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दिल्ली आंदोलन 2.0: 306वें दिन भी जारी किसान प्रदर्शन, अनशन से बिगड़ी Jagjit Singh Dallewal की तबीयत

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दिल्ली आंदोलन 2.0 के तहत किसानों का धरना आज 306वें दिन भी जारी है। किसान सुबह 11 बजे शंभू बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। वहीं, हरियाणा-पंजाब के खनुरी बॉर्डर पर किसान नेता Jagjit Singh Dallewal का आमरण अनशन 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिससे उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक भूखे रहने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, उनका वजन अब तक 12 किलो से ज्यादा घट चुका है और लीवर की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

किसान अपनी 13 मांगों, जिनमें फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी प्रमुख है, को लेकर पिछले 10 महीने से शंभू और खनुरी बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान नेता सरवन पंधेर ने ऐलान किया है कि 16 दिसंबर को पंजाब को छोड़कर देशभर में ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। इसके अलावा, 18 दिसंबर को पंजाब में दोपहर 12 से 3 बजे तक ‘ट्रेन रोको अभियान’ चलाया जाएगा। 18 दिसंबर तक किसी भी जत्थे को दिल्ली की ओर जाने की अनुमति नहीं दी गई है।

इससे पहले, 6, 8 और 14 दिसंबर को संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले 101 किसानों के एक समूह ने दिल्ली की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। 14 दिसंबर को 101 किसान शंभू बॉर्डर से दिल्ली के लिए रवाना हुए, लेकिन पुलिस ने घग्गर नदी के पुल पर बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। जब किसानों ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, तो पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। इस झड़प में 17-18 किसान घायल हो गए।

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जालंधर में मंत्री लाल चंद काटारुचक पहुंचे, गेहूं खरीद के 24 घंटे में भुगतान; मंडियों में पुख्ता प्रबंध किए गए

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पंजाब में गेहूं खरीद सीजन को लेकर सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। जालंधर के जिला प्रशासकीय परिसर स्थित कांफ्रेंस हॉल में पहुंचे खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद काटारुचक ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया कि राज्य की सभी मंडियों में व्यापक स्तर पर प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मंत्री ने कहा कि इस बार गेहूं खरीद के दौरान किसानों को सबसे बड़ी राहत समय पर भुगतान को लेकर मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों द्वारा अपनी फसल बेचने के बाद 24 घंटे के भीतर उनके खातों में राशि भेज दी जाएगी। इसके लिए सरकार ने पहले ही 30,973 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर ली है, जिससे भुगतान प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

मंडियों में उपलब्ध करवाई गई सुविधाएं

उन्होंने बताया कि मंडियों में साफ-सफाई, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और तौल की उचित सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। इसके अलावा किसानों की फसल की सुचारु खरीद के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी भी तय कर दी गई है। सरकार का प्रयास है कि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो, ताकि किसानों को अधिक समय तक इंतजार न करना पड़े।

गेहूं की लिफ्टिंग को लेकर भी मंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस बार किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गोदामों को पहले से खाली कराया जा रहा है, ताकि खरीदी गई फसल को तुरंत उठाया जा सके और मंडियों में अनावश्यक जाम की स्थिति न बने।

अधिकारियों को दिए समस्याएं हल करने के निर्देश

मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। यदि कहीं कोई कमी सामने आती है तो उसे तुरंत दूर किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीद प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस मौके पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे और उन्होंने मंत्री को मंडियों में किए गए इंतजामों की जानकारी दी। सरकार को उम्मीद है कि इस बार खरीद सीजन सुचारु तरीके से पूरा होगा और किसानों को समय पर उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।

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पंजाब को जल्द मिलेगा स्थायी DGP, 14 IPS अधिकारियों का पैनल तैयार; UPSC को भेजने की तैयारी में मान सरकार

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राज्य सरकार ने स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी है। जल्द ही 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजने की तैयारी की जा रही है।

यूपीएससी इस पैनल में से तीन अधिकारियों को शार्टलिस्ट करेगा, जिनमें से एक को राज्य का नियमित डीजीपी नियुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है और इसे जल्द यूपीएससी को भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यह पैनल 1992, 1993 और 1994 बैच के आईपीएस अधिकारियों से तैयार किया गया है, जो डीजीपी पद के लिए पात्र हैं।

इन अधिकारियों के नाम शामिल

1992 बैच के अधिकारियों में कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव, पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी शरद सत्य चौहान, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के स्पेशल डीजीपी कुलदीप सिंह और हरप्रीत सिंह सिद्धू (पोस्टिंग का इंतजार) शामिल हैं।

1993 बैच से कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन व महिला मामलों की स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर देओ, पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी डॉ. जितेंद्र कुमार जैन और रेलवे के स्पेशल डीजीपी शशि प्रभा द्विवेदी का नाम पैनल में है।

