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कौशल रोजगार निगम युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़, आरक्षण, पारदर्शिता और मेरिट की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियां : हुड्डा

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चंडीगढ़  : पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आज एक प्रेस कान्फ्रेंस कर बीजापी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम युवाओं के शोषण और भ्रष्टाचार का अड्डा है। कौशल रोजगार के अंतर्गत लगे हुए कर्मचारियों ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मिल इस निगम में खामियों को लेकर ज्ञापन सौंपा। हुड्डा ने कहा कि इसमें सवैंधानिक नियम अनुसार न धरातल पर आरक्षण का प्रावधान है और न ही मेरिट है न ही योग्यता, और पारदर्शिता का तो मतलब ही नहीं है। युवाओं को पक्की नौकरी देने की बजाय सरकार खुद ठेकेदार बनकर कच्ची नौकरियां दे रही है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर खाली पड़े करीब 2 लाख पदों पर पक्की भर्ती कर युवाओं को रोजगार दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में थोथे प्रचार, झूठे समाचार और बेलगाम भ्रष्टाचार वाली सरकार चल रही है। थोथे प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसका ताजा उदाहरण विकसित भारत संकल्प यात्रा है। अपने राजनीतिक एजेंडा के लिए बीजेपी-जेजेपी स्कूली बच्चों और सरकारी कर्मचारियों का इस्तेमाल कर रही है। अध्यापकों समेत अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को उनका काम छुड़वाकर राजनीतिक प्रचार में झोंक दिया गया है। जबकि प्रदेश सरकार के पास गिनवाने के लिए एक भी उपलब्धि नहीं है। अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर सरकार जनता को बरगलाने की कोशिश कर रही है। लेकिन सरकार की सच्चाई खुद सरकारी आंकड़ों में देखी जा सकती है।

हुड्डा अपने आवास पर पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। वार्ता में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान व पूर्व मंत्री व विधायक गीता भुक्कल भी उनके साथ मौजूद थी। इस मौके पर हुड्डा ने एनसीआरबी द्वारा जारी 2022 के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बीजेपी-जेजेपी राज में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। सिर्फ एक साल के भीतर महिलाओं के विरूद्ध अपराध के 16,743 मामले यानी रोज़ 46 मामले सामने आए हैं। एक साल में बलात्कार के 1,787 केस यानी रोज़ 5 बेटियों की अस्मत लूटने के मामले सामने आए। 2022 में ही प्रदेश से 2640 बच्चे लापता हो गए, जिनमें 1124 लड़के और 1516 लड़कियां हैं। जींद के बाद अब कैथल जिले में बच्चियों के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया। कांग्रेस ने ऐसे तमाम मामलों की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग उठाई है। साथ ही सुझाव दिया है कि स्कूलों में कंप्लेन बॉक्स होना चाहिए, जिसमें कोई भी अपनी शिकायत लिखकर डाल सके। लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। ‘बेटी बचाओ’ का नारा देने वाली सरकार बेटियों को बचाने में नाकाम साबित हुई है।

ज़हरीली शराब से मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। 3 साल के भीतर हरियाणा में सोनीपत, पानीपत, अंबाला और यमुनानगर जैसे कांड हुए हैं जिनमें ज़हरीली शराब से दर्जनों लोगों की मौत हुई। सरकारी संरक्षण के बिना यह संभव नहीं है। बड़ी-बड़ी घटनाओं के बावजूद सरकार ने किसी बड़े नशा कारोबारी पर कार्रवाई नहीं की।

हुड्डा ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के बीच में चल रही खींचतान पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। पहले से ही प्रदेश का स्वास्थ्य तंत्र व कानून व्यवस्था चरमराई हुई है। सरकार के भीतर खींचतान की वजह से यह और बिगड़ रही है। कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में जरूर उठेगी।

हुड्डा ने बताया कि सब्जी मंडी मार्केट कमेटी में काम करने वाले व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल उन्हें ज्ञापन देने पहुंचा था। उन्होंने बताया कि कांग्रेस कार्यकाल के दौरान जिस मंडी फीस को खत्म कर दिया गया था, उसे बीजेपी-जेजेपी लगातार बढ़ा रही है। बिना उचित अध्ययन के ज्यादा फीस वसूली के लिए अनाप-शनाब स्लैब बना दिए गए हैं। हुड्डा ने कहा कि सब्जी और व्यापारियों पर बढ़ रही फीस के चलते आम जनता पर महंगाई की मार पड़ती है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मौके पर आढ़ती और मजदूरों के बकाया का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार आढ़ती और मजदूर का 487 करोड़ रुपए बकाया है। अब तक उनको मेहनताना नहीं दिया गया। 

