित हुए। राघव चड्ढा ने सवाल उठाया कि क्या हमारी रेलवे अब इतनी निर्मम हो गई है कि बुजुर्गों की सूखी हड्डियों को निचोड़कर पैसा कमाना पड़ रहा है? उन्होंने सरकार से आग्रह करते हुए कहा की बुजुर्गों की सब्सिडी को फिर से शुरू किया जाए, ताकि वे अपने जीवन के आखिरी वर्षों में सम्मानपूर्वक यात्रा कर सकें।
सांसद राघव चड्ढा ने रेल हादसों पर सवाल उठाते हुए कहा, की हमारे रेल मंत्री को रेलवे और जनता की सुरक्षा की कोई फिक्र नहीं है। रेल मंत्री ‘कवच सिस्टम’ की बात करते हैं, मगर हर हफ्ते कोई न कोई रेल दुर्घटना हो जाती है। पहले भारतीय रेलवे को सुरक्षित यात्रा का पर्याय माना जाता था, लेकिन आज कोई गारंटी नहीं है कि आप जहां जाना चाहते हैं वहां सुरक्षित पहुंच भी पाएंगे या नहीं । पिछले 5 वर्षों में 200 से अधिक रेल दुर्घटनाओं में 351 लोगों की जान गई और 1000 से अधिक लोग घायल हुए। इसके अलावा बालासोर रेल दुर्घटना में 293 लोग मारे गए और 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए, लेकिन जांच और कार्रवाई के नाम पर कोई कदम नहीं उठाया गया।
रेल सुरक्षा के नाम पर जो टैक्स आम आदमी से वसूला जाता है, उसका उपयोग सुरक्षा संसाधन बढ़ाने में नहीं बल्कि बड़े अधिकारियों के लिए लक्जरी सोफे और फुट मसाजर खरीदने में किया जा रहा है।
भारतीय लोगों की ऐसी स्थिति पर चुप क्यों है सरकार।
104 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किए जाने की घटना का जिक्र करते हुए राघव चड्ढा ने कहा, “भारतीयों को हवाई जहाज में हथकड़ियों और बेड़ियों में बांधकर लाया गया। यह मानवता के खिलाफ है। सरकार को इस पर कड़ा विरोध करना चाहिए था, लेकिन हमारे विदेश मंत्रालय ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
उन्होंने कहा कि इन प्रवासियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, उन्हें 40 घंटे तक बेड़ियों में बांधकर रखा गया, वॉशरूम जाने की अनुमति भी नहीं दी गई और खाने पिने से भी बेहाल रखा गया । यह सब अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के भी खिलाफ है।
उन्होंने भारत की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा भारत ने अपने नागरिकों को सम्मानपूर्वक वापस लाने के लिए विमान क्यों नहीं भेजा? वहीं, स्वीडन, डेनमार्क, नॉर्वे और ब्रिटेन जैसे देशों के नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों नहीं किया जाता ?
ट्रंप की नीतियों से खतरे में पड़ीं लाखों नौकरियां
राघव चड्ढा ने अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन की नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि एच-1बी वीजा प्रतिबंध और टैरिफ की वजह से भारतीय पेशेवरों और उद्योगों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय आईटी निर्यात, फार्मास्युटिकल्स, और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर अमेरिकी टैरिफ से भारी नुकसान हो रहा है, जिससे लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। । 2023 में कुल 3.86 लाख एच-1बी आवेदनों में से 72% आवेदन भारतीयों के थे। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स की बड़ी संख्या में नौकरियां चली जाएंगी। इससे अनुमानित 0.5 मिलियन भारतीयों के अमेरिका में नौकरी जाने की संभावना है। अमेरिका में अवैध प्रवासियों पर सख्ती और ग्रीन कार्ड आवेदनों में देरी से कई भारतीयों को नौकरी गंवानी पड़ सकती है। इससे भारत में बेरोजगारी दर और बढ़ेगी, और अमेरिका से लौटने वाले भारतीयों को एकीकरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
अप्रत्यक्ष करों का प्रभाव और जीएसटी का बोझ
राघव चड्ढा ने कहा कि भारत की 140 करोड़ आबादी में से केवल 6.68 फीसदी लोग ही इन छूटों का लाभ उठा पाते हैं। 8 करोड़ भारतीय इनकम टैक्स दाखिल करते हैं, लेकिन उनमें से 4.90 करोड़ लोग शून्य आय दिखाते हैं, और केवल 3.10 करोड़ लोग ही टैक्स भुगतान करते हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि टैक्स का असली बोझ Middle Class पर ही है।
रुपये की घटती वैल्यू से बढ़ रही महंगाई
राघव चड्ढा ने रुपये के गिरते मूल्य पर भी चिंता जताई। एसबीआई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार रुपये में 5 फीसदी की गिरावट से मुद्रास्फीति में 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी होती है। उन्होंने आगे कहा, “मई 2014 में डॉलर के मुकाबले रुपया 58.80 रुपये था, जो फरवरी 2025 में गिरकर 86.70 रुपये हो गया है। रुपये के कमजोर होने से पेट्रोल-डीजल महंगे हो गए हैं, जिससे हर चीज की कीमतें बढ़ रही हैं।
