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पंजाब सरकार राज्य में ग्राम न्यायालय के मुद्दे पर सभी कानूनी विकल्पों की पड़ताल करेगी: CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ग्राम न्यायालयों को लेकर केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे दबाव पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए इसे गैर-व्यवहारिक और कानूनी समुदाय के हितों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाने के लिए तैयार है और सभी कानूनी पहलुओं की गहन जांच के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मुद्दा संस्थागत अखंडता और जनता के विश्वास से जुड़ा हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका में कानून का राज और नैतिक मानदंड सर्वोपरि होने चाहिए।


65 बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से बैठक

म्यूनिसिपल भवन में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य भर की 65 बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की।

उन्होंने कहा, “पंजाब में अधिकांश लोगों की 20 किलोमीटर के दायरे में अदालतों तक पहुंच पहले से ही उपलब्ध है, इसलिए ग्राम न्यायालयों का यह प्रस्ताव व्यावहारिक नहीं है। वकील समुदाय पहले ही केंद्र के इस कदम के खिलाफ है, क्योंकि इससे राज्य सरकार को कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब में इस प्रस्ताव को रोकने के सभी विकल्पों की तलाश की जाएगी।


कानूनी विशेषज्ञों की कमेटी का गठन

सीएम मान ने घोषणा की कि पंजाब सरकार इस मुद्दे की गहन पड़ताल के लिए कानूनी विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन करेगी।

उन्होंने कहा, “मैं इस विषय को केंद्र सरकार के समक्ष उचित मंचों पर उठाऊंगा।”


वकीलों के हितों की रक्षा का भरोसा

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार वकील समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशनों ने देश की कानूनी प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और समाज की बेहतरी के लिए लगातार काम किया है।

उन्होंने भारतीय संविधान की मूल भावना—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून का राज आधुनिक लोकतांत्रिक समाज की नींव है।


मुफ्त कानूनी सहायता का सुझाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में न्याय भी महंगा होता जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि वकील समाज के कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की स्थापना पर विचार करें।

उन्होंने कहा, “मुकदमे जीते या हारे जा सकते हैं, लेकिन कानून का राज हमेशा कायम रहना चाहिए।”


वकीलों की मांगों पर विचार

मुख्यमंत्री ने वकील सुरक्षा एक्ट लागू करने और चैंबरों के कमर्शियल बिजली कनेक्शनों को घरेलू कनेक्शन में बदलने सहित वकीलों की विभिन्न मांगों को जायज बताते हुए कहा कि इनकी समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने कहा, “मैं स्वयं को जनता का वकील मानता हूं और समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं।”


‘नियुक्ति भवन’ का उल्लेख

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने म्यूनिसिपल भवन को ‘नियुक्ति भवन’ बताते हुए कहा कि यहां 63,000 सरकारी नौकरियों में से लगभग 50,000 नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं।


लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने आम लोगों के हित में कई लोक-हितैषी और नागरिक-केंद्रित फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है। सत्ता के दौरान महलों में रहने वालों ने अपने घरों के दरवाजे जनता के लिए बंद कर दिए थे, लेकिन जनता ने समय आने पर जवाब दिया।”

इससे पहले पंजाब के एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डाला।

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आप सांसद मालविंदर कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी साइनबोर्ड फिर से लगाने के फैसले का किया स्वागत

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आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अपने कैंपस में पंजाबी साइनबोर्ड और नेमप्लेट फिर से लगाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे पंजाब की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया।

कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में साइनबोर्ड और नेमप्लेट से पंजाबी (गुरुमुखी) हटाने पर कड़ा एतराज़ जताया था। उन्होंने इस कदम को पंजाब के इतिहास, संस्कृति और पहचान को दिखाने वाली भाषा का अपमान बताया।

इस मामले को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, सीपी राधाकृष्णन के सामने उठाते हुए, कंग ने उनसे तुरंत दखल देने की मांग की ताकि पंजाबी को उसकी सही जगह और सम्मान मिले, खासकर एक ऐसे संस्थान में जो पंजाब के नाम और विरासत को बनाए रखता है।

इस बारे में जानकारी सांझा करते हुए, कंग ने कहा कि उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से एक ऑफिशियल लेटर मिला है, जिसमें कन्फर्म किया गया है कि पंजाबी साइनबोर्ड लगाने का प्रोसेस शुरू हो चुका है। लेटर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पंजाबी साइनबोर्ड के लिए ऑर्डर दे दिया है और उन्हें लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

