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पंजाब ने VB को सौंपी, गांवों के रास्तों की अवैध बिक्री की जांच

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पंजाब सरकार ने न्यू चंडीगढ़ में गांव के रास्तों को एक निजी बिल्डर को अवैध बिक्री के मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
राज्य सरकार ने राज्य सतर्कता ब्यूरो को सैनी माजरा गांव में कथित बिक्री की जांच करने को कहते हुए उसे मोहाली के माजरी ब्लॉक के सात अन्य गांवों में इसी तरह के भूमि सौदों की पुष्टि करने का निर्देश दिया है।

विजिलेंस विभाग ने ब्यूरो के मुख्य निदेशक को लिखे पत्र में ब्यूरो से उन अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ विस्तृत जांच करने को कहा है, जो 2018-19 में भूमि सौदे का हिस्सा थे। जांच में माजरी ब्लॉक के सैनी माजरा के अलावा बांसेपुर, रानी माजरा, दोदेमाजरा, घंडौली, रसूलपुर, भरौंजियां और सलामतपुर गांवों में गांव के रास्तों की अवैध बिक्री की कथित मंजूरी की भी जांच की जाएगी। इन सभी गांवों को अब ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमएडीए) द्वारा न्यू चंडीगढ़ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

गांव के रास्ते या “रास्ते” कानूनी तौर पर तब तक नहीं बेचे जा सकते जब तक कि इन्हें चकबंदी निदेशक और भूमि अभिलेख निदेशक द्वारा “परित्यक्त” घोषित न कर दिया जाए। न्यू चंडीगढ़ की ज़मीन पंजाब में सबसे महंगी ज़मीनों में से एक है, यहाँ एक एकड़ की बाज़ार कीमत 4 करोड़ रुपये से ज़्यादा होने का अनुमान है।

मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता वाले पंजाब सतर्कता विभाग ने इस मामले में ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग में सचिव और निदेशक के पद पर तैनात दो आईएएस अधिकारियों दिलराज सिंह संधावालिया और परमजीत सिंह के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इन दोनों अधिकारियों ने नवंबर 2024 में गांव के रास्तों को खरीदने के लिए बिल्डर द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि बढ़ा दी थी, जबकि इन रास्तों को परित्यक्त घोषित नहीं किया गया था।
VB को भेजे गए पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्मिक विभाग पहले से ही अपने स्तर पर अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रहा है।

पंजाब सरकार ने न्यू चंडीगढ़ में गांव के रास्तों को एक निजी बिल्डर को कथित अवैध बिक्री के मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है।राज्य सरकार ने राज्य सतर्कता ब्यूरो को सैनी माजरा गांव में कथित बिक्री की जांच करने को कहते हुए उसे मोहाली के माजरी ब्लॉक के सात अन्य गांवों में इसी तरह के भूमि सौदों की पुष्टि करने का निर्देश दिया है।

विजिलेंस विभाग ने ब्यूरो के मुख्य निदेशक को लिखे पत्र में ब्यूरो से उन अधिकारियों और निजी व्यक्तियों (ग्रामीणों) के खिलाफ विस्तृत जांच करने को कहा है, जो 2018-19 में भूमि सौदे का हिस्सा थे। जांच में माजरी ब्लॉक के सैनी माजरा के अलावा बांसेपुर, रानी माजरा, दोदेमाजरा, घंडौली, रसूलपुर, भरौंजियां और सलामतपुर गांवों में गांव के रास्तों की अवैध बिक्री की कथित मंजूरी की भी जांच की जाएगी। इन सभी गांवों को अब ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमएडीए) द्वारा न्यू चंडीगढ़ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

गांव के रास्ते या “रास्ते” कानूनी तौर पर तब तक नहीं बेचे जा सकते जब तक कि इन्हें चकबंदी निदेशक और भूमि अभिलेख निदेशक द्वारा “परित्यक्त” घोषित न कर दिया जाए। न्यू चंडीगढ़ की ज़मीन पंजाब में सबसे महंगी ज़मीनों में से एक है, यहाँ एक एकड़ की बाज़ार कीमत 4 करोड़ रुपये से ज़्यादा होने का अनुमान है।

मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता वाले पंजाब सतर्कता विभाग ने इस मामले में ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग में सचिव और निदेशक के पद पर तैनात दो आईएएस अधिकारियों दिलराज सिंह संधावालिया और परमजीत सिंह के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इन दोनों अधिकारियों ने नवंबर 2024 में गांव के रास्तों को खरीदने के लिए बिल्डर द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि बढ़ा दी थी, जबकि इन रास्तों को परित्यक्त घोषित नहीं किया गया था।