उन्होंने बताया कि भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, और रुपये के कमजोर होने से ईंधन के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। रुपये की घटती वैल्यू से खाद्य मुद्रास्फीति, ऊर्जा मुद्रास्फीति, स्वास्थ्य सेवा मुद्रास्फीति, शिक्षा मुद्रास्फीति और इलेक्ट्रॉनिक्स मुद्रास्फीति जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं, जिनका सीधा असर Middle Class पर पड़ता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स मुद्रास्फीति की बात करते हुए सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि भारत अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक्स और उनके कंपोनेंट्स का आयात करता है, जिसका निपटान यूएस डॉलर में किया जाता है। रुपये के अवमूल्यन के साथ स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स की लागत लगातार बढ़ रही है। भारत में निर्मित इलेक्ट्रॉनिक्स भी महंगे हो रहे हैं क्योंकि आयातित घटकों की लागत बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक तौर से कमजोर रुपये से निर्यात बढ़ना चाहिए, लेकिन भारतीय निर्यात में गिरावट आई है। चीन ने अपने युआन का अवमूल्यन कर निर्यात को बढ़ावा दिया है, जबकि भारत में व्यापार घाटा बढ़कर 202.42 बिलियन डॉलर हो गया है।
उन्होंने कहा, 2013 में एक प्रमुख भाजपा नेता और सांसद ने कहा था, “जब यूपीए सत्ता में आया था, तब डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत राहुल गांधी की उम्र के बराबर थी। आज यह सोनिया गांधी की उम्र के बराबर है और बहुत जल्द यह मनमोहन सिंह की उम्र को छू लेगा। यही स्थिति महंगाई को और बढ़ाएगी और आम आदमी को परेशान करेगी।”
सांसद राघव चड्ढा ने आगे कहा, पहले कुछ लोग रुपये के गिरने पर चिंता करते थे, मगर अब सरकार का इस पर कोई ध्यान नहीं है। “मैं उनसे पूछना चाहता हूं अब कोई ध्यान क्यों नहीं देता? रुपये गिरने पर ज्ञान क्यों नहीं देता? रुपया का गिरना तो हर दिन जारी है, मगर अब कोई बयान क्यों नहीं देता?
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ई-20 के विरोध में 100 लोगों के साथ पीएम से मिलने जा रहे केजरीवाल को पुलिस ने रोका
ई-20 पेट्रोल के विरोध में 100 लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पैदल मार्च करते हुए उनके आवास जा रहे आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को दिल्ली पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। जिसके बाद अरविंद केजरीवाल लोगों से मिली 2.33 लाख से ज्यादा पीटिशन के साथ सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और पीएम से मिलाने की मांग करने लगे। पुलिस ने उन्हें बताया कि प्रधानमंत्री मिलना नहीं चाहते हैं और सारी पीटिशन लेकर धरना खत्म करा दिया। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार ट्रंप के दबाव में अमेरिका से इथेनॉल खरीदकर देश पर थोपना बंद करे। प्रधानमंत्री को हम पर अपनी ताकत दिखाने से क्या होगा, उन्हें यही हिम्मत ट्रंप को दिखानी चाहिए। ई-20 वापस नहीं होता है तो देश फिर एक बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएगा। इस दौरान वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह समेत पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद रहे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम लोग 2,33,238 पिटीशन लेकर प्रधानमंत्री को देने गए थे। हालांकि पुलिस ने हमें प्रधानमंत्री आवास तक जाने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि एक महीना पहले ई20 के मुद्दे पर प्रधानमंत्री से चर्चा करने के लिए समय मांगा था, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। आज हम उन्हें पिटीशन देने के लिए निकले, तो उन्होंने जवाब दिया कि वे नहीं मिलेंगे। यह उनकी तानाशाही को दिखाता है। जिस तरह से उन्होंने नीट वाले पूरे एपिसोड में तानाशाही दिखाई, वैसे ही ई20 के मुद्दे पर भी वे अड़े हुए हैं। उनकी सरकार ने खुद संसद में माना है कि गाड़ियों की माइलेज कम होती है, लेकिन थोड़ी कम होती है। इंजन के पार्ट खराब होते हैं, लेकिन रबड़ वाले पार्ट खराब होते हैं। जब इंजन के पार्ट खराब होते हैं और गाड़ियों की माइलेज भी कम होती है, तो फिर सरकार ने यह जबरदस्ती क्यों कर रखी है?
