Punjab
43 दिनों में चरणजीत सिंह चन्नी का जादू ख़त्म, कांग्रेस के लिए Jalandhar उपचुनाव के नतीजे ‘खतरे की घंटी’
Jalandhar वेस्ट विधानसभा उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले रहे। लोकसभा चुनाव में 7 सीटें जीतने का ‘हनीमून’ दौर अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि उपचुनाव में कांग्रेस तीसरे नंबर पर आ गई. उपचुनाव में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी. इस चुनाव के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपना आवास जालंधर स्थानांतरित कर लिया था, लेकिन चुनाव नतीजे कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बनकर उभरे।
उपचुनाव में कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी थी. चुनाव की पूरी जिम्मेदारी जालंधर से सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के कंधों पर थी. यह कांग्रेस के लिए भी चिंता का विषय है क्योंकि उसे चार और उपचुनाव और पांच नगर निगम चुनाव लड़ने हैं। यह परिणाम कांग्रेस के लिए भी चिंता का विषय है क्योंकि चौधरी परिवार के पतन के बाद चरणजीत सिंह चन्नी दोआबा की दलित राजनीति में एक नए नेता के रूप में उभरे थे। लोकसभा चुनाव में चन्नी ने न सिर्फ ये सीट जीती बल्कि जालंधर वेस्ट में 44,394 वोट भी हासिल किए|
बीजेपी के सुशील रिंकू को 42,837 वोट मिले. इस विधानसभा में रिंकू चन्नी से 1557 वोटों से पीछे थे। चुनाव नतीजे आने के महज 40 दिनों के अंदर ही कांग्रेस पहले से तीसरे स्थान पर खिसक गई. आम आदमी पार्टी के महेंद्र भगत चुनाव जीते, जबकि बीजेपी की शीतल अंगुराल 17,921 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं. कांग्रेस की महिला उम्मीदवार सुरिंदर कौर 16,757 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। चुनाव सीधे चंद्रमा के सामने लड़ा जा रहा था। पार्टी ने उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति की सारी जिम्मेदारी चन्नी को सौंपी थी. लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव के 40 दिन के अंदर ही चांद का जादू खत्म होता नजर आ रहा है|
2021 में मुख्यमंत्री बनने के बाद चन्नी लगातार खुद को दलित नेता का बड़ा चेहरा साबित करने की कोशिश कर रहे हैं. 2022 का विधानसभा चुनाव भी चन्नी के चेहरे पर ही लड़ा गया. जब चन्नी ने लोकसभा चुनाव जीता तो वह दलितों के बड़े नेता बनकर उभरे। लेकिन सुरक्षित सीट पर चन्नी का जादू नहीं चल सका. जबकि चन्नी पूरे चुनाव के दौरान जालंधर वेस्ट में सक्रिय रहे। यह कांग्रेस के लिए भी चिंता का विषय है क्योंकि जालंधर पश्चिम से उसके नेता महेंद्र केपी पार्टी छोड़कर शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए हैं। इसके साथ ही चन्नी को टिकट मिलने के बाद चौधरी परिवार भी उनसे दूर हो गया है. जबकि पांच नगर निगमों में चुनाव होने हैं, उनमें जालंधर भी शामिल है| ऐसे में जालंधर वेस्ट के चुनाव नतीजे कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी की तरह हैं|
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CM मान की ‘शुक्राना यात्रा’ का तीसरा दिन, बठिंडा से हुई शुरुआत
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ‘शुक्राना यात्रा’ आज तीसरे दिन में प्रवेश कर गई। यह यात्रा बेअदबी के खिलाफ बनाए गए सख्त कानून के लिए पंजाबवासियों का धन्यवाद करने के उद्देश्य से निकाली जा रही है। तीसरे दिन की शुरुआत बठिंडा से हुई, जहां सुबह करीब 10 बजे यात्रा ‘थ्री कॉर्नर्स’ से रवाना हुई।
इस दौरान बड़ी संख्या में आम लोगों और ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। बठिंडा के डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान और एसएसपी डॉ. ज्योति यादव बैंस की ओर से सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन के मुताबिक यात्रा के पूरे रूट का ट्रैफिक प्लान पहले ही जारी कर दिया गया था ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बठिंडा में यात्रा ‘थ्री कॉर्नर्स’ से अमरीक सिंह रोड, गोल डिग्गी, हनुमान चौक, बस स्टैंड, कोटशमीर और भागीवंदर होते हुए आगे बढ़ी। इसके बाद यात्रा तलवंडी साबो के लिए रवाना हुई। तलवंडी साबो में मुख्यमंत्री भगवंत मान तख्त श्री दमदमा साहिब में माथा टेकेंगे और अरदास करेंगे।