VB को भेजे गए पत्र में कथित तौर पर यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्मिक विभाग पहले से ही अपने स्तर पर अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रहा है।मूल रूप से, ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग के अधिकारियों ने 2018-19 में निजी बिल्डर को अपने आवास परियोजना के लिए जमीन का एक टुकड़ा प्राप्त करने की सुविधा के लिए रास्तों की बिक्री की अनुमति दी थी। तब तक बिल्डर के पास रास्तों के चारों ओर जमीन के टुकड़े थे। शुरू में बिल्डर ने रास्तों को घेर लिया था, जिस पर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई थी। वे खरड़ कोर्ट गए और अंतरिम संरक्षण प्राप्त किया। बाद में, कुछ ग्रामीण जमीन बेचने के लिए सहमत हो गए। 2018-19 में विभाग में तैनात कुछ अधिकारियों पर आरोप है कि निजी बिल्डर ने उन्हें सुविधा देने के लिए न्यू चंडीगढ़ में निर्मित संपत्तियां दी थीं।

हालांकि, कुछ ग्रामीणों ने इस बिक्री पर आपत्ति जताई और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने 2021 में फैसला सुनाया कि जमीन को तभी बेचा जा सकता है जब इसे परित्यक्त घोषित किया जाए। ऐसा न किए जाने के बावजूद अधिकारियों ने जमीन की बिक्री की अनुमति दे दी।

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प्रभावी शिक्षा पहल: CM मान सरकार ने एक दिन में पंजाब के सभी सरकारी स्कूलों में माता-पिताओं, शिक्षकों और अधिकारियों को एकजुट किया

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पंजाब के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने की एक महत्वपूर्ण पहल के तहत पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आज दूसरी राज्यव्यापी स्कूल-स्तरीय पैरेंट्स (माता-पिता) वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यभर से 17.50 लाख से अधिक माता-पिता शामिल हुए।

इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के नेतृत्व में शुरू की गई यह मेगा पहल पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में माता-पिताओं की सक्रिय भागीदारी के लिए एक नया मानक स्थापित करती है। उन्होंने कहा कि यह पहल पंजाब शिक्षा क्रांति के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार की सहभागी शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।

स्कूल और माता-पिता की साझेदारी पर जोर

शिक्षा मंत्री श्री बैंस ने श्री आनंदपुर साहिब क्षेत्र के सरकारी हाई स्कूल मानकपुर (नंगल) में आयोजित वर्कशॉप में भाग लिया और माता-पिताओं व छात्रों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य स्कूलों और माता-पिताओं के बीच साझेदारी को मजबूत करना और छात्रों के समग्र विकास को प्रोत्साहित करना है।

उन्होंने बताया कि वर्कशॉप के दौरान माता-पिताओं को

  • तनाव-मुक्त परीक्षा तैयारी की रणनीतियों,
  • सकारात्मक सोच के जरिए बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने,
  • तथा पंजाब सरकार की ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम के अंतर्गत नशा रोकथाम, शीघ्र पहचान और सहायता से जुड़े विषयों पर जागरूक किया गया।

मंत्रियों और विधायकों की सक्रिय भागीदारी

श्री बैंस ने बताया कि इस राज्यव्यापी पहल में कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर, श्री लालचंद कटारूचक, श्री तरुनप्रीत सिंह सौंद और श्री हरदीप सिंह मुंडियां सहित 40 से अधिक विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में वर्कशॉपों में भाग लिया। इससे शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता और सामुदायिक भागीदारी का स्पष्ट संदेश गया।

पहली वर्कशॉप की सफलता के बाद दूसरी पहल

शिक्षा मंत्री ने कहा कि दिसंबर 2025 में आयोजित पहली पैरेंट्स वर्कशॉप की शानदार सफलता के आधार पर दूसरी वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस पहल ने स्कूलों और अभिभावकों के बीच मजबूत संवाद स्थापित किया और माता-पिताओं को अपने बच्चों की शैक्षणिक प्रगति व घर पर सीखने के सहयोग के महत्व से अवगत कराया।

सुचारू संचालन के लिए व्यापक प्रबंध

वर्कशॉप की सफलता सुनिश्चित करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने 3,000 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें निदेशक और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) शामिल थे, की तैनाती की। इसके साथ ही, पहले से लगभग 40,000 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था ताकि इस पहल का सकारात्मक प्रभाव वास्तविक रूप से सामने आ सके।

सहयोगी माहौल से शिक्षा में बदलाव

श्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि शिक्षा के स्वरूप को बदलने और एक शिक्षित व जागरूक युवा पीढ़ी तैयार करने के लिए स्कूल और माता-पिताओं के बीच तालमेल बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह वर्कशॉप बच्चों की शैक्षणिक सफलता और समग्र स्वास्थ्य के लिए एक सहयोगी घरेलू माहौल बनाने के सरकार के मिशन का अहम आधार है।

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मजदूर सुलखन सिंह के लिए संजीवनी बना हेल्थ कार्ड, बिना एक रुपया खर्च किए हुआ 3 लाख रुपए का इलाज: धालीवाल