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि यह जबरदस्ती इसलिए कर रखी है क्योंकि ट्रंप मोदी जी के सिर पर बैठे हैं। ट्रंप उन पर इतना दबाव डाल रहे हैं कि मोदी जी की ट्रंप के सामने ना कहने की हिम्मत नहीं है। ट्रंप जबरदस्ती कर रहे हैं कि अमेरिका से एथेनॉल खरीदकर भारत में बेचा जाए, इसलिए यह पूरा ई20 लाया गया है। आज हम पिटीशन लेकर गए थे जो रस्सी से बांधी हुई थीं, लेकिन किसी वजह से वो रस्सियां खुल गईं और कई पिटीशन इधर-उधर हो गईं। अगर प्रधानमंत्री कार्यालय कहेगा तो हम सभी पिटीशन का एक फ्रेश सेट उन्हें भिजवा देंगे। अगर 2 लाख 33 हजार से ज्यादा लोगों ने इतनी जल्दी साइन कर दिए, तो जाहिर है कि पूरे देश के अंदर इसे लेकर बहुत बेचौनी है। हम प्रधानमंत्री से यही निवेदन करना चाहते हैं कि वे अमेरिका से एथेनॉल खरीदना बंद करें और ट्रंप का दबाव बर्दाश्त करना सीखें, क्योंकि इसकी वजह से पूरा देश कष्ट झेल रहा है।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि अभी पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया है कि ई20 को वापस लिया जाए। ई20 जनता के खिलाफ है और प्रधानमंत्री जी को ट्रंप का दबाव नहीं मानना चाहिए। गोवा में हमारे दो, गुजरात में पांच और जम्मू-कश्मीर में हमारा एक विधायक है। जम्मू-कश्मीर, गुजरात और गोवा में भी हमारे विधायक यह प्रस्ताव पेश करेंगे। हमें मालूम है कि वह पास होगा या नहीं, क्योंकि कम से कम गुजरात और गोवा में भाजपा की सरकारें हैं और वे इसे पास नहीं होने देंगे। लेकिन हम वहां भी ई20 वापस लेने का प्रस्ताव जरूर पेश करेंगे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नीट वाले पूरे आंदोलन में मोदी जी को खुद निर्णय लेना था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना है या नहीं। लेकिन यहां तो ट्रंप का दबाव है और ट्रंप के सामने मोदी जी भीगी बिल्ली बन जाते हैं। इसमें मोदी जी की चलती नहीं है और उनकी मजबूरियां हैं। अगर जनता को ई20 से छुटकारा चाहिए, तो उसे बड़े स्तर पर सड़कों पर उतरना पड़ेगा। यह आंदोलन जारी रहेगा। आगे कब और कौन सी एक्टिविटी होगी, जल्द ही विचार विमर्श करके अवगत कराएंगे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज जो 100 पीड़ित लोग आए, उन्होंने बड़ी हिम्मत दिखाई, क्योंकि आज के दौर में हिम्मत करना बहुत मुश्किल है। जो सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाल देता है, ये लोग उसकी ऐसी-तैसी कर देते हैं, एफआईआर कर देते हैं। इनके ट्रोल धमकाते हैं और इनके गुंडे घर पहुंच जाते हैं। इन्होंने बहुत गुंडागर्दी मचा रखी है, लेकिन यही गुंडागर्दी इनका अंत साबित होगी।
इस दौरान, “आप” के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि ट्रंप के दबाव में आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का स्वाभिमान, सम्मान और हिंदुस्तान की 30 करोड़ गाड़ियां ट्रंप के हाथों गिरवी रख दी हैं। ट्रंप की गुलामी के कारण प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका से 22 हजार करोड़ रुपए का कूड़ा खरीदने जा रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने एक महीने पहले प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर अनुरोध किया था कि हम इस मुद्दे पर उनसे मिलना और बातचीत करना चाहते हैं। इसके अलावा 2 लाख 33 हजार लोगों ने हस्ताक्षर करके दिया कि वे ई20 के खिलाफ हैं। लेकिन ट्रंप की गुलामी के कारण प्रधानमंत्री ने अरविंद केजरीवाल की बात नहीं सुनी।
संजय सिंह ने कहा कि आज अरविंद केजरीवाल अपने उन 100 पीड़ित साथियों के साथ, जिनकी गाड़ियां ई20 पेट्रोल से खराब हुई हैं, ये 2 लाख 33 हजार पत्र प्रधानमंत्री को सौंपने जा रहे थे। लेकिन 100 लोगों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया और एक हजार पुलिस वाले लगा दिए गए। असल में यही मोदी का राज है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में ई20 के खिलाफ यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी और हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रंप की गुलामी और दलाली नहीं करने देंगे।
‘‘आप’’ वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि ई-20 का मसला देश के 30 करोड़ लोगों की गाड़ियों में ज़बरदस्ती इथेनॉल डलवाने का मसला है। करोड़ों लोग बता रहे हैं कि इससे उनकी गाड़ियों का नुकसान हो रहा है, माइलेज कम हो रही है, इंजन ख़राब हो रहा है और सर्विस के ख़र्चे बढ़ गए हैं।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि जनता को इतना नुकसान हो रहा है, फिर भी मोदी जी इस पर अड़े क्यों हुए हैं? सिर्फ़ अमेरिका के दबाव में, ट्रंप के दबाव में। ट्रंप के पास सरप्लस इथेनॉल था, जिसे उन्होंने मोदी जी को झुकाकर भारत से ख़रीदवाने पर मजबूर कर दिया। आज इसी बारे में लाखों लोगों की पीटिशन लेकर हम प्रधानमंत्री जी को देने निकले थे, लेकिन प्रधानमंत्री जी ने मिलने से मना कर दिया। तब ये पीटिशन पुलिस के ज़रिए प्रधानमंत्री कार्यालय भिजवाई गईं।
*लोगों ने प्रधानमंत्री के नाम यह याचिका की है साइन*
याचिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा गया है कि देशभर में ई20 पेट्रोल थोपे जाने के खिलाफ भारी आक्रोश है। मुझे यह देखकर दुख होता है कि सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है और इसे थोपने पर आमादा है। सरकार के फैसलों को सही ठहराने के लिए न तो कोई तर्क है, न ही कोई विज्ञान, न इंजीनियरिंग और न ही अर्थशास्त्र। शायद इसके पीछे कोई राजनीति है, जो मेरी समझ से परे है और मैं इसे समझ नहीं पा रहा हूं।
इस देश के एक नागरिक के रूप में, मैं आपसे आग्रह करता हूं किरू
1) फ्यूल स्टेशनों पर हमें शुद्ध पेट्रोल और ई20 के बीच चयन करने का विकल्प प्रदान करें, ताकि हमें ऐसे ईंधन का उपयोग करने के लिए मजबूर न होना पड़े जो हमारे वाहनों को नुकसान पहुंचाता है।
2) ई20 की कीमत कम करें ताकि यह इसके कम कैलोरी मान और इससे मिलने वाले कम माइलेज के अनुरूप हो, जिससे हमें गुणवत्ता से समझौता किए गए उत्पाद के लिए पूरी कीमत न चुकानी पड़े।
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धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाए- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर मंतर से शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने की मांग रख कर युवाओं के अंदर उम्मीद की नई किरण जगा दी है। गुरुवार को उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके संघर्ष का समर्थन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाए। लेकिन प्रधानमंत्री ऐसा करेंगे नहीं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं सोनम वांगचुक शिक्षा में कोई क्रांति न ला दें। देश की सड़ चुकी शिक्षा व्यवस्था को एक क्रांतिकारी कदम ही ठीक कर सकता है। इसलिए देश को सोनम वांगचुक जैसा एक क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री के साथ ही क्रांतिकारी कदम दोनों की जरूरत है। इस दौरान सांसद संजय सिंह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए पूरे देश के युवा जो कॉकरोच आंदोलन के बैनर तले इकट्ठे हुए हैं, मैं उन सब लोगों को सलाम करता हूं। मैं सोनम वांगचुक को सलाम करता हूं जो अपने लिए नहीं, बल्कि युवाओं और हमारे देश के बच्चों के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर पिछले 19 दिन से अनशन कर रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि हमारे देश में ऐसे बहुत सारे टीचर्स हैं जिन्होंने पेपर लीक के खिलाफ अपने-अपने शहर से आवाज उठाई, लेकिन उनको गिरफ्तार कर लिया गया। उन टीचर्स को तरह-तरह से टॉर्चर किया गया और उनके खिलाफ एफआईआर की गई, मैं उन सब लोगों को भी सलाम करता हूं। सोनम वांगचुक एक बहुत बड़े शिक्षाविद् हैं। उन्होंने पहले भी लद्दाख और देश के लिए कई