वहीं, 1994 बैच के अधिकारियों में स्पेशल डीजीपी (मुख्यालय) सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, विजिलेंस ब्यूरो के स्पेशल डीजीपी-कम-चीफ डायरेक्टर प्रवीण कुमार सिन्हा, ट्रैफिक व रोड सेफ्टी के स्पेशल डीजीपी अमनदीप सिंह राय, साइबर क्राइम के स्पेशल डीजीपी वरुण नेराजा, महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी, फिल्लौर की डायरेक्टर अनीता पुंज, मानवाधिकार के स्पेशल डीजीपी नरेश कुमार और टेक्निकल सर्विसेज के स्पेशल डीजीपी राम सिंह शामिल हैं।

दो साल का होगा कार्यकाल

पैनल में से चुने जाने वाले डीजीपी को कम से कम दो साल का कार्यकाल मिलेगा, भले ही उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख कुछ भी हो। यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्देशों और बाद में तय यूपीएससी गाइडलाइंस के तहत लागू होता है। पंजाब में जुलाई 2022 से कार्यवाहक डीजीपी की व्यवस्था जारी है। आम आदमी पार्टी सरकार ने गौरव यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी थी और वे तब से लगातार इस पद पर कार्यरत हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 फरवरी को इस मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए राज्यों को नियमित डीजीपी नियुक्त करने की प्रक्रिया अपनाने को कहा था और यूपीएससी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। प्रक्रिया में देरी पर सवाल सरकार को 10 दिन के भीतर प्रस्ताव भेजने को कहा गया था, लेकिन इसमें देरी हुई।

राज्य ने 2023 में पारित पंजाब पुलिस संशोधन विधेयक का हवाला देते हुए अपनी प्रक्रिया अपनाने की कोशिश की थी। हालांकि 12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी की प्रक्रिया से ही होगी।

यूपीएससी की भूमिका अहम

यूपीएससी की एंपैनलमेंट कमेटी में चेयरमैन या सदस्य, केंद्रीय गृह सचिव का प्रतिनिधि और केंद्रीय पुलिस संगठन का प्रमुख शामिल होता है। यही कमेटी राज्य द्वारा भेजे गए नामों में से तीन अधिकारियों को चुनती है।

अब सभी की नजरें यूपीएससी पर टिकी हैं, जो इस पैनल से तीन नाम तय करेगी। इसके बाद पंजाब सरकार अंतिम फैसला लेकर राज्य को नया नियमित डीजीपी देगी।

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CM मान की गारंटी पूरी: ‘मां-बेटी सम्मान योजना’ का नोटिफिकेशन जारी, अप्रैल से लागू

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पंजाब सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मां-बेटी सम्मान योजना’ के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने International Women’s Day के अवसर पर बजट पेश करते हुए इस योजना का ऐलान किया था। नोटिफिकेशन के अनुसार, यह योजना 2 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएगी और सेवा केंद्रों पर इसका रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त होगा।

मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने कहा कि यह ‘आप’ सरकार की गारंटी थी, जिसे अब पूरा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाएं (सरकारी कर्मचारी, पूर्व विधायक, सांसद और पेंशनर को छोड़कर) इस योजना का लाभ उठा सकेंगी।

इस योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रति माह ₹1,100 और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की महिलाओं को ₹1,500 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

यह एक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना है, जिसके तहत राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री ने उन महिलाओं से अपील की है जिनके पास बैंक खाता नहीं है, वे जल्द से जल्द खाता खुलवाएं। उन्होंने दावा किया कि राज्य की लगभग 97% महिलाएं (करीब 1.10 करोड़) इस योजना के दायरे में आएंगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर न रहें।

जरूरी दस्तावेज:

  • पंजाब के पते वाला आधार कार्ड
  • बैंक खाता पासबुक
  • SC वर्ग की महिलाओं के लिए जाति प्रमाण पत्र
  • पंजाब वोटर आईडी कार्ड

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर डिप्टी कमिश्नरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों में महिलाओं की सहायता के लिए विशेष सुविधा कर्मी और मोबिलाइज़र नियुक्त किए जाएंगे, जो बैंक खाता खुलवाने और आधार लिंक कराने में मदद करेंगे।

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ने सख्त नियम भी लागू किए हैं। लाभार्थी की मृत्यु होने पर सहायता राशि तुरंत बंद कर दी जाएगी, हालांकि अंतिम संस्कार के लिए दिए गए अग्रिम भुगतान की वसूली नहीं की जाएगी। साथ ही, धोखाधड़ी रोकने के लिए मोबाइल ऐप और डैशबोर्ड के जरिए डेटा की निगरानी की जाएगी।

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