पांच राज्यों के चुनावी नतीजे पर टिप्पणी करते हुए हुड्डा ने कहा कि पार्टी हार के कारणों की समीक्षा कर रही है। हालांकि अगर नतीजे को गहराई से देखा जाए तो कांग्रेस को चार राज्यों में बीजेपी के मुकाबले करीब 10 लाख वोट ज्यादा मिले हैं। हरियाणा के पड़ोसी राजस्थान में भी बीजेपी और कांग्रेस के वोट में सिर्फ दो प्रतिशत का अंतर रहा है। हरियाणा के साथ लगती 34 में से 29 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है।

कांग्रेस के आगामी कार्यक्रमों का ब्योरा पेश करते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान ने बताया कि 24 दिसंबर को पार्टी सिरसा में किसान-मजदूर जन आक्रोश रैली करने जा रही है। इसके बाद 25 दिसंबर को सफीदों, 31 दिसंबर को लाडवा में जन आक्रोश रैली होगी।  1 जनवरी को करनाल, 2 जनवरी को नूंह, 3 जनवरी को फरीदाबाद, 5 जनवरी को नारनौल, 6 जनवरी को गुरुग्राम में जिला कार्यकर्ता सम्मेलन होगा। इसके बाद 7 जनवरी को बरोदा में जन आक्रोश रैली होगी। 9 जनवरी को दादरी, 10 जनवरी को कुरुक्षेत्र में जिला कार्यकर्ता सम्मेलन होगा। 21 जनवरी को मुलाना, 28 जनवरी को बादली, 4 फरवरी को तिगांव, 10 फरवरी को कलायत, 11 फरवरी को होडल में जन आक्रोश रैली की जाएगी। 17 फरवरी को हिसार में राज्य स्तरीय पिछड़ा वर्ग सम्मेलन होगा। 18 फरवरी को महेंद्रगढ़ में जन आक्रोश रैली होगी और 24 फरवरी को झज्जर में राज्य स्तरीय संत रविदास जयंती कार्यक्रम किया जाएगा।

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पंजाब में Universal Healthcare Model बना मिसाल, हर परिवार को बिना शर्त 10 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा!

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पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐसा मॉडल पेश किया है, जो देश की पारंपरिक योजनाओं से अलग और ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अब राज्य के हर परिवार को बिना किसी शर्त के 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बढ़ते इलाज के खर्च के बीच यह योजना लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।

जहां केंद्र सरकार की Ayushman Bharat योजना सीमित पात्रता और 5 लाख रुपये तक के कवर तक ही सीमित है, वहीं पंजाब का यह मॉडल हर निवासी को कवर करता है, चाहे उसकी आय कुछ भी हो। यही कारण है कि इसे Universal Healthcare Model के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें इलाज का अधिकार किसी सूची या शर्त पर नहीं बल्कि जरूरत के आधार पर तय होता है।

वित्तीय दृष्टि से भी पंजाब का यह मॉडल काफी मजबूत माना जा रहा है। केंद्र सरकार जहां 140 करोड़ आबादी के लिए 9,500 करोड़ रुपये का बजट रखती है, वहीं पंजाब सरकार करीब 3 करोड़ लोगों के लिए 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति निवेश कई गुना ज्यादा है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दर्शाता है।

इस योजना के तहत करीब 65 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मरीज 2,300 से अधिक इलाज पैकेजों के जरिए दिल की बीमारी, कैंसर, किडनी से जुड़ी समस्याएं, एक्सीडेंट केस और अन्य गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। इसके लिए 900 से अधिक अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जहां कैशलेस सुविधा उपलब्ध है।

योजना का एक बड़ा फायदा इसकी आसान प्रक्रिया भी है। जहां अन्य योजनाओं में पात्रता साबित करने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत होती है, वहीं पंजाब में लोग सिर्फ आधार कार्ड या वोटर आईडी के जरिए आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके लिए सेवा केंद्रों और Common Service Centers के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है। साथ ही, गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने और रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

इस योजना का असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। कई ऐसे परिवार, जो पहले इलाज के खर्च के कारण परेशान रहते थे, अब बिना किसी आर्थिक दबाव के इलाज करवा पा रहे हैं। यह मॉडल न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बना रहा है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर करने में मदद कर रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक सोच में बदलाव है, जहां स्वास्थ्य सेवा को अधिकार के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि पंजाब सरकार का उद्देश्य हर व्यक्ति तक बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में परेशान न हो।