बार अनशन किए हैं और आज उन्होंने देश के लिए अपनी जान दांव पर लगाई हुई है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब कोई बच्चा कॉम्पिटिटिव एग्जाम देने जाता है तो वह सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि उसके लिए एक सपना होता है। जब वह एग्जामिनेशन हॉल में घुसता है तो उसे विश्वास होता है कि मैं अपनी मेहनत और अपनी बुद्धिमत्ता के बल पर अपना भविष्य बनाऊंगा। मैंने भी आईआईटी के पेपर दिए थे और उसमें सफल होकर आईआईटी गया था, लेकिन उन दिनों पेपर लीक नहीं होते थे। अगर उन दिनों पेपर लीक हो रहे होते तो शायद मेरा आईआईटी देने का विश्वास ही नहीं बनता। मेरे दोनों बच्चे भी आईआईटी से हैं और उनके समय पर भी पेपर लीक नहीं होते थे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ सालों से जिस तरह से देश में पेपर लीक होने लगे हैं, उससे बच्चे का वह आत्म विश्वास लड़खड़ाने लगा है कि अगर वह मेहनत करेगा और इंटेलिजेंट है तो अमीरों के बच्चों को भी पीछे छोड़ देगा। आज बच्चों का यह लड़खड़ाता हुआ आत्म विश्वास सही नहीं है और देश के लिए बहुत खतरनाक बात है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब हर साल पेपर लीक हो रहे हैं। साल 2024 में जो पेपर लीक हुआ था, सरकार ने उसके मास्टरमाइंड को बेल दिला दी। अब यह एक सिस्टम बन गया है कि हर साल पेपर लीक होते हैं, कमेटी बैठती हैं, जांच होती है, एफआईआर होती है, गिरफ्तारी होती है, बेल हो जाती है और अगले साल के पेपर लीक होने की फिर तैयारी शुरू हो जाती है। देश का युवा और ये बच्चे इसे कब तक बर्दाश्त करेंगे?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नीट पेपर लीक के बाद 20 से ज्यादा बच्चों ने सुसाइड कर लिया, लेकिन सरकार को कोई अक्ल नहीं आई। इनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती, चाहे जितने बच्चे सुसाइड कर लें। जो बच्चे सुसाइड कर रहे हैं वे हमारे घरों के बच्चे थे, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। सीबीएसई में पूरा इवैल्यूएशन सिस्टम गड़बड़ा गया, गिरफ्तार करना तो दूर की बात है, सरकार ने जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की। इतने बड़े स्तर पर पूरे देश में आंदोलन चल रहा है, फिर भी सरकार ने कोई ऐसा सिस्टम में बदलाव नहीं किया जिससे अगले साल पेपर लीक न हों। अगले साल फिर पेपर लीक होंगे और हमारे बच्चे फिर मरेंगे, फिर आत्महत्या करेंगे। यह सिस्टम कब बदलेगा? इस सिस्टम को बदलना ही पड़ेगा।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यही जंतर-मंतर था, 4 अप्रैल 2011 का दिन था और यहीं अन्ना हजारे बैठे हुए थे। उस वक्त की सरकार को भी बड़ा अहंकार था, लेकिन तीन साल के बाद वह सरकार अपने अहंकार की वजह से नहीं बची और डूब गई। आज 2026 है और मैं सरकार को कहना चाहता हूं कि वह युवाओं के कॉकरोच आंदोलन और सोनम वांगचुक की बात सुन ले, नहीं तो आज से तीन साल बाद उनका भी यही हश्र होगा, जो 2014 में उस अहंकारी सरकार का हुआ था। इस सरकार को अक्ल नहीं आ रही है और ये भी बहुत ज्यादा अहंकार में डूबे हुए हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को तो इस्तीफा देना ही चाहिए, लेकिन सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाओ और सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाओ। मुझे पता है कि प्रधानमंत्री सुनने वाले नहीं हैं। प्रधानमंत्री सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री नहीं बनाएंगे, क्योंकि उन्हें डर लगता है कि कहीं सोनम वांगचुक कोई क्रांतिकारी चीज न कर दे। आज शिक्षा व्यवस्था जितनी खराब हो गई है, उसे ठीक करने के लिए हमें क्रांतिकारी कदम ही चाहिए। बिना क्रांति के शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं होने वाली है। इसके लिए हमें सोनम वांगचुक जैसा एक क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री और क्रांतिकारी कदम दोनों की जरूरत है। उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि 20 जुलाई को ज्यादा से ज्यादा संख्या में जंतर-मंतर आना है और शांतिपूर्ण संसद मार्च को सफल बनाना है।
इस दौरान “आप” के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह श्दिनकर’ की पंक्तियों ‘समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध’ का जिक्र करते हुए घरों में बैठे लोगों से अपील की कि वे बाहर निकलकर जंतर-मंतर पहुंचें। लोगों को सोनम वांगचुक की आवाज में आवाज मिलाकर भारत सरकार और नरेंद्र मोदी को झुकने के लिए मजबूर करना है।
संजय सिंह ने आगे कहा कि मोदी जी से बड़ा नौटंकीबाज पूरी दुनिया में कोई नहीं मिलेगा। जब देश में कोरोना आया और नोटबंदी में लोग मर गए, तब वे रोने लगे। देश के प्रधानमंत्री दिन-रात सिर्फ झूठ बोलने का काम करते हैं। इसलिए मैं यकीन दिलाकर जा रहा हूं कि 20 जुलाई से संसद के अंदर सभी साथी सांसदों से बात करके हम लोग युवाओं के लिए लड़ाई लड़ने का काम करेंगे। 20 जुलाई को सोनम वांगचुक के आह्वान पर मैं भी एक कार्यकर्ता और साथी के रूप में इस आंदोलन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर आऊंगा और हमारे अन्य साथी भी यहां पहुंचेंगे।
संजय सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने भरोसा दिलाया है कि हम इस आंदोलन को हर तरीके से अपना समर्थन देंगे। हम अन्य राजनीतिक दलों और जन आंदोलनों से भी इस आंदोलन को समर्थन देने की अपील करते हैं, क्योंकि सोनम वांगचुक कोई अपनी निजी लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि देश के करोड़ों नौजवानों, हिंदुस्तान के भविष्य और आने वाले कल की लड़ाई लड़ रहे हैं।
Delhi
Mahatma Gandhi की समाधि पर जाकर केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हुए नतमस्तक, सत्याग्रह के मार्ग पर डटे रहने की मांगी शक्ति
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया मंगलवार को राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी की समाधि पर नतमस्तक हुए। उनके साथ पार्टी के विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सत्याग्रह की राह दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन करते हुए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं कि हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।
अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि आज मनीष सिसोदिया और अन्य साथियों के साथ राजघाट पहुंच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन किया। मेरी बापू से यही प्रार्थना है कि उनके दिखाए ‘सत्याग्रह’ के मार्ग पर चलने के हमारे संकल्प को वे सदैव शक्ति दें। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से, सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।
वहीं, मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मामला अदालत का है। हम अदालत का बहुत सम्मान करते हैं। हम अपने देश की न्याय प्रणाली का बहुत सम्मान करते हैं, क्योंकि इसी न्याय प्रणाली और न्यायपालिका ने हमें बेल दिलवाई और आरोप मुक्त किया है। आज हम लोग अगर आजाद घूम रहे हैं, तो हमारी न्याय प्रणाली की वजह से ही घूम रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, जिनकी वजह से हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। वे सभी हमने जज साहिबा को लिखी चिट्ठी में बयां कर दिए हैं।
उधर, ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बापू समाधि पर नतमस्तक होने के बाद एक्स पर कहा कि मंगलवार को राजघाट जाकर पूज्य बापू की समाधि पर अरविंद केजरीवाल के साथ नतमस्तक हुआ। महात्मा गांधी जी ने हमें हमेशा सत्य के रास्ते पर अडिग रहने और सत्य के लिए आत्मबल के साथ सत्याग्रह करने की प्रेरणा दी है। आज उसी मार्ग पर चलने का संकल्प और मजबूत हुआ।
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