इसके बाद शुक्राना यात्रा सरदूलगढ़, मानसा और बरनाला होते हुए आगे बढ़ेगी। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री मान विभिन्न स्थानों पर लोगों को संबोधित भी कर सकते हैं। इस यात्रा का उद्देश्य बेअदबी के खिलाफ बने नए कानून के बारे में लोगों को जागरूक करना और सरकार के फैसलों के लिए जनता का धन्यवाद करना है।
शाम को मुख्यमंत्री सुनाम स्थित गुरुद्वारा मस्तुआणा साहिब भी जाएंगे। इसके बाद यात्रा कुछ समय के लिए संगरूर में रुकेगी और फिर वहां से श्री फतेहगढ़ साहिब के लिए रवाना होगी।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की यह ‘शुक्राना यात्रा’ 6 मई को श्री आनंदपुर साहिब से शुरू हुई थी और लगातार पंजाब के अलग-अलग इलाकों में निकाली जा रही है।
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Punjab में निर्धारित लोड से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वालों पर PSPCL सख्त, लगेगा जुर्माना
पंजाब में बढ़ती बिजली मांग के बीच पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने निर्धारित लोड से अधिक बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ सख्ती करने के निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता अपने स्वीकृत लोड से 10 प्रतिशत अधिक बिजली की खपत करता है, तो उसे 7 दिनों के भीतर नोटिस जारी किया जाएगा।
PSPCL के मुताबिक, तय सीमा से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने पर उपभोक्ताओं पर जुर्माना और अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। यदि कोई उपभोक्ता तीसरी बार भी नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ बिजली चोरी का मामला दर्ज करते हुए FIR भी दर्ज की जा सकती है।
कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि लगातार निर्धारित सीमा से अधिक बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर समय रहते कार्रवाई की जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और राजस्व नुकसान रोकने के लिए PSPCL ने सप्लाई कोड 2024 में संशोधन किया है। इसके तहत सभी मुख्य अभियंताओं को नए नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के आदेश जारी किए गए हैं।
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बेअदबी कानून मामले में आज श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होंगे स्पीकर संधवां
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां आज श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय पहुंचकर जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज के सामने अपना स्पष्टीकरण पेश करेंगे। जानकारी के मुताबिक, वह सुबह 11 बजे श्री अकाल तख्त साहिब में हाजिरी भरेंगे। यह मामला आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा बनाए गए नए बेअदबी विरोधी कानून को लेकर चर्चा में आया था, जिसके संबंध में जत्थेदार की ओर से स्पीकर संधवां को तलब किया गया था।
दरअसल, श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से इस कानून को तैयार करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा था कि बेअदबी जैसे संवेदनशील और धार्मिक मामले पर कोई भी कानून बनाने से पहले पंथक संगठनों, सिख विद्वानों और पूरे पंथ की राय लेना जरूरी था।
उन्होंने यह भी कहा कि सिख मर्यादा और धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों में श्री अकाल तख्त साहिब की भूमिका सर्वोच्च मानी जाती है और उसकी अनदेखी उचित नहीं है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा था कि श्री अकाल तख्त साहिब उनके लिए सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें आधिकारिक तौर पर बुलाया गया है तो वह पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखेंगे।
अब राजनीतिक और पंथक हलकों की नजरें आज होने वाली इस अहम पेशी पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला धार्मिक भावनाओं और कानूनी प्रक्रिया दोनों से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
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