कुल मिलाकर, पंजाब का यह यूनिवर्सल हेल्थकेयर मॉडल देश के लिए एक नई दिशा दिखाता है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित नहीं बल्कि सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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चंडीगढ़ में देर रात दहशत: सेक्टर-29 के रिहायशी इलाके में दिखा तेंदुए जैसा जानवर, सीसीटीवी में कैद

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चंडीगढ़ के सेक्टर-29 में बुधवार रात तेंदुआ दिखाई देने की खबर से इलाके में दहशत फैल गई। लोगों ने पूरी रात घरों से बाहर निकलने से परहेज किया। सूचना मिलने के बाद पुलिस और फॉरेस्ट विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और देर रात तक सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिला। हालांकि, इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों में एक तेंदुआ पीर दरगाह के पास पानी पीते हुए कैद हुआ है।

पार्क में महिला ने सबसे पहले देखा

जानकारी के अनुसार बुधवार शाम करीब 7:30 से 8 बजे के बीच सेक्टर-29 के एक पार्क में एक महिला अपने बच्चों के साथ टहल रही थी। इसी दौरान उसकी नजर झाड़ियों के पास घूमते हुए एक तेंदुए पर पड़ी। यह देखते ही महिला घबरा गई और तुरंत बच्चों को लेकर पार्क से बाहर निकल गई।

घर पहुंचकर महिला ने इस बारे में अपने पति को बताया। इसके बाद उसके पति ने यह जानकारी पास में स्थित पीर दरगाह के लोगों को दी।

CCTV में कैद हुआ तेंदुआ

सूचना मिलने के बाद जब दरगाह परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई तो उसमें साफ दिखाई दिया कि एक तेंदुआ दरगाह के पास बने स्थान पर पानी पी रहा है। इसके बाद तुरंत पुलिस और फॉरेस्ट विभाग को सूचना दी गई।

सूचना के बाद पुलिस और फॉरेस्ट विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आसपास के इलाके में पूरी रात तलाशी अभियान चलाया। हालांकि देर रात तक चलाए गए सर्च ऑपरेशन में तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिल पाया।

फिलहाल पुलिस और फॉरेस्ट विभाग दोनों ही तेंदुए की मौजूदगी को लेकर आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद इलाके के लोग काफी दहशत में हैं और सतर्कता बरत रहे हैं।

पुलिसकर्मी हाथ में डंडा लेकर खड़ा हुआ।

पुलिसकर्मी हाथ में डंडा लेकर खड़ा हुआ।

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चंडीगढ़ में अगले माह से महंगी होंगी जमीनें:कलेक्टर रेट में 30 से 60% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव, 1 अप्रैल से लागू करने की तैयारी

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चंडीगढ़ में एक बार फिर प्रॉपर्टी महंगी होने जा रही है। चंडीगढ़ प्रशासन ने कलेक्टर रेट बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। डीसी निशांत यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें कलेक्टर रेट संशोधित करने के लिए एक कमेटी गठित की गई।

प्रशासन ने शहर के अलग-अलग इलाकों के अनुसार कलेक्टर रेट में 30 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित नए रेटों को लेकर अगले सप्ताह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा, जिसमें आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी।

1 अप्रैल से लागू हो सकते हैं नए रेट

प्रशासन के अनुसार, लोगों से सुझाव लेने के बाद अंतिम नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। योजना है कि नए कलेक्टर रेट 1 अप्रैल से लागू कर दिए जाएं। पिछले साल भी कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले वर्ष 2021 और 2017 में संशोधन हुआ था।

ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से चार गुना तक बढ़ोतरी

सूत्रों के मुताबिक, नए प्रस्ताव के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के रेट तीन से चार गुना तक बढ़ सकते हैं। वहीं कई सेक्टरों में रेट डेढ़ गुना तक बढ़ाने की तैयारी है। कलेक्टर रेट बढ़ने से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी होगी, क्योंकि स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क इन्हीं रेटों के आधार पर तय होते हैं। ऐसे में रियल एस्टेट बाजार और आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

संभावना है कि रेट बढ़ाने के प्रस्ताव पर कुछ संगठनों और प्रॉपर्टी मालिकों की ओर से विरोध भी किया जा सकता है।

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