इस फैसले का स्वागत करते हुए, कंग ने कहा कि इससे एक मजबूत संदेस जाता है कि पंजाब के वजूद और पंजाबी भाषा की इज्ज़त को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि पंजाबी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि पंजाब की रिच कल्चरल विरासत और सामूहिक पहचान की निशानी है, जिसका हर लेवल पर सम्मान किया जाना चाहिए और उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कंग ने इस मामले पर तुरंत ध्यान देने के लिए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, श्री सी. पी. राधाकृष्णन का धन्यवाद किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन की भी तारीफ़ की कि उन्होंने सुधार के कदम उठाए और पंजाब के लोगों की चिंताओं पर पॉज़िटिव जवाब दिया।

आप सांसद ने कहा कि पंजाब से जुड़े हर संस्थान में पंजाबी के सम्मान, अहमियत और हक की हमेशा रक्षा होनी चाहिए।

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मोहाली को मिला नया मेयर, विधायक कुलवंत सिंह के बेटे सरबजीत समाना ने संभाली कमान

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मोहाली नगर निगम को नया मेयर मिल गया है। मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह समाना को मेयर चुना गया। वहीं आर.पी. शर्मा को सीनियर डिप्टी मेयर और हरपाल चन्नी को डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी सौंपी गई।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा, विधायक कुलवंत सिंह और पार्टी नेता डॉ. सन्नी आहलूवालिया ने सरबजीत समाना को बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।

मेयर पद को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। शुरुआत में डॉ. सन्नी आहलूवालिया को इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और पार्टी नेतृत्व से करीबी संबंधों के चलते उनका नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदले और सरबजीत समाना को उम्मीदवार बनाया गया।

बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले विधायक कुलवंत सिंह ने पार्टी पार्षदों के साथ लगातार बैठकें कीं। नगर निगम चुनाव जीतने वाले कई पार्षद उनके करीबी सहयोगी माने जाते हैं, जिससे मेयर पद की दौड़ में उनके बेटे का पलड़ा भारी रहा।

पार्टी में एकजुटता बनाए रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए पंजाब आप अध्यक्ष अमन अरोड़ा खुद नगर निगम कार्यालय पहुंचे और उनकी मौजूदगी में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।

दूसरी ओर, मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया, जबकि शिरोमणि अकाली दल के पार्षद बैठक के दौरान वॉकआउट कर गए। इसके चलते चुनावी माहौल काफी गर्म रहा।

चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए सभी पार्षदों के मोबाइल फोन नगर निगम कार्यालय के बाहर जमा कराए गए और रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद ही उन्हें बैठक कक्ष में प्रवेश दिया गया।

सरबजीत सिंह समाना के मेयर बनने के साथ ही मोहाली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की पकड़ और मजबूत हो गई है। अब शहर के विकास कार्यों और नगर निगम की आगामी योजनाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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अकाली दल को बड़ा झटका! मनप्रीत इयाली ‘वारिस पंजाब दे’ में हुए शामिल

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पंजाब की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दाखा से शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह इयाली मंगलवार को औपचारिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन में शामिल हो गए। उनके इस फैसले को पंजाब की पंथक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

संगठन में शामिल होने के बाद मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा कि उन्होंने बिना किसी शर्त और पद की अपेक्षा के इस मंच का साथ चुना है। उनका उद्देश्य पंजाब की पंथक और क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट करना तथा राज्य से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाना है।

इयाली ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी और तकनीकी रूप से वह अभी भी शिरोमणि अकाली दल के विधायक हैं। उन्होंने बताया कि ‘वारिस पंजाब दे’ फिलहाल एक सामाजिक और संगठनात्मक मंच है, न कि चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल, इसलिए विधायक पद छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता।

उन्होंने कहा कि पंजाब के कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनमें राज्य के पानी का मुद्दा, पंजाबी भाषी क्षेत्रों का मामला, चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार और अन्य क्षेत्रीय हित शामिल हैं। इन मुद्दों को नई ऊर्जा और मजबूती के साथ उठाया जाएगा।

मनप्रीत इयाली ने कहा कि पंजाब, पंजाबी पहचान और पंथक विचारधारा को मजबूत करने के लिए समान सोच रखने वाली सभी ताकतों को एक मंच पर आने की जरूरत है। उनके इस कदम के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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