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Punjab

डीजीपी Gaurav Yadav ने सीपी/एसएसपी को हिंसा मुक्त पंचायत चुनाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

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पंजाब पुलिस के नेता Gaurav Yadav पुलिस में सभी को छोटे-मोटे अपराधों को रोकने और नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों की मदद करने के लिए कड़ी मेहनत करने की याद दिला रहे हैं। वह अधिकारियों से उन चीजों पर ध्यान देने के लिए कह रहे हैं जो लोगों को असुरक्षित महसूस कराती हैं, जैसे चोरी करना और पैसे के लिए लोगों को धमकाना। वह चाहते हैं कि वे सुनिश्चित करें कि वे नशा बेचने वाले लोगों को भी पकड़ें।

उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को चोरी जैसे छोटे-मोटे अपराधों के बारे में तुरंत रिपोर्ट लिखनी चाहिए और इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो एसएसपी, डीएसपी या एसएचओ जैसे प्रभारी पुलिस नेता मुश्किल में पड़ जाएंगे।

पुलिस नेता Gaurab Yadav और एक अन्य महत्वपूर्ण पुलिस अधिकारी मनदीप सिंह सिद्धू ने पटियाला क्षेत्र के सभी पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें पटियाला, मलेरकोटला, संगरूर और बरनाला जैसे स्थान शामिल हैं। वे संगरूर में पुलिस लाइन नामक स्थान पर मिले, ताकि इस बारे में बात की जा सके कि पुलिस अपना काम कितनी अच्छी तरह कर रही है और पंचायत चुनावों से पहले सब कुछ सुरक्षित और शांतिपूर्ण सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में मदद करने के लिए नानक सिंह, सरताज चहल, संदीप मलिक और गगन अजीत सिंह जैसे अन्य पुलिस नेता भी मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि डकैती और ड्रग की समस्या को रोकने में मदद के लिए वे उन जगहों पर और कैमरे लगा रहे हैं, जहां ये चीजें अक्सर होती हैं। वे अलग-अलग इलाकों में विशेष कमरे भी बना रहे हैं, जहां लोग कैमरों को देख सकते हैं और तुरंत देख सकते हैं कि क्या हो रहा है।

डीजीपी ने पुलिस नेताओं से कहा है कि वे ड्रग्स बेचने वाले बुरे लोगों को पकड़ने के लिए एक विशेष नियम का इस्तेमाल करें और ड्रग्स बेचने से मिले पैसे से जो कुछ भी उन्होंने खरीदा है, उसे जब्त कर लें।

उन्होंने पुलिस से कहा कि वे नई ‘सेफ पंजाब एंटी-ड्रग हेल्पलाइन-9779100200’ से मिलने वाली किसी भी सलाह को तुरंत जांच लें। लोग इस हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं और पुलिस को ड्रग्स बेचने वाले किसी भी व्यक्ति के बारे में गुप्त रूप से बता सकते हैं।

पंचायत चुनाव से पहले गौरव यादव नाम के एक पुलिस नेता ने जांच की कि राज्य में सब कुछ कितना सुरक्षित है। उन्होंने अपनी टीम से कहा कि वे सुनिश्चित करें कि चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हों। उन्होंने उन्हें यह भी याद दिलाया कि अगर कुछ गलत हुआ तो पर्याप्त पुलिस तैयार रखें।

बैठक में नेताओं ने पुलिस से कहा कि वे अपराधियों द्वारा पहले किए गए बुरे कामों के बारे में पता लगाएं। वे चाहते हैं कि पुलिस हिंसक अपराधों को रोकने के लिए बहुत गंभीर हो, जगहों पर अधिक सावधानी से निगरानी रखे, अपराधियों को पकड़ने के लिए गैजेट का उपयोग करे और ड्रग्स बेचने वालों से सामान छीन ले। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को अपराधियों से अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उनसे सवाल पूछने चाहिए। पंजाब के पुलिस नेता ने सभी पुलिस अधिकारियों से पूछा कि उन्हें अपने काम के दौरान किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पुलिस थानों के प्रमुखों से कहा कि वे हर हफ्ते अपराध के बारे में बात करने और इसे बेहतर तरीके से संभालने के लिए बैठकें करें।

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मोगा की रैली में CM मान का ऐलान:‘30 दिन तकसीम’ योजना शुरू; आढ़तियों की हड़ताल पर सख्त रुख; 2027 के लिए मांगा जनादेश

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज (शनिवार) को मोगा में एक विशाल रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आढ़तियों की हड़ताल से निपटने के लिए गेहूं खरीद में सहकारी समितियों की मदद लेने और ’30 दिन तकसीम’ योजना शुरू करने सहित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने 2027 के चुनावों के लिए जनादेश भी मांगा।