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा जनता से किए गए वादे अब जमीनी स्तर पर साकार होते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की दूरदर्शी सोच के चलते ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ आज पूरी तरह प्रभावी हो चुकी है।

शनिवार को आप नेता प्रभबीर सिंह बराड़ और गुरप्रताप सिंह संधू के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए धालीवाल ने बताया कि इस योजना के तहत पंजाब के करीब 65 लाख परिवारों को ₹10 लाख तक के कैशलेस इलाज की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना विशेष रूप से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

योजना की सफलता का उदाहरण साझा करते हुए धालीवाल ने गुरदासपुर जिले के गांव गुरदासनंगल निवासी सुलखन सिंह का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दिहाड़ी मजदूरी करने वाले सुलखन सिंह अचानक गंभीर हृदय रोग की चपेट में आ गए थे। डॉक्टरों ने उनके इलाज का खर्च करीब ₹3 लाख बताया था, जिसे वहन करना उनके परिवार के लिए असंभव था।

धालीवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत मात्र एक दिन में हेल्थ कार्ड तैयार किया गया और इसके बाद अमृतसर के एक निजी अस्पताल में बिना एक भी पैसा खर्च किए सुलखन सिंह का सफल ऑपरेशन किया गया तथा स्टेंट डाले गए। उन्होंने कहा कि सुलखन सिंह का स्वस्थ होकर घर लौटना उन लोगों को करारा जवाब है, जो सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को केवल ‘जुमलेबाजी’ बताते हैं।

आप नेता ने कहा कि पंजाब सरकार का मुख्य एजेंडा शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना है। इन दोनों क्षेत्रों में निवेश कर सरकार आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और मजबूत भविष्य तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान गरीब वर्ग महंगे इलाज के कारण या तो कर्ज में डूब जाता था या इलाज के अभाव में अपनी जान गंवा देता था, लेकिन मान सरकार ने स्वास्थ्य को हर नागरिक का बुनियादी अधिकार बनाया है।

धालीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि किसी भी मरीज को किसी प्रकार की परेशानी न हो और कोई भी अस्पताल कार्ड धारकों से अतिरिक्त राशि की मांग न कर सके।

अंत में उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टियां दशकों तक सत्ता में रहकर इन बुनियादी सुविधाओं को नजरअंदाज करती रहीं, उन्हें आज हो रहा बदलाव पच नहीं रहा है। उन्होंने पंजाब की जनता से अपील की कि वे मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अपना हेल्थ कार्ड बनवाएं और इस जनहितकारी योजना का पूरा लाभ उठाएं।

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नशे के ठिकाने बताकर नशा तस्करों को प्रोमोट कर हैं सांसद चरणजीत चन्नी: Baltej Pannu

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा सोशल मीडिया पर जारी नशे से जुड़ी वीडियो को लेकर कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला है। पन्नू ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से चिट्टे (नशे) के ठिकाने बताना एक सांसद की बेहद गैर-जिम्मेदाराना और निंदनीय हरकत है।

पन्नू ने कहा कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह नशे के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करे, न कि नशा बिकने वाली जगहों का प्रचार करे। उन्होंने कहा कि नशा रोकने के बजाय नशे के ठिकानों को उजागर करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह समाज के लिए भी खतरनाक संदेश देता है।

आप नेता ने कहा कि चाहे अकाली-भाजपा का दस साल का शासन रहा हो या उसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह और चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार, इन सभी सरकारों के दौरान पंजाब में नशे को फलने-फूलने दिया गया और इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

बलतेज पन्नू ने कहा कि आज मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार पूरे प्रदेश के सहयोग से ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान चला रही है, जिससे नशा तस्करों में खौफ पैदा हुआ है। ऐसे समय में चन्नी द्वारा वीडियो जारी कर यह बताना कि चिट्टा कहां उपलब्ध है, सरकार की नशा विरोधी मुहिम को कमजोर करने और नशा तस्करों को फायदा पहुंचाने की सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है।

पन्नू ने आगे कहा कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि का कर्तव्य होता है कि वह पुलिस और प्रशासन को जानकारी दे, न कि वीडियो बनाकर नशे के ठिकानों का प्रचार करे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चन्नी अब नशा बेचने वालों के ब्रांड एंबेसडर की भूमिका निभा रहे हैं?

उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता सब देख रही है और कांग्रेस पार्टी से यह स्पष्ट करने की मांग की कि वह सरकार की नशा विरोधी मुहिम के साथ खड़ी है या नशा बेचने वालों के साथ। अंत में पन्नू ने चेतावनी दी कि इस तरह की ओछी राजनीति से आम आदमी पार्टी सरकार का नशा मुक्त पंजाब का संकल्प कमजोर नहीं होगा और नशे के पूरी तरह खात्मे तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

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