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नेता जमीनी हकीकत से दूर हैं। मान ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “ओवरकोट या टाइट पजामा पहनने वाले” लोग आधी रात को खेतों में सिंचाई करने वाले किसानों की समस्याओं को नहीं समझ सकते।

सीएम मान बोले- किसानों को नहीं होगी कोई परेशानी

आढ़तियों की हड़ताल के संदर्भ में मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट किया कि सरकार गेहूं की खरीद और उठान में किसानों को कोई परेशानी नहीं आने देगी। उन्होंने घोषणा की कि हड़ताल में शामिल न होने वाले आढ़तियों को अगले खरीफ सीजन में धान के आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि सहकारी समितियों की सूची तैयार कर ली गई है, जो आवश्यकता पड़ने पर गेहूं खरीद का कार्य संभालेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “हर एक दाने की सही तरीके से खरीद और उठान सुनिश्चित किया जाएगा।”

13 अप्रैल से शुरू होगी तकसीम योजना

मुख्यमंत्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा में बताया कि 13 अप्रैल से ’30 दिन तकसीम’ योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत किसानों की जमीन का बंटवारा आवेदन जमा करने के 30 दिनों के भीतर किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य लंबे समय से लंबित भूमि विवादों को समाप्त करना है।

अपनी सरकार के कामकाज को 2027 के चुनावों का आधार बताते हुए मुख्यमंत्री मान ने कई उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली प्रदान की है, लगभग 65,000 सरकारी नौकरियां दी हैं, और 43,000 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत व कारपेटिंग की है। किसानों को दिन के समय सहित 8 घंटे बिजली की आपूर्ति भी सुनिश्चित की गई है।

सीएम मान बोले- नहर के पानी के उपयोग में हुई है उल्लेखनीय वृद्धि

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में नहर के पानी के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह 22 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत हो गया है, और आगामी खरीफ सीजन में इसे 90 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि फसलों को बिजली के तारों से लगने वाली आग से बचाने के लिए भूमिगत बिजली वायरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भगवंत मान ने कहा कि उनके गांव में खेतों में लगे 1,100 से अधिक बिजली के खंभों को हटाकर अंडरग्राउंड फाइबर वायरिंग की जा रही है और इसे पूरे राज्य में लागू करने का लक्ष्य है। शिक्षा को “हर समस्या का समाधान” बताते हुए मान ने कहा कि सरकार स्कूल शिक्षा प्रणाली को मजबूत कर रही है।

ताकि बच्चों को बेहतर अवसर मिल सकें। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब फिंगरप्रिंट की अनिवार्यता खत्म की जाएगी, क्योंकि मेहनतकश लोगों के हाथों के निशान अक्सर मिट जाते हैं।

सीएम मान ने कांग्रेस पर कसा तंज

सीएम मान रैली के दौरान मान अपने व्यंग्यात्मक अंदाज में नजर आए और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं पर स्थानीय नेतृत्व को न पहचानने को लेकर कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सभी विपक्षी दल केवल आम आदमी पार्टी को निशाना बनाने के लिए एकजुट हो रहे हैं।

उन्होंने 32 लाख परिवारों को 10 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा, मोहल्ला क्लीनिक और टोल प्लाजा हटाने जैसे कदमों का भी जिक्र किया। इस मौके पर दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मोगा में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का संकेत है कि आम आदमी पार्टी 2027 में भारी बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में लौटेगी।

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जालंधर में मंत्री लाल चंद काटारुचक पहुंचे, गेहूं खरीद के 24 घंटे में भुगतान; मंडियों में पुख्ता प्रबंध किए गए

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पंजाब में गेहूं खरीद सीजन को लेकर सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। जालंधर के जिला प्रशासकीय परिसर स्थित कांफ्रेंस हॉल में पहुंचे खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद काटारुचक ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया कि राज्य की सभी मंडियों में व्यापक स्तर पर प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मंत्री ने कहा कि इस बार गेहूं खरीद के दौरान किसानों को सबसे बड़ी राहत समय पर भुगतान को लेकर मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों द्वारा अपनी फसल बेचने के बाद 24 घंटे के भीतर उनके खातों में राशि भेज दी जाएगी। इसके लिए सरकार ने पहले ही 30,973 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर ली है, जिससे भुगतान प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

मंडियों में उपलब्ध करवाई गई सुविधाएं

उन्होंने बताया कि मंडियों में साफ-सफाई, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और तौल की उचित सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। इसके अलावा किसानों की फसल की सुचारु खरीद के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी भी तय कर दी गई है। सरकार का प्रयास है कि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो, ताकि किसानों को अधिक समय तक इंतजार न करना पड़े।

गेहूं की लिफ्टिंग को लेकर भी मंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस बार किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गोदामों को पहले से खाली कराया जा रहा है, ताकि खरीदी गई फसल को तुरंत उठाया जा सके और मंडियों में अनावश्यक जाम की स्थिति न बने।

अधिकारियों को दिए समस्याएं हल करने के निर्देश

मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। यदि कहीं कोई कमी सामने आती है तो उसे तुरंत दूर किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीद प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस मौके पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे और उन्होंने मंत्री को मंडियों में किए गए इंतजामों की जानकारी दी। सरकार को उम्मीद है कि इस बार खरीद सीजन सुचारु तरीके से पूरा होगा और किसानों को समय पर उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।

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पंजाब को जल्द मिलेगा स्थायी DGP, 14 IPS अधिकारियों का पैनल तैयार; UPSC को भेजने की तैयारी में मान सरकार

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राज्य सरकार ने स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी है। जल्द ही 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजने की तैयारी की जा रही है।

यूपीएससी इस पैनल में से तीन अधिकारियों को शार्टलिस्ट करेगा, जिनमें से एक को राज्य का नियमित डीजीपी नियुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है और इसे जल्द यूपीएससी को भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यह पैनल 1992, 1993 और 1994 बैच के आईपीएस अधिकारियों से तैयार किया गया है, जो डीजीपी पद के लिए पात्र हैं।

इन अधिकारियों के नाम शामिल

1992 बैच के अधिकारियों में कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव, पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी शरद सत्य चौहान, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के स्पेशल डीजीपी कुलदीप सिंह और हरप्रीत सिंह सिद्धू (पोस्टिंग का इंतजार) शामिल हैं।

1993 बैच से कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन व महिला मामलों की स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर देओ, पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी डॉ. जितेंद्र कुमार जैन और रेलवे के स्पेशल डीजीपी शशि प्रभा द्विवेदी का नाम पैनल में है।

वहीं, 1994 बैच के अधिकारियों में स्पेशल डीजीपी (मुख्यालय) सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, विजिलेंस ब्यूरो के स्पेशल डीजीपी-कम-चीफ डायरेक्टर प्रवीण कुमार सिन्हा, ट्रैफिक व रोड सेफ्टी के स्पेशल डीजीपी अमनदीप सिंह राय, साइबर क्राइम के स्पेशल डीजीपी वरुण नेराजा, महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी, फिल्लौर की डायरेक्टर अनीता पुंज, मानवाधिकार के स्पेशल डीजीपी नरेश कुमार और टेक्निकल सर्विसेज के स्पेशल डीजीपी राम सिंह शामिल हैं।

दो साल का होगा कार्यकाल

पैनल में से चुने जाने वाले डीजीपी को कम से कम दो साल का कार्यकाल मिलेगा, भले ही उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख कुछ भी हो। यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्देशों और बाद में तय यूपीएससी गाइडलाइंस के तहत लागू होता है। पंजाब में जुलाई 2022 से कार्यवाहक डीजीपी की व्यवस्था जारी है। आम आदमी पार्टी सरकार ने गौरव यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी थी और वे तब से लगातार इस पद पर कार्यरत हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 फरवरी को इस मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए राज्यों को नियमित डीजीपी नियुक्त करने की प्रक्रिया अपनाने को कहा था और यूपीएससी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। प्रक्रिया में देरी पर सवाल सरकार को 10 दिन के भीतर प्रस्ताव भेजने को कहा गया था, लेकिन इसमें देरी हुई।

राज्य ने 2023 में पारित पंजाब पुलिस संशोधन विधेयक का हवाला देते हुए अपनी प्रक्रिया अपनाने की कोशिश की थी। हालांकि 12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी की प्रक्रिया से ही होगी।

यूपीएससी की भूमिका अहम

यूपीएससी की एंपैनलमेंट कमेटी में चेयरमैन या सदस्य, केंद्रीय गृह सचिव का प्रतिनिधि और केंद्रीय पुलिस संगठन का प्रमुख शामिल होता है। यही कमेटी राज्य द्वारा भेजे गए नामों में से तीन अधिकारियों को चुनती है।

अब सभी की नजरें यूपीएससी पर टिकी हैं, जो इस पैनल से तीन नाम तय करेगी। इसके बाद पंजाब सरकार अंतिम फैसला लेकर राज्य को नया नियमित डीजीपी